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चलो पुरातन की ओर

चलो पुरातन की ओर

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एक सूक्ष्म से परजीवी ने आपको घुटनो पर ला दिया ? न एटम बम काम आ रहे न पेट्रो रिफाइनारी ? आपका सारा विकास एक छोटे से जीवाणु से सामना नहीं कर पा रहा ?? क्या हुआ , निकल गयी हेकड़ी ?? बस इतना ही कमाया था इतने वर्षों में ? की एक छोटे से जीव ने घरो में कैद कर दिया ??? मध्य युग में पुरे यूरोप पे राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पे आ गया , मध्य पूर्व को अपने कदमो से रोदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य ( ईरान , टर्की ) अब घुटनो पर हैं , जिनके साम्राज्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था , उस ब्रिटिश साम्राज्य के वारिश बर्मिंघम पैलेस में कैद हैं , जो स्वयं को आधुनिक युग की सबसे बड़ी शक्ति समझते थे , उस रूस के बॉर्डर सील हैं , जिनके एक इशारे पर दुनिया क नक़्शे बदल जाते हैं , जो पूरी दुनिया के अघोषित चौधरी हैं , उस अमेरिका में लॉक डाउन हैं और जो आने वाले समय में सबको निगल जाना चाहते थे , वो चीन ,...
भयावह मंजरों वाला तीसरा विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया है 

भयावह मंजरों वाला तीसरा विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया है 

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यह मेरी समझ से बाहर है कि क्यों अभी तक नाटो देशों ने औपचारिक रूप से नहीं घोषित किया कि तीसरा विश्वयुद्ध प्रारंभ हो चुका है। जबकि इसका आरंभ तो अमेरिका द्वारा उत्तरी कोरिया व ईरान के विरूद्ध उठाए गए कदमों के साथ ही जो चुका था। बुरी तरह उलझे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में वस्तुतः एक ही बार मे यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन सा देश किसके साथ है। किंतु कोरोना वायरस के विश्वव्यापी संक्रमण के खतरनाक रूप से  शिकार विश्व में विभिन्न राष्ट्रों की  प्रतिक्रिया व उठाए जा रहे कदमों से स्पष्ट हो चुका है कि दुनिया फिर से दो खेमों में बंटने जा रही है अमेरिकी व चीनी।   सन 1989 तक विश्व जिसमें बाज़ारबादी अमेरिका व साम्यवादी सोवियत संघ के दो खेमें थे , वे 1989 में अमेरिका द्वारा सोवियत संघ के बिखराब व अवसान के बाद समाप्त हो चुके थे व सन 1990 से सन 2019 तक अमेरिका दुनिया की एक मात्र महाशक्ति था। किंतु अब यह समी...
येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

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बैंकिग व्यवस्था किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का दर्पण होती है। बैंकिग प्रणाली में जनता के विश्वास का होना, इस बात का प्रमाण है कि उक्त देश की अर्थव्यवस्था बहुत सुदृढ़ है इसके विपरीत यदि जनता का विश्वास बैंकिंग व्यवस्था से भंग होता है तो सत्ता के प्रति भी उनका विश्वास भंग होना स्वाभाविक है। देश में अभी कुछ समय के अंतराल में न केवल येस बैंक अपितु 50 से अधिक अन्य छोटे-बड़े बैंक भी बंद हो चुके हैं। इस परिस्थिति के परिणामस्वरूप 25-30 हजार से लेकर कई लाख खाताधारकों का पैसा डूबा है, जिसके कारण आज सम्पूर्ण देश में साधारण जनता का विश्वास बैंकिग व्यवस्था से उठता जा रहा है।  आज बैंको के डूबने के कारणों का गहनता से अध्ययन करने की आवश्यकता है। जब भी कोई बैंक डूबता है, सरकार तथा रिजर्व बैंक द्वारा साधारण जनता को यही समझाया जाता है कि उक्त बैंको के उच्च पदो पर आसीन प्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों ने अप...
आप आज समूचे समाज पर उपकार करें !

आप आज समूचे समाज पर उपकार करें !

