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सर्जिकल स्‍ट्राईक : भारत के नए संकल्‍प और आतंकवाद के खिलाफ नए नजरिए का एक नया अध्‍याय

सर्जिकल स्‍ट्राईक : भारत के नए संकल्‍प और आतंकवाद के खिलाफ नए नजरिए का एक नया अध्‍याय

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बालाकोट सर्जिकल स्‍ट्राईक : भारत का एतेहासिक मोड़ व खोयी हुई ताकत को पहचाना और दिखाया। सर्जिकल स्‍ट्राईक : संशय और भ्रमित माहौल के बीच, नरेंद्र मोदी सरकार ने दशकों पुरानी गहरी नींद से भारत को जगाया। राष्ट्र मौन, स्तब्ध और अवाक रहा। कुछ भयानक हुआ था, जिसने हर भारतीय को झकझोर कर रख दिया था। पुलवामा में 40 सीआरपीएफ कर्मियों की एक बटालियन पर हमला करने का घृणित कार्य वास्तव में मानव जाति के इतिहास में राज्य प्रायोजित आतंकवाद का सबसे निंदनीय उदाहरण है। पुलवामा एक ऐसी नृशंस साजिश है जो देश विरोधी तत्वों द्वारा तैयार की गई थी। और 1989 में आतंकवाद शुरू होने के बाद से यह कश्मीर में भारतीय राज्य पर होने वाले सबसे घातक, भयावह आतंकवादी हमलों में से एक है। हालांकि, यह वह दिन भी था जब प्रत्येक भारतीय ने अपने जवानों के बलिदान का सबसे जवाब देने का संकल्प लिया। यह भारतीय विश्वास के पुनरुत्थान का बि...
“एक सन्यासी का राष्ट्र के गृहमंत्री को संदेश”

“एक सन्यासी का राष्ट्र के गृहमंत्री को संदेश”

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सेवा में श्रीमान अमित शाह जी गृहमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली विषय:एक सन्यासी का राष्ट्र के गृहमंत्री को संदेश महोदय, मुझे नही पता की मेरा यह पत्र आपको मिलेगा या नहीं मिलेगा। आप इस पत्र को पढ़ पाएंगे या नहीं पढ़ पायेंगे।मेरे जैसे लाखो साधु इस देश में हैं और आप इस महान राष्ट्र के यशस्वी महानायक हैं जिसके मजबूत कंधो पर सम्पूर्ण सनातन धर्म और भारत राष्ट्र की रक्षा का भार है।इस कारण से मुझे लगता है की ये लगभग असम्भव बात है की मेरा यह पत्र आप तक पहुँचे,फिर भी मैं सनातन धर्म का सन्यासी होने के कर्तव्य को पूरा करने के लिये आपको यह पत्र लिख रहा हूँ। 13 फरवरी 2020 को मैं दिल्ली विधानसभा के भा ज पा की हार को लेकर आपके बयान को सुन रहा था।आपके बयान को सुनकर मेरा दिल बैठ गया क्योंकि आपका बयान बहुत ही निराशाजनक और सच्चाई से परे था।मुझे नहीं लगता की ये आपका बयान हो सकता है।शायद आपके कुछ कायर, कम...
तो जिन्हें जेल में होना चाहिए वे बनेंगे  एम- एमएलए

तो जिन्हें जेल में होना चाहिए वे बनेंगे  एम- एमएलए

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यह कोई पुरानी बात नहीं है जब कत्ल, अपहरण, नरसंहार से लेकर विमान का अपहरण करने वाले भी हमारे यहां लोकसभा, विधानसभा आदि के चुनाव लड़ते ही नहीं थे,बल्कि जीत भी जाते थे। दुर्भाग्य है कि अब यह सिलसिला और भी बढ़ा है। अफसोस तो तब होता है जब हमारे यहां ऐसे कुख्यात अपराधी तत्व  सांसद और विधायक तक बन रहे हैं। पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद तो यह लगता है कि अब यह सिलसिला बंद हो जायेगा या कम से कम इस पर रोक लगेगी। राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सभी सियासी दलों से पूछा कि वे क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को पार्टी कि टिकट क्यों दे रहे हैं? अब उन्हें इसकी वजह बतानी होगी और जानकारी अपने वेबसाइट पर भी देनी होगी। क्या इस फैसले के बाद अब भी कोई दल किसी अपराधी को टिकट देने का साहस करेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा लोकसभा के 542 सांसदों में से 233 यानी 43 फीसदी सां...
ऑस्टियोआर्थराइटिस  : मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से इलाज

