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दिल्ली में प्रदूषण क्यों?

दिल्ली में प्रदूषण क्यों?

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जो लोग दिल्ली में 2008 के पहले से रह रहे हैं, वो जानते हैं कि इससे पहले दिल्ली में कभी इस तरह से धुआं नहीं भरा करता था... अगर कभी थोड़ा बहुत होता भी था, तो अधिक से अधिक 1-2 दिन के लिए, जबकि किसान पहले भी पराली जलाते ही थे। 2008 के बाद अचानक ऐसा क्या हो गया कि दिल्ली प्रतिवर्ष गैस चेंबर बनने लगी ? इस बात को समझने के लिए इन 5 बातों को जानना बहुत आवश्यक है - 1. यूट्यूब पर सर्च करें तो पाएंगे कि 2007 के बाद अचानक मीडिया के एक विशेष वर्ग ने पंजाब और हरियाणा में घटते भूजल स्तर पर स्टोरीज़ की भरमार कर दी थी, NDTv इसमें सबसे आगे था... बताया जाता था कि कैसे पंजाब और हरियाणा में धरती के अंदर का पानी सूखता जा रहा है और किसान संकट में है। 2. इन समाचारों से पैदा दबाव के बहाने पंजाब और हरियाणा सरकारों ने यह कहते हुए अप्रैल में धान बोने पर प्रतिबंध लगा दिया कि इस समय धान बोने के लिए किसान बड़े-ब...
मुसलमानों के कर्णधार कब हक देंगे औरतों और पसमांदाओं को

मुसलमानों के कर्णधार कब हक देंगे औरतों और पसमांदाओं को

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भारत में औरतों को  जीवन के हर क्षेत्र में समता दिलवाने का सपना पूरा होने में अभी वक्त लगेगा।  हालांकि गुजरे कुछ दशकों के दौरान औरतों ने बहुत सारे अवरोधों को पार भी किया है। वे तमाम क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज भी करवा रही हैं। पर मुसलमान औरतों के आगे बढ़ने की रफ्तार बहुत ही धीमी है। उन्हें बुर्के के अंदर कैद रखने के साथ-साथ ट्रिपल तलाक जैसे  मुद्दों ने आगे ही नहीं बढ़ने दिया। तलाक वाला मसला तो अब कानूनी तौर पर हल हो गया है पर अब भी उन्हें कदम-कदम पर कठमुल्लों के फैसलों के आगे झुकना पड़ रहा है। उदाहरण के रूप में केरल  को छोड़कर अधिकतर राज्यों में मुसलमान औरतें मस्जिद में जाकर नमाज नहीं पढ़ सकती। हालांकि कुरआन में उन्हें मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने की मनाही का कहीं उल्लेख तक नहीं है। कुरआन में औरतें को कम से कम 59 जगहों पर मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने की बात मिलती है।  वरिष्ठ लेखक जि...
परंपराएँ हैं तो हम हैं…!

परंपराएँ हैं तो हम हैं…!

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इसे आप मन पर अंकित संस्कारों की अमिट छाप कहें या मूल की ओर लौटने की स्वाभाविक मानवीय प्रकृति, त्योहारों के आते ही मन-प्राण अकुलाने लगता है, चित्त की सारी वृत्तियाँ गाँव-घर की ओर अभिमुख हो उठती हैं, शहरों की आबो-हवा से दूर गाँव की गलियों में मन-प्राण ठौर ढूंढ़ने लगता है | पहले मैं सोचा करता था कि आख़िर क्यों कोई आजीवन देश-परदेश रहने के बाद भी अपना अंतिम समय अपनी माटी, अपने परिवेश, अपने लोगों के संग-साथ ही बिताना चाहता है? अब समझ में आया कि माटी माटी को पुकारती है; हर पल हमें हमारा मूल पुकारता रहता है, भीतर बहुत भीतर अपना कोई आवाज़ दे रहा होता है|यह बार-बार लौटने की, मूल की ओर, जड़ों की ओर लौटने की प्रवृत्ति है कि छूटे न छूटतीं! और गाँव के वे खेत-खलिहान, कूल-कछार, ताल-तलैया त्योहारों के आते ही हमारी स्मृतियों में नए सिरे से आकार लेने लगते हैं, नितांत नए संदर्भों और अर्थों के साथ| एक-एक करक...
आधुनिक भारत के शिल्पी थे सरदार पटेल

