Shadow

addtop

कनेरी मठ से स्वामी जी का संदेश, अपनाएं निरोगी जीवन पद्धति

कनेरी मठ से स्वामी जी का संदेश, अपनाएं निरोगी जीवन पद्धति

addtop, TOP STORIES, प्रेस विज्ञप्ति
श्री क्षेत्र सिद्धगिरि मठ के 49वें मठाधिपति श्री काडसिद्धेश्वर स्वामी जी ने स्वस्थ भारत यात्रा-2 को देश के गरीब और बीमारियों और उसके कारगर इलाज से अंजान लोगों के लिए बहुत उपयोगी व सराहनीय बताया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे स्वस्थ भारत यात्रा का हर जगह स्वागत करें और हर संभव उनको सहयोग भी करें। स्वामी जी ने देशवासियों के यह संदेश उनसे मिलने आए स्वस्थ भारत यात्रा-2 के प्रमुख आशुतोष कुमार सिंह और उनके सहयोगियों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी जीवन पद्धति अपनानी चाहिए, जिससे हम बीमार ही न हो। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को लेकर उनके मठ की ओर से गांव-गांव में स्वच्छता अभियान के साथ योग शिविरों के आयोजन, बच्चों को पोषण के लिए स्वर्ण घोल देने के साथ जहर-मुक्त खेती को बढावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने जेनरिक दवाइयों को बढावा देने की जरूरत प...
Sharp decline in small savings is a cause of worry: Safeguards necessary for senior citizens

Sharp decline in small savings is a cause of worry: Safeguards necessary for senior citizens

addtop, BREAKING NEWS, आर्थिक
Latest data released by Reserve Bank of India (RBI) shows a sharp decline in small savings in first eight months of financial year 2017-18 when small savings schemes amounted to just rupees 40,429 crore, a seven-fold dip from Rs 2,75,682 crore in the corresponding period of the previous year. Evidently it is at cost of more investment in mutual-fund schemes where political and other factors can suddenly harm the investors like happened in investment in properties. A sharp decline in interest-rate was anticipated post-demonetisation when Jeevan Akshay pension-plan of LIC of India for the reason witnessed maximum investment in that period. But with currency-circulation crossing what it was before demonetisation, reduced interest-rate in government savings-schemes should be restored with t...
पश्चिम बंगाल का सारधा चिटफंड घोटाला :- लूट, राजनीति, और आतंक का तालमेल

पश्चिम बंगाल का सारधा चिटफंड घोटाला :- लूट, राजनीति, और आतंक का तालमेल

addtop, Today News, घोटाला
कभी-कभी ऐसा संयोग होता है कि एक साथ दो घटनाएँ अथवा दुर्घटनाएँ होती हैं और उनका आपस में सम्बन्ध भी निकल आता है, जो उस समय से पहले कभी उजागर नहीं हुआ होता. पश्चिम बंगाल में सारधा चिटफंड घोटाला तथा बर्दवान बम विस्फोट ऐसी ही दो घटनाएँ हैं. ऊपर से देखने पर किसी अल्प-जागरूक व्यक्ति को इन दोनों मामलों में कोई सम्बन्ध नहीं दिखाई देगा, परन्तु जिस तरह से नित नए खुलासे हो रहे हैं तथा ममता बनर्जी जिस प्रकार बेचैन दिखाई देने लगी हैं उससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि वामपंथियों के कालखंड से चली आ रही बांग्लादेशी वोट बैंक की घातक नीति, पश्चिम बंगाल के गरीबों को गरीब बनाए रखने की नीति ने राज्य की जनता और देश की सुरक्षा को एक गहरे संकट में डाल दिया है. जब तृणमूल काँग्रेस के गिरफ्तार सांसद कुणाल घोष ने जेल में नींद की गोलियाँ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की तथा उधर उड़ीसा में बीजू जनता दल के सांसद हंसदा को सीबी...
उत्तर प्रदेश में गठबंधन चूक या चौका

