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हरियाणा कौशल भर्ती, अध्यापक परेशान, दूर स्टेशन, तनख्वाह जीरो समान।

हरियाणा कौशल भर्ती, अध्यापक परेशान, दूर स्टेशन, तनख्वाह जीरो समान।

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कौशल के नाम पर ढिंढोरा पीटती सरकार की सच्चाई है बेहद डरावनी. सिस्टम के साथ खिलवाड़ कर मेरिट से भर्ती हुए अध्यापकों की स्थिति है बेहद चिंतनीय. 18000 से 20000 की नौकरी के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और एचटेट पास उच्च शिक्षित युवा हुए बेघर. घर से सैंकड़ों किलोमीटर दूर नौकरी पर भेजे. निगम ट्रांसफर के नाम पर एप्लीकेशन एकत्रित कर रहा बस, करता कुछ नहीं. पिछले तीन माह से तनख्वाह का एक भी पैसा नहीं आया. किरायेदार घर से निकाल रहे. मानसिक रोगों का शिकार हो रहे. भविष्य में पक्की नौकरी पर मुख्यमंत्री की ना. ऐसे में हरियाणा कौशल एक ड्रामा और समय की खपत नहीं तो और और क्या ? -प्रियंका सौरभ जी हाँ, हरियाणा सरकार की चर्चित योजना हरियाणा कौशल के तहत भर्ती किए गए कर्मचारी बिलकुल ना खुश है. एक तरफ जहां सरकार हरियाणा कौशल के तहत भर्ती को अपनी कामयाबी का सबसे महत्वपूर्ण माइलस्टोन मानती है वही इस निगम के तहत भर्ती ...
डूबते अमेरिकी बैंक – भारत के लिए चेतावनी

डूबते अमेरिकी बैंक – भारत के लिए चेतावनी

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मेरे एक बैंकर मित्र श्री श्याम कस्तूरे इन दिनों अमेरिका में हैं। उनसे अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक,सिल्वर गेट और सिग्नेचर बैंक के डूबने पर लम्बी बात हुई, मित्र ने कुछ लिख भी भेजा। वस्तुतः: ये बैंक डूब चुके हैं, और यह घटनाक्रम भारत के लिए चेतावनी है । इन बैंकों के दिवालिया होने के बाद वहाँ के उन सभी छोटे अमेरिकी बैंकों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिनका व्यवसाय इन बैंकों के साथ जुड़ा हुआ है। अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। आर्थिक जगत के विद्वान अचंभित हैं। दुनियाभर के शेयर बाजार सहमे हुए हैं। बैंक के प्रदर्शन और क्रेडिट गुणवत्ता के आधार पर फरवरी, 2023 में सिलिकॉन वैली बैंक को फोर्ब्स ने 100 सर्वश्रेष्ठ बैंकों की वार्षिक सूची में शीर्ष 20 में स्थान दिया था। करीब 44 प्रतिशत तकनीकी और स्वास्थ्य क्षेत्र की कंपनियों के साथ कारोबार करने वाले इस बैंक के शेयर की क...
अमेरिका अभी लम्बा झेलेगा। इनका बैंकिंग सिस्टम ही बकवास है।

अमेरिका अभी लम्बा झेलेगा। इनका बैंकिंग सिस्टम ही बकवास है।

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अमेरिका अभी लम्बा झेलेगा। इनका बैंकिंग सिस्टम ही बकवास है। ये लोग क्या करते हैं कि 1 रुपये की नेट वर्थ पर 10 रुपये उधार दे डालते हैं। बाकी का 9 रुपये ये दूसरे बैंकों से ले डालते हैं। अब यदि जिसने 1 रुपया दिया वो डूब गया तो समझ लो कि बाकी के बैंक अब किस्से 9 रुपये वापिस लेंगे, तो उनका भी पैसा फंस जाता है। सिलिकॉन वैली बैंक का भी यही हाल है। अब अमेरिका झूठ कह रहा कि खतरा नही है। लेकिन सच्चाई यही है कि या तो उसे बेलआउट पैकेज देना पड़ेगा या फिर इसका असर और बैंकों पर पड़ेगा। अब यदि ये बेलआउट पैकेज देते हैं तो इनकी लिक्विडिटी बढ़ेगी। उस लिक्विडिटी से इनके यहां महंगाई बढ़ेगी और उसे रोकने को ये इंटरस्ट रेट बढ़ाएंगे। नतीजा दुनिया भर के मार्केट प्रभावित होंगे और फिर करंसी की वैल्यू फिर से कमजोर होगी। इस वजह से इनके लोग दूसरे देशों से पैसा खींचेंगे और आपके रिजर्व से लेकर इम्पोर्ट एक्सपोर्ट प्र...
ऑस्कर की उपलब्धि को हम सीढ़िया बनाये

