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कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद

कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद

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कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद आर.के. सिन्हा काशी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिलने के दावे हो रहे है। इसकी सच्चाई का भी पता चल ही जाएगा पर इस तथ्य से कौन इंकार कर सकता है कि काशी में मुस्लिम शासकों ने सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा। ज्ञानवापी मस्जिद तो काशी विश्वनाथ मंदिर के स्थान पर निर्मित है, जिसका निर्माण औरंगजेब ने कराया था। औरंगजेब ने 9 अप्रैल, 1669 को इस मं‌दिर सहित बनारस के तमाम मंदिर तोड़ने का आदेश जारी किया था। इस आदेश की कॉपी एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में सुरक्षित है। मस्जिद का मूल नाम है ‘अंजुमन इंतहाजामिया जामा मस्जिद’। मोहम्मद गोरी के ‌सिपहसालार कुतुबुद्दीन ऐबक से लेकर औरंगजेब तक काशी के मंदिरों को ध्वस्त करने से बाज नहीं आए। अविमुक्तेश्वर को काशी में शिव द्वारा स्थापित आदि‌लिंग माना गया है। उनमें एक का स्थान ज्ञानवापी ...
डायबिटिक रेटिनोपैथी: समय पर इलाज न कराया जाए तो इस बीमारी से जा सकती है आपकी आंख की रोशनी

डायबिटिक रेटिनोपैथी: समय पर इलाज न कराया जाए तो इस बीमारी से जा सकती है आपकी आंख की रोशनी

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सेहत डायबिटिक रेटिनोपैथी  : समय पर इलाज न कराया जाए तो इस बीमारी से जा सकती है आपकी आंख की रोशनी डॉ. महिपाल सचदेव डायरेक्टर सेंटर फॉर साइट नई दिल्ली डायबिटिक रेटिनोपैथी आंख की एक समस्या है जिसके कारण अंधापन हो सकता है। यह तब होता है जब उच्च रक्त शर्करा आंख के पृश्ठ भाग में यानी रेटिना पर स्थित छोटी रक्त वाहिनियों को क्षतिग्रस्त कर देती है। डायबिटीज वाले सभी लोगों में यह समस्या होने का जोखिम होता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती है। हो सकता है कि शुरुआत में आपको कोई लक्षण न दिखें। स्थिति के बिगडने के साथ, रक्त वाहिनियां कमजोर हो जाती हैं और रक्त तथा द्रव्य का रिसाव करती हैं। नई रक्त वाहिनियों के बढने पर वे भी रिसाव करती हैं और आपकी दृष्टि में बाधा उत्पन्न हो सकती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी, आंखों की एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह डायबिटीज होती है। जो ...
जल-संकट गृहयुद्ध का कारण न बन जाये

जल-संकट गृहयुद्ध का कारण न बन जाये

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जल-संकट गृहयुद्ध का कारण न बन जाये - ललित गर्ग - पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली की जनता परेशान है। परेशानी का सबब यह है कि पानी पहुंचाने वाले टैंकरों को कड़ी सुरक्षा में चलाया जा रहा है, ताकि पानी को लेकर हिंसा की नौबत न आ जाए। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे लोग पानी की टंकियों और हेंडपंपों से बूंद-बूंद पानी इकट्ठा कर रहे है और अपने-अपने पानी के डिब्बों को जंजीर से बांधकर रख रहे हैं। ऐसा ही नजारा मंगलवार को वसंत विहार के कुसुमपुर पहाड़ी इलाके में देखने को मिला। यह चिंताजनक इसलिए है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो यह जल संकट कभी भी जल संघर्ष एवं हिंसा में बदल सकता है। यह तो अक्सर देखने में आता ही रहा है कि पानी को लेकर लोग एक दूसरे की जान तक लेने में भी नहीं हिचकते। भीषण गर्मी और हरियाणा में नदी में कम पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।...
दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों

दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों

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दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों अथवा सन्नाटा शहरों में या साहित्य में आर.के. सिन्हा यह संभव है कि मौजूदा युवा पीढ़ी को शायद पता ही न हो कि कोई एक-डेढ़ दशक पहले तक दिल्ली, लखनऊ, पटना वगैरह हिन्दी पट्टी के खास शहरों में हिन्दी लेखकों-कवियों की दिनभर कॉफी हाउस से लेकर शामों में अलग-अलग साहित्य प्रेमियों के घरों में लगातार गोष्ठियां आयोजित हुआ करती थीं। उनमें लेखक बंधु अपनी ताजा रचनाएं पढ़ते थे। उसके बाद उन पर बहस होती थी। वह कभी-कभी विस्फोटक भी होने लगती थीं। अब लगता है कि गोष्ठियों और बैठकी के दौर गुजरे जमाने की बातें हो रही हैं। अब गोष्ठियां आनलाइन अधिक होने लगी हैं। इसके अलावा लेखक अपनी ताजा कहानियां, गजलें, कविताएं अपनी फेसबुक वॉल पर ही डाल रहे हैं। वहां पर कुछ लाइक और छिट-पुट कमेंट जरूर आ जाते हैं। लेखक एक-दूसरे से पहले की तरह गर्मजोशी के साथ नहीं मिल रहे। पहल...
QUAD सम्मेलन से क्या मिलेगा? – अनुज अग्रवाल

