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क्यों मैंनेजमेंट-मुलाजिम हो गए एक-दूसरे से दूर?

क्यों मैंनेजमेंट-मुलाजिम हो गए एक-दूसरे से दूर?

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यह तो दिवाली के अगले दिन की ही बात है जब दिल्ली से सटे औद्योगिक क्षेत्र फरीदाबाद में एक नामी गिरामी कंपनी के एचआर विभाग के प्रमुख की उनकी कंपनी से ही कुछ समय पहले नौकरी से बर्खास्त किए गए एक मुलाजिम ने उन्हीं के दफ्तर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्यारा नौकरी से निकाले जाने के बाद से ही एचआर प्रमुख को खुलेआम धमकी भी दे रहा था। उधर,नोएडा की एक चीनी कंपनी से जुड़े कर्मियों ने नौकरी से एक झटके में निकाले जाने के बाद तगड़ा बवाल काटा। उन्होंने अपने ही दफ्तर पर पत्थर भी फेंके। इनका कहना था कि इन्हें बिना किसी नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया गया है। यह घटना भी विगत नवंबर महीने की है। ये दोनों घटनाएं अपने आप में अपवाद की श्रेणी में नहीं आती हैं। हमारे देश में इस तरह की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि प्रबंधन और कर्मियों के रिश्तों में कटुता बढ़ती ही चली जा रही है।...
अरुण तिवारी की दो नई पुस्तकें

अरुण तिवारी की दो नई पुस्तकें

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स्वामी सानंद का आत्मकथ्य : लेखक - अरुण तिवारी, प्रकाशक - पानी पोस्ट, कुल पृष्ठ - 156, सहयोग राशि - रुपये 170/- डाक खर्च अतिरिक्त।   भारतीय संस्कृति में नदी - विज्ञान व व्यवहार : लेखक अरुण तिवारी, प्रकाशक - पानी पोस्ट, कुल पृष्ठ - 52, सहयोग राशि - रुपये 70/- डाक खर्च अतिरिक्त। पुस्तकें प्राप्त करने सम्बन्धी विवरण की जानकारी लिए कृपया दिए गए लिंक पर क्लिक करें  https://www.instamojo.com/paypanipost/ ......................................................................................................................................................... पुस्तक 01 स्वामी सानंद का आत्मकथ्य यह पुस्तक स्वामी श्री सानंद से बातचीत पर आधारित है। इस बातचीत को पढ़कर आप समझ सकेंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बांध निर्माण की कई परियोजनाओं में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल रहा एक इंजीनियर,...
हमें अपनी जड़ों को सींचना होगा

हमें अपनी जड़ों को सींचना होगा

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हम सब अच्छे जीवन, सफलता और शुभ-श्रेयस्कर होने की कामना करते हैं लेकिन जीवन तो उतार और चढ़ाव का खेल है। हम सभी कभी न कभी अवसाद और तनाव से आहत होते हैं, तो कभी दुःखों से हमारा साक्षात्कार होता है। दुःखों एवं पीड़ाओं का एहसास निरन्तर बना रहता है। जिंदगी में हमेशा सब कुछ अच्छा और सही ही हो, कहां होता है। किसी की जिंदगी में नहीं होता। जिंदगी पूरी तरह परफेक्ट ना होती है, ना होगी। व्यापार, नौकरी, सेहत या रिश्ते कोई ना कोई परेशानी चलती ही रहती है। गलतियों से, दुखों से कब तक बचा रहा जा सकता है। लेखक तोबा बीटा कहते हैं, ‘कोशिशें हमें बिल्कुल सही नहीं कर देतीं। वे केवल हमारी गलतियों को कम कर देती हैं।’ हर सुबह को हम इस सोच और संकल्प के साथ शुरू करते हैं कि हमें अपने व्यक्तित्व निर्माण में कुछ नया करना है, नया बनना है। पर क्या हमने निर्माण की प्रक्रिया में नए पदचिन्ह स्थापित करने का प्रयत्न किया? क्या ...
किसानों को गुमराह करने का षड़यंत्र क्यों?

किसानों को गुमराह करने का षड़यंत्र क्यों?