ऑस्टियोआर्थराइटिस  : मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से इलाज

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ऑस्टियोआर्थराइटिस रूमेटॉयड की दूसरी सबसे आम समस्या है, जो भारत में 40 प्रतिशत आबादी को अपना शिकार बनाए हुए है। यह एक प्रकार की गठिया (अर्थराइटिस) की समस्या है, जो एक या ज्यादा जोड़ों के कार्टिलेज के डैमेज होने के कारण होती है। कार्टिलेज प्रोटीन जैसा एक तत्व है जो जोड़ों के बीच कुशन का काम करते हैं। हालांकि, ऑस्टियोआर्थराइटिस किसी भी जोड़े को प्रभावित कर सकता है, लेकिन आमतौर पर यह हाथों, घुटनों, कूल्हों और रीढ़ के जोड़ों को प्रभावित करता है। यह समस्या जोड़ों में दर्द को पैदा करता है और समय के साथ यह दर्द तीव्र होता जाता है। यह समस्या आमतौर पर हड्डियों और जोड़ों का बचाव करने वाले कार्टिलेज के डैमेज होने से होती है। आज के दौर में यह समस्या बहुत ही आम और खतरनाक हो गई है, जो उम्र के साथ गंभीर होती जाती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर के जोड़ों को खराब कर देती है, जैसे हाथ और उंगलियां, घुटने, कूल्हा,...
हिन्दू उत्कर्ष

हिन्दू उत्कर्ष

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  हिन्दू कोई धर्म नहीं है बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की एक जीवन शैली है। इस भूभाग में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है। इनमें कुछ सनातन धर्म को मानते हैं तो कुछ अन्य धर्मों को, जिन्हें भारत में अल्पसंख्यक कहा जाता है। इस भूभाग में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज हिन्दू सनातनी ही रहे हैं। विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण और उनके शासन के कारण कुछ ने इस्लाम धर्म अपना लिया तो कुछ ने ईसाइयत को स्वीकार कर लिया। पर सभ्यता और संस्कृति के आधार पर सब हिन्दू ही कहे जाएंगे। इसलिए जब भारत के हिन्दू राष्ट्र की बात की जाती है तब इसमें सभी धर्मों के वे सभी लोग शामिल हो जाते हैं जिनके पूर्वज हिन्दू रहे हैं। वामपंथी इतिहासकारों ने अब तक इतिहास को अपने हिसाब से काफी तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया है। भारत को बांटने के क्रम में इन्होंने अंबेडकर के उन लेखों को तो प्रोत्साहित किया जिसमें उन्होंने हिन्दू धर्म की कमियां ...
विश्वविद्यालयों में हिंसा  बड़े षड्यंत्र का हिस्सा

विश्वविद्यालयों में हिंसा  बड़े षड्यंत्र का हिस्सा

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जब से नरेंद्र मोदी सरकार आई है कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माक्र्सवादी (सीपीएम), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माक्र्सवादी, लेनिनवादी (सीपीआई, एम एल) आदि जैसे जातिवादी इस्लामिक सांप्रदायिक (जाइसा) दलों के पेट में भीषण दर्द चल रहा है। इस जाइसा मोर्चे का नेतृत्व कर रहे हैं कांग्रेस और साम्यवादी-नक्सल दल जिनकी दिल्ली मीडिया में अच्छी-खासी पैठ है। कभी ये असहिष्णुता का रोना रोते हैं तो कभी जवाहरलाल नेहरू के 'आईडिया ऑफ इंडिया’ का, जिसमें धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है इस्लामिक सांप्रदायिक कट्टरवाद को बढ़ावा देना और उदारवाद का मतलब है देशद्रोही ताकतों को शह देना। साम्यवाद रूझान वाले जवाहरलाल नेहरू के 'आईडिया ऑफ इंडिया’ ने देश को मानसिक स्तर पर ही विषाक्त नहीं किया, इसने भौतिक स्तर पर भी देश तोडऩे वाली देशद्र...
हमारी प्रमुख समस्या नागरिकता की पहचान अथवा गिरती हुई अर्थव्यवस्था?

हमारी प्रमुख समस्या नागरिकता की पहचान अथवा गिरती हुई अर्थव्यवस्था?

