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Separate kitchens in hotels and eateries for cooking non-vegetarian food necessary

Separate kitchens in hotels and eateries for cooking non-vegetarian food necessary

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It refers to steep and sharp decline in consumption of non-vegetarian food with spread of Corona virus. Already vegetarianism is spreading fast with many hotels and restaurants becoming popular for being excusive vegetarian. Vegetarianism is becoming popular even in advanced countries. Central and some states have taken some practical steps to fight danger of Corona being spread in the country. Time has come when central government should order that hotels, restaurants and eateries may have separate kitchens and kitchen-wares to cook non-vegetarian food with such system displayed prominently inside and outside such hotels, restaurants and eateries adopting practice of having separate kitchens and kitchen-wares to cook non-vegetarian food. Rather such display will increase their business...
Uncertainty of private banks now with YES Bank calls for another round of bank-nationalisation

Uncertainty of private banks now with YES Bank calls for another round of bank-nationalisation

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It refers to Reserve Bank of India (RBI) now on 05.03.2020 imposing restrictions on withdrawal of more than rupees 50000 from an account in YES Bank. Only some time back, similar restrictions in case of PMC Bank had put its customers in great difficulty when there were even deaths reported of some customers who could not bear the burnt of blocking of their hard-earned money because of RBI instructions. Main sufferers of such restrictions are senior citizens whose only income is from interest in Fixed Deposits. Since private Banks give more interest than public-sector banks, depositors park their hard-earned money in private banks in want of more income. It is time that another phase of nationalisation of private banks may be initiated to prevent hardships to depositors in these banks...
महिला समानता के बिना कैसे होगा सबका विकास?

महिला समानता के बिना कैसे होगा सबका विकास?

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8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समानता केन्द्रीय बिंदु रहा. आज भी हमारे समाज में, यदि महिलाओं को बराबरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हो तो यह विकास के ढाँचे पर भी सवाल उठाता है क्योंकि आर्थिक विकास का तात्पर्य यह नहीं है कि समाज में व्याप्त असमानताएं समाप्त हो जाएँगी. बल्कि विकास के ढाँचे बुनियादी रूप से ऐसे हैं कि अनेक प्रकार की असमानताएं और अधिक विषाक्त हो जाती हैं. दुनिया के अन्य क्षेत्र में, जैसे कि यूरोप में आर्थिक विकास होने में कई-सौ साल लगे जिसके दौरान, विकास के साथ-साथ समाज में लैंगिक समानता भी बढ़ी. परन्तु भारत समेत, एशिया और पैसिफिक क्षेत्र के देशों में, आर्थिक विकास तो दुनिया के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले, बड़ी तेज़ी से हुआ, परन्तु महिला असमानता उस रफ़्तार से कम नहीं हुई. उदाहरण के लिए अत्याधुनिक जापान में आर्थिक विकास के बावजूद भी महिला असमा...
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का कुत्सित रूप कोरोना वायरस

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का कुत्सित रूप कोरोना वायरस

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आज जब एशिया के एक देश चीन के एक शहर वुहान से कोरोना नामक वायरस का संक्रमण देखते ही देखते जापान, जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, रूस समेत विश्व के 30 से अधिक देशों में फैल जाता है तो निश्चित ही  वैश्वीकरण के इस दौर में इस प्रकार की घटनाएं हमें ग्लोबलाइजेशन के दूसरे डरावने पहलू से रूबरू कराती हैं। क्योंकि आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण से विश्व भर में अब तक 2012 मौतें हो चुकी हैं और लगभग 75303 लोग इसकी चपेट में हैं  जबकि आशंका है कि यथार्थ इससे ज्यादा भयावह हो सकता है। लेकिन यहां बात केवल विश्व भर में लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान तक ही सीमित नहीं है बल्कि पहले से मंदी झेल रहे विश्व में इसका नकारात्मक प्रभाव चीन समेत उन सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पडऩा है जो चीन से व्यापार करते हैं जिनमे भारत भी शामिल है। बात यह भी है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग, रोबोटिक...
कोरोना वायरसः वैश्विक आपातकाल

