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‘काॅनक्लेव’ से नहीं कर्मठ लोगों से हल हांेगी समस्या

‘काॅनक्लेव’ से नहीं कर्मठ लोगों से हल हांेगी समस्या

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अक्सर देश के बडे़ मीडिया समूह, दिल्ली में राष्ट्रीय समस्याओं पर सम्मेलनों का आयोजन करते हैं। जिनमें देश और दुनिया के तमाम बड़े नेता और मशहूर विचारक भाग लेते हैं। देश की राजधानी में ऐसे सम्मेलन करना अब काफी आम बात होती जा रही है। इन सम्मेलनों में ऐसी सभी समस्याओं पर काफी आंसू बहाऐ जाते है और ऐसी भाव भंगिमा से बात रखी जाती है कि सुनने वाले यही समझे कि अगर इस वक्ता को देश चलाने का मौका मिले तो इन समस्याओं का हल जरूर निकल जाएगा। जबकि हकीकत यह है कि इन वक्ताओं में से अनेकों को अनेक बार सत्ता में रहने का मौका मिला और ये समस्यायें इनके सामने तब भी वेसे ही खड़ी थी जैसे आज खड़ी हैं। इन नेताओं ने अपने शासन काल में ऐसे कोई क्रान्तिकारी कदम नहीं उठाये जिनसे देशवासियों को लगता कि वो ईमानदारी से इन समस्याओं का हल चाहते है। अगर उनके कार्यकाल के निर्णयों कोे बिना राग-द्वेष के मूल्यांकन किया जाए तो यह स्पष्ट ...
मुसलमान भाइयों-बहनों को झूठ और अफवाहों से बचाने के लिए आगे आएं हिन्दू भाई-बहन

मुसलमान भाइयों-बहनों को झूठ और अफवाहों से बचाने के लिए आगे आएं हिन्दू भाई-बहन

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दिल्ली में दंगों की आग बुझ चुकी है, लेकिन चिंता की बात यह है कि देश के अनेक हिस्सों में मुसलमान भाइयों-बहनों के बीच अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि दिल्ली में गुजरात दंगों जैसा कोई मॉडल आजमाया गया है। मकसद साफ है कि अन्य जगहों पर भी उन्हें दंगे करने के लिए उकसाया जा सके। देखा जाए तो यह उनकी पूरी की पूरी कम्युनिटी को दंगाई बनाने की साज़िश है, जिससे उन्हें सावधान रहना होगा। जहां तक दिल्ली दंगों का सवाल है, मुसलमान भाइयों-बहनों को यह समझना होगा कि शातिर सियासतदानों ने उनके कंधों पर बन्दूकें रखकर 40 से ज़्यादा बेगुनाह लोगों को मरवा दिया, जिनमें दोनों समुदायों के अभागे लोग शामिल हैं। इन दंगों की तैयारी शाहीन बाग की स्थापना के साथ ही शुरू हो गई थी और मास्टरमाइंड सियासी दलों ने इसके लिए रेडिकल इस्लामिक एलिमेंट्स को इस्तेमाल किया। आइए, कुछ तथ्यों से आप समझ जाएंगे कि इन दंगों के पीछे रेडिकल हिं...
नई ऊंचाइयों पर भारत अमेरिका सम्बंध

नई ऊंचाइयों पर भारत अमेरिका सम्बंध

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे क्षेत्र को कवर करते हुए व्यापक वार्ता की, जिसमें रक्षा, सुरक्षा और व्यापार और निवेश के प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका का साझा बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि भारत-अमेरिका के बीच 3 अरब डॉलर के एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनाने के लिए बातचीत होगी। वहीं, साझा बयान से पहले मीडिया के समक्ष वार्ता में अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया और उन्हें भारत यात्रा के लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में पिछले दो दिन अद्भुत थे, विशेषकर अहमदाबाद के मोटेरा स्ट...
सेठजी ट्रंप के छक्के

