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शिक्षा से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों के दाग -ः ललित गर्ग:

शिक्षा से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों के दाग -ः ललित गर्ग:

समाचार, सामाजिक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने एवं तरह-तरह के कानूनों के प्रावधानों के बावजूद आजादी का अमृत महोत्सव मना चुके राष्ट्र के शिक्षा के मन्दिर बच्चों पर हिंसा करने, पिटने, सजा देने के अखाडे़ बने हुए है, शिक्षक अपनी मानसिक दुर्बलता एवं कुंठा की वजह से बच्चों के प्रति बर्बरता की हदें लांघ रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा में अभिनव क्रांति करने का ढ़िढोरा पीट रही है, लेकिन अपने शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं पर सवार हिंसा की मानसिकता को दूर करने का कोई सार्थक उपक्रम नहीं कर पायी है। यही कारण है कि दिल्ली में एक प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका ने पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची को न केवल बुरी तरह पीटा, बल्कि कैंची से वार करते हुए उसे पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। ऐसी क्रूर, हिंसक एवं बर्बर घटना को अंजाम देने वाली शिक्षिका को बच्चों को पढ़ाने-लिखाने लायक माना जा सकता है? बात केवल दिल्ली...
सोशल मीडिया पर खबरों के दौर में अखबारों पर भरोसा

सोशल मीडिया पर खबरों के दौर में अखबारों पर भरोसा

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* जहां तक राष्ट्रीय मीडिया की लोकप्रियता का सवाल है, यह कहना कठिन है कि उसके प्रति आम लोगों का प्रेम या आदर बढ़ा है लेकिन उसके दर्शकों और पाठकों की संख्या तो काफी बढ़ी ही है। जब आज से लगभग 45 साल पहले मैं नवभारत टाइम्स में काम करता था तो देश के इस सबसे बड़े अखबार की 4—5 लाख प्रतियां छपती थीं लेकिन अब तो हिंदी और अन्य भाषाओं के कई अखबारों की प्रसार—संख्या कई—कई लाखों में हैं और उनके पाठकों की संख्या करोड़ों में है। पहले किसी अखबार के दो—तीन संस्करण निकलते थे तो उन्हें बड़ा अखबार माना जाता था लेकिन अब कुछ अखबार ऐसे हैं, जिनके दर्जनों संस्करण छपते हैं।  यही स्थिति टीवी चैनलों की है। शुरू-शुरू में चार-पांच न्यूज़ चैनल ही दिखाई पड़ते थे, लेकिन आज विभिन्न भाषाओं में देश में सैकड़ों चैनल कार्यरत हैं। अब उनके दर्शकों की संख्या भी लाखों नहीं, करोड़ों में है। कई सर्वे...
संसद के प्रति कार्यपालिकाओं की जवाबदेही

संसद के प्रति कार्यपालिकाओं की जवाबदेही

राष्ट्रीय, समाचार
एक संसदीय लोकतंत्र में, संसद लोगों की इच्छा का प्रतीक है और इसलिए, सार्वजनिक नीति को लागू करने के तरीके की निगरानी करने में सक्षम होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सामाजिक-आर्थिक प्रगति के उद्देश्यों के अनुरूप है, प्रशासन और समग्र रूप से लोगों की आकांक्षाएं के लिए कुशल है। संक्षेप में, यह प्रशासन की संसदीय निगरानी का कारण है। संसद को प्रशासन के व्यवहार पर नजर रखनी होती है। यह कार्योत्तर पूछताछ और जांच कर सकता है कि क्या प्रशासन ने अनुमोदित नीतियों के तहत अपने दायित्वों के अनुरूप कार्य किया है और उसे प्रदत्त शक्तियों का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए किया है जिनके लिए उनका इरादा था और क्या खर्च किया गया पैसा संसदीय मंजूरी के अनुसार था। यह सुनिश्चित करता है कि अधिकारी इस तथ्य से अवगत रहें कि वे अंततः संसदीय जांच के अधीन होंगे और वे जो करते हैं या करने में विफल होते हैं, उसके लिए जव...
डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा

डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा

EXCLUSIVE NEWS, समाचार
डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्व स्वास्थ्य संगठन मुख्यालय (जिनेवा) का एक आउटपोस्ट केंद्र है। यह डब्ल्यूएचओ सदस्य देशों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में सहायता करेगा। डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा जो पारंपरिक दवाओं से संबंधित दवाओं और अनुसंधान के विकास को बढ़ावा देगा तथा पारंपरिक दवाओं के बारे में साक्ष्य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा जागरूकता को मजबूत बनाएगा। डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम की गतिविधियां/कार्यक्षेत्र इस प्रकार हैं- स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडे के विकास और आकार देने, अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों को स्थापित करने, देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने तथा पारंपरिक चिकित्सा तथा स्वस्थ रुझानों की निगरानी और आकलन के लिए एक संरक्षक के रूप में कार्य करना। अनु...
फीफा कप को किसने जोड़ा मजहब से

फीफा कप को किसने जोड़ा मजहब से

विश्लेषण, समाचार
आर.के. सिन्हा कतर में चल रहे फीफा विश्व कप में लगातार उलटफेर हो रहे हैं। यह ही एक ऐसा खेल है जिसमें अच्छी क्वालिटी के खेलों का रोमांच बढ़ता है जब नतीजे अप्रत्याशित आते हैं। कमजोर समझी जाने वाली टीमें भी बड़ी शक्तिशाली टीमों को परास्त कर देती हैं। पर चालू फीफा कप को इसलिए भी याद रखा जाएगा कि लगातार इस विश्व कप की इस्लामीकरण करने की कोशिश ही होती रही। यह जब आरंभ हुआ तो इस बात को जरूरत से ज्यादा महिमामंडित किया गया कि इसका आयोजन एक इस्लामिक देश कर रहा है। फिर नॉकआउट राउंड में स्पेन को हराने के बाद पहली बार क्वार्टर-फाइनल में पहुंची मोरक्को टीम के खिलाड़ियों ने फिलिस्तीनी झंडे के साथ जीत का जश्न मनाया। मैच में मोरक्को ने स्पेन को पेनल्टी शूटआउट में 3-0 से हराया था। मोरक्को की स्पेन पर जीत पर हमारे यहां भी बहुत से लोग इस तरह से खुश हो रहे थे मानो कि उनका मुल्क मोरक्को ही हो, पर यहाँ फि...
हिन्दुत्व की प्रयोगशाला का सफलतम अनुसन्धान: गुजरात चुनाव परिणाम 

हिन्दुत्व की प्रयोगशाला का सफलतम अनुसन्धान: गुजरात चुनाव परिणाम 

राज्य, समाचार
मृत्युंजय दीक्षित  गुजरात की जनता ने 2022 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को इतने शानदार ढंग से सत्ता में वापसी कराई है कि आज बड़े बड़े  राजनैतिक विश्लेषक भी  हैरान हैं, कोई समझ नहीं पा रहा  कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी के व्यक्तित्व और  नेतृत्व में ऐसी क्या विशेषता है कि लगातार सातवीं बार भाजपा को प्रचंड जीत हासिल हो गई है। इससे पूर्व कांग्रेस को राज्य विधानसभा में वर्ष 1985 में 56 प्रतिशत वोटों के साथ 149 सीटें प्राप्त हुई थीं और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने यह रिकार्ड ध्वस्त कर दिया है। राजनैतिक विष्लेषक इस अदभुत और अविश्वसनीय विजय के पीछे के रहस्यों को पता करने का प्रयास कर रहे हैं। सभी विश्लेषकों  का अनुमान है कि इस बार कांग्रेस ने चुनावों के पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था और रही सही कसर आम आ...
चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
रजनीश कपूरदेश की सर्वोच्च अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फ़ैसले से देशभर की अदालतों में लंबित पड़े 33 लाख मामलों पर प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही चेक बाउंस के नाजायज़ केसों में भीकटौती हो सकेगी।दुनिया के कई देशों की तरह हमारे देश में भी चेक बाउंस होना एक अपराध माना जाता है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट,1881 के मुताबिक चेक बाउंस होने की स्थिति में चेक जारी करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है। क़ानून केमुताबिक़ उसे 2 साल तक की जेल या चेक में भरी राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है।मुख्य न्यायाधीश का पदभार सँभालने से कुछ हफ़्ते पहले, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अपनी सहयोगी जज जस्टिस हिमाकोहली के साथ एक खंडपीठ में अक्तूबर 2022 को दिये इस फ़ैसले में इस क़ानून की एक धारा के सही उपयोग को स्पष्टकिया है। कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्...
नेपाल में नई सरकार

