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Deepika Padukone rising for social causes

Deepika Padukone rising for social causes

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It is good that fully active professional celebrity Deepika Padukone at peak of her youth and professional career has become sensitive to social causes where she went at Jawaharlal Nehru University (New Delhi) on 07.01.2020 to express solidarity with protesting students against recent violence in the campus by unidentified persons. She should better utilize her celebrity-status for guiding JNU students for concentrating more on studies as students rather than misusing the campus for anti-national activities and rising as future politicians. But a curious question is why she chose JNU as her entry-point for social causes. She could even do so in raising voice for increasing crimes against women. She should have joined public-protests against recent episode of rape-cum-murder of Dr Priyan...
How FREE KASHMIR posters allowed at Mumbai during protests on JNU violence

How FREE KASHMIR posters allowed at Mumbai during protests on JNU violence

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Maharashtra Government is answerable for not immediately arresting the girl carrying big FREE KASHMIR posters at Gateway of India on 06.01.2020 during protest against violence by unidentified masked persons at Jawaharlal Nehru University (New Delhi) on 06.01.2020. Violence cannot be held justified. But Maharashtra Chief Minister while comparing the incident at JNU as a sort of repeat of Jaliawala Bagh incident in British regime, failed to take strict action against those displaying objectionable posters at Gateway of India. While delhi Police is probing attack on incidents by unidentified persons at JNU, Mumbai Police should probe how anti-national posters could so openly be displayed at Gateway of India.   SUBHASH CHANDRA AGRAWAL
भव्य राम मंदिर निर्माण  की ओर बढ़ते कदम

भव्य राम मंदिर निर्माण की ओर बढ़ते कदम

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  राम मंदिर पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर निर्माण हेतु सरगर्मियां तेज़ हो गयी हैं। न्यायालय ने तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है। अब ट्रस्ट में कौन कौन व्यक्तिसदस्य होंगे एवं राम मंदिर का पुजारी कौन होगा इस पर गतिविधियां पूरे उफान पर हैं। राम मंदिर आंदोलन में अहम किरदार रही विश्व हिन्दू परिषद चाहती है कि राजनीतिक लोगों का ट्रस्ट में ज़्यादा हस्तक्षेप न रहे। इसके साथ ही विहिप दलित पुजारी की पैरवी भी कर रही है। इन सबके बीच अमित शाह ने चार माह में भव्य राम मंदिर निर्माण की बात कहकर इस विषय पर सरकार की प्रतिबद्धता को सार्वजनिक कर दिया है। चूंकि राम मंदिर के विषय पर दायर सारी याचिकाएं अब खारिज हो चुकी हैं इसलिए किसी भी तरह की कोई कानूनी अड़चन अब आड़े नहीं है। एक ओर रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य रामविलास वेदान्ती अयोध्या को अन्तराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में देखना ...
Supreme Court strengthens RTI Act by bringing CJI-office under RTI Act

Supreme Court strengthens RTI Act by bringing CJI-office under RTI Act

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Five-member Constitution Bench of Supreme Court headed by the Chief Justice of India on 13.11.2019 gave a land-mark verdict (Civil Appeal 2683 of 2010) dismissing appeal by its own CPIO thus holding office of Chief Justice of India under RTI Act, added yet other milestone in an era requiring transparency. Verdict coupled with another recent Supreme Court verdict dated 17.09.2019 (Civil Appeal 9828 of 2013) declaring DAV College Trust and Management Society public-authority under RTI Act because of substantial government-funding, will have far reaching positive implications where it has set an example for many such bodies affecting day-to-day public-life till now resisting to be under purview of RTI Act. Bringing more bodies affecting day-to-day public-life under RTI Act Earlier Centr...
गडकरी जी : ट्रैफिक जाम से निजात दिलवाओ  शहरों को