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राजधानी की सड़कें एक बार फिर देशभर से आए किसानों के नारों से गूंजती रहीं। लेकिन प्रश्न यह है कि विभिन्न राजनीतिक दलों, कृषक समूहों और समाजसेवी संगठनों की पहल पर दिल्ली आए किसानों को एकत्र करने का मकसद अपनी राजनीति चमकाना है या ईमानदारी से किसानों के दर्द को दूर करना? यह ठीक नहीं कि राजनीतिक-सामाजिक संगठन अपने हितों की पूर्ति के लिए किसानों का इस्तेमाल करें। किसान देश का असली निर्माता है, वह केवल खेती ही नहीं करता, बल्कि अपने तप से एक उन्नत राष्ट्र की सभ्यता एवं संस्कृति को भी रचता है, तभी ‘जय जवान जय किसान’ का उद्घोष दिया गया है। राष्ट्र की इस बुनियाद के दर्द पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। कर्ज माफी और फसलों के उचित दाम के अलावा उनकी एक प्रमुख मांग किसानों के मसले पर संसद का विशेष सत्र बुलाना भी है। इसके लिए उन्होंने देश की सबसे बड़ी पंचायत तक पैदल मार्च भी किया। कथित किसान हितैषी नेता...
पंजाब में आत्मघाती राहुल सिद्धू नीति

पंजाब में आत्मघाती राहुल सिद्धू नीति

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ताज़ा समाचार ये है कि पंजाब की राजनीति में घमासान मचा है । 10 से ज़्यादा मंत्रियों ने अपने CM और राज्य इकाई से मांग की है कि सिद्धू को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए । 2017 के पंजाब विस् चुनाव से पहले , जब कि AAP अपने उफान पे थी , और कांग्रेस डवांडोल , तो Capt अमरेंद्र सिंह ने अपनी हाइ कमान से कह दिया था , या तो हमको नेता घोषित करो नही तो हम अलग पाल्टी बनाऊंगा और भाजपा के साथ गठबंधन करूंगा । हाई कमान के पास कोई चारा ही न था । उसने घुटने टेक दिए । कैप्टन साहब ने मनमाना टिकट बाँटा और पूरे चुनाव अभियान में राहुल G को पंजाब में घुसने न दिया । एक तरह से देखा जाए तो पंजाब की कांग्रेस अमरेंद्र सिंह Congress बन चुकी थी । पिछले हफ्ते सिद्धू Capt अमरेंद्र सिंह के मना करने के बावजूद पाकिस्तान गए । भारत सरकार और खुद पंजाब सरकार की अवहेलना कर पाकिस्तान गए । वहां के एक खालिस्तानी नेता गोपाल सिंह ...
जी-20 में सफल कूटनीति

जी-20 में सफल कूटनीति

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अर्जेटिंना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में चल रहे जी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सफलता तो यह है कि उन्होंने इस 20 राष्ट्रीय संगठन का 2022 का सम्मेलन भारत में करवाने का वायदा ले लिया। 2022 में भारत की आजादी का वह 75 वां साल होगा। इस 20 सदस्यीय संगठन में दुनिया के सारे शक्तिशाली राष्ट्र सक्रिय हैं और उनके अलावा भारत, जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देश भी हैं, जो निकट भविष्य में महाशक्ति बन सकते हैं। इन सब राष्ट्रों का लक्ष्य यह होता है कि वे एक जगह बैठकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय, व्यापारिक, आर्थिक और कानूनी समस्याओं पर विचार करें और उन्हें हल करने के रास्ते निकालें। ये 19 राष्ट्र और 20 वां यूरोपीय संघ मिलकर दुनिया का 85 प्रतिशत व्यापार करते हैं और 80 प्रतिशत सकल उत्पाद के ये मालिक हैं। इस सम्मेलन में मेादी के भाषणों का जोर इसी बात पर रहा कि नीरव मोदी, चोकसी, माल्या जैसे...
Option for food in all trains necessary like is to be in engine-less train

Option for food in all trains necessary like is to be in engine-less train

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It refers to media-reports that first engine-less train in India to be introduced as a prime train on a prime route will have option to have tickets without food-cost also. But such a system already introduced in Rajdhani Express should be in all trains including Shatabdi and Duranto where food-cost is compulsorily charged with ticket-cost. Most domestic airlines have already replaced food-serving by selling variety of packaged food-items according to choice of passengers. Compulsory charging of food-cost in rail-tickets unnecessarily penalizes those who do not wish to avail train-food due to various reasons including peculiar food-choice like without onion and garlic or not taking sweet-dish for being diabetic etc, It may be recalled that optional sweet dish of hot Gulab-Jamun was decide...
दिन ब दिन टूटते रिश्ते

