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Welcome Supreme Court order imposing fine on Tejaswy Yadav and ordering to vacate government-bungalow

Welcome Supreme Court order imposing fine on Tejaswy Yadav and ordering to vacate government-bungalow

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It refers to welcome order of Supreme Court on 08.02.2019 imposing symbolic fine of rupees 50000 for filing appeal at the Apex Court against justified order of Patna High Court directing former state Deputy Chief Minister Tejaswy Yadav to vacate government-bungalow meant for state Deputy Chief Minister. It is noteworthy that Tejaswy Yadav was rightfully offered another government-bungalow meant for persons of state of ministers in the state because he is presently Leader of the Opposition in state-assembly who is entitled for a government-bungalow meant for ministers in the State. Our political rulers should take lesson from British Prime Minister where family-members of outgoing British Prime Minister are seen pushing out their belongings to ensure that new British Prime Minister enter...
बंगलुरु में बिहारी प्रवासियो ने स्वस्थ भारत यात्रियो का किया जोरदार स्वागत

बंगलुरु में बिहारी प्रवासियो ने स्वस्थ भारत यात्रियो का किया जोरदार स्वागत

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कर्नाटक और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित घटप्रभा से चलकर स्वस्थ भारत यात्री देर शाम को बंगलुरु पहुंचे। जहाँ राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल ट्रस्ट के पदाधिकारियो ने बिहार भवन में आयोजित समारोह में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। ट्रस्ट के पदाधिकारियो ने स्वस्थ भारत   यात्रियो की हिम्मत और त्याग की सराहना की और उनके द्वारा जनऔषधि, पोषण और आयुष्मान को लेकर की जा रही राष्ट्रव्यापी यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दी। समारोह में ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेश्वर सिह ने स्वस्थ भारत यात्रा के प्रमुख आशुतोष कुमार सिह, गांधीवादी चिंतक प्रसून लतांत, वरिष्ठ पत्रकार अशोक प्रियदर्शी, आयुर्वेदाचार्य डाँ. सोम शेखर सहित विवेक शर्मा, शंभु कुमार,प्रियंका सिह, विनोद रोहिल्ला और पवन कुमार को सम्मानित किया। उन्होने कहा कि राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल ट्रस्ट को स्वस्थ भारत यात्रियो का बिहार भवन में स्वागत सम्मान करते हुए हर्ष हो रहा है।...
राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ?

राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ?

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क्या राहुल रॉफेल डील से सचमुच असंतुष्ट हैं? अगर हाँ, तो जैसा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, उन्हें ठोस सबूत पेश करने चाहिए। अगर वो कहते हैं और मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए दिए हैं तो इसे सिद्ध करें, कहीं न कहीं किसी ना किसी खाते में पैसों का लेनदेन दिखाएं। काश कि वो और उनके सलाहकार यह समझ पाते कि इस प्रकार  आधी अधूरी जानकारियों के साथ आरोप लगाकर वे मोदी की छवि से ज्यादा नुकसान खुद अपनी और कांग्रेस की छवि को ही पहुँचा रहे हैं। क्योंकि देश देख रहा है कि जिस प्रकार की संवेदनशीलता से वे रॉफेल सौदे में कथित भ्रष्टाचार को लेकर मोदी के खिलाफ दिखा रहे हैं,वो ममता के प्रति शारदा घोटाले, या  अखिलेश के प्रति उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले अथवा मायावती के प्रति मूर्ति घोटाले या फिर लालू और तेजस्वी के प्रति चारा घोटाले या चिदंबरम के प्रति आई एन एक्स क...
स्वस्थ भारत यात्रियों ने तमिलनाडू के लोगों से की अपील, शराबबंदी के समर्थन में बनाएं माहौल

स्वस्थ भारत यात्रियों ने तमिलनाडू के लोगों से की अपील, शराबबंदी के समर्थन में बनाएं माहौल

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कर्नाटक दौरे के बाद स्वस्थ भारत यात्री तमिलनाडू में आए और इस राज्य में आबादी की दृष्टि से दूसरे बड़े और विभिन्न बातों के लिए प्रख्यात कोयंबटूर के कई जनऔषधि केन्द्रों पर पहुंचे और उनकी स्थिति का जायजा लिया। डॉक्टरों से मिले और मरीजों का हाल जानने की कोशिश की। स्वस्थ भारत यात्रा के प्रमुख आशुतोष कुमार सिंह ने तमिलनाडू के लोगों से अपील की कि वे शराबबंदी के लिए आगे आएं तभी हमारा भारत स्वस्थ होगा। श्री सिंह ने तमिलनाडू में शराब के कारण आम लोगों कि खासकर महिलाओं कि दुर्गति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल दवा से ही स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं हो सकता बल्कि इसके लिए हमें कई तरह की बुराई के खिलाफ भी खड़ा होना होगा। शराब भी एक बहुत बड़ी बुराई है जिससे सेहत के साथ-साथ आर्थिक नुकसान होता है और नई पीढी के विकास में भी अनेक बाधाएं आती हैं। तमिलनाडू में स्वस्थ भारत यात्रादल मैनचेस्टर ऑफ द साउथ...
फिऱ आया इंदिरा गांधी-राजीव गांधी की शहदात भुनाने का मौसम