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वैसे तो हम भारतीयों की यह आदत रही है कि संकट के समय एकजुट हो जाते हैं ।सचमुच यह  समय एकजुटता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को स्वीकारने और उसके पीछे चलने का है | समूचे राष्ट्र को यह  संकल्प करना होगा कि हम वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए दिशा-निदेशों का पालन करेंगे । ‘इस बार समाज रक्षा का तरीका पृथक है, समाज की रक्षा के लिए खुद को फौरी तौर पर समाज से अलग  लेने का है।  वैज्ञानिकों के बाद प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि घर से बाहर तभी निकलें, जब बहुत जरूरी हो। आज २२ मार्च ‘जनता कर्फ़्यू’ का दिन है, इसकी उद्देश्य पूर्ति में सरकार के कठोर कदम से ज्यादा हमारी जागरूकता जरूरी है। आने वाले तीन हफ्ते घर से बाहर निकलने से पहले सोचें कि क्या घर से निकलना बेहद जरूरी है? घर में रहने के नाम पर  अक्सर घबराहट फैलती है और लोग जमाखोरी करने में जुट जाते हैं। अमेरिका जैसे विकसित देश में यह देखा गया है कि वहां भी स्टोर के ...
कौन खा रहा हैं बैंकों को नोच-नोच कर

कौन खा रहा हैं बैंकों को नोच-नोच कर

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यस बैंक में जिस तरह की लोन देने के नाम पर लूट मची हुई थी उससे यह साफ हो गया है कि देश के बैंकिंग सेक्टर में नए सिरे से पुनर्समीक्षा कर प्राण फूंकने की जरूरत हैं। बैंकिंग सेक्टर अब ऐसा लगता है कि जंगग्रस्त हो चुकी है। अब यस बैंक के देशभर में फैले लाखों खातेदार अपना पैसा निकालने के लिए मारे-मारे घूम रहे है। आपको याद ही होगा कि पिछले साल के अंतिम महीनों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर अलग-अलग तरह की कई पाबंदियां लगा दीं थी। जिसके बाद इसके खातेदारों को अपने ही बैंक से अपना पैसा निकालना मुश्किल हो गया था। यकीन मानिए कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों के हर माह करीब 90 मुलाजिमों को चोरी-चकारी, भ्रस्टाचार और अकर्मण्यता के पुख्ता कारणों से नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर पर भ्रष्टाचार में फंसे होने के पुख्ता साक्ष्य हैं। ये काम करने की बजाय काली क...
हिन्दू संस्कृति अपनाए “कोरोना” को भगाए

हिन्दू संस्कृति अपनाए “कोरोना” को भगाए

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‘कोरोना’ का संक्रमण रोकने हेतु विश्‍वभर में हिन्दू संस्कृति के अनुसार आचरण आरंभ होना ही हिन्दू धर्म की महानता ! ‘नमस्कार’, ‘आयुर्वेद’, ‘शाकाहार’ आदि को अपनाकर स्वस्थ और आनंदित रहें ! विश्‍वभर में उत्पात मचानेवाले कोरोना विषाणु के संक्रमण के कारण अनेक देश बाधित हैं । कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या प्रतिदिन बढ रही है । इस संक्रमण को रोकने हेतु एक-दूसरे से मिलने पर ‘शेक-हैन्ड’ अर्थात हाथ मिलाना, ‘हग’ अर्थात गले लगना, चुंबन लेना आदि पाश्‍चात्य पद्धति भी कारणभूत सिद्ध हो रहे हैं, यह ध्यान में आने पर अनेक पाश्‍चात्य देशों में अब ‘नमस्ते’ बोलने की पद्धति प्रचलित हुई है । जिन अंग्रेजों ने हम पर 150 से भी अधिक वर्षों तक राज्य कर हिन्दू संस्कृति नष्ट करने का प्रयास किया, उसी इंग्लैंड के प्रिंस चार्ल्स एवं पोर्तुगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा सहित अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्...
निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारियों के संरक्षक कौन लोग?

निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारियों के संरक्षक कौन लोग?