आधुनिक भारत के शिल्पी थे सरदार पटेल

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भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन एवं आजादी के बाद आधुनिक भारत को वैचारिक एवं क्रियात्मक रूप में एक नई दिशा देने के कारण सरदार वल्लभभाई पटेल ने राजनीतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण, ऐतिहासिक एवं स्वर्णिम स्थान प्राप्त किया। वास्तव में वे आधुनिक भारत के शिल्पी थे। भारत की मादी को प्रणम्य बनाने एवं कालखंड को अमरता प्रदान करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी अखण्ड भारत को लेकर जितनी बड़ी कल्पनाएं थी, जितने बड़े सपने थे, उसी के अनुरूप लक्ष्य बनाये और उतने ही महत्वपूर्ण कार्य किये। उनके कठोर व्यक्तित्व में बिस्मार्क जैसी संगठन कुशलता, कौटिल्य जैसी राजनीति सत्ता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अब्राहम लिंकन जैसी अटूट निष्ठा थी। जिस अदम्य उत्साह, असीम शक्ति एवं कर्मठता से उन्होंने नवजात भारत गणराज्य की प्रारम्भिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र पर वे एक अमिट आलेख बन गये। राजनीति...
सकारात्मक संकेत दे गई दीवाली

सकारात्मक संकेत दे गई दीवाली

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दीवाली का पर्व तो खुशी-खुशी देश ने मना ही लिया। कोई बड़ी  दुर्घटना नहीं हुई I इसने यह भी ठोस संकेत दे दिए कि अभी भी करोंड़ों हिन्दुस्तानियों की जेब में औरबैंकों में अरबों रूपये का पर्याप्त पैसा है खरीददारी करने के लिए। इसलिए किसी तथाकथित “अर्थशास्त्री” का यह कहना कि मंदी के कारण दीवाली में खरीददारी नहीं हुई,सरासर गलत ही होगा। दीवाली से दो-तीन हफ्ते पहले तक सारे देश में यही वातावरण बनाया जा रहा था कि कारों की बिक्री बिल्कुल बैठ गई है। पर धनतेरस कात्योहार खुशियां लेकर आया। इस दौरान हजारों कारों की बिक्री हुई। दिल्ली-एनसीआर में ही मर्सिडीज बेंज और बीएमड्ब्ल्यू जैसी लक्जरी कारें सैकड़ों की संख्या में बिकीं।अगले कुछ दिनों के बाद जर्मन की चांसलर एंजेला मर्केल भारत आ रही है। उन्हें जब इस  आंकड़े के संबंध में पता चलेगा कि उनके देश के दो कार निर्माता भारत मेंभी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उन्हें ...
इस्लामी कलंक का सफाया

इस्लामी कलंक का सफाया

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‘इस्लामिक स्टेट’ के सरगना अबू बकर अल-बगदादी की हत्या करके अमेरिका ने एक अमेरिका महिला के साथ हुए बलात्कार और उसकी हत्या का बदला तो ले लिया लेकिन क्या इससे विश्व में फैला इस्लामी आतंकवाद खत्म हो जाएगा ? उसामा बिन लादेन तो बगदादी से भी ज्यादा खतरनाक और कुख्यात था लेकिन उसका हत्या से क्या आतंकवाद में कोई कमी आई ? इस्लाम के नाम पर चलनेवाले आतंकवाद को रोकने के लिए कुछ और भी बुनियादी कदम उठाने पड़ेंगे। सबसे पहले तो इस्लामी जगत को यह समझना होगा कि आतंकवाद इस्लाम का सबसे बड़ा कलंक है। इस्लाम की जितनी बदनामी आतंकवाद के नाम पर हुई है, किसी अन्य मजहब या संप्रदाय की नहीं हुई है। आपके नाम में यदि कोई अरबी या फारसी का शब्द आ जाए, बस इतना ही काफी है। आप पर शक की निगाहें उठने लगती है। ऐसा क्यों है ? क्योंकि सारे दहशतगर्द अपने कुकर्म का औचित्य कुरान की आयातों के आधार पर ठहराते हैं। वे दावा करते हैं कि वे ज...
CSE releases analysis of post-Diwali air in Delhi-NCR

