चैक डैम के पानी ने बदली आदिवासी किसानों की जिंदगी
पानी व किसान का चोली और दामन का साथ है। पानी की महत्ता को अगर कोई अच्छे से जानता है तो वह है किसान। किसान को एक बार पीने का पानी नही मिले तो चल जाए लेकिन उसे उसकी फसल को सिंंंचने का पानी नही मिले तो वह बावरा हो जाता है। फसल को हर हाल में पानी मिले इसके लिए कुछ भी कर सकता है। दुर्भाग्य तो ये है कि सरकारें किसानों को सहज रूप से व्यापक स्तर पर पानी उपलब्ध नही करा पाती है लेकिन उनके व्यक्तिगत प्रयासों से जो उत्पादन बढ़ता है उसका श्रेय लेने में कभी पीछे नही हटती है। हालाकि सरकारों की दोगली नीति से किसान को कोई फर्क नही पड़ता है। वह अपनी आर्थिक समृद्धि के लिए व्यक्तिगत रूप से देश के हर इलाके में अपने-अपने स्तर पर नए-नए प्रयोग करते रहता है। किसानों का ऐसा ही एक नवाचार झाबुआ जिले की थांदला तहसील के गावों में देखने को मिला। गोपालपुरा, छोटी बिहार व भीमपुरा वह चंद गांव है जिनमें यहां के आ...