उत्तर प्रदेश में गठबंधन चूक या चौका

addtop, Today News, विश्लेषण
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का औपचारिक गठबंधन होने पर भाजपा के माथे पर बल पड़ गये। एक दशक पूर्व ये दोनों क्षेत्रीय दल उत्तर प्रदेश की राजनीति में नंबर एक और दो की हैसियत रखते थे। 2014 में भाजपा का ग्राफ बढऩे एवं 2017 की प्रचंड जीत के बाद भाजपा एक नंबर का दल हो गयी। अब अपनी राजनैतिक हैसियत बचाने के लिए सपा-बसपा का एक साथ आना एक बड़ा राजनैतिक दांव है। कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल न करके जब इन दलों ने तीसरे मोर्चे की तैयारी तेज़ की ही थी कि तभी कांग्रेस ने प्रियंका वाड्रा को महासचिव का पद देकर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया और इस तरह सपा-बसपा का चौका दिखता गठबंधन अब कहीं चूक न बन जाये। अमित त्यागी त्तर प्रदेश में पूरे भारत की आत्मा निवास करती है। देश को उत्तर प्रदेश 80 लोकसभा की सीटें देता है। 2014 में भाजपा को 73 सीटों पर प्रचंड जीत मिली थी। सपा को 05, कांग्रेस को 02 और बस...
महागठबंधन देश हित या स्वार्थ

महागठबंधन देश हित या स्वार्थ

addtop, TOP STORIES, विश्लेषण
'मंजिल दूर है, डगर कठिन है लेकिन दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते चलिए’, कोलकाता में विपक्षी एकता के शक्ति प्रदर्शन के लिए आयोजित ममता की यूनाइटिड इंडिया रैली में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का यह एक वाक्य 'विपक्ष की एकता’ और उसकी मजबूरी दोनों का ही बखान करने के लिए काफी है। अपनी मजबूरी के चलते ये सभी दल इस बात को भी नजरअंदाज करने के लिए मजबूर हैं कि यह सभी नेता जो आज एक होने का दावा कर रहे हैं वो सभी कल तक केवल बीजेपी नहीं एक दूसरे के भी 'विपक्षी’ थे। सच तो यह है कि कल तक ये सब एक दूसरे के विरोध में खड़े थे इसीलिए आज इनका अलग अस्तित्व है क्योंकि सोचने वाली बात यह है कि अगर ये वाकई में एक ही होते तो आज इनका अलग अलग वजूद नहीं होता। दरअसल कल तक इनका लालच इन्हें एक दूसरे के विपक्ष में खड़ा होने के लिए बाध्य कर रहा था, आज इनके स्वार्थ इन्हें एक दूसरे के साथ खड़े होने के लिए विवश कर रहे हैं। क्...
कांग्रेस बनाम गैर कांग्रेसी विपक्ष

कांग्रेस बनाम गैर कांग्रेसी विपक्ष

addtop, BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
सन 2014 के आम चुनावों में जीत के बाद और हालिया विधानसभा चुनावों के पहले तक भारतीय जनता पार्टी का अजेय होने का जो मिथक था, वह टूटता नजर आ रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार ने उसके प्रति बनी राष्ट्रीय अवधारणा में दरार डाल दी है। तीन हिंदीभाषी राज्यों में भाजपा की हार कितनी बड़ी है, और उसका असर कितना गहरा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर पूर्व में इकलौती जगह यानी मिजोरम में कायम कांग्रेस का सफाया हो गया, लेकिन कांग्रेस की यह हार मिजोरम के बाहर बड़ी खबर तक नहीं बनी। कांग्रेस की उस तेलंगाना में भी करारी हार हुई, जहां पांच साल पहले तक उसका राज होता था। वह तेलंगाना उस अविभाजित आंध्र का हिस्सा था, जिसकी बदौलत 2004 में कांग्रेस की केंद्रीय सत्ता में वापसी हुई थी। जिसमें अविभाजित आंध्र के पूर्व मु यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने बड़ी भू...
कितने दागदार हैं आलोक वर्मा

कितने दागदार हैं आलोक वर्मा

addtop, TOP STORIES, विश्लेषण
ये पहली बार सुना कि एक सरकारी अफसर ने दिली चाहत ज़ाहिर की है कि उसे उसके मन का ही विभाग मिले। अगर नहीं मिलेगा तो वह उसे संभालेगा ही नहीं। वह सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे देगा। यही तो किया पिछले ह ते देश की सर्वोच्च संस्था सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने। उनकी सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के निदेशक पद पर बहाली कर दी थी। उसके बाद उन्हें सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने एक नई जि मेदारी दे दी। पर उनके दुस्साहस को तो देखिए कि उन्होंने उस नए पद को लेने से ही मना कर दिया। क्या कोई अर्ध-सैनिक वर्दीधारी पदाधिकारी इस तरह का आचरण कर सकता है? जब मोदी सरकार ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक बनाया था, तब तो उन्होंने इस पद को खुशी-खुशी हथिया लिया था। जबकि उन्हें इस विभाग में पहले काम करने का रत्तीभर भी अनुभव नहीं था। कहते हैं कि तब सीबीआई निदेशक के नाम पर विचार के लिए बुलाई उच्चस्तरीय समिति बैठक में विपक्ष के नेता म...
मुंबइकर महिलाओं ने जाना जेनरिक दवाइयों का महत्व