फिऱ आया इंदिरा गांधी-राजीव गांधी की शहदात भुनाने का मौसम

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ऱाफेल डील विवाद पर दो तरह की बातें साफ तौर पर देखने में आ रही है। पहली, कुछ नेता अपने विरोधियों पर खुलकर गटर छाप और असभ्य भाषा का इस्तेमाल करके निशाना साध रहे हैं। दूसरी, कांग्रेस के कुछ नेता फिर से चुनाव से ठीक पहले जनता की सहानुभूति बटोरने के लालच से इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की शहादत को भुनाने में लग गए हैं। ये ठीक है कि इन दोनों नेताओं की दुखद हत्याएं हुईं थीं। पर क्या श्रीमती इंदिरा गांधी की पंजाब नीति वाजिब थी? कौन नहीं जानता कि उन्होंने ही शुरूआती दौर में जरनैल सिंह भिंडरावाले को हर तरह से मदद करके खाद-पानी दिया था। भिंडरावाले का संबंध एक दौर में एक सिख डेरे से था। वह आगे चलकर सिख मिलिटेंसी के प्रतीक बन गया। पहले तो वह सिख धर्म का एक लोकप्रिय प्रचारक मात्र था। किसको नहीं पता कि पंजाब में कांग्रेस के राज में  खालिस्तानी ताकतें मजबूत  की गई और उनसे इंदिरा जी के बढ़ावा पर ही जमकर  खू...
शक्ति के उपासक बनें

शक्ति के उपासक बनें

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भारत भूमि के महान सपूत महर्षि अरविन्द ने वर्षों पूर्व जब हम अंग्रेजों के अधीन थे, अपनी एक छोटी रचना 'भवानी मंदिर' की भूमिका में लिखा था कि "हमने शक्ति को छोड़ दिया है , इसलिए शक्ति ने भी हमें छोड़ दिया"। अतः पराधीनता में रहना हमारी दुर्बलता का ही परिणाम था। अनेक मनीषियों ने लिखा व कहा भी था कि सदियों की पराधीनता से हमारी शक्तियाँ दुर्बल हुई हैं , अतः इससे मुक्त होना सर्वाधिक आवश्यक है।स्वामी विवेकानंद ने भी हिन्दुओं को निर्भीक व बलवान बनने के लिए प्रेरित किया था । हिन्दू समाज की दुर्बलता, कायरता व भीरुता को गोरखनाथ पीठ के  ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ व महंत अवैद्यनाथ जी भी समझते थे और इस आत्मघाती अवगुण से समाज को बाहर लाने का निरंतर प्रयास करते रहे । उसी  धरोहर और परंपराओं को अनेक अवरोधों के उपरान्त भी निभाने वाला एक संत आज अपने समाज का अग्रणी सारथी बन गया है। अपने अथक परिश्रम...
अपने-अपने ब्रह्मास्त्र

अपने-अपने ब्रह्मास्त्र

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जब जब विरोधियों को लगता है कि मोदी का ग्राफ गिर रहा है और वह कमजोर हो रहे हैं तभी अचानक मोदी खेमा ऐसे वापसी करता है कि विपक्षी खेमा चारों खाने चित्त हो जाता है। चूंकि राजनीति में विमर्श का बड़ा महत्व होता है। जनता के बीच चलने वाला विमर्श ही राजनीतिक दलों का वोट बैंक निर्धारित करता है। इसलिए तीन प्रमुख राज्यों में हार के बाद राष्ट्रीय विमर्श कांग्रेस की सत्ता में वापसी एवं मोदी का गिरता ग्राफ बन गया था। मोदी विरोध एवं मोदी समर्थन वाले मीडिया समूह अपनी अपनी ढपली पर अपने अपने राग अलाप रहे थे। राम मंदिर चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा था। संतों के द्वारा एक समानान्तर आंदोलन चलाया जा रहा था। सवर्णों को आधार बनाकर 2019 के लोकसभा चुनावों हेतु समीकरण दिये जा रहे थे। इसी बीच मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का संवैधानिक संशोधन करके एक बड़ा दांव चल दिया। देश में विमर्श की दिशा ही बदल गयी। मोदी से नारा...
कौन सच्चा राष्ट्रवादी?