गडकरी जी : ट्रैफिक जाम से निजात दिलवाओ  शहरों को

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आज के दिन हमारे  देश का शायद ही कोई  छोटा-बड़ा शहर या महानगर बच गया हो, जो दिन भर ट्रैफिक जाम से नहीं जूझ रहा होता है। दिल्ली से लेकर देश कीआई टी  राजधानी बंगलूरू, और आर्थिक राजधानी मुंबई से लेकर पटना, रांची और लखनऊ, कानपुर आदि तक सभी शहरों की सड़कें आज भारी जाम से त्रस्त हैं। किसी केसमझ ही नहीं आ रहा कि सारे देश में  जाम की समस्या अचानक इतनी विकट कैसे हो गई?  आखिर, हालात ही क्यों इस हद तक बिगड़ने दिए गये। गाड़ियां जिस तरहरेंग रही होती हैं लगता है कि पैदल चलना ही ज्यादा बेहतर है। पर अफ़सोस यह है कि पैदल यात्री चलें भी तो कहा चलें । या तो फुटपाथ ही नहीं हैं और जहाँ हैं भी, वेखोमचों, सब्जी वालों के ठेलों से भरे पड़े हैं। 10-15 साल पहले तक बंगलुरु को देश का आदर्श शहर माना जाता था । मौजूदा हालत यह है कि यहां तो एयरपोर्ट से ले कर शहर के किसी भी मुहल्ले की ओर जानेपर जाम ही जाम मिलता है । एयरपोर्ट जान...
एक देश – अनेक भाषाएँ – एकात्म भाषाएँ

एक देश – अनेक भाषाएँ – एकात्म भाषाएँ

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कुछ दिनों पूर्व गृहमंत्री श्री अमित शाहने कह दिया एक देश, एक भाषा और यह एक विवादका विषय बन गया। मुझे लगा कि इस पूरी चर्चामेंतकनीकीकी भूमिका भी है, उसकी चर्चा करूँ। यह है संगणकीय (कम्प्युटर) तकनीक। संयोगसे यह विषय भी शाहके गृहमंत्रालयका हिस्सा है। हम एक राष्ट्र, एक भाषाका नारा क्यों लगाते हैं? क्योंकि एक स्वतंत्र राष्ट्रके रूपमें आज भी हम विश्वको यह नही बता पाते कि हमारी राष्ट्रभाषाकौनसी है? फिर वैश्विक समाज अंग्रेजीको हमारे देशकी de facto भाषा मानने लगता है। उनकी इस अवधारणाकी पुष्टि हम भारतीय ही करते हैं।जब दो भारतीय व्यक्ति विदेशमें एक दूसरेसे मिलते हैं तब भी अंगरेजीमे बात करते है। देशके अंदर भी कितने ही माता- पिता जब अपने बच्चोंकेसाथ कहीं घूमने जा रहे होते हैं तब उनके साथ अंगरेजीमें ही बोलते हैं। ये बातें देशके गृहमंत्रीको अखर जायें और वह सोचे कि काश हमारे देशकीएक घोषित राष्ट्रभाषा हो...
अब गरीबी नहीं, अमीरी समस्या है

अब गरीबी नहीं, अमीरी समस्या है

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देश की प्रति व्यक्ति आय मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़कर 10,534 रुपये महीना पहुंच जाने का अनुमान है। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में मासिक प्रति व्यक्ति आय 9,580 रुपये थी। प्रति व्यक्ति औसत आय का बढ़ना देश की समृद्धि का स्वाभाविक संकेत है। आम आदमी की औसत आय का बढ़ना हो या देश अरबपतियों-करोडपतियों की संख्या का बढ़ना है, इन स्थितियों के बीच ऐयाशी, प्रदर्शन एवं वैभवता के अतिशयोक्तिपूर्ण खर्च की विकृत मानसिकता का पनपना नैतिक एवं चारित्रिक गिरावट कारण भी बन रही है। समस्या दरअसल गरीबी को समाप्त करने की उतनी नहीं, जितनी कि संतुलित समाज रचना को निर्मित करने की है। अमीरी का बढ़ना भी समस्या बन रहा तो गरीबी भी बड़ी समस्या है। यदि समय रहते समुचित कदम नहीं उठाए गए तो विषमता की यह खाई और चैड़ी हो सकती है और उससे राजनैतिक व सामाजिक टकराव की नौबत आ सकती है। भारत के अमीर और ज्यादा अमीर होते ...
तो अब भीड के हवाले करो रेप के गुनाहगारॉ को