कोरोना वायरसः वैश्विक आपातकाल

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 आशुतोष कुमार सिंह विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को स्वास्थ्य की दृष्टि से वैश्विक आपातकाल घोषित किया है। चीन में घातक कोरोना वायरस से अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग इस वायरस के चपेट में हैं। इस वायरस के बढ़ते प्रकोप से स्वास्थ्य की दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। भारत सहित तमाम देश इस वायरस से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर जुटे हैं। चीन में चिकित्सा का बड़ा केन्द्र वुहान इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है। सबसे ज्यादा मौतें इसी शहर में हुई हैं। धीरे-धीरे इस वायरस का विस्तार बढ़ता जा रहा है। भारत में भी इस वायरस से संक्रमित कुछ लोगों की पहचान हुई है। यहां पर यह जानना जरूरी है कि कोरोना वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है, लेकिन इनमें से केवल छह विषाणु ही लोगों को संक्रमित करते हैं। इसके सामान्य प्रभावों के चलते सर्दी-जुकाम होता है, लेकिन ‘सिवीयर एक्यूट रे...
बदले-बदले से केजरीवाल!

बदले-बदले से केजरीवाल!

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उमेश चतुर्वेदी   लोकसभा चुनावों में भारी पराजय के महज आठ महीने बाद दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारी जीत दर्ज कराने के बाद केजरीवाल एक बार फिर अलग तरह की राजनीति करते नजर आ रहे हैं। बेशक उनकी जीत पिछली बार की तुलना में कम रही, 67 सीटों की बजाय 62 सीटों पर ही उनकी पार्टी जीत पाई, लेकिन 70 सदस्यों वाली विधानसभा के हिसाब से यह फिर भी बड़ी जीत है। इस जीत में निस्संदेह बड़ी भूमिका शाहीनबाग आंदोलन ने भी निभाई। नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए 15 दिसंबर 2019 को शुरू हुआ आंदोलन इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जारी है। इसका असर यह हुआ कि मुस्लिम बहुल सभी पांचों सीटों मटिया महल, सीलमपुर, ओखला, बल्लीमारान और मुस्तफाबाद से आम आदमी पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवार भारी मतों से जीते। जाहिर है कि पांचों जगह आम आदमी पार्टी की भारी जीत मुस्लिम मतदाताओं की एकतरफा वोटिंग की वजह से हुई। चुनाव नत...
शुरुआती पहचान से हो सकती है 90 फीसदी कैंसर मामलों की रोकथाम  

शुरुआती पहचान से हो सकती है 90 फीसदी कैंसर मामलों की रोकथाम  

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 70 वर्ष की उम्र से पहले होने वाली मौतों के लिए कैंसर एक प्रमुख वजह बनकर उभरा है। हालाँकि, बीमारी के बारे में जागरूकता और इसकी शुरुआती पहचान से तो कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों की रोकथाम की जा सकती है। नोएडा स्थित राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआइसीपीआर) की निदेशक डॉ शालिनी सिंह ने ये बातें कही हैं।  डब्ल्यूएचओ की एक ताजा रिपोर्ट में दस में से एक भारतीय को उसके जीवनकाल में कैंसर की चपेट में आने और पंद्रह भारतीयों में से एक की इस बीमारी से मौत होने की आशंका व्यक्त की गई है। ‘वर्ल्ड कैंसर रिपोर्ट’ के अनुसार वर्ष 2018 में भारत में कैंसर के 11.6 लाख नये मामले सामने आए थे, जिसके कारण 7.84 लाख से अधिक लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी थी। डब्ल्यूएचओ ने गरीब देशों में वर्ष 2040 तक कैंसर के मामले 81 फीसदी तक बढ़ने की आशंका जतायी है। डॉ शा...
पश्चिमी घाट में कम तीव्रता के भूकंप की घटनाओं का कारण मानसून 