कौन सच्चा राष्ट्रवादी?

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हमारे दादा जी स्वर्गीय नेहरु जी को देशभक्त समझते थे लेकिन मुझे लगता है कि नेहरूजी सत्ता भक्त थे। मेरे पिताजी स्वर्गीय इंदिरा जी को को देशभक्त मानते थे लेकिन अब मुझे लगता है कि वह भी गलत थे। 2014 तक मैं केजरीवाल जी को देशभक्त समझता था, लेकिन अब लगता है कि मैं भी गलत था। कुछ दिन पहले तक जो लोग राम-रहीम और निर्मल बाबा को संत मानते थे अब वे भी अपनी गलती स्वीकार करते हैं। नेहरु जी के सेकुलरिज्म को समझने में हमें 50 साल लगे और मुलायम सिंह के समाजवाद को पहचानने में 25 साल लेकिन युवा पीढ़ी ने केजरीवाल की ईमानदारी और राहुल जी की जनेऊगीरी को बहुत जल्दी पहचान लिया। इससे स्पष्ट है कि आज का युवा बहुत समझदार है और उसे बेवकूफ बनाना बहुत मुश्किल है। आने वाली पीढिय़ां यह जरूर तय करेंगी कि कौन सच्चा राष्ट्रवादी है और कौन झूठा, कौन असली समाजवादी है और कौन नकली, कौन ईमानदार है और कौन नटवरलाल, कौन वास्तव...
समरकंद संवाद है आतंक के खिलाफ आवाज

समरकंद संवाद है आतंक के खिलाफ आवाज

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  उज्बेकिस्तान की राजधानी समरकंद में भारत, अफगानिस्तान और पांच मध्य एशियाई देशों ने एकजुट होकर आतंकवाद से निपटने का संकल्प लिया है। इन देशों में एवं दुनिया के अन्य हिस्सों में आतंकवाद जितना ल बा चल रहा है, वह क्रोनिक होकर विश्व समुदाय की जीवनशैली का अंग बन गया है। इसमें ज्यादातर वे युवक हैं जो जीवन में अच्छा-बुरा देखने लायक बन पाते, उससे पहले उनके हाथों में एके-47 एवं ऐसे ही घातक हथियार थमा दिये जाते हैं। फिर जो भी वे करते हैं, वह कोई धर्म नहीं कहता। आखिर कोई भी धर्म उनके साथ नहीं हो सकता जो उसकी पवित्रता को खून के छींटों से भर दे। आखिर आतंकवाद का अंत कहां होगा? तेजी से बढ़ता आतंकवादी हिंसक दौर किसी एक देश का दर्द नहीं रहा। इसने दुनिया के हर इंसान को ज मी बनाया है। अब इसे रोकने के लिये प्रतीक्षा नहीं, प्रक्रिया आवश्यक है। यदि इस आतंकवाद को और अधिक समय मिला तो हम हिंसक वारदातें सुनन...
आस्था ही नहीं, हिंदू जागरण का पर्व भी है कुंभ

आस्था ही नहीं, हिंदू जागरण का पर्व भी है कुंभ

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  अमृत प्राप्ति की इच्छा मनुष्य के मन में आदि काल से रही है। मनुष्य ही क्यों, देवता और राक्षस भी अजर-अमर होने की कामना रखते थे। जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ तो चौदह रत्न निकले, लेकिन सबसे ज्यादा छीना-झपटी मची अमृतकलश को लेकर क्योंकि जो अमृतपान करेगा वही स्वर्ग पर राज करेगा, जो अमृतपान करेगा वही देवत्व को प्राप्त करेगा। लेकिन वो अमृतपान करने वाली हंै कौन - सतोगुणी शक्तियां या तमोगुणी शक्तियां? यदि सतोगुणी शक्तियां अमृतपान करती हैं तो सृष्टि का कल्याण होगा। यदि तमोगुणी शक्तियां अमृतपान करती हैं तो मानवताविरोधी, विनाशकारी और विध्वंसकारी शक्तियां अमरत्व का दुरूपयोग कर तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मचा देंगी। अमृतकलश को किसी तरह तमोगुणी शक्तियों से बचाना था तो देवताओं ने स्वर्ग के राजा इंद्र के पुत्र जयंत को कलश थमा कर चुपचाप वहां से भगा दिया। राक्षसों को जैसे ही भनक लग...