दिन ब दिन टूटते रिश्ते

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हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर जापान के नियमों के मुताबिक, उन्हें राजघराने से अपना नाता तोड़ना पड़ा। उनके इस विवाह के बाद अब वे खुद भी राजकुमारी से एक साधारण नागरिक बन गईं हैं। कैम्ब्रिज के ड्यूक और ब्रिटेन के शाही परिवार के राजकुमार विलियम ने एक साधारण परिवार की कथेरिन मिडलटन से विवाह किया (2011) और आज दुनिया भर में एक आदर्श जोड़े के रूप में पहचाने जाते हैं। स्वीडन की राजकुमारी विक्टोरिया ने स्वीडन के एक छोटे से समुदाय से आने वाले डेनियल वेसलिंग से  शादी की (2010)। डेनियल कभी उनके पर्सनल ट्रेनर हुआ करते थे। मोनाको के राजकुमार रेनियर तृतीय ने हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री ग्रेस केली से विवाह किया(1956)। 1982 में एक कार दुर्घटना में अपनी मृत्यु तक वे मोनाको की राजकुमारी के रूप में रेनियर तृतीय ही नहीं मोनाको के लोगों...
आंकड़ों की हेराफेरी से जनधन योजना की नाकामी छिप नहीं सकती

आंकड़ों की हेराफेरी से जनधन योजना की नाकामी छिप नहीं सकती

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चार साल के कार्यकाल में एक से एक योजना और अभियान चलाए। चार साल के बाद ये जानना तो लाजिमी हो जाता है कि आखिर केन्द्र की मोदी सरकार के द्वारा चलाए गए अभियानों और योजनाओं का लाभ अवाम को कितना मिला है। आदर्श ग्राम योजना, स्वच्छता अभियान, स्मार्टसिटी के साथ ही ऐसी तमाम योजनाएं है जिनका सरोकार सीधे जनता है। आज हम उस जनधन योजना की यथा स्थिति के बारे में जानने का प्रयास करते है जिसका आम गरीब की आर्थिक बेहतरी से सीधे-सीधे नाता रहा है। बता दे कि मोदी सरकार की जन धन योजना और स्वच्छ भारत जैसी कुछेक योजनाएं ही देश के मन को लुभाने में कामयाब रही है जबकि इसी दौरान पेश अन्य योजनाएं लोगों के दिलो दिमाग में खास जगह नहीं बना पायी हैं। लेकिन व्यवहारिकता के धरातल पर देखा जाए तो ये योजनाएं भी प्रचार-प्रसार का ही एक माध्यम बन कर रह गई है। इसकी सफलता को लेकर जितने ढ़ोल पीटे गए व...
सोनिया के अस्तित्व को नकारती कांग्रेस

सोनिया के अस्तित्व को नकारती कांग्रेस

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अंग्रेजी में एक कहावत है "नो योरसेल्फ एंड बी योरसेल्फ" यानी खुद को जानो और फिर वैसा ही आचरण करो। शायद इसी वाक्य से प्रेरित होकर, लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी खुद को जानने की एक अनंत यात्रा पर निकले हैं। वे अपनी स्वयं की ही खोज में निकले हैं। चूंकि यह कोई छोटा विषय तो है नहीं, इसलिए हर महत्वपूर्ण कार्य की ही तरह इस कार्य को भी वो केवल विशेष मुहूर्तों में ही करते हैं। जी हाँ "मुहूर्त", अर्थात किसी कार्य की सिद्धि या फिर उसमें सफलता प्राप्त करने का सर्वोत्तम समय। अगर कार्य का उद्देश्य आध्यत्मिक फल की प्राप्ती होता है तो यह मुहूर्त सनातन धर्म के पंडित से निकलवाया जाता है। लेकिन अगर कार्य का उद्देश्य राजनैतिक फल की प्राप्ति होता है तो इसका मुहूर्त राजनैतिक पंडित निकलते हैं। जिस प्रकार हिन्दू धर्म के पंडित पंचांग से तिथियाँ देखकर सर्वश्रेष्ठ तारीख बताते हैं, उसी प्रकार राजनीति के व...