पश्चिमी घाट में कम तीव्रता के भूकंप की घटनाओं का कारण मानसून 

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भारतीय भू-वैज्ञानिकों ने एक ताजा अध्ययन में देश के पश्चिमी घाट में लंबे समय से हो रही कम तीव्रता की भूकंप की घटनाओं के कारणों का पता लगाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि देश के पश्चिमी तट पर आज भी कम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं, जो मानसून के कारण उत्पन्न होने वाली एक स्थानीय भूगर्भीय घटना है। पश्चित घाट पर स्थित महाराष्ट्र के पालघर जिले के धूंधलवाड़ी गाँव के आसपास वर्ष 2018 के नवंबर महीने में भूकंपों यह श्रृंखला गड़गड़ाहट की आवाज के साथ शुरू हुई थी, जो अब तक रुकने का नाम नहीं ले रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले करीब 17 महीनों से अब तक इस इलाके में 0.5 से 3.8 तीव्रता के 16 हजार से अधिक भूकंप आ चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इस अध्ययन से जुड़े हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ता डॉ विनीत गहलौत ने इंडिया साइंस वायर को बता...
पिछली सरकार के पाप धोने में वर्तमान सरकार

पिछली सरकार के पाप धोने में वर्तमान सरकार

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येस बैंक के शुरू हुए अभी 16-17 साल ही हुए है। राणा कपूर और अशोक कपूर दोनों ने मिलकर 2003 में येस बैंक शुरू किया था. और देखते-देखते भारत का चौथा सबसे बड़ा निजी बैंक बन गया। UPI लेन-देन में येस बैंक की सबसे अधिक हिस्सेदारी रही है...करीब चालीस प्रतिशत। बैंक 2003 में शुरू हुआ और सही तरीकों से आगे बढ़ने लगा। 2008 का मुंबई आतंकी हमला इस बैंक के लिये भी झटका साबित हुआ। उस हमले में अशोक कपूर भी मारे गये और यहीं से गोरखधंधे की शुरुआत हो गयी। अशोक कपूर के मरने के बाद बैंक पर नियंत्रण को लेकर उनकी पत्नी और भाई राणा कपूर में खींचतान शुरू हुई।  उच्चतम न्यायालय के फैसले से राणा कपूर को बैंक पर नियंत्रण मिल गया। राणा कपूर के नेतृत्व में येस बैंक ने हर उस उद्यमी और कंपनी को कर्ज देना शुरू कर दिया, जिन्हें अन्य बैंक खराब क्रेडिट के कारण मना कर चुके थे। राणा कपूर इस तरह के कर्जों को बैलेंस शीट से छुप...
अमेरिका—तालिबान समझौते से उपजे नए सवाल

अमेरिका—तालिबान समझौते से उपजे नए सवाल

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क़तर की राजधानी दोहा में तालिबान के साथ अमेरिका ने जो समझौता किया है, यदि वह सफल हो जाए तो उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सुखद आश्चर्य माना जाएगा। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि तालिबान ने इस समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया तो अफगानिस्तान में इतनी अमेरिकी फौजें भेज दी जाएंगी कि जितने पहले कभी नहीं भेजी गई हैं। बेचारे ट्रंप को क्या पता कि पिछले 200 साल में ब्रिटिश साम्राज्य और सोवियत रुस अफगानिस्तान में कई बार अपने घुटने तुड़ाकर सबक सीख चुके हैं, फिर भी उनके प्रतिनिधि जलमई खलीलजाद को बधाई देनी होगी कि वे अमेरिका के जानी दुश्मन अफगान तालिबान को समझौते की मेज तक खींच लाए। यह समझौता अभी सिर्फ अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ है, अफगान सरकार और तालिबान के बीच नहीं। अफगान सरकार और तालिबान के बीच वार्ता शुरु होगी 10 मार्च को लेकिन भोजन के पहले ग्रास में ही मक्खी पड़ गई है। अफ...