सेठजी ट्रंप के छक्के

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस भारत-यात्रा से किसी भी विदेशी राष्ट्रध्यक्ष की यात्रा की तुलना नहीं की जा सकती। कुछ अर्थों में यह अप्रतिम रही है। अब तक आए किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति या किसी अन्य विदेशी नेता ने भारत और उसके प्रधानमंत्री की वैसी तारीफ कभी नहीं की, जैसी कि ट्रंप ने की है। अपने दो दिन के प्रवास में ट्रंप ने एक शब्द भी ऐसा नहीं बोला और कोई भी हरकत ऐसी नहीं की, जिसके लिए वे सारी दुनिया में जाने जाते हैं। दूसरे शब्दों में उनकी भारत-यात्रा ने उन्हें काफी परिपक्व बना दिया। यदि इस परिपक्वता को वे बनाए रखेंगे तो राष्ट्रपति का अगला चुनाव जीतने में उन्हें काफी मदद मिलेगी। ट्रंप ने अपने अहमदाबाद-भाषण में पाकिस्तान का जिक्र भी बड़ी तरकीब से किया। उन्होंने उसके आतंकवाद से लड़ने की तो कसम खाई लेकिन उसे कोई दोष नहीं दिया। उस लड़ाई में उन्होंने उसकी मदद की बात भी कही। यही उच्च कोटि की कू...
किसने भूमिका तैयार की दिल्ली के दॅंगों की?

किसने भूमिका तैयार की दिल्ली के दॅंगों की?

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अब तो आग की लपटों से बाहर निकल आई है दिल्ली। अब मासूमों को मारने के लिए सड़कों पर उतरे मौत के सौदागर अपना सुनियोजित काम करके पतली गली से निकल चुके हैं। लेकिन, तीन-चार दिनों तक दिल्ली में मानवता बार-बार मरती रही। दर्जनों लोग मार डाले गए और सैकड़ों घायल हुए। हजारों दूकानें और घर राख में तब्दील कर दिए गए। इतना सब कुछ होने के बावजूद अब भी यहां पर ‘मेरा-तुम्हारा’ करने वाले सक्रिय हैं। वे अब भी दुखी हैं इस बात से हैं कि किछ उनके मजहब वाले  भी दंगों में शिकार हुए। उन्हें दूसरे मजहब के मानने वाले मृतकों या घायलों को लेकर किसी तरह का सहानुभूति का भाव ही नहीं है। तो इतना पत्थर दिल बन गये हैं हमारे  समाज के कुछ नकाबपोश। गंगा-जमुनी तहजीब की बातें मानों बेमानी सी ही लगती है।  बहरहाल, दिल्ली के दंगों के लिए एक खास समूह कपिल मिश्र की गिरप्तारी की मांग कर रहा है। उन्हें इन दंगों के लिए दोष दे र...
सरकार और प्रशासन की नाकामी है दिल्ली दंगे

सरकार और प्रशासन की नाकामी है दिल्ली दंगे

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शाहीनबाग़ संयोग या प्रयोग हो सकता है लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान देश की राजधानी में होने वाले दंगे संयोग कतई नहीं हो सकते। अब तक इन दंगों में एक पुलिसकर्मी और एक इंटेलीजेंस कर्मी समेत लगभग 42 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नागरिकता कानून बनने के बाद 15 दिसंबर से दिल्ली समेत पूरे देश में होने वाला इसका विरोध इस कदर हिंसक रूप भी ले सकता है इसे भांपने में निश्चित ही सरकार और प्रशासन दोनों ही नाकाम रहे। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि सांप्रदायिक हिंसा की इन संवेदनशील परिस्थितियों में भी भारत ही नहीं विश्व भर के मीडिया में इसकेपक्षपातपूर्ण विश्लेषणात्मक विवरण की  भरमार है जबकि इस समय सख्त जरूरत निष्पक्षता और संयम की होती है। देश में अराजकता की ऐसी किसी घटना के बाद सरकार की नाकामी, पुलिस की निष्क्रियता, सत्ता पक्ष का विपक्ष को या विपक्ष का सरकार को दोष देने की राजनीति इस द...
मुसलमान भाई-बहन समझें कि मानवता के नाते अनाथ बच्चों को गोद लिया जाता है, मां-बाप वाले बच्चों को नहीं

मुसलमान भाई-बहन समझें कि मानवता के नाते अनाथ बच्चों को गोद लिया जाता है, मां-बाप वाले बच्चों को नहीं

