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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भोपाल विभाग के शारीरिक प्रकट कार्यक्रम में 2500 स्‍वयंसेवकों ने शारीरिक अभ्‍यास का किया प्रदर्शन

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भोपाल। संघ के दो मुख्य काम हैं– व्यक्ति निर्माण और समाज संगठन। यह दोनों कार्य एक ही लक्ष्य के लिए है– भारत को परम वैभव पर पहुंचाना। परम वैभव का अर्थ केवल भारत आर्थिक और सामरिक रूप से सक्षम बने, यहां के सभी नागरिकों को रोटी, कपड़ा और मकान मिले यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि इससे भी अधिक है। भारत का लक्ष्य विश्व मंगल की कामना है। भारत के महापुरुषों ने हमेशा विश्व कल्याण की बात की है और उसके लिए प्रयास किए हैं। यह बात राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के माननीय सरकार्यवाह श्री दत्‍तात्रेय होसबाले ने रविवार को लालपरेड मैदान में भोपाल विभाग के शारीरिक प्रकट कार्यक्रम में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में अपने बौद्धिक में कही। इस अवसर पर मंच पर मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त श्री ओमप्रकाश रावत, मध्य क्षेत्र संघचालक श्री अशोक सोहनी, प्रांत संघचालक श्री अशोक पांडेय और भोपाल विभाग के संघचालक...
बढ़ता तापमान,घटती कृषि – परिणाम ?

बढ़ता तापमान,घटती कृषि – परिणाम ?

BREAKING NEWS, आर्थिक
भारत की सरकार ने संसद में माना है कि  देश में वर्ष 2001 से 2011 के बीच भूमिहर किसानों की संख्या कम होने के बाद भी कृषि श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। आंकड़ा साफ कहता है भारत में किसानों की संख्या घट रही है और कृषि श्रमिकों की नहीं, उनका जेंडर बदल रहा है | सही मायने में  विश्व भर में खेतिहर श्रमिकों के लिए तापमान वृद्धि घातक होती जा  रही है । सब जानते हैं कि लगातार बढ़ते तापमान में कृषि श्रमिकों को लगातार धूप में काम करना होता है, और इस कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। तापमान वृद्धि पर पिछले 20 वर्षों से किये जा रहे अध्ययन के अनुसार पृथ्वी का तापमान वर्ष 1990 के बाद  से हरेक दशक में औसतन 0.26 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है। लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में भारत समेत विश्व के 43 देशों में 750 स्थानों से प्राप्त जलवायु के आंकड़ों का और मृत्यु दर का विश्लेषण किया गया...
कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आर.के. सिन्हा अब चुनाव आयोग को यह गॅंभीरता से विचार करना होगा कि कैसे सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर गंभीर या बाध्य हों। वे मतदान करना अपना दायित्व समझें। हाल ही में दिल्ली नगर निगम चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव नतीजे सही से आ गये। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। पर निराशा इस कारण से अवश्य हुई कि इस बार दिल्ली में मतदान 47 फीसद के आसपास ही रहा। मतलब आधे से अधिक मतदाताओं ने अपना वोट डालने की आवश्यकता ही नहीं समझी। मतदान भी रविवार के दिन ही हुआ था। इसलिए उम्मीद तो यह थी कि दिल्ली वाले मतदान के लिए भारी सॅंख्या में निकलेंगे। उस दिन मौसम भी  खुशगवार था। फिर भी मतदान बेहद खराब रहा। बड़ी तादाद में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के हक में वोट देने नहीं आए। वे जिन नेताओं और सियासी दलों को नापसंद करते हैं, उन्हें चाहे तो खारिज कर सकते थे। उन्हों...
लोकतंत्र को मजबूती देने वाले नतीजें