ऑस्कर की उपलब्धि को हम सीढ़िया बनाये

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-ललित गर्ग-भारतीय सिनेमा ने एक स्वर्णिम इतिहास रचते हुए पहली बार दो ऑस्कर जीत कर जश्न का अभूतपूर्व अवसर प्रदत्त किया है। आजादी के अमृत महोत्सव की अमृत बेला में 95वें ऑस्कर पुरस्कारों ने भारत सिनेमा में विशेष रूप से अमृतकाल को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के सबसे चमकदार भव्य मंच पर एक साथ दो अलग अलग भारतीय फिल्मों ने बाजी मार कर हर भारतीय को गौरवान्वित किया है। तेलुगु फिल्म “आरआरआर“ और डॉक्यूमेंट्री ‘द एलिफेंट विस्पर्स’ ने दो अलग अलग श्रेणियों में ऑस्कर पुरस्कार जीत लिए हैं। हालांकि 91 साल के ऑस्कर इतिहास में अब तक किसी भी भारतीय फिल्म को ऑस्कर नहीं मिल सका है। कुछ ऐसे भारतीय कलाकार भानु अथैया, सत्यजीत रे, ऐ. आर. रहमान एवं  गुलजार जरूर रहे हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर देश को गौरवान्वित करने का मौका दिया है। फिल्म ’स्लमडॉग मिलियनेयर’ के लिए ...
आज डिजिटल तकनीक का युग है।

आज डिजिटल तकनीक का युग है।

राष्ट्रीय, समाचार
आज डिजिटल तकनीक का युग है। इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम का युग है। यही कारण है कि आज हम पत्रों से संवाद करना लगभग लगभग भूल चुके हैं। आज की युवा पीढ़ी डाकघर में मिलने वाले अंतर्देशीय पत्र, पोस्टकार्ड आदि के बारे में जानती ही नहीं होगी। आज सब टेक्स्ट मैसेज लिखते हैं, व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम का जमकर प्रयोग करते हैं लेकिन पत्र लिखने में जो भावनाएं मौजूद थीं, जिस भाषा का हम पत्रों में इस्तेमाल करते थे, आज वह भाषा, भावनाएं दोनों ही नदारद हो गई हैं। आज पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों को कोई विरले ही चिट्ठी लिखता होगा।वैसे भी आज के इंटरनेट, आधुनिक युग में किसी संपादक के पास इतना समय नहीं होता है कि वह पाठकों, लेखकों की एक एक चिट्ठियाँ खोलकर पढ़ें और बाद में उन्हें अपने अखबार में प्रकाशित करें। पहले संपादकों द्वारा पाठकों, लेखकों की चिट्ठियों को ...
13 मार्च 1940 क्रांतिकारी ऊधमसिंह ने लंदन जाकर की थी जनरल डायर की हत्या

13 मार्च 1940 क्रांतिकारी ऊधमसिंह ने लंदन जाकर की थी जनरल डायर की हत्या

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
--रमेश शर्मा भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अधिकाँश क्राँतिकारियों का बलिदान सत्ता प्राप्ति के लिये नहीं अपितु इस राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया । क्राँतिकारी ऊधमसिंह वे संकल्पवान बलिदानी हैं जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लंदन जाकर लिया और जनरल डायर को लंदन में गोली मारी । यह घटना 13 मार्च 1940 की है । हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि वह जनरल डायर दूसरा था । और उसकी मौत 1927 मे हो गई थी । पर यह सच नहीं लगता । चूंकि क्राँतिकारी ऊधम सिंह ने वर्षों लंदन में रहकर डायर का पीछा किया था ।क्राँतिकारी उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले अंतर्गत सुनम गाँव में हुआ था | उनके जन्म के दो वर्ष बाद ही माँ का निधन हो गया था और पिताजी सरदार तेजपाल सिंह का निधन 8 साल बाद 1907 हो गया ।माता पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अमृतसर के खालसा अनाथालय भेज दिया गया ।...
1 मार्च 1689 सम्भाजी महाराज का बलिदान

