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वीर सावरकर का विरोध करने वाले कायर है.

वीर सावरकर का विरोध करने वाले कायर है.

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कांग्रेस और वामपंथी सहित सभी सेकुलरिस्ट पार्टियां विनायक दामोदर सावरकर का मूल्यांकन काफी संकुचित दायरे में करती है. वो सिर्फ वीर ही नहीं थे बल्कि वो महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, लेखक और कवि भी थे. कांग्रेस जब अंग्रेजों का सेफ्टी वल्व बनकर ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ लिया करती थी. जब भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी और नेहरू का  नामोनिशान नहीं था. जब कम्यूनिस्ट पार्टी, हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कहीं पैदा नहीं हई थी. उस वक्त, सावरकर भारत के सैकड़ो क्रांतिकारियों का फ्रेंड, गाईड और फिलोसोफर थे. सावरकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांति की आग फैला रहे थे, अभिनव भारत नामक गुप्त क्रांतिकारी दल की पहुंच और सक्रियता को बढा रहे थे. युवकों को क्रांति के लिए तैयार कर रहे थे. दूसरों की तरह वो भी पढ़ाई करने इंग्लैंड पहुंचे लेकिन वो ऐशोआराम की जिंदगी बसर कर बैरिस्टर नहीं बनना चाहत...
भारतीय संस्कृति के आदर्श ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ के विचार में है  विश्व की समस्याओं का समाधान

भारतीय संस्कृति के आदर्श ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ के विचार में है विश्व की समस्याओं का समाधान

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31 मई को महारानी अहिल्या बाई होल्कर की जयन्ती के अवसर पर विशेष लेख     (1) भारत सांस्कृतिक विविधता के कारण एक लघु विश्व का स्वरूप धारण किये हुए हैं। भारत की सांस्कृतिक विविधता ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का सन्देश देती है अर्थात सारी वसुधा एक विश्व परिवार है। भारत की महान नारी लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने लोक कल्याण की भावना से होलकर साम्राज्य का संचालन हृदय की विशालता, असीम उदारता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर बड़ी ही कुशलतापूर्वक किया। देश-विदेश में इस महान नारी की जयन्ती प्रतिवर्ष बड़े ही उल्लासपूर्ण तथा प्रेरणादायी वातावरण में मनायी जाती है। इस महान नारी की जयन्ती पर हमें उन्हीं की तरह अपने हृदय को विशाल करके उदारतापूर्वक सारी वसुधा को कुटुम्ब बनाने का संकल्प लेना चाहिए। भारत सरकार से मेरी अपील है कि वह लोकमाता अहिल्याबाई की जयन्ती 31 मई को राष्ट्रीय स्तर पर ‘वसुधैव कुटुम...
मोदी मंत्रिमंडल के मायने

मोदी मंत्रिमंडल के मायने

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नियति और कर्मो ने नरेंद्र मोदी को दूसरी बार भारत सरकार की कमान दी है। जिस प्रकार पिछले पांच बर्षों में मोदी मंत्रिमंडल बना व काम किया उसमें अनेक जगह समझौतों, मजबूरियों व असफल प्रयोगों से मोदी जी दो चार हुए। पुरानी भाजपा के धुरंधरों व संघ के चाबुकों के बीच काम करना उनकी मजबूरी थी। उस पर "लुटियंस ज़ोन के गैंग" का दबाब भी। किंतू इन सब चुनोतियाँ के बीच भी अथक कार्यों, ईमानदार छवि और साहसिक फैसलों और संघ के दर्शन के साथ देश व दुनिया की सभी राजनीतिक विचारधाराओ व नीतियों के समावेश से बनाई गई " मोदीत्व" की विचारधारा को राष्ट्र के पटल पर स्थापित कर दिया। अपनी शर्तों, सोच व शैली में काम करने वाले मोदी असीम धैर्य रखते हैं और समय मिलते ही दुश्मन और पथ भटके टीम के सदस्यो को हाशिए पर पटक देते हैं या अपने रंग में रंग लेते हैं। मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल वास्तव में  "गवर्मेंट ऑफ इंडिया इनकॉरपोरेट" के स...
प्रधानमंत्री को स्वस्थ भारत ने लिखा पत्र, स्वस्थ भारत की दिशा में दिए अहम सुझाव

