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Unnecessary controversy on idea to honour Veer Savarkar with Bharat Ratna

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It refers to some leaders from opposition raising unnecessary controversy on poll-manifesto of Maharashtra BJP promising Bharat Ratna for Veer Savarkar. It is noteworthy that postal-stamp on Veer Savarkar was issued by none other than Congress government and he was praised as Remarkable Son of India by none other than the then Prime Minister Indira Gandhi. Now Congress is countering that Veer Savarkar was good but his ideology of Hinutva was wrong. Bharat Ratna honours are not done based on ideology of honoured ones, but honours are done according to contribution of honoured ones to the nation. Congress-led governments did great mistake by forgetting national icons who laid down their lives for freedom of India. Instead those earlier governments honoured family-members of the family rul...

Festival-gifts are social-evil and bribes : Need to be banned with riders before Diwali

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Festival-gifts like on Diwali to those in public and public sector are no less than bribes. These are given to persons in legislature, bureaucracy and even in judiciary also, with most of them accepting these having expectation in advance. Quoting from Hindu code in Manusmriti, the then President of India Dr APJ Abdul Kalam Kalam on his retirement-eve rightly analyzed that gift coming with a purpose causes person losing their personality greatly. Central government should immediately much before Diwali and forthcoming marriage-season issue a strict warning-order under Prevention of Corruption Act against giving and accepting any gifts by those being paid from public-exchequers. Both those gifting and accepting should be booked under relevant sections of Indian Penal Code. Central Vigila...

Ban sale of khoya prepared by unorganised sector in Delhi before festive season

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Consumption of khoya during festive-season of Diwali in Delhi much exceeds all probable capacity after procurement of milk, leading to sale and use of adulterated khoya for preparation of sweets. Central government should take all possible steps for heavy increase in production of khoya by organised sector and co-operative giants including like Mother Dairy, Amul, Saras, Delhi Milk scheme, Vita, Verka, Sudha etc. Mother dairy and Amul having appreciable market-share in Delhi should also arrange door-delivery of khoya for bulk-purchasers on advance-booking in a routine manner. Mother Dairy markets khoya. But because of extra-ordinary fat-content, its product is not only costlier but is much hard to use. Mother Dairy should decrease fat-content in khoya to make it softer with its price co...

Too much variants of a car-model must not be allowed: Standardize consumables in car-industry:

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Too many variants of any car-model confuse customers. There may be just two variants apart from the third with automatic gears, one basic Lx for economy customers and the other Vx with all company-fitted extra accessories and luxuries for affording customers. There is no sense in having too many confusing variants like Lx, Lxi, Vx, Vxi for same model. India being biggest consumer-market amongst nations with free economy, it has certainly power to dictate its consumer-friendly terms for global market-leaders collaborating car-manufacture in India. Union government should induce standardization of common accessories like tyres and batteries so that same parts may be used in different models of cars produced by various car-manufacturers. It will heavily bring down cost of consumables throu...
प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

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"आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जगता है और ना ही सोता है।"  आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर मंथन चरम पर है तो रामधारी सिंह दिनकर जी की ये पंक्तियाँ बरबस ही याद आ जाता है । वैसे तो कुछ समय पहले से विश्व के अनेक देश सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठा चुके हैं और आने वाले कुछ सालों के अंदर केवल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का ही उपयोग करने का लक्ष्य बना चुके हैं। भारत इस लिस्ट में सबसे नया सदस्य है। जैसा कि लोगों को अंदेशा था, उसके विपरीत अभी भारत सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक को कानूनी रूप से बैन नहीं किया है केवल लोगों से स्वेच्छा से इसका उपयोग बन्द करने की अपील की है। अच्छी बात यह है कि लोग जागरूक हो भी रहे हैं और एक दूसरे को कर भी रहे हैं। अगर दुनिया भर के देशों द्वारा सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन के पैटर्न को द...
उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य है: नयी WHO रिपोर्ट

उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य है: नयी WHO रिपोर्ट

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नयी वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2019 के अनुसार, टीबी नियंत्रण में जो सफलता मिली है, वह सराहनीय तो है पर रोग-उन्मूलन के लिए पर्याप्त नहीं है. जब टीबी की पक्की जांच और पक्का इलाज मुमकिन है तो 2018 में क्यों 15 लाख लोग टीबी से मृत हुए और 1 करोड़ को टीबी रोग झेलना पड़ा? 2030 तक टीबी उन्मूलन के लिए ज़रूरी है कि 2020 तक टीबी के नए रोगी दर में सालाना 20% गिरावट आये और टीबी मृत्यु दर में 35% गिरावट. विश्व में सिर्फ एक छेत्र है जो 2020 टीबी नियंत्रण लक्ष्य पूरे करने की ओर अग्रसर है: यूरोप. 7 ऐसे देश हैं जहाँ टीबी का दर अत्याधिक है पर सतत प्रयास से वह भी 2020 लक्ष्य पूरे करने की ओर प्रगति कर रहे हैं: कीन्या, लिसोथो, म्यांमर, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंज़ानिया और ज़िम्बाब्वे. बाकि पूरी दुनिया 2020 लक्ष्य से फ़िलहाल बहुत पिछड़ी हुई है. 2017 की तुलना में, 2018 में 1 लाख अधिक बच्चे टी...
कॉलेज तो खोला नहीं, क्यों खोल रहे विश्वविद्लाय केजरीवाल