मुंबइकर महिलाओं ने जाना जेनरिक दवाइयों का महत्व

addtop, TOP STORIES, प्रेस विज्ञप्ति
सूरत से चलकर मुंबई पहुंचे स्वस्थ भारत यात्रा के यात्रियों का मुंबईकर महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ कुंकुम और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। स्वस्थ भारत यात्रा के प्रमुख आशुतोष कुमार सिंह ने मुंबई को स्वस्थ भारत अभियान का प्रेरक स्थल बताते हुए कहा कि आज पूरे देश में स्वास्थ्य को लेकर मेरे व मेरे सहयोगियों, समर्थकों द्वारा छेड़े गए अभियान का प्रेरणा स्थल मुंबई ही है। श्री सिंह ने सात साल पहले अपने मुंबई प्रवास के दिनों को याद करते हुए कहा कि मुझे एक गर्भवती महिला के इलाज के दौरान हुई महंगी दवाइयों के नाम पर लूट ने बहुत व्यथित किया। इस व्यथा ने ही महंगी दवाइयों के खिलाफ आंदोलन को जन्म दिया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह आंदोलन जब शुरू हुआ तो इस आंदोलन का सूत्रधार गर्भ में था लेकिन आज वह करीब 7 साल का हो चुका है। 7 वर्षीय सिद्दिद यादव आज अपने फिटनेस को लेकर जितना संजीदा है वह इस अभियान ...
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारार्थ कुछ प्रश्न

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारार्थ कुछ प्रश्न

addtop, TOP STORIES, विश्लेषण
पिछले हफ्ते ट्वीटर पर मैंने सरसंघचालक जी से एक खुले पत्र के माध्यम से विनम्रता से कहा कि मुझे लगता है कि संघ कभी-कभी हिन्दू धर्म की परंपराओं को तोड़कर अपने विचार आरोपित करता है।  जिससे हिंदुओं को पीड़ा होती है। जैसे हम ब्रजवासियों के 5000 वर्षों की परंपरा में वृन्दावन और मथुरा का भाव अलग था, उपासना अलग थी व दोनों की संस्कृति भिन्न थी। पर आपकी विचारधारा की उत्तर प्रदेश सरकार ने दोनों का एक नगर निगम बनाकर इस सदियों पुरानी भक्ति परम्परा को नष्ट कर दिया, ऐसा क्यों किया? इसका उत्तर मिला कि संघ का सरकार से कोई लेना देना नहीं है। देश की राजनीति, पत्रकारिता या समाज से सरोकार रखने वाला कोई भी व्यक्ति क्या यह मानेगा कि संघ का सरकार से कोई संबंध नहीं होता ?सच्चाई तो यह है कि जहां-जहां भाजपा की सरकार होती है, उसमें संघ का काफी हस्तक्षेप रहता है। फिर ये आवरण क्यों ? यदि भाजपा संघ की विचारधारा व संगठन से...
खोखले चुनावी वादें कब तक?

खोखले चुनावी वादें कब तक?

addtop, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए चुनावी वादों की ऐसी भरपूर बारिश होने लगी है कि लगने लगा है लोकतंत्र नेताओं के लिए ही नहीं, जनता के लिए सचमुच महाकुंभ की तरह है। लेकिन विडम्बना यह है कि ये वादें एवं नारे खोखले होते हैं। किसी समस्या की गहराई में जाकर उसके सूक्ष्म पक्षों पर चर्चा करने से ज्यादा आसान है बड़ी-बड़ी बातें करना, भावनात्मक मुद्दों को उछालना और मतदाताओं को लुभाना एवं ठगना। पुराना मुहावरा है कि झूठ की जुबान लंबी होती है और चुनाव के समय राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं की जुबान सचमुच बहुत लम्बी हो जाती हैं। यह लोकतंत्र के आदर्श को धुंधलाने की एक कुचेष्टा ही हैं। क्योंकि इन वादों का यथार्थ से कुछ भी लेना-देना नहीं होती। अगर ये वादें सचमुच आम जनता के दुःख-दर्द एवं समस्याओं को कम करने के लिये होते तो उन्हें बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं पड़ती। राजनीतिक पार्टियों द्वारा लगभग 70 वर्षों से अब तक श...