प्रधानमंत्री को स्वस्थ भारत ने लिखा पत्र, स्वस्थ भारत की दिशा में दिए अहम सुझाव

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आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, सादर प्रणाम! स्वस्थ भारत अभियान,स्वस्थ भारत (न्यास) व स्वस्थ भारत यात्रा के साथियों की ओर से आपको पुनः प्रधानमंत्री बनने हेतु शुभकामनाएं प्रेषित कर रहा हूं। आपका राष्ट्र के प्रति समर्पण अनुकरणीय है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्वास्थ्य संबंधी कारकों ने चुनाव को इतना प्रभावित किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों को चुनाव में जीत का मंत्र बनाया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि आपकी सरकार देश के स्वास्थ्य को लेकर बहुत गंभीर है। और इस गंभीरता की जरूरत भी है। उज्ज्वला योजना से होते हुए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के रास्ते आयुष्मान भारत की जो नीतिगत सफर आपकी सरकार ने की है, उसकी मैं तारीफ करता हूं। नई स्वास्थ्य नीति को आपकी सरकार ने अंगीकार किया है। इसके लक्ष्य-निर्धारण भी स्वागत योग्य हैं। इन ...
URGENT NEED FOR THE ELECTION COMMISSION AND THE PRESIDENT OF INDIA TO LAY DOWN CODE OF CONDUCT

URGENT NEED FOR THE ELECTION COMMISSION AND THE PRESIDENT OF INDIA TO LAY DOWN CODE OF CONDUCT

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Notwithstanding seven decades’ of election campaigns the current election campaign for the 2019 election is in a state of catharsis. The political parties fighting the elections led by the two national parties appear to have forsaken all norms of acceptable behavior and campaigning dignity. Unsubstantiated charges against opponents are flung about without a care about their veracity. Abusive language that was used with caution in the past is now the order of the day. Sadly the leaders of the two national parties have crossed all bounds of decency and probity by indulging in abusive language against their principal opponents. This example has trickled down to their rank and file. The dynasty which could have learned a lesson from the 2014 election where calling the Gujarat Chief minister th...
राष्ट्रवाद के प्रेरक : वीर सावरकर

राष्ट्रवाद के प्रेरक : वीर सावरकर

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भारत को अजेय शक्ति बनाने के लिए "हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है और राष्ट्रीयत्व ही हिंदुत्व है' के उद्द्घोषक स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर आज तन से हमारे मध्य नहीं हैं। लेकिन उनकी संघर्षमय प्रेरणादायी अविस्मरणीय मातृभूमि के प्रति समर्पित गाथा युगों युगों तक भारतभक्तों का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी। मुख्यतः हम उनकी पुण्य जन्म व निर्वाण दिवसों पर अपनी अपनी श्रद्धांजलियां देकर दशकों पुरानी परंपरा को निभा कर राष्ट्रवाद के वाहक बन जाते है। लेकिन विचार अवश्य करना होगा कि राष्ट्र चेतना के धधकते अंगारे व हिन्दू राष्ट्र के प्रचंड योद्धा वीर सावरकर के सौपें उत्तराधिकार के लिए आज हम कितने सजग हैं? हिन्दुत्वनिष्ठ समाज को एकजुट व संगठित करके संगोष्ठी व वार्ताओं के विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा वीर सावरकर जी के अथाह राष्ट्रप्रेम से आने वाली पीढ़ी को भी अवगत करा कर उनमें भारतभक्ति की भावनाओं को अंकुरित कर...
किन्हें नामंजूर है राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना

किन्हें नामंजूर है राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना

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17 वीं लोकसभा के चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद ही मात्र दिखावे भर के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश करने का नाटक किया। पर जैसी कि कांग्रेस में वंशवाद की संस्कृति बनी हुई है, उनके इस्तीफे को अस्वीकार करने का नाटक भी किया जा रहा है। कम से कम ऐसा मीडिया को कहा जा रहा है। उन्हें  कांग्रेस के वयोवृद्ध होते नेताओं जैसे मनमोहन सिंह और ए.के.एंटनी से पद पर बने रहने के लिए आग्रह करवाने का ढोंग कृत्य संपन्न किया जा रहा है । हारे हुए सेनापति राहुल को कांग्रेस के लिए अपरिहार्य बताया जा रहा है। सच में राहुल गांधी को अपने इस्तीफे को वापस लेने का दबाव डालने वालों ने या ढोंग करने वालों ने 125 बरस पुरानी कही जाने वाली पार्टी को तबाह करके ही रख दिया है। इन्हीं लोगों ने कांग्रेस के भीतर चमचागिरी की हद करते हुए जवाबदेही की संस्कृति को कभी भी पनपने ही नहीं दिया। दुर्भाग्यव...
मोदी सरकार में हिन्दी को प्राथमिकता मिले

