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आतंक पर अंतिम जंग

आतंक पर अंतिम जंग

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लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनावों की घोषणा के पूर्व ही पुलवामा में अत्यंत कायराना आतंकी हमले से देशवासियों की मनोदशा व राजनीतिक माहौल दोनों ही बुरी तरह बदल चुके हैं। देश में देशभक्ति का ज्वार उफान पर है और देशवासी अब आतंकियों व पाकिस्तान के खिलाफ आरपार की जंग के पक्ष में आ चुके हैं। जवाबी कार्यवाही के रूप में भारतीय वायुसेना ने पाक अधिकृत कश्मीर के बालकोट में आतंकी शिविरों पर किये बड़े हमले में सैंकड़ों आतंकियों को नेस्तनाबूद कर जंग का उद्घोष कर दिया है। पाकिस्तान जानता है कि प्रत्यक्ष युद्ध में वह भारत को नहीं हरा सकता, इसलिए उसने सन 71 की अपमानजनक हार के बाद गुरिल्ला युद्ध का सहारा ले रखा है और जब तब भारत में आंतरिक अशांति फैलाने वाले कार्य करता रहता है। यह होना स्वाभाविक भी है। तिनके तिनके जोड़कर हर भारतीय ने विभाजन के दंश के बाद मिली आजादी के बाद पिछले 72 सालों में अनेक झंझावात ...
Pollution in Ganga harming riverbed sediments too: study

Pollution in Ganga harming riverbed sediments too: study

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The excessive amounts of human waste and toxic effluents that find their way into the Ganga river are not only polluting the water but also causing deficit of dissolved oxygen in the riverbeds in some of the most polluted stretches of the river, a new study has found. Dissolved oxygen is an important parameter that determines health and rejuvenation capacity of any riverine ecosystem. The amount of dissolved oxygen in a river depends on atmospheric supply of oxygen, photosynthetic process, and oxygen-consuming metabolic and chemical processes. If dissolved oxygen falls below the threshold of 2 milligram per liter, it can lead to mass killing of fish and harm other aquatic life. Researchers measured sediment oxygen demand that includes the biological as well as chemical oxygen demandi...
पाक में घुसा भारत, अब तो सबक ले ले

पाक में घुसा भारत, अब तो सबक ले ले

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आर.के. सिन्हा भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर हमला करके भारत ने अपने धूर्त पड़ोसी  देश को उसकी औकात बता ही दी। सोमवार को देश ने रणभूमि के वीरों के स्मारक का उद्घाटन किया था और उसके अगले ही दिन अल सुबह पाकिस्तान में जैश ए मोहम्मद के 300 से भी ज़्यादा आतंकियों को ढेर कर पुलवामा के आतंकी हमले का करारा जवाब दे दिया। भारत ने एक तरह से  पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी एक कड़ा संदेश दे दिया  कि अगर भारत  की तरफ तिरछी नजर से देखा तो गर्दन में अंगूठा डाल दिया जाएगा। यह इस बार भारत ने अच्छी तरह से करके दिखा दिया है। भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के 3:50 से 4:05 बजे के बीच के मात्र पंद्रह मिनटों में जैश-ए-मोहम्मद के एक दर्जन ठिकानों पर पर ताबड़-तोड़ हमला किया। यह एक्शन भारत ने डंके की चोट पर किया। भीगी बिल्ली बने पाकिस्तान ने भी माना कि उसके क्षेत्र में भारत के विमान घुस गए थे।बालाकोट में भारत ने ज...
समय है देश विरोधियो के चहरे से नकाब उतारने का