QUAD सम्मेलन से क्या मिलेगा? – अनुज अग्रवाल

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QUAD सम्मेलन से क्या मिलेगा? - अनुज अग्रवाल शोमैन मोदी हर विदेशी दौरे में छाये रहते हैं। आज कल वे जापान के दौरे पर हैं QUAD की शिखर वार्ता में शामिल होने के लिए। चीन के वर्चस्व को रोकने के लिए बने QUAD के चारों भागीदारों में अमेरिका के जो बाइडेन और आस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अँथनी अलबनीज के चुनावों में सफलता के पीछे ही चीन ही है। जापान अब अपने नौकरशाह के हाथों में है व अमेरिका का पिट्ठू बना हुआ है। मोदी भी बिना नाम लिए चीन को धमकी देने की रस्म निभाते आए हैं और भारत चीन के विरुद्ध सैन्य संगठन AUKUS में भी शामिल नहीं हुआ है। यद्यपि चीन की विस्तारवादी नीतियों का सबसे बड़ा और पहला शिकार भारत है। यह माना गया था कि चार बड़े लोकतांत्रिक देश मिलकर चीन के विस्तारवाद पर लगाम लगाएंगे, हिंद-प्रशांत को चीन के सैन्य अड्डे में बदलने से रोकेंगे और इसे एक सुरक्षित क्षेत्र के रूप में स्थापि...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जापान की यात्रा पर हैं. इस दौरान पीएम मोदी ने जापान के कई टॉप बिजनेसमैन से मुलाकात की. प्रधानमंत्री ने जापान की कंपनियों से भारत में निवेश के मौके तलाशने की अपील भी कीसुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के चेयरमैन ने तो प्रधानमंत्री मोदी के काम की जमकर तारीफ भी कर दी. तोशिहिरो सुजुकी के अलावा प्रधानमंत्री ने सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के सीनियर एडवाइजर ओसामु सुजुकी, सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉरपोरेशन के बोर्ड डाइरेक्टर मासायोशी सॉन और यूनिक्लो के प्रेसिडेंट एवं सीईओ तादाशि यानाई से भी मुलाकात की ...
भारतीय संस्कृति के अनुसार पत्र-पत्रिका लेने में वामहस्त का निषेध क्यों?

भारतीय संस्कृति के अनुसार पत्र-पत्रिका लेने में वामहस्त का निषेध क्यों?

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भारतीय संस्कृति के अनुसार पत्र-पत्रिका लेने में वामहस्त का निषेध क्यों? श्रीराम-रावण युद्ध दो विपरीत संस्कृतियों का संग्राम है। श्रीराम देव संस्कृति के पोषक हैं, वहीं रावण की संस्कृति दानवी है। देव संस्कृति के श्रीराम क्षत्रिय होते हुए भी स्वभाव से विनम्र, निरभिमानी, विनयशील, गुरुजनों का सम्मान करने वाले तथा एक पत्नीव्रती हैं वहीं रावण जाति से ब्राह्मण होते हुए भी दम्भी, लोलुप, सत्ता का लालची और मायावी रूप धारण कर देव संस्कृति को धोखा देने वाला है। रावण पाँच भाई थे- अहिरावण, महिरावण, कुम्भकर्ण और विभीषण। रावण के शासनकाल में लंका अपने चरमोत्कर्ष पर थी। कई अवगुणों के होते हुए भी रावण परमवीर, शिवभक्त, प्रकाण्ड विद्वान, तन्त्र विद्या का ज्ञाता तथा प्रसिद्ध वीणा वादक था। रावण की वीणा का नाम रुद्र वीणा था। वह संस्कृत भाषा का परम विद्वान था। वह शिवजी का भक्त था। उसने शिव ताण्डव स्तोत्र की रचना ...
Not Clash of Civilisations … – World War@Ukraine

Not Clash of Civilisations … – World War@Ukraine

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Sometimes the phrase 'Clash of civilisations' comes to mind when describing the conflict in Ukraine, but in reality it is a clash of Globalism versus Nationalism. Globalism is a one size fits all, thinking, and action initiated by global elites that use the power of their nations and institutions with help of the media to dominate and control the world as much as they can for their personal benefit. Communities, societies, civilisations and nations are all being sought to be brought under the yoke of this totalitarian regime called 'Globalism'. The Globalists are the ones who have taken over most countries starting with Europe and America and now marching on to take control of the whole world. Ukraine is but a flash point in an ongoing world war, with the conquered, converted,...
What ails biodiversity conservation in India: Down To Earth and CSE release new analysis to mark World Biodiversity Day

What ails biodiversity conservation in India: Down To Earth and CSE release new analysis to mark World Biodiversity Day

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Centre for Science and Environment (CSE), New Delhi, India PRESS RELEASE World Biodiversity Day Special Biodiversity conservation and benefit sharing with communities has become a meaningless exercise, finds a new Down To Earth analysis Find the proceedings of our World Biodiversity Day webinar here:  Biodiversity conservation is an absolute imperative today, but is India serious about it? Notwithstanding the alacrity that the country has shown in ratifying and supporting international biodiversity conventions or in enacting domestic laws and regulations, India’s record in conservation and use of its bioresources has been quite dismal – finds an investigative analysis done by Down To Earth (DTE) magazine. Thirty years ago, in 1992, the world had agreed on a landmark global treat...
भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरत कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप

भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरत कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप

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भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरत कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप नई दिल्ली, 20 मई (इंडिया साइंस वायर): कृषि प्रौद्योगिकी से जुड़े स्टार्टअप्स भारत की अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने यह बात कही है। डॉ जितेन्द्र सिंह, मैसूरू में एग्री-टेक एवं फूड-टेक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा भारतीय कृषि क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, पुराने पड़ चुके उपकरणों के उपयोग, अनुचित संरचना और किसानों की विभिन्न बाजारों का आकलन करने में अक्षमता- जैसी कठिनाइयों को दूर करने के निमित्त नीतिगत माहौल प्रदान किए जाने की वजह से...