मोदी सरकार में हिन्दी को प्राथमिकता मिले

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देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे चमत्कारी एवं ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही हैं। संभावना की जा रही है कि मोदी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय प्रतीकों मजबूती प्रदान करेंगी। जैसे राष्ट्रभाषा हिन्दी, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय पक्षी आदि को सम्मानजनक स्थान प्रदत्त किया जायेगा। मूल प्रश्न राष्ट्रभाषा हिन्दी को सशक्त बनाने का है। चुनाव में प्रचार का सशक्त माध्यम हिन्दी ही बनी, लेकिन जिस हिन्दी का उपयोग करके प्रत्याशी संसद में पहुंचते हैं, वहां पहुंचते ही हिन्दी को भूल जाते हैं, विदेशी भाषा अंग्रेजी के अंधभक्त बन जाते है, यह लोकतंत्र की एक बड़ी विसंगति है, राष्ट्रभाषा का अपमान है। हिन्दी की दुर्दशा एवं उपेक्षा आहत करने वाली है। इस दुर्दशा के लिये हिन्दी वालों का जितना हाथ है, उतना किसी अन्य का ...
हिमालय में ग्लेशियर के पिघलने से जुड़े खतरे

हिमालय में ग्लेशियर के पिघलने से जुड़े खतरे

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वर्तमान समय में पर्यावरण के समक्ष तरह-तरह की चुनौतियां गंभीर चिन्ता का विषय बनी हुई हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल कर समुद्र का जलस्तर तीव्रगति से बढ़ा रहे हैं। जिससे समुद्र किनारे बसे अनेक नगरों एवं महानगरों के डूबने का खतरा मंडराने लगा है। हिमालय में ग्लेशियर का पिघलना कोई नई बात नहीं है। सदियों से ग्लेशियर पिघलकर नदियों के रूप में लोगों को जीवन देते रहे हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में पर्यावरण के बढ़ रहे दुष्परिणामों के कारण इनके पिघलने की गति में जो तेजी आई है, वह चिंताजनक है। ग्लोबल वार्मिंग का खतरनाक प्रभाव अब साफतौर पर दिखने लगा है। देखा जा सकता है कि गर्मियां आग उगलने लगी हैं और सर्दियों में गर्मी का अहसास होने लगा है। इसकी वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल कर समुद्र का जलस्तर तीव्रगति से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में मुंबई समेत दुनिया के कई हिस्सों एवं महानगरों-नगरों के ड...
सनातनता की विजय – मौलिक भारत के निर्माण का समय

सनातनता की विजय – मौलिक भारत के निर्माण का समय

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यह भारत की इंडिया पर जीत है। यह मोदीत्व की जय है। यह कर्मयोगियों की जीत है। यह सनातन संस्कृति के उन पहरुओं की जीत है जो 'राष्ट्र प्रथम’ बस इसी भाव से अपना सर्वस्व न्यौछावर कर इस भारत भूमि को पुष्पित पल्लवित करने को उद्धत हैं। यह उस आक्रामक राष्ट्रवाद की जीत है जो हम पर बुरी नजऱ रखने वाले दुश्मन देश की आंख निकाल लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति रखता है। यह 'नए भारत’ की उस संकल्पना की जीत है जो प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने देश की जनता के सामने रखी और जनता ने उस पर अपने भरोसे व समर्थन की मुहर लगा दी। टूटते वंशवाद के किलों और सम्प्रदाय-जाति की हवेलियों के बीच नए भारत की नयी इमारत बनकर सामने आ रही है जिसमें पहली बार इतनी व्यापक जनभागीदारी और जनसहभागिता है। एक जगे हुए आंदोलित राष्ट्र के एक एक जन ने उन स्वरों व भाषाओं के कहकरों को सुन समझ ताल से ताल मिला ली है और द्रुतगति से विश्वपटल पर अपनी खो...