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बुराईरूपी रावण का अंत जरूरी

बुराईरूपी रावण का अंत जरूरी

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दशहरा बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक पर्व है, आज भी अंधेरों से संघर्ष करने के लिये इस प्रेरक एवं प्रेरणादायी पर्व की संस्कृति को जीवंत बनाने की जरूरत है। प्रश्न है कौन इस संस्कृति को सुरक्षा दे? कौन आदर्शो के अभ्युदय की अगवानी करे? कौन जीवन-मूल्यों की प्रतिष्ठापना मे अपना पहला नाम लिखवाये? बहुत कठिन है यह बुराइयों से संघर्ष करने का सफर। बहुत कठिन है तेजस्विता की यह साधना। आखिर कैसे संघर्ष करें घर में छिपी बुराइयों से, जब घर आंगण में रावण-ही-रावण पैदा हो रहे हो, चाहे भ्रष्टाचार के रूप में हो, चाहे राजनीतिक अपराधीकरण के रूप में, चाहे साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाने वालों के रूप में हो, चाहे शिक्षा, चिकित्सा एवं न्याय को व्यापार बनाने वालों के रूप में। विजयादशमी-दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह हर साल दिपावली के पर्व से 20 दिन पहले आता है। लंका के असुर राजा ...
प्रधानमंत्री के ‘जल शक्ति अभियान’ को कैसे सफल बनाये?

प्रधानमंत्री के ‘जल शक्ति अभियान’ को कैसे सफल बनाये?

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देश में बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री जी के अति महत्वपूर्ण ‘जल शक्ति अभियान’ की शुरूआत जुलाई 2019 में की भी। जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और सबके लिए स्वच्छ पेयजल की आपूत्र्ति करना है। ‘स्वच्छता अभियान’ व ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’  की ही तरह यह भी एक अति महत्वपूर्णं कदम है। जिसका क्रियान्वयन करने में देश के हर नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी और राजनेताओं को ईमानदारी और निष्ठा से सहयोग करना चाहिए। जिससे बढ़ते जल संकट से निजात पा सके। आजादी के बाद से आजतक यही होता आया है कि बड़ी-बड़ी योजनाऐं सद्इच्छा से और देश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से घोषित की जाती है। पर जैसा 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि, ‘‘दिल्ली से चले 100 रूपये में से केवल 14 रूपये ही खर्च होते हैं, शेष रास्ते में भ्रष्टाचार की बलि ...
अपने अंदर के रावण का परित्याग कर राम को जगाये

अपने अंदर के रावण का परित्याग कर राम को जगाये

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दस मुँह वाले रावण रूपी दस अवगुणों काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी का परित्याग करके अपने अंदर रामरूपी सद्गुणों को ग्रहण करना ही जीवन का परम ध्येय होना चाहिए।  सफलता के लिए ईश्वर को केवल मानो मत, जानने की कोशिश भी करो! आइए इस शुभ पर्व पर अपने जीवन को एक नया आयाम देने की शपथ लें - विश्वात्मा ग्लोबल सोल एक ही छत के नीचे हो अब सब धर्मों की प्रार्थना!   - प्रदीप कुमार सिंह दशहरा हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं तथा रामलीला का आयोजन होता है। दशहरे का उत्सव रखा गया है। दस मुँह वाले रावण रूपी दस प्रकार के पापों-काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आल...
Developing famous Kalkaji Temple (New Delhi) and surroundings through CSR

Developing famous Kalkaji Temple (New Delhi) and surroundings through CSR

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South Delhi Municipal Corporation SDMC about a year back had announced that it was working on a dream-project of developing famous Kalkaji Temple and its surroundings in Delhi with help of some company under Corporate-Social-Responsibility(CSR) obligations. Since both private and public sector companies have to spend some percentage of their profits under CSR, it was not difficult to find some such company to spend about rupees 10.5 crores on the ambitious project without requirement of any funds for the project from public-exchequer. But there is still no indication on working of the project. Management of Kalkaji Temple should be run on lines of famous Tirupati Temple in South India where huge earnings by way of offerings and sale-resale of coconuts and other items of ...
Certificate of Appreciation by CBDT should be sent early and through Speed Post

Certificate of Appreciation by CBDT should be sent early and through Speed Post

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Central Board of Direct Taxes (CBDT) deserves compliments for motivating Income-Tax payers by sending Certificates of Appreciation to those contributing appreciably through tax-payment. But these certificates should be sent within say a fortnight of final assessment. Moreover sending the attractive colourful certificate only through e-mail is not sufficient, because very few Income Tax payers have facility of colour-printers. These Certificates should also be sent through WhatsApp and more importantly on an attractive laminated card-paper through Speed Post so that contributors to national economy may proudly display these Certificates at their residences or work-places after getting these framed. Then more and more people will be motivated for racing for contribution of national econom...
Reasons for recusal by judges should be made compulsory

Reasons for recusal by judges should be made compulsory

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It refers to media-reports (TOI 04.10.2019) mentioning that as many as five judges of Supreme Court recused themselves from hearing a case. Recusal by judges from cases is not uncommon. Earlier also a Supreme Court judge recused himself from the bench hearing an appeal challenging closure of politically sensitive Bofors case. A judge of Delhi High Court once recused herself from hearing a case where she herself issued notice to former President Pranab Mukerji after admitting a writ filed by some individual urging some contents of the book authored by the former President to be deleted. Recusal by judges from cases is not uncommon. Only recently a Supreme Court judge recused himself from the bench hearing an appeal challenging closure of politically sensitive Bofors case. Such recusal of...
Smaller post-offices made dumping-ground for issuing spoilt currency-notes