कॉलेज तो खोला नहीं, क्यों खोल रहे विश्वविद्लाय केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता से अब इस तरह के वादे करने लगे हैं जिन्हें सुनकर गुस्सा कम और हंसी ज्यादा आती है। दिल्ली में विधानसभाचुनाव से ठीक पहले वे यहां पर दो नए विश्वविद्लायों को खोलने की घोषणा कर चुके है। केजरीवाल पहले भी लगातार दिल्ली के युवाओं  को फुटबाल, क्रिकेट, हॉकी समेतदूसरे खेलों में स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की डिग्री  देने के सब्जबाग दिखाते रहे हैं। यानी यहां के नौजवान भावी विश्वविद्लाय में उपर्य़ुक्त विषयों में डिग्री ले सकेंगे।जबकि, दूसरा विश्वविद्यालय यह वादा करके खोला जा रहा है ताकि युवाओं को  उद्यमिता व कौशल विकास की पढ़ाई करवाई जा सके। अब सवाल यह है कि जिसकेजरीवाल सरकार ने अपने लगभग पांच वर्ष के कार्यकाल में दिल्ली विश्वविद्लाय में एक भी नया कॉलेज नहीं खोला, वह अचानक से दो विश्वविद्लाय  कहां से खोलेगी ? इनके लिए फैक्ल्टी की व्यवस्था कैसे होगी? ...
विश्व सरकार पर विचार करने के लिए यूएनओ दिवस स्वर्णिम अवसर

विश्व सरकार पर विचार करने के लिए यूएनओ दिवस स्वर्णिम अवसर

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24 अक्टूबर - संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर विशेष लेख भावी विश्व संसद का पूरा ढांचा यूएनओ के रूप में 74 वर्ष पहले से सक्रिय है! विश्व के प्रत्येक वोटर को अपने वोट की शक्ति को पहचान कर विश्व सरकार की बनाने की घोषणा करने वाली अपने-अपने देश की राजनैतिक पार्टी को ही अपना कीमती वोट देकर समर्थन देना चाहिए! - विश्वात्मा भरत गांधी विश्व सरकार पर विचार करने का संसार के प्रत्येक वोटर के लिए एकजुट होने के लिए यूएनओ दिवस स्वर्णिम अवसर है। मानव सभ्यता के इतिहास में बीसवीं सदी सबसे बड़ी खूनी सदी रही है। - डा. कौफी अन्नान अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री फ्रैन्कलिन रूजवेल्ट ने 1945 में विश्व के नेताओं की एक बैठक बुलाई जिसकी वजह से   24 अक्टूबर, 1945 को विश्व की शान्ति की सबसे बड़ी संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ (यू.एन.ओ.) की स्थापना हुई। प्रारम्भ में केवल 51 देशों ने ही संयुक्त राष्ट्...
राम द्रोहियों को सद्बुद्धि के साथ मंदिर की ओर लौटाएं भगवान : विनोद बंसल

राम द्रोहियों को सद्बुद्धि के साथ मंदिर की ओर लौटाएं भगवान : विनोद बंसल

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राम मंदिर निर्माण के लिए हुआ मंगल कामना पूर्ति यज्ञ    नई दिल्ली। अक्तूबर 20, 2019। अयोध्या की पावन नगरी में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण तथा राम द्रोहियों को सद्बुद्धि देने हेतु आज राम मंदिर निर्माण मंगल कामना पूर्ति यज्ञ का आयोजन किया गया। चारों वेदों के पवित्र मन्त्रों से दी गई आहूतियों के माध्यम से प्रार्थना की गई कि हे प्रभु! अयोध्या में जन्मभूमि पर मंदिर को भव्यता देने में रह गईं कुछ बाधाओं को और अबिलम्ब दूर कर जन-जन की आकांछाओं को पूरा करें। यज्ञोपरांत मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि अब तक हम भारतीयों का यह दुर्भाग्य ही तो था कि राम के इस राष्ट्र में उन्हीं को विराट मंदिर से निकाल कर टाट के टेंट में रहने को मजबूर किया गया। गत लगभग 500 वर्षों के सतत् संघर्ष के बाद अब उस कालिमा के छंटने का समय निकट है।...
दिवाली पर क्यों न खाएं मिठाईयां

दिवाली पर क्यों न खाएं मिठाईयां

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दीपोत्सव के आने में जब एक हफ्ता भी शेष नहीं बचा है, तब हमारे यहां जिस पैकेट बंद दूध को करोड़ों लोग पीते है उसकी गुणवत्ता को लेकर आई एक रिपोर्ट सचमुचमें डराने वाली हैं। उसके निष्कर्षो को देखकर लगता है कि करोड़ों हिन्दुस्तानी दूध के नाम पर जहर ही पीने को मजबूर हैं। चूंकि आलोक पर्व पर देश भर के हलवाईऔर घरों में भी पैकेट बंद दूध से ही ज्यादातर मिठाईयां  बनाई जाती हैं I इसलिए अब लग रहा है कि मिठाई खाना तो खतरे से खाली नहीं रहा है। साथ ही यह भीलग रहा है कि जिस मिठाई से हम-आप दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश का भोग लगाते हैं, वह भी दूषित हो गई है। यह सच में बेहद दुखद  स्थिति है। खाद्य नियामकभारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार (एफएसएसएआई) की ओर से दूध की गुणवत्ता पर किए गए एक ताजा अध्ययन में पाया गया है कि जहां खुले दूध के 4.8फीसदी सैंपल में खामियां पाई गईं, वहीं पैकेट बंद दूध के 10 फीसदी से अधिक सैंपलो...