CSE releases analysis of post-Diwali air in Delhi-NCR

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Centre for Science and Environment (CSE) has analysed real time data for Delhi and the towns in the National Capital Region (NCR) -- including Gurugram, Faridabad, Noida and Ghaziabad -- to show how the Diwali night has ushered in the season’s first severe pollution peak due to the bursting of firecrackers. This has undone the comparatively cleaner trend achieved so far in the September 15 to October 27 period. Says Anumita Roychowdhury, executive director-research and advocacy, CSE: “While harsher winter conditions are yet to set in and the weather during the period of analysis (September 15 to October 27) has remained relatively favourable (including a delayed monsoon), several ongoing systemic actions and preventive emergency measures had also contributed to prevent an early onset...
ये धुंधली तस्वीर और भटकते रास्ते

ये धुंधली तस्वीर और भटकते रास्ते

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भाजपा की दृष्टि से कहे तो यह अत्यंत निराशाजनक स्थिति है। बस चंद महीनों पूर्व जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने वाली भाजपा अपने दोनों महारथियों नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कुशल नेतृत्व व उपलब्धियों की लंबी सूची के बावजूद अपने गढ़ महाराष्ट्र व हरियाणा में किए गए दावों व एग्जिट पोल के अनुमानों से खासे पीछे रह गए। हालांकि दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार तो बन गयी किंतु यह पार्टी व संघ परिवार में बढ़ रही गुटबाजी, सत्ता के अवगुण (अहम, भ्रष्टाचार व अय्याशी) और जमीनी सच्चाई को नकारने की जिद के साथ ही बाहरी लोगों को जबर्दस्ती पार्टी में ठूंसने व अपने कद्दावर नेताओं को हाशिए पर धकेलने की कुटिल नीति के परिणाम है जो लोकसभा चुनावों से पूर्व मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिले थे और कुछ दिनों बाद झारखंड व दिल्ली के चुनावों में भी देखने को मिलेंगे। हम इन दिनों एक नए संघ परिवार के दर्श...

भारतीय आबादी की संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग 

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एक नई परियोजना के तहत देश के विभिन्न समुदाय के लोगों की संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग की गई है। भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा शुरू की गई इस पहल के अंतर्गत 1008 लोगों के जीनोम का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों के निदान, कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के उपचार, नई दवाओं के विकास और विवाह पूर्व भावी जोड़ों के अनुवांशिक परीक्षण में किया जा सकता है। इंडिजेन नामक यह परियोजना इस वर्ष अप्रैल में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा शुरू की गई थी। इस परियोजना का संचालन सीएसआईआर से संम्बद्ध जीनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली एवं कोशकीय और आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने किया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने इस परियोजना के बारे में बतात...

Black-mail money-involving politics alive in Haryana and Maharashtra with Jannayak Janta Party (JJP) and Shiv Sena in role of king-maker or becoming king

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It refers to election-results of state-assemblies of Haryana and Maharashtra where ruling BJP failed to gain absolute majority at its own thus being compelled to dance to tune of Jannayak Janta Party and Shiv Sena both of these regional parties in a position to enable forming government with either BJP or non-BJP parties. Social media is flooded with posts of a real Dhantares for smaller parties and independents anticipating big role of money in catching their support for forming government.    Such black-mail politics should be done away by electing Chief Minister simultaneously with Speaker and Deputy Speaker by secret and compulsory vote through EVMs equipped with VVPAT on nominations signed by at least 34-percent members with abstaining members losing right to vote in the House thou...