Smaller post-offices made dumping-ground for issuing spoilt currency-notes

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It refers to regretting aspect of Indraprastha Head Post Office (New Delhi) sending non-issuable spoilt and even multi-pieces currency-notes for issue to account-holders at Dariba Post Office in Delhi which presently also houses work-load of since closed Chandni Chowk post-office. It is significant that account-holders have to inform for cash-withdrawal one day in advance at Dariba post-office. I withdrew cash from my savings-account from Dariba post-office on 04.10.2019 after informing on the prior day. But I was shocked that badly spoilt currency-notes in smaller denomination of rupees 50 and 100 giving very bad smell were given to me out of which certain notes were taped because of being in two pieces. Even counting of such dirty notes was tough because notes were stuck with each oth...
भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! – विशात्मा (भरत गांधी)

भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! – विशात्मा (भरत गांधी)

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साक्षात्कार भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! - विशात्मा (भरत गांधी) अभी हाल ही में चैथी दुनिया के संवाददाता श्री शफीक आलम ने प्रख्यात राजनीतिक सुधारक विशात्मा (भरत गांधी) से वोटरशिप स्कीम पर कानून बनाने की मांग पर लम्बी बातचीत की। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश 8 प्रश्नों तथा उसके 8 उत्तरों के रूप में नीचे लिखे अनुसार प्रस्तुत हैं:- प्रश्न 1ः- पहले ये बताएं कि वोटरशिप स्कीम और यूनिवर्सल बेसिक इनकम में क्या फर्क है? उत्तर:- देखिए, प्रोफेसर जे. एस. मिल और कार्ल माक्र्स ये दोनों समकालीन थे। दोनों एक बात पर राजी थे कि राज्य गरीबों पर जुल्म ढा रहा है। माक्र्स कहते थे कि इस जुल्म को रोकने का तरीका ये है कि गरीबों को संगठित होकर राज्य पर कब्जा कर लेना चाहिए, लेकिन प्रोफेसर जे. एस. मिल ये कहते थे कि राज्य पर गरीब कब्जा कर लेंगे तो जुल्म दूसरों पर होने लगेगा...
अंधविश्वास एवं जादू-टोना की क्रूरताएं कब तक?

अंधविश्वास एवं जादू-टोना की क्रूरताएं कब तक?

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ओडीशा के गंजाम जिले के कुछ अंधविश्वासी लोगों ने वहां के छह बुजुर्ग व्यक्तियों के साथ जिस तरह का बर्ताव किया, उससे एक बार फिर यही पता चलता है कि हम शिक्षित होने एवं विकास के लाख दावे भले करें, लेकिन समाज के स्तर पर आज भी काफी निचले पायदान पर खड़े हैं। एक स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र एवं स्वस्थ जीवन के लिये जादू-टोना, अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और टोटकें बड़ी बाधा है। इनकी दूषित हवाओं ने भारत की चेतना को प्रदूषित ही नहीं किया बल्कि ये कहर एवं त्रासदी बनकर जन-जीवन के लिये जानलेवा भी साबित होते रहे हैं। कैसी विडम्बना है कि हम बात चाँद पर जाने की करते हैं या 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की, लेकिन हम जनजीवन को इन अंधविश्वासी त्रासदियों एवं विडम्बनाओं से मुक्त नहीं कर पाये हैं। खबरों के मुताबिक वहां गोपुरपुर गांव में तीन महिलाओं की मौत हो गई और सात बीमार थीं, तो वहां के कुछ लोगों ने यह मान लिया कि...
गाँधी संग्रहालय में झंडावंदन के साथ जय जगत 2020 का उद्घाटन

गाँधी संग्रहालय में झंडावंदन के साथ जय जगत 2020 का उद्घाटन

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"अहिंसा मेरे विश्वास का पहला लेख है। यह मेरे पंथ का अंतिम लेख भी है"।  महात्मा गांधी के ये शब्द आज भी हमारे दिलों में बसे हुए हैं। आज महात्मा गांधी के 150 वें जन्म वर्ष पर, जय जगत 2020 की शुरुआत महात्मा गांधी संग्रहालय से राज घाट, नई दिल्ली तक पैदल मार्च के साथ हुई। युवाओं और अहिंसा की शक्ति के साथ, नैतिकता और न्याय पर आधारित एक अहिंसक अर्थव्यवस्था, समाज, दुनिया की दिशा में काम करना संभव है जैसे संदेशों के साथ जय जगत यात्रा की शुरुआत हुई। अभियान के मुख्य पहलू अहिंसा में प्रशिक्षण, लोगों को एक साथ लाने और ग्लोबल मार्च है। गांधी पैदल मार्च की परंपरा में, जय जगत 2020 की यात्रा नई दिल्ली (भारत) से जिनेवा (स्विट्जरलैंड) तक के लिए एक वैश्विक मार्च आयोजित करने की है। यात्रा का पहला दिन एक सम्मेलन के साथ शुरू हुआ, जहां विभिन्न राज्यों और देशों से आए हुए लोगों ने भाग लिया। एस.एन. सुभराव, आचार्य ...