लोकतंत्र को मजबूती देने वाले नतीजें

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
-ः ललित गर्ग:- भारत के दो राज्यों गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश और एक नगर निगम दिल्ली के चुनावों में इन क्षेत्रों के मतदाताओं ने जो जनादेश दिया है उससे एक बार फिर सिद्ध हो गया है कि भारत में लोकतंत्र कायम है और इसकी जीवंतता के लिये मतदाता जागरूक है। मतदाता को ठगना या लुभाना अब नुकसान का सौदा है। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने कीर्तिमान गढे़, तो हिमाचल में कांग्रेस ने नया जीवन पाया, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को खुश होने का मौका मिला। इन चुनावी नतीजों ने जाहिर कर दिया कि आज के मतदाता किसी भी पार्टी के दबाव में नहीं है। ये नतीजे जहां लोकतंत्र की सुदृढ़ता को दर्शा रहे हैं, वही देश की राजनीति का नई राहों की ओर अग्रसर होने के संकेत दे रहे हैं। इन चुनाव नतीजों से यह तय हो गया कि भारत विविधता में एकता एवं विभिन्न फूलों का एक ‘खूबसूरत गुलदस्ता’ है। इन जनादेशों का चारों तरफ स्वागत हो रहा है। ऐसे जन...
 विश्व सरकार: कितना व्यावहारिक?

 विश्व सरकार: कितना व्यावहारिक?

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            7 अप्रैल, 1978 को हमारे संविधान के संस्थापक श्री एच.वी. कामथ ने संविधान के अनुच्छेद 51 में संशोधन करने के लिए लोगों के सर्वोच्च मंच में एक संविधान (संशोधन) विधेयक पेश किया, ताकि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में निम्नलिखित नए खंड को शामिल किया जा सके:- "विश्व संघीय सरकार के लिए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए विश्व संविधान सभा के शीघ्र गठन के लिए राज्य अन्य देशों के साथ सहयोग करने का प्रयास करेगा।"             पार्टी लाइन से परे बहस ने प्रस्ताव को लगभग सार्वभौमिक समर्थन प्रकट किया और यहां तक कि उपाध्यक्ष, श्री गोडे मुरहारी, जो उस समय अध्यक्षता कर रहे थे, ने अध्यक्ष से सभापतित्व में रहने का अनुरोध किया, "क्योंकि यह उन दुर्लभ अवसरों में से एक है जब एक डिप्टी स्पीकर बोलना चाहेंगे"। उन्होंने जोरदार भाषण में बिल का समर्थन भी किया। कहने की आवश...
नये भारत से नये विश्व की प्रेरणा देने का अवसर

नये भारत से नये विश्व की प्रेरणा देने का अवसर

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ललित गर्ग भारत के लिये एक शुभ एवं श्रेयस्कर घटना है इसी एक दिसंबर को जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता संभालना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस जिम्मेदारी को संभालने का अर्थ है भारत को सशक्त करने के साथ-साथ दुनिया को एक नया चिन्तन, नया आर्थिक धरातल, शांति एवं सह-जीवन की संभावनाओं को बल देना। गुजरात विधानसभा में शानदार प्रदर्शन के साथ मोदी सरकार इस दायित्व को सफलतापूर्वक निर्वहन करने के लिये काफी गंभीर दिखाई दे रही है। निश्चित रूप से जी-20 जैसे विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के संस्थान का नेतृत्व करना देश के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। यह एक ऐतिहासिक दायित्व भी है, स्वयं को साबित करने एवं कुछ अनूठा एवं विलक्षण कर दिखाने का दुर्लभ अवसर भी है। समूचे राष्ट्र को इसे भारत के अभ्युदय के रूप में देखते हुए इन उजालों का स्वागत करना चाहिए।विश्व की राजनीति, आर्थिक एवं सामरिक नीतियों, पर्...
तीनों पार्टियाँ गदगद: तीनों को सबक

तीनों पार्टियाँ गदगद: तीनों को सबक

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक गुजरात, दिल्ली और हिमाचल के चुनाव परिणामों का सबक क्या है? दिल्ली और हिमाचल में भाजपा हार रही है और गुजरात में उसकी एतिहासिक विजय हुई है। हमारी इस चुनाव-चर्चा के केंद्र में तीन पार्टियाँ हैं- भाजपा, कांग्रेस और आप! इन तीनों पार्टियों के हाथ एक-एक प्रांत लग गया है। दिल्ली का चुनाव तो स्थानीय था लेकिन इसका महत्व प्रांतीय ही है। दिल्ली का यह स्थानीय चुनाव प्रांतीय आईने से कम नहीं है। दिल्ली में आप पार्टी को भाजपा के मुकाबले ज्यादा सीटें जरूर मिली हैं लेकिन उसकी विजय को चमत्कारी नहीं कहा जा सकता है। भाजपा के वोट पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़े हैं लेकिन आप के घटे हैं। आप के मंत्रियों पर लगे आरोपों ने उसके आकाशी इरादों पर पानी फेर दिया है। भाजपा ने यदि सकारात्मक प्रचार किया होता और वैकल्पिक सपने पेश किए होते तो उसे शायद ज्यादा सीटें मिल जातीं। भाजपा ने तीनों स्थानीय निगमों क...
जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