समय है देश विरोधियो के चहरे से नकाब उतारने का

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पुलवामा की आतंकवादी घटना के बाद से जिस प्रकार के कदम हमारी सरकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है उससे ना सिर्फ देश में एक सकारात्मक माहौल उत्पन्न हुआ है बल्कि इन ठोस कदमों ने  हमारे सुरक्षा बलों के मनोबल को भी ऊंचा किया है। लेकिन यह खेद का विषय है कि सरकार के जिन प्रयासों का स्वागत पूरा देश कर रहा है उनका विरोध देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस समेत जम्मू कश्मीर के स्थानीय विपक्षी दल कर रहे हैं। काश कि ये समझ पाते  कि इनका गैर जिम्मेदाराना और सरकार विरोधी आचरण देश विरोध की सीमा तक जा पहुंचा है । क्योंकि अपने राजनैतिक हितों के चलते इन लोगों ने कश्मीर समस्या को और उलझाने का ही  काम किया है। पाक परस्ती के चलते जो लोग यह कहते हैं कि युद्ध किसी समस्या का विकल्प नहीं होता उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि युद्ध किसी समस्या का पहला विकल्प नहीं होता लेकिन अंतिम उपाय और एकमात्...
India expected too much of Pakistan’s best friend

India expected too much of Pakistan’s best friend

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At the end Indian diplomats and leaders should know that world leaders expect that India having the fastest growing economy in the world and looking to be an important player on the global stage should be able to take care of its own military problems with its troublesome neighbor.   It is not known how the visit of the Saudi Crown Prince would have gone off at levels that were dealing with the visit and interacting with the visitor. Going through the newspapers and viewing television, it might not have been as successful as desired. One of the main reasons might have been the overwhelming emphasis that was laid on declaring Pakistan a terror state. To begin with the manner in which the Saudi Prince was received must have been perceived by him as deferential see...
Will Pakistan exist within the next 20 years?

Will Pakistan exist within the next 20 years?

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Today’s conditions don’t show very much promise. There’s an interesting phrase I see popping up in Indian politics called “Mera des badal raha he” which translates roughly to “My nation/homeland is changing”. It’s interesting because of how it’s used as a double-edged sword and has both right wing and left wing connotations. The right wing use it to praise the BJP and its governance and claim the nation is on a path to economic progress, international prestige and nation reinvigoration. It promises a bright and optimistic future in a nutshell. The left wing use it as a grim warning or a mockery and claim the nation’s secular fabric and institutions are being torn apart and an intolerant regime bent on persecuting minorities and imposing authoritarianis...
पुलवामा पर विरोधाभासी स्वर दुर्भाग्यपूर्ण

पुलवामा पर विरोधाभासी स्वर दुर्भाग्यपूर्ण

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देश घायल है, वैचारिक बिखराव एवं टूटन को झेल रहा है, पुलवामा में आतंकी हमले के बाद समूचे राष्ट्र में आक्रोश की ज्वाला धधक रही है। लहूलुहान हो चुके इस देश के लोगों के दिल और दिमाग में बार-बार करतब दिखाती हिंसा को देखकर भय और आक्रोश होना स्वाभाविक है, विनाश एवं निर्दोष लोगों की हत्या को लेकर चिन्ता होना भी जायज है। इस तरह निर्दोषों को मारना कोई मुश्किल नहीं, कोई वीरता भी नहीं। पर निर्दोष जब भी मरते हैं, पूरा देश घायल होता है, राष्ट्रीयता आहत और घायल होती है। इन हालातों में हर कोई निर्दोष लोगों की हत्या का बदला चाहता है। क्योंकि इस आतंकी हमले ने देश की जनता को गहरा आघात दिया है और उसकी प्रतिक्रिया में आक्रोश, विद्रोह एवं बदले की भावना सामने आना स्वाभाविक है, क्योंकि घटना ही इतनी दुखद, त्रासद एवं भयावह थी। पुलवामा की आतंकी घटना को लेकर जैसा राष्ट्रीयता का स्पष्ट एवं सार्थक वातावरण बनना चाहिए थ...
आर्यसमाज की 150 वीं वर्षगांठ का लक्ष्य व उसकी पूर्ति के उपाय