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जब भी कोई दंगा होता है। मानवता कराहती है और समाज नंगा होता है। मैं भी चाहता तो हूँ कि दिल्ली दंगों के दौरान अनेक हिंदुओं ने जिस तरह से जान पर खेलकर अनेक मुसलमानों को बचाया, और अनेक मुसलमानों ने जिस तरह से जान पर खेलकर अनेक हिंदुओं को बचाया, उससे राहत की सांस लूं और तसल्ली रखूं कि इंसानियत अभी ज़िंदा है, लेकिन कुछ सियासी दलों ने जिस तरह से खेल खेला है और बिना किसी बात के हमारे मुसलमान भाइयों-बहनों को युद्ध के मैदान में खड़ा कर दिया है, वह चिंताजनक है। इस सियासी खेल का अंजाम यह होगा कि मुसलमान भाई-बहन दिन-ब-दिन मुख्य धारा से और कटते जाएंगे और हिंदुओं में भी मुसलमानों के प्रति शंकाएं बढ़ती ही जाएंगी, जो अंततः इस टकराव को और बढ़ाएगा। फिर,40 लोगों की मौत के बाद मेरे जैसे लोग इस बात पर गर्व नहीं कर सकते कि मारने वाले थे, तो बचाने वाले भी थे। मैं समस्या को उसकी जड़ से खत्म होते हुए दे...
दंगा करने वाले और कराने वाले अब इस देश को ब्लैकमेल नहीं कर सकते!

दंगा करने वाले और कराने वाले अब इस देश को ब्लैकमेल नहीं कर सकते!

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जब भी कोई दंगा होता है, मानवता कराहती है, समाज नंगा होता है। लेकिन ये दंगा होता क्यों है? क्योंकि दंगे के कारणों की हम कभी भी निष्पक्षता से समीक्षा नहीं करते। सबकी अपनी-अपनी राजनीति है और लोगों को इंसानी लाशों पर भी राजनीति की रोटियां सेंकने से गुरेज नहीं है। दिल्ली का यह दंगा अवश्यम्भावी था- इस आशंका से मेरा मन लगातार कांप रहा था, लेकिन मुंह से यह अशुभ निकालने से बचता रहा। परंतु अन्य सभी तरीकों से लिखकर लोगों को आगाह करने की कोशिश की। कभी प्यार से समझाकर, कभी नाराज़गी प्रकट करके। लोगों ने नहीं समझा, तो तीखा भी बोलना पड़ा। अब अंततः दंगा हो चुका है तो कुछ लोगों के कलेजे को ठंडक पड़ गई होगी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल, डी राजा, असदुद्दीन ओवैसी और देश भर में इनके तमाम सहयोगी दलों और उनके तमाम नेताओं को बधाई, क्योंकि इनके मकसद का पहला चरण पूरा हुआ। ...
अपरिहार्य ‘हिंदुत्व

अपरिहार्य ‘हिंदुत्व

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  संघ प्रमुख मोहन भागवत का कथन कि 'राष्ट्रवाद’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका मतलब नाज़ी या हिटलर से निकाला जा सकता है, ऐसे में राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों को ही प्रमुखता से इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने इस वक्त इस्लामी आतंकवाद, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती हैं। दुनिया के सामने जो बड़ी समस्याएं हैं, उनसे सिर्फ भारत ही निजात दिलवा सकता है। हिंदू ही एक ऐसा शब्द है जो भारत को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करता है। भले ही देश में कई धर्म हों, लेकिन हर व्यक्ति एक शब्द से जुड़ा है जो हिंदू है। ये शब्द ही देश की संस्कृति को दुनिया के सामने दर्शाता है। वास्तव में यही भारत, भारतीयता और हिंदुत्व का सही परिचय है- शांतिपूर्ण सह अस्तित्व, मानवतावादी दृष्टिकोण, प्रकृति केंद्रित विकास व सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की अवधारणा। ...

Claim by pharmaceutical companies for tax-deduction on gifts exposes over-pricing of medicines

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It refers to Madras High Court directing Income Tax Department to submit details of claims made by pharmaceutical-companies towards tax-deduction for gifts made to doctors, names of doctors and penalties paid by these companies for drug-overpricing. Observations made by the Court made it clear that pharmaceutical-companies overprice drugs where prices of same medicine different multiple times according to popularity of brand-names owned by different pharmaceutical companies. Even World Health Organization WHO established that even essential drugs in India with lowest printed Maximum-Retail-Price MRP are exorbitantly priced over manufacturing-cost followed by abnormally high trade-margin between ex-factory price and MRP. National Pharmaceutical Pricing Authority NPPA at regular interv...