नेपाल में नई सरकार

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* नेपाल में हुए आम चुनावों में जिन सत्तारुढ़ पार्टियां ने पहले से गठबंधन सरकार बनाई हुई थीं, वे फिर से जीत गई हैं। उन्हें 165 में से 90 सीटें मिल गई हैं। अब नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा फिर प्रधानमंत्री बन जाएंगे। हालांकि उनकी पार्टी को 57 सीटें मिली हैं और प्रंचड की कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 18 सीटें मिली हैं लेकिन जहां तक वोटों का सवाल है, प्रचंड की पार्टी को 27,91,734 वोट मिले हैं जबकि नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 26,66,262 वोट ही मिल पाए। इसका अर्थ क्या हुआ? अब कम्युनिस्ट पार्टी का असर ज्यादा मजबूत रहेगा। अब देउबा की सरकार में कम्युनिस्ट पार्टी का सिक्का ज़रा तेज दौड़ेगा। देउबा प्रधानमंत्री तो दुबारा बन जाएंगे लेकिन उन्हें अब उन कम्युनिस्टों की बात पर ज्यादा ध्यान देना होगा, जो कभी नेपाली कांग्रेस के कट्टर विरोधी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बगावत के ...
अवैध मतांतरण

अवैध मतांतरण

राष्ट्रीय, समाचार, सामाजिक
ह्रदय नारायण दीक्षित अवैध मतांतरण राष्ट्रीय चुनौती है। ईसाई इस्लामी समूह काफी लम्बे समय से अवैध मतांतरण में संलग्न हैं। वे सारी दुनिया को अपने पंथ मजहब में मतांतरित करने के लिए तमाम अवैध साधनों का इस्तमाल कर रहे हैं। अपनी आस्था विवेक और अनुभूति में जीना प्रत्येक मनुष्य का अधिकार है। लेकिन यहाँ अवैध मतांतरण के लिए छल बल भय और प्रलोभन सहित अनेक नाजायज तरीके अपनाए जा रहे हैं। यह मानवता के विरुद्ध असाधारण अपराध है। और राष्ट्रीय अस्मिता के विरुद्ध युद्ध भी है। मतांतरण से व्यक्ति अपना मूल धर्म ही नहीं छोड़ता, उसकी देव आस्थाएं बदल जाती हैं। पूर्वज बदल जाते हैं। वह अपनी संस्कृति के प्रति स्वाभिमानी नहीं रह जाता। वह नए पंथ मजहब के प्रभाव में अपने पूर्वजों पर भी गर्व नहीं करता। उसकी भूसांस्कृतिक निष्ठा बदल जाती है। भूसांस्कृतिक निष्ठा ही भारतीय राष्ट्र का मूल तत्व है। इसलिए मतांतरण राष्ट्रांतरण ...
घुटने टेकता ईरान

घुटने टेकता ईरान

TOP STORIES, समाचार
घुटने टेकता ईरान* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* ईरान में हिजाब के विरुद्ध इतना जबर्दस्त जन-आंदोलन चल पड़ा है कि मुल्ला-मौलवियों और आयतुल्लाहों की सरकार को घुटने टेकने पड़ गए हैं। उसने घोषणा की है कि वह ‘गश्त—ए-इरशाद’ नामक अपनी मजहबी पुलिस को भंग कर रही है। इस पुलिस की स्थापना 2006 में राष्ट्रपति महमूद अहमदनिजाद ने इसलिए की थी कि ईरानी लोगों से वह इस्लामी कानूनों और परंपराओं का पालन करवाए। देखिए, ईरान की कथा भी कितनी विचित्र है। सउदी अरब और यूएई जैसे सुन्नी और अरब राष्ट्रों से ईरान की हमेशा ठनी रहती है लेकिन फिर भी वह हिजाब-जैसे सुन्नी और अरबी रीति-रिवाजों को उनसे भी ज्यादा सख्ती से लागू करने पर आमादा रहता है। ईरान तो आर्य राष्ट्र है। उसके शहंशाह को ‘आर्यमेहर’ कहा जाता था। लेकिन ईरान अपने भव्य भूतकाल को भूलकर अब अरबों की नकल करता है और दूसरी तरफ वह अपने शिया होने पर इतना गर्व करता है कि सुन्...