आर्यसमाज की 150 वीं वर्षगांठ का लक्ष्य व उसकी पूर्ति के उपाय

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वर्ष प्रतिपदा के पावन दिवस 10 अप्रैल, सन् 1875 को महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य-समाज ने अब तक देश के धार्मिक,सामाजिक, आध्यात्मिक व राष्ट्रीय विषयों पर अपनी गहरी पैठ बनाई है. इसके द्वारा अविद्या के नाश व विद्या वृद्धि, अँध-विश्वासों, आडंबरों, मिथ्याचरण, बाल विवाह, बेमेल विवाह, सामाजिक कुरीतियों, सामाजिक असमानता इत्यादि पर प्रहार करते हुए हिन्दी, संस्कृत व देवनागरी के साथ गुरुकुलों का विकास, वेदों का सरलीकरण व सुलभीकरण, विधवा विवाह, स्त्री शिक्षा का प्रसार आदि कार्यों में वैश्विक स्तर पर प्रशंसनीय कार्य हुए हैं. योगदर्शन में वर्णित अष्टांग योग यथा यम-नियम-आसन-प्राणायाम-प्रत्याहार-धारणा-ध्यान-समाधि जिनसे मनुष्य ज्ञानवान होकर ईश्वर को प्राप्त कर सकता है, का प्रचार-प्रसार भी भरसक किया है. स्वामी श्रद्धानंद की प्रेरणा, संकल्प व संघर्ष के कारण आर्यसमाज ने जो एक अत्यन्त महत्वपूर्ण क...
मानवता को सकारात्मक संदेश देते शिवजी के अष्टादश प्रतीक

मानवता को सकारात्मक संदेश देते शिवजी के अष्टादश प्रतीक

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शिवरात्रि में विभिन्न पूजन सामग्री का उपयोग भक्तजन करते हैं विशेषरूप से पुष्प,धतूरा,बिल्वपत्र,बेरफल,आँकड़ा,दूध,दही,शहद आदि का प्रयोग चन्दन, अक्षत, अबीर,गुलाल के साथ किया जाता है। किन्तु हम शिवजी के द्वारा धारण की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं के बारे में यदा-कदा ही ध्यान देते हैं। आइये जरा जानते हैं, कि, भक्तों को क्या सन्देश देते हैं ये प्रतीक। 1 गंगा नदी- शिव के शीश पर प्रवाहमान गंगा का अवतरण इस बात की ओर इंगित करता है कि व्यक्ति आवेग की अवस्था को अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से जीवन में संतुलन बनाए रख सकता है। शिव अपने भक्तों के शान्ति प्रदाता हैं। 2 शीश की जटा - भगवान शिव हम सभी जीवधारियों के रक्षक हैं। जटा श्वास - प्रश्वास का सूक्ष्म स्वरूप है। शिव स्वयं व्योमकेश हैं। उनके केश वायुमंडल के प्रतीक हैं। 3 अर्द्धचन्द्र समुद्र - मंथन के समय निकलने वाले विष को शिवजी ने अपने कंठ में धारण कर...
शिवरात्रि और शिवार्चन का महत्व

शिवरात्रि और शिवार्चन का महत्व

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भगवान शिव उत्पत्ति,स्थिति तथा संहार के देवता हैं। फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि के दिन स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर भक्त यदि ‘‘नमःशिवाय’’ इस पंचाक्षर मंत्र का जाप अनवरत करता है तो उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है। वह मृत्यु पर विजय प्राप्त कर मोक्ष ग्रहण कर लेता है। नारायण जब मायारूपी शरीर धारण कर समुद्र में शयन करते हैं तो उनके नाभि -कमल से पंचमुख ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं और वे सृष्टि निर्माण की प्रार्थना करते हैं। भगवान ने पाँच मुखों से पाँच अक्षरों का उच्चारण किया यही शिव वाचक पंचाक्षर मंत्र है। इसके प्रारंभ में ऊँ लगा देने से यह षड़ाक्षर हो गया है। यह मोक्ष, ज्ञान का सबसे उत्तम साधन है। शिव नाम की महिमा अनन्त है। सामान्य मनुष्य तो इनकी महिमा का गुणगान करने में असमर्थ है ही माँ भगवती सरस्वती भी भगवान के गुणों का वर्णन करने में असमर्थ प्रतीत होती है। श्री पुष्पदन्ताचार्य ने शि...