तो अब भीड के हवाले करो रेप के गुनाहगारॉ को

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सोमवार को राज्य सभा में हैदराबाद में हुई दरिंदगी पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान श्रीमती जया बच्चन ने हैदराबाद की एक नवयुवती डाक्टर की गैंग रेप केबाद हत्या और कम्बल में लपेटकर शव जलाकर फेंकने के जघन्य कांड  पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अब तो यही उपाय बचा दिखता है कि रेप केगुनहगारों को बीच शहर में भीड के हवाले कर दिया  जाये। यह शायद व्यावहारिक न दिखे लेकिन पिछले सात सालों से निर्भया हत्या कांड  के बाद पुलिस, प्रशासनऔर न्यायपालिका का भी जो रवैया रहा है, उसको देखते हुये शायद यह भावना वर्तमान में आम जन की भावना के करीब लगती है। दिल्ली में करीब सात साल पहले निर्भया रेप केस के कारण देश दहल गया था। तब उसके गुनहगारों को फ़ासी पर लटकाने की  देशव्यापी माँग हुई। कोर्ट ने उन्हें फाँसी की सज़ा दे भी दी, पर वे अब भी जेल में  सुरक्षित हैं और सरकारी खर्चे पर आराम की जिन्दगी जी रहे ह...
Parents of three boys killed in illegal bike-ride responsible rather than Delhi Police

Parents of three boys killed in illegal bike-ride responsible rather than Delhi Police

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It is indeed regretful that Delhi Police is being unnecessarily targeted for death of three boys killed near Turkman Gate in Delhi on night of 30.11.2019 when their speeding bike hit a pole during their joy-ride. It is significant that the three boys broke all traffic-rules by having three riders on a bike that too all without helmets and overspeed. It may also be possible that the killed boys might have been minors. Fault lied with parents of the three killed boys who did not care to control their children for such unlawful scooter-ride. Delhi witnesses havoc created by bikers on busy Delhi roads including in high security-zone of Leyton Delhi with parents enjoying driving-skill of their children through all traffic-rules. Higher authorities in Delhi should issue necessary notificat...
क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

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हाल ही में रामजन्मभूमि पर आए निर्णंय के बाद देश के बहुसंख्यक मुसलमानों ने जिस शांति और सदभाव का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। सारी आकांक्षाओं को निर्मूल करते हुए, अल्पसंख्यक समुदाय ने इस फैसले के विरूद्ध कोई भी उग्र प्रदर्शन या हिंसक वारदात न करके, ये बता दिया है कि साम्प्रदायिक वैमनस्य समाज में नहीं होता बल्कि राजनैतिक दलों के दिमाग की साजिश होती है। कोई भी दल इसका अपवाद नहीं है। इतिहास में इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि अगर ‘रामजन्भूमि मुक्ति आन्दोलन’ को राजनैतिक रंग न दिया जाता, तो ये मामला तीन दशक पहले सुलझने की कगार पर था। दरअसलआम आदमी को अपनी रोजी, रोटी और रोजगार की चिंता होती है। ये चिंता भारत के बहुसंख्यक लोगों को आजादी के 72 वर्ष बाद भी सता रही है। जब पेट भरे होते हैं, तब धर्म और राजनीति सूझती है। जो राजसत्ताऐं अपनी प्रजा की इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पातीं, वही धार्मिक उ...