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निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारियों के बचाव के लिए उठाए गए कदम ने चौंकाया है और गम्भीर सवाल को जन्म दिया है. अतः सरकार इस तथ्य की जांच CBI, IB या NIA से करवाए कि निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारियों के संरक्षक कौन लोग हैं, उनका एजेंडा क्या है...? ज्ञात रहे कि पूरा देश इस तथ्य से भलीभांति परिचित है कि निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारी एक निजी बस के ड्राईवर कंडक्टर खलासी क्लीनर का काम करते थे. अतः उनकी अर्थिक पृष्ठभूमि/स्थिति का आंकलन आसानी से किया जा सकता है. पूरा देश इस कटु सत्य से भी भलीभांति परिचित हैं कि भारतीय अदालतों में मुकदमेबाजी कितनी महंगी है, विशेषकर जब यह मुक़दमेबाजी हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचती है तो खर्च की सारी सीमाएं तोड़ देती है. यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों से निर्भया के हत्यारे चारों बलात्कारियों के बचाव के लिए की जा रहीं अभूतपूर्व कोशिशों के कारण एक गम्भ...
नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा देने वाली पहल

नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा देने वाली पहल

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सम्पूर्ण मानवता के सम्मुख खडे़ कोरोना वायरस की महामारी के संकट से सार्क देश आपस में मिलकर लडे़, दुनिया के सामने मानवता की रक्षा की एक अनूठी मिसाल कायम करें और विश्व को सेहतमंद बनाने में अपनी भूमिका अदा करें, ऐसी भारत की पहल एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सकारात्मक भूमिका का जहां दुनिया में स्वागत हो रहा है, वही इन संकट के निवारण की चर्चा के दौरान पाकिस्तान का कश्मीर राग अलापना विडम्बपापूूर्ण है, दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरोेना वायरस जैसे महासंकट के समय सार्क देशों के बीच भारत एक नई उम्मीद एवं रोशनी का कारण बना है। इन उजालों को निर्मित करने में नरेन्द्र मोदी की मानवतावादी सोच, दूरदृष्टिता एवं सूझबूझ की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनुष्य के अविनाशी जीवन के भाव को ग्रसने के लिये कोरोना वायरस का राहू मुंह बाये खड़ा है, हरेक मनुष्य के सामने यह गंभीर चुनौती है। लेकिन कुछ स्वार्थी देश इन क्षणों में भी अप...
Final hanging of Nirbhaya convicts after too much legal hurdles calls for systematic reform for time-bound hanging of convicts of death-sentence

Final hanging of Nirbhaya convicts after too much legal hurdles calls for systematic reform for time-bound hanging of convicts of death-sentence

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Final hanging of Nirbhaya convicts after too much legal hurdles calls for systematic reform for time-bound hanging of convicts of death-sentenceIt is a matter of satisfaction that finally four convicts of Nirbhaya rape-cum-death were ultimately hanged to death at 5.30 am on 20.03.2020 after crossing all hurdles created by lawyers of convicts including last-moment mid-night effort to knock court-doors. Even politicians cutting across party-lines expressed satisfaction on final justice to Nirbhaya who faced most inhuman torture on 16.12.2012. But legal loopholes brought in the whole affair calls for immediate reform in the system whereby crimes attracting death-penalty may be heard on fast track at all stages of trial from District Court to Supreme Court. Provision of filing mercy-petitio...
क्यों होती है फांसी देने में देरी कातिलों को

क्यों होती है फांसी देने में देरी कातिलों को

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निर्भया गैंगरेप केस में दोषियों को आख़िरकार फांसी तो हो ही गई। निर्भया के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने वाले मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को पहली बार इस केस में साल 2013 में ही मौत की सजा सुनाई गई थी। उसके बाद यह केस विभिन्न अदालतों में अनावश्यक रूप से घूमता रहा । पर इतने बड़े और अहम केस में दोषियों को सजा मिलने में हुई देरी बहुत सारे सवाल न्यायपालिका और वकालती दाव-पेंच पर भी खड़े करती है। कोर्ट से इंसाफ मिलने में होने वाली देरी के चलते फांसी की सजा का इंतजार कर रहे मुजरिमों की दया याचिकाओं पर भी फैसले वक्त रहते नहीं हो पाये । सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में फांसी की सजा का इंतजार कर रहे 15 दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में भी बदली थी। उसने फांसी की सजा का इंतजार करने वाले कैदियों को लेकर अपने एक अहम फैसले में कहा था कि मृत्युदंड पाए अपराधियों की दया याचिका पर अनिश्चि...