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चलती संसद का मूड बदलने के लिए, ताजा चुनावी नतीजे काफी है | गुजरात हिमाचल विधानसभा के साथ दिल्ली [एम् सी डी]  के नतीजों से  जो संकेत निकला है, वह सत्र में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण जैसे विषय की धार को और तेज़ करेगा | यह तो सर्वविदित है कि विपक्ष कतिपय राजनीतिक घटनाओं से उत्साहित एवं आक्रामक है अभी तक तो दोनों पक्ष चुनाव और उसके नतीजों के इंतजार में व्यस्त थे । अब बुलन्द हौसलों  के साथ २९ दिसम्बर तक चलने वाले इस सत्र में  हर दिन विपक्ष, ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की जहां कोशिश करेगा , वहीँ  सत्तापक्ष से इन विषयों पर उठे प्रश्नों का उत्तर देने के जनअपेक्षा  और बढ़ गई है | वस्तुत: विपक्ष को संसद में यह आभास कराना चाहिए कि उसका उद्देश्य अपने सवालों के जवाब पाना है, न कि हंगामा कर सदन की कार्यवाही ठप करना। सत्तापक्ष को इसके लिए भी तत्प...
एमसीडी चुनाव : आप की फीकी जीत बनाम बीजेपी की कड़वी हार

एमसीडी चुनाव : आप की फीकी जीत बनाम बीजेपी की कड़वी हार

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दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन के चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए इन तथ्यों का भी ध्यान रखिए. दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन के चुनाव में जनता ने भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं है. मुफ्त रेवड़ी की सच्चाइयों को भी जनता ने याद रखा है. यही कारण है कि 42% वोट के साथ केजरीवाल ने 134 सीट जीती तो भाजपा ने 39% वोट के साथ 104 सीट जीती है. भ्रष्टाचारियों का हाल यह रहा कि तिहाड़ जेल में बंद और वहीं मसाज सेंटर चला रहे सत्येंद्र जैन की शकूर बस्ती विधानसभा के सारे वार्ड पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया तो एमसीडी के टिकट बेचने के आरोपी अखिलेश पति त्रिपाठी और चर्चित आप नेता आतिशी के क्षेत्र से आम आदमी पार्टी का एक भी पार्षद नहीं जीत सका. इसी तरह दिल्ली की गली गली में दारू का ठेका खोलने वाले मनीष सिसोदिया के पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र, दिलीप पांडे, अमानुल्ला खां, गोपाल राय के क्षेत्र से महज एक एक सीट ही आम आ...
काबुलः भारत नई पहल करे

काबुलः भारत नई पहल करे

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* पिछले साल काबुल पर तालिबान का कब्जा होते ही भारत सरकार बिल्कुल हतप्रभ हो गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? हमारे विदेश मंत्री ने कहा था कि हम बैठे हैं और देख रहे हैं। उसी समय मैंने तालिबान के कब्जे के एक-दो दिन पहले ही लिखा था कि भारत सरकार को अत्यंत सतर्क रहने की जरुरत है लेकिन मुझे खुशी है कि हमारे कुछ अनुभवी अफसरों की पहल पर भारत सरकार ने ठीक रास्ता पकड़ लिया। उसने दोहा (क़तर) में स्थित तालिबानी तत्वों से संपर्क बढ़ाया, अफगानिस्तान को हजारों टन गेहूं और दवाइयां भेजने की घोषणा की और तालिबान सरकार से भी संवाद किया। काबुल स्थित अपने दूतावास को भी सक्रिय कर दिया। उधर तालिबान नेताओं और प्रवक्ता ने भारत की मदद का आभार माना, हालांकि भारत सरकार ने उनकी सरकार को कोई मान्यता नहीं दी है। इस बीच इस साल जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य एशिया के पांचों गणतं...