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आचार्य महाश्रमण : मिट्टी से मानुष गढ़ता संत

आचार्य महाश्रमण : मिट्टी से मानुष गढ़ता संत

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अहिंसा की एक बड़ी प्रयोग भूमि भारत में आज साम्प्रदायिकता, अनैतिकता, हिंसा के घने अंधकार में एक संत-चेतना चरैवेति-चरैवेति के आदर्श को चरितार्थ करते हुए पांव-पांव चलकर रोशनी बांट रही है। जब-जब धर्म की शिथिलता और अधर्म की प्रबलता होती है, तब-तब भगवान महावीर हो या गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद हो या महात्मा गांधी, गुरुदेव तुलसी हो या आचार्य महाप्रज्ञ-ऐसे अनेक महापुरुषों ने अपने क्रांत चिंतन के द्वारा समाज का समुचित पथदर्शन किया है। अब इस जटिल दौर में सबकी निगाहें उन प्रयत्नों की ओर लगी हुई हैं, जिनसे इंसानी जिस्मों पर सवार हिंसा, अनैतिकता, नफरत, द्वेष का ज्वर उतारा जा सके। ऐसा प्रतीत होता है कि आचार्य श्री महाश्रमण और उनकी अहिंसा यात्रा इन घने अंधेरों में इंसान से इंसान को जोड़ने का उपक्रम बनकर प्रस्तुत हो रही है, उनका सम्पूर्ण उपक्रम प्रेम, भाईचारा, नैतिकता, सांप्रदायिक सौहार...
संकट के दौर से गुजर रहा संयुक्त परिवार

संकट के दौर से गुजर रहा संयुक्त परिवार

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  किसी ने यह सच ही कहा है कि ‘‘दिल छोटा और बड़ा अहंकार, जिसने बिखेर कर रख दिया एक बड़ा सुखी परिवार। टुकड़ों में सब जीते हैं अब, गम के घुट अकेले पीते है सब। याद करते उन पलों को जब साथ में सब रहते थे, मिलजुल कर सब सहते थे। यह बिल्कुल सत्य है कि समय ने हमारे अहंकार को बड़ा कर दिया है और दिल को छोटा बना दिया है जिसके वजह से हमारा संयुक्त परिवार एकल परिवार में तब्दील होता जा रहा है। एक समय था जब हमारे यहां रिश्तों, संस्कारो और परम्पराओं को सबसे बढ़कर माना जाता था। लेकिन आधुनिकता ने इन सभी रिश्तों को न केवल कमजोर किया है बल्कि ईष्र्या और वैमनस्यता को भी इन रिश्तों के बीच ला खड़ा किया है। इन बातों को आसानी से महसूस की जा सकती है जिसमें आप पाएंगे कि वो प्यार, वो दुलार तेजी से बदलते दौर में कहीं गुम-सी गयी है। आखिर ऐसी क्या वजहें हैं कि आज के रिश्तें केवल नाममात्र के रह गए हैं जिसमें ...
बच्चों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए

बच्चों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए

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भारत की तकनीकी प्रगति को चिह्नित करने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देने के लिए 11 मई को भारत भर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश में नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों के उपलक्ष्य में वर्ष 1999 से प्रत्येक वर्ष 11 मई इस दिवस का आयोजन करता है। इस अवसर देशभर में राष्ट्र की सेवा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सफलता का उत्सव मनाया जाता है। ज्ञातव्य है कि यह दिवस 11 मई को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि प्राप्त होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह राजस्थान के पोखरण में 11 से 13 मई 1998 तक आयोजित आपरेशन शक्ति (पोखरण -2) परमाणु परीक्षण के पांच परमाणु परीक्षणों में से पहले परीक्षण की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। आपरेशन का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कि...
चिन्ताजनक है पूंजी का बढ़ता असन्तुलन

चिन्ताजनक है पूंजी का बढ़ता असन्तुलन

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भारत के अमीर और ज्यादा अमीर होते जा रहे हैं, गरीब और ज्यादा गरीब। इस बढ़ती असमानता से उपजी चिंताओं के बीच देश में अरब़पतियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। भारत के लिये विडम्बनापूर्ण है कि यहां गरीब दो वक्त की रोटी और बच्चों की दवाओं के लिए जूझ रहे हैं, वहीं कुछ अमीरों की संपत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। देश में दसियों नए अरबपति उभरे हैं तो कुछ पुराने अरबपतियों की लुटिया भी डूब गई है। हालांकि अरबपतियों के उभरने की रफ्तार दुनिया में सबसे ज्यादा यहीं है। संपत्ति सलाहकार कंपनी नाइट फ्रैंक की ‘द वेल्थ रिपोर्ट 2019’ के अनुसार भारत में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2013 में यह 55 थी जो 2018 में बढ़कर 119 हो गई। फिलाडेल्फिया की टेंपल यूनिवर्सिटी के तहत फॉक्स स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर चाल्र्स धनराज के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में देश का कारोबारी माहौल लगातार सुधरा है। एक ...
बहुजनों को बार-बार छलने वाली बहनजी बंद कीजिए दिन में ख्वाब देखना