1 मार्च 1689 सम्भाजी महाराज का बलिदान

धर्म, समाचार, साहित्य संवाद
औरंगजेब द्वारा कठोर यातनाएँ, जुबान काटी, चीरा लगाकर नमक भरा रमेश शर्मा पिछले दो हजार वर्षों में संसार का स्वरूप बदल गया है । बदलाव केवल शासन करने के तरीके या राजनैतिक सीमाओं में ही नहीं हुआ अपितु परंपरा, संस्कृति, जीवनशैली और सामाजिक स्वरूप में भी हुआ है । किंतु भारत इसमें अपवाद है । असंख्य आघात सहने के बाद भी यदि भारतीय संस्कृति और परंपराएँ दिख रहीं हैं तो इसके पीछे ऐसे बलिदानी हैं जिन्होंने कठोरतम प्रताड़ना सहकर भी अपने स्वत्व की रक्षा की है । झुकना या रंग बदलना स्वीकार नहीं किया । ऐसे ही बलिदानी हैं सम्भाजी महाराज जिन्हें धर्म बदलने के लिये 38 दिनों तक कठोरतम यातनाएँ दीं गईं जिव्हा काटी गई, शरीर में चीरे लगाकर नमक भरा गया पर वे अपने स्वत्व पर अडिग रहे ।सम्भाजी महाराज छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र थे। उन्हें धोखे से बंदी बनाकर इतनी क्रूरतम प्रताड़ना दी गयी जिसकी कल्पना तक नहीं की...
उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

राज्य, समाचार, सामाजिक
विजयमनोहरतिवारी होली के दिन मध्यप्रदेश में विदिशा जिले के उदयपुर में नंदी की एक दर्शनीय प्राचीन प्रतिमा मिट्‌टी और मलबे से बाहर आई। क्रिकेट खेलते हुए कुछ बच्चों की दृष्टि में आने के बाद उसे बाहर निकाला गया। वह स्पष्ट रूप से परमार राजाओं के समय के किसी शिव मंदिर का हिस्सा होगा, जिसे खंडित किए जाने के निशान साफ देखे जा सकते हैं। वह भूकंप में तबाह नहीं हुआ। वह हमलावरों के निशान हैं, जिससे उदयपुर लगातार घायल होकर भी बचा रह गया। कुछ ही घंटों में शासन ने जानकारी मिलते ही उदयपुर के बारह खंभा स्मारक के पास नंदी की प्रतिमा को सुरक्षित निकाल लिया। प्रश्न यह है कि उदयपुर जैसे प्राचीन नगरों का अब क्या किया जाए, जो सदियों की समृद्ध विरासत को अपने भीतर संजोए हुए हैं और यदाकदा नई मूर्तियों, शिलालेखों और मंदिरों के अवशेष सामने आते रहते हैं? क्या इन्हें ऐसे ही लावारिस पड़े रहने दिया जाए या इन्हें नए...
इतिहास को दोहराते राहुल गांधी

इतिहास को दोहराते राहुल गांधी

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इतिहास को दोहराते राहुल गांधी-बलबीर पुंज कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी द्वारा ब्रिटेन में दिए बयानों का कुल निचोड़ यह है— "भारत में लोकतंत्र समाप्त है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोग भारतीय सत्ता-अधिष्ठान पर काबिज है। चुनाव आयोग से लेकर मीडिया, न्यायालय दवाब में है। देश में लोकतंत्र को बचाने हेतु अमेरिका और यूरोप को हस्तक्षेप करना होगा।" वास्तव में, इन वक्तव्यों में निहित चिंतन ही भारत की त्रासदी और उसके शताब्दियों तक आक्रांताओं के अधीन परतंत्र रहने का बड़ा कारण है। वर्ष 1707 में मुगलिया आक्रांता औरंगजेब के देहांत के बाद भारत में इस्लामी हुकूमत क्षीण होने लगी थी। तब कालांतर में शाह वलीउल्लाह ने अफगान शासक अब्दाली (दुर्रानी) को भारत पर आक्रमण हेतु बुलावा भेजा, क्योंकि वह छत्रपति शिवाजी द्वारा प्रतिपादित 'हिंदवी स्वराज्य' को समाप्त करके भारत में पुन: इस्लामी राज स्थापित ...
रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

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-ललित गर्ग- सरकारों के बजट भी अब मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटने, तोहफों, लुभावनी घोषणाएं एवं योजनाओं की बरसात करने का माध्यम बनते जा रहे हैं। बजट में भी ‘रेवड़ी कल्चर’ का स्पष्ट प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, खासकर तब जब उन राज्यों में चुनाव नजदीक हों। ‘फ्रीबीज’ या मुफ्त उपहार न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में वोट बटोरने का हथियार हैं। यह एक राजनीतिक विसंगति एवं विडम्बना है जिसे कल्याणकारी योजना का नाम देकर सत्ताधारी पार्टी राजनीतिक लाभ की रोटियां सेंकती है।  यह तय करना कोई मुश्किल काम नहीं है कि कौनसी कल्याणकारी योजना है और कौनसी मुफ्तखोरी यानी ‘रेवड़ी कल्चर’ की, परंतु राजनीतिक मजबूरी इसे चुनौतीपूर्ण बना देती है। भारत जैसे विकासशील देश की विभिन्न राज्यों की सरकारें सरकारी बजट के माध्यम से आम-जनता को प्रभावित करने का हरसंभव प्रयास करती है। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट इसका ...