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मैं बहुत वर्षों से लिखता रहा हूं कि साम्यवाद दुनियां की सबसे खतरनाक विचारधारा है तथा इस्लाम सबसे अधिक खतरनाक संगठन। साम्यवाद से तो दुनियां धीरे धीरे मुक्त हो रही है किन्तु इस्लाम अभी चर्चा तक सीमित है। इस्लाम सारी दुनियां के लिये खतरनाक है यह बात पूरी तरह प्रमाणित हो गयी है किन्तु इस्लाम की बढ़ी हुई शक्ति और शेष समाज में मानवता की बढ़ी हुई धारणा के बीच दूरी इतनी अधिक है कि या तो लोग इस्लाम को उतना खतरनाक समझ नहीं रहे हैं अथवा उनकी संगठित शक्ति के आगे भयभीत हैं। धर्म के नाम पर आतंक का समर्थन करने वाला दुनियां का एक मात्र संगठन इस्लाम है। अन्य कोई भी संगठन धर्म के नाम पर आतंक को उचित नहीं मानता। इस्लाम अपने विस्तार के लिये हिंसा का भी समर्थन करता है। कुछ इस्लामिक देशों में ईश निंदा कानून जैसे घोर अमानवीय कानून भी खुले आम मान्यता प्राप्त हैं। किन्तु दुनियां की कोई अन्य विचार धारा इस प्रकार के...
CSE releases new report on tracking and reporting air pollution under the National Clean Air Action Plan (NCAP) at Anil Agarwal Dialogue 2020

CSE releases new report on tracking and reporting air pollution under the National Clean Air Action Plan (NCAP) at Anil Agarwal Dialogue 2020

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The National Clean Air Programme (NCAP) has completed a year, at the end of which 122 non-attainment cities have been asked to reduce particulate pollution by 20-30 per cent by 2024 from 2017 levels – they are expected to achieve an annual reduction of at least 6 per cent per year to meet the target. Says Anumita Roychowdhury, executive director, research and advocacy, CSE: “The cities are expected to immediately begin reporting on their annual progress; but for that, they must know the methods and standard operating procedures for such reporting. How will cities know if their pollution levels are rising or declining? This is what our report tries to address.” Roychowdhury was speaking at the release of CSE’s new report -- Breathing Space: How to track and report air pollution under ...
Raising RTI fees in MP – RTI fees and payment-mode should be uniform in complete country

Raising RTI fees in MP – RTI fees and payment-mode should be uniform in complete country

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It refers to reports about Madhya Pradesh government raising RTI fees from present rupees 10 to rupees 100 with additional raised fees for filing First Appeals and Second Appeals at rupees 500 and 1000. But RTI fees cannot be more than rupees 50 according to court-verdict. Rather Department of Personnel and Training (DoPT) should notify that RTI fees and payment-mode should be uniform for all states and Competent Authorities. Earlier several Competent Authorities and states had fixed abnormally high RTI fees at rupees 500 according to power given to them under sections 27 and 28 of RTI Act. But negligible RTI fees of just rupees 10 fixed long back in the year 2005 by DoPT has lost relevance being one of the reasons for misuse of RTI Act. Uniform RTI fees of rupees 50 inclusive of cop...
कैसे कोई कंपनी  छूने लगती हैं बुलंदियों को

कैसे कोई कंपनी  छूने लगती हैं बुलंदियों को

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निश्चित रूप से हम सबने देश की कॉरपोरेट संसार की प्रमुख कंपनियों जैसे रिलायंस, टाटा, बिड़ला, विप्रो, एचसीएल वगैरह के नाम सुने हैं। पर जरा बताइये कि हमसे कितने लोगों ने क्वैस कोर्प का नाम सुना है?  माफकीजिए कि क्वैस कोर्प के नाम और काम से बहुत कम लोग परिचित  हैं। पर यह असाधारण कंपनी के रूप में उभरी है। इसने तमाम बड़ी स्थापित कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। यहां पर बात मुनाफे की नहीं हो रही है।बात हो रही है  कि देश में किस कंपनी के पास सर्वाधिक मुलाजिम है। क्वैस मुलाजिमों की संख्या के स्तर पर निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी के रूप में उभरी है। अब तो आप मानेंगे कि यह कोई सामान्य कंपनी नहींहै। फिलहाल इसके देश भर में 3 लाख 85 हज़ार कर्मी हैं। यह कोई  छोटा आंकड़ा तो नहीं है। दरअसल क्वैस निजी क्षेत्र की एमेजन से लेकर स्वैगी जैसी तमाम कंपनियों को उनके उपयुक्त कर्मचारी उपलब्ध कराती है। येकर्मी विभिन्न...