बहुजनों को बार-बार छलने वाली बहनजी बंद कीजिए दिन में ख्वाब देखना

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बहुजन समाजवादी पार्टी की एकमात्र नेत्री मायावती ने प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब देखने भी शुरू कर दिए हैं। देखा जाए तो कोई दिन में सपने देखकर खुश होना चाहे तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है। वैसे उन्हें ख्वाबों और हकीकत का अंतर तो मालूम ही होगा। विगत दिनों उत्तर प्रदेश में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बहन जी ने कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश से ही होगा। ये जरूरी नहीं है कि मोदी जी वाराणसी से चुनाव जीते। वो एक तरह से साफ संकेत दे रही थीं कि वो स्वयं प्रधानमंत्री बन सकती हैं। मायावती राजनीति की भले ही  पुरानी खिलाड़ी हों पर उन्हें यह तो समझना ही चाहिए कि उनके लिए अभी दिल्ली दूर है। उनका प्रधानमंत्री पद को हासिल करना असंभव सा है। दलितों को ही ठगने और छलने वाली नेत्री दलित नेत्री अपने को प्रचारित करके कभी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकतीं। बहन मायावती जी की एक बड़ी कमी यह है कि वह...
बम धमाकों में हर बार इस्लाम के ही चीथड़े उड़ाते हैं आतंकवादी!

बम धमाकों में हर बार इस्लाम के ही चीथड़े उड़ाते हैं आतंकवादी!

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रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। प्रार्थना करता हूं कि दुनिया में शांति कायम रहे, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से यह चलन देखा जा रहा है कि रमज़ान के महीने में इस्लामिक आतंकवादियों की हिंसा काफी बढ़ जाती है। मेरी नज़र में सबसे भयावह घटना तीन साल पहले बांग्लादेश में हुई थी, जब कुरान की आयतें न पढ़ पाने पर कई लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा दुनिया भर में अंजाम दी जा रही वारदात की क्रोनोलॉजी याद रखना बेहद मुश्किल है, क्योंकि आए दिन कहीं न कहीं वे बेगुनाह लोगों को मार रहे हैं। कुछ दिन पहले श्रीलंका में हुए धमाकों में सैकड़ों लोग मारे गए थे। बुधवार, 8 मई को फिर पाकिस्तान के लाहौर में एक सूफी दरगाह के बाहर धमाका हुआ है और कई लोग मारे गए हैं। कई लोगों को यह बात कड़वी लगेगी, लेकिन इस्लामिक आतंकवादी जब भी कहीं कोई धमाका करते हैं, हवाओं में ख़ुद इस्लाम के ही चीथड़े उड़ते हैं।...
वामपंथी रुदन

वामपंथी रुदन

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फेसबुक पर इन चुनावी दिनों में कई घोषित वामपंथियों (इनमें साहित्यकार, जिन्हें मैं साहित्यविकार कहता हूँ, और रिपोर्टर टाइप पत्रकार आदि शामिल हैं) का रुदन पढ़ रहा हूँ। सभी एक दूसरे को कॉपी पेस्ट किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें महारत हासिल है। मौलिक लेखन की प्रतिभा तो कहीं दिखती नहीं है। इनके रुदन को पढ़िए। एक ही बात सभी लिखे जा रहे हैं। पिछले पाँच वर्ष में देश तथा समाज में अनाचार मच गया है। वे अकेले हो गए हैं, जीवन का सारा रस सूख गया है, प्रकृति के प्रति कोई प्रेम कहीं नहीं बचा है। संस्कृति नष्ट हो गई  है, नदी, हवा, पेड़-पौधे, सभी समाप्त हो रहे हैं। सभी लोग एक दूसरे से घृणा करने लगे हैं। इसका कारण एक ही है। एक ऐसा व्यक्ति सत्ता में बैठा है, जो सब रस सोखे ले रहा है, घृणा फैला रहा है, प्रकृति को नष्ट कर रहा है, सौन्दर्य को समाप्त कर रहा है, व्यक्तियों को अकेला कर रहा है। इस रुदन को पढ़ने से प...
अंधकार का प्रतीक बुर्का बने इतिहास की बात

अंधकार का प्रतीक बुर्का बने इतिहास की बात

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श्रीलंका में दिल-दहलाने वाले बम धमाकों के बाद  वहां की सरकार ने बुर्का पहनने पर रोक लगा दी। इसके तुरंत बाद अपने केरल  राज्य में एक मुस्लिम शिक्षा निकाय ने अपने कॉलेजों और स्कूलों में ड्रेस कोड पर सर्कुलर जारी कर दिया है। सर्कुलर के अनुसार छात्राओं को अपने चेहरे को बुर्के से ढकने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हो सकता है कि कुछ मुसलमान और छदम सेक्यूलर वादी कहे जाने वाले मित्र श्रीलंका में बुर्के पर बैन को गंभीरता से न लें पर हमारे अपने देश की एक मुस्लिम शिक्षण ने संस्था ने सच में एक मील का पत्थर फैसला लिया है। उसने अपने फैसले को लागू करने के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देश का हवाला दिया है। यह एक बेहद क्रांतिकारी फैसला माना जाएगा। क्षमा चाहता  हूं कि मुसलमानों का एक बड़ा समूह अपने को प्रगति विरोधी के रूप में साबित करने पर आमादा रहता है। इन हालातों में केरल की उपर्युक्त संस्था ने उन  कठमुल्ला म...
दबाव एवं हिंसा की त्रासदी का शिकार बचपन

दबाव एवं हिंसा की त्रासदी का शिकार बचपन

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आज का बचपन केवल अपने घर में ही नहीं, बल्कि स्कूली परिवेश में बुलीइंग यानी दबाव एवं हिंसा का शिकार है। यह सच है कि इसकी टूटन का परिणाम सिर्फ आज ही नहीं होता, बल्कि युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते यह एक महाबीमारी एवं त्रासदी का रूप ले लेता है। यह केवल भारत की नहीं, बल्कि दुनिया की एक बड़ी समस्या है। लंदन के लैंकस्टर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट स्कूल के अर्थशास्त्र विभाग में असोसिएट रह चुकीं एम्मा गॉरमैन ने इस पर लम्बा शोध किया है। उन्होंने अपने इस शोध के लिए यूके के 7000 छात्र-छात्राओं को चुना। उन्होंने पहले उनसे तब बात की जब वे 14-16 की उम्र के थे। उसके बाद तकरीबन दस वर्षों तक उनसे समय-समय पर बातचीत की गई। गॉरमैन ने पाया कि किशोरावस्था की बुलीइंग यानी बच्चों को अभित्रस्त करना, उन पर अनुचित दबाव डालना या धौंस दिखाना, चिढ़ाना-मजाक उड़ाना या पीटना की घटनाओं ने बच्चों के भीतर के आत्मविश्वास, स्वतंत्र व्यक्...
एक खामोश क्रांति, लाखों युवक लेते कारोबार के लिए लोन

एक खामोश क्रांति, लाखों युवक लेते कारोबार के लिए लोन

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देश में लोकसभा चुनावों के स्वाभाविक कोलाहल के बीच एक अहम खबर दब सी गई है। पर यह अपने आप में अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। खबर यह है कि सरकार ने मुद्रा लोन योजना के तहत अपने 2018-19 के लक्ष्य को पूरा कर लिया है। ये राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 23 फीसद अधिक है । सरकार ने इस अवधि के दौरान 3 लाख करोड़ रुपये का लोन देने का लक्ष्य बनाया था। आपको पता ही है कि उपर्युक्त मुद्रा योजना के तहत देशभर के उन नवयुवकों / नवयुवतियों को आसान दरों पर लोन उपलब्ध करवाया जाता है, जो पहली बार अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहते हैं। आज से बीसेक साल पहले जिन कारोबारियों ने अपना कोई बिजनेस शुरू किया है, वे ही बता सकते हैं कि उन्हें पूंजी जुटाने के लिए दिन में ही रात के तारे नजर आ जाते थे। बैंकों के चक्कर लगाते-लगाते जूतियाँ घिस जाती थीं । इसी वजह से ज्यादातर भावी कारोबारियों के कुछ खास करने के ख्वाब बिखर जाया करते थे...