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भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

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*भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष* आंकड़े गंभीर नहीं डरावने हैं,विश्व भर में लगभग १२ करोड़ लोग कोरोना दुष्काल भुखमरी की चपेट में आ चुके हैं | वैश्विक खाद्य संकट के कारण यह संख्या बढ़कर ८० करोड़ से भी अधिक हो गयी है। भारत में लगभग ८ करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं, प्रतिवर्ष १.७ करोड़ लोग हृदय रोग के कारण दम तोड़ देते है, ३३ लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे तथा हर पांच में से एक पुरुष एनीमिक है। यह सारा संकट अनाज के कारण है, कहीं अनाज उपलब्ध नहीं होता तो कहीं वो गुणकारी नहीं होता | सारा विश्व इस संकट से निबटने के उपाय खोज रहा है | पिछले दिनों उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुए एससीओ सम्मेलन में विश्व खाद्य संकट से निपटने के लिए सुपर फूड (मोटा अनाज) को हर थाली का हिस्सा बनाये जाने की अपील तक की गयी है । कोविड, जलवायु संकट, यूक्रेन युद्ध आदि कारणों से व...
जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?

जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?

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जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?*विनीत नारायणपिछले कुछ समय से विवादों में घिरी सरकार की दो जाँच एजेंसियाँ, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई विपक्ष कानिशाना बनी हुई हैं। इस विवाद में ताज़ा मोड़ तब आया जब हाल ही में मुंबई की एक विशेष अदालत ने पात्रा चॉलपुनर्विकास से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा शिवसेना के सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ और ‘निशानाबनाने’ की कार्रवाई करार दिया। इसके साथ ही राउत की जमानत भी मंजूर कर ली गई। अदालत के इस आदेश ने विपक्षको और उत्तेजित कर दिया है। राज्यों में चुनावों के दौरान ऐसे फ़ैसले से विपक्ष को एक और हथियार मिल गया है। विपक्षअपनी चुनावी सभाओं में इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। सारा देश देख रहा है कि पिछले आठ साल मेंभाजपा के एक भी मंत्री, सांसद या विधायक पर सीबीआई या ईडी की निगाह टेढ़ी नहीं हुई। क्या कोई इस बात को मानेगाकि...
वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

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वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमकमृत्युंजय दीक्षितअंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है और विश्व के लगभग सभी देश प्रधानमंत्री व भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहे हैं। कोरोना महामारी की लड़ाई से थके हुए विश्व में अर्थ व्यवस्थाओं में मंदी और उसके करण उपजी नागरिक समस्याओं के साथ साथ रूस- यूक्रेन युद्ध सहित कई अन्य कारणों से तनाव व्याप्त है। किसी भी समय, किसी भी देश की एक गलती से धरती का बड़ा भाग परमाणु विध्वंस की चपेट में आ सकता है किन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की वर्तमान कूटनीति ने स्थितियों को बिगड़ने से बचा रखा है ।रूस -यूक्रेन युद्ध के सन्दर्भ में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा व उसके किसी भी मंच पर कभी रूस के विरुद्ध मतदान नहीं किया अपितु ऐसे हर प्रस्ताव के समय अनुपस्थित रहा किन्तु जब...
राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

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-ललित गर्ग-संवैधानिक पद पर विराजित राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों के बीच द्वंद एवं टकराव की स्थितियां अनेक बार उभरती रही है। राजनीति के उलझे धागों के कारण ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण एवं विडम्बनापूर्ण स्थितियां देखने को मिलती है। गैर-भाजपा शासित राज्यों में सरकारों और राज्यपालों के बीच इस तरह का टकराव एक सामान्य बात हो गयी है, लेकिन यह टकराव न केवल लोकतंत्र के लिये बल्कि शासन-व्यवस्थाओं पर एक बदनुमा दाग की तरह है। बहुत समय से सरकारें राज्यपाल पर तो राज्यपाल सरकारों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे एक दूसरे के कामकाज में रोड़े अटका रहे हैं। इनदिनों तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ऐसी स्थितियां बढ़-चढ़कर देखने को मिली है। इन सभी राज्यों में गैर-भाजपा सरकार है और एक बात कॉमन है वो बात है राज्य सरकार का राज्यपाल के साथ विवाद। बीते कुछ समय से इन पांचों राज्यों में राज्यपाल बनाम राज्य सरक...
यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* विदेश मंत्री डाॅ. जयशंकर ने दिल्ली में एक संगोष्ठी में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच भारत की मध्यस्थता की बात बहुत अपरिपक्व है याने अभी कच्ची है। यह उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा है। यह सवाल किसी ने इसलिए उनसे पूछ लिया था कि वे 7-8 नवंबर को मास्को गए थे और उस वक्त यही प्रचारित किया जा रहा था कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को रूकवाने और दोनों राष्ट्रों के बीच मध्यस्थता करने के लिए जा रहे हैं। ऐसा लग भी रहा था कि भारत एकमात्र महत्वपूर्ण राष्ट्र है, जो दोनों की बीच मध्यस्थता कर सकता है और इस युद्ध को रूकवा सकता है। ऐसा लगने का एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत ने इस दौरान निष्पक्ष रहने की पूरी कोशिश की है। उसने संयुक्तराष्ट्र संघ के सभी मंचों पर यूक्रेन के बारे में यदि मतदान हुआ है तो किसी के भी पक्ष या विपक्ष में वोट नहीं दिया। वह तटस्थ रहा। उसने परिवर्जन किया। युद्ध के पिछल...
भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

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अभी जिस दिन इस वर्ष का अंतिम चन्द्रग्रहण था, देर रात दिल्ली ने भूकम्प के झटके झेले | यह सही है अभी भारत में भूकंप का पूर्वानुमान संभव नहीं है । मैक्सिको जैसे देश ऐसे निगरानी तंत्र से ही अपना बचाव करते हैं। वहां भूकंप से बचने के लिए एजेंसियों को एक से डेढ़ मिनट का वक्त मिल जाता है। जाहिर है, एशिया में इस तरह का तंत्र बनाने के लिए हिमालय के आस-पास बसे सभी देशों को एक मंच पर आना होगा। नेपाल, चीन और भारत में आए भूकंप के ये झटके अस्वाभाविक नहीं थे। इसका केंद्र नेपाल का मणिपुर था और भूगोल के हिसाब से इंडियन टेक्टोनिट प्लेट पूर्व से पश्चिम तक फैला है, जिसमें हमारा पूर्वोत्तर का इलाका, हिंदुकुश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान के कुछ भाग आदि आते हैं। यहां इंडियन प्लेट अपने से कहीं भारी यूरेशियन प्लेट के भीतर समा रही है या टकरा रही है, जिससे न सिर्फ हिमालय ऊपर की ओर उठ रहा है, बल्कि यह पूरा इलाका ही भूक...
भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

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भारत के लिये यह गर्व एवं गौरव की बात है कि वह 1 दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता करेगा। भारत के लिए ये ऐतिहासिक अवसर है। आजादी के अमृतकाल में यह देश के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है, जहां से भारत के सशक्त होने एवं विश्व स्वीकार्यता की सार्थक दिशाओं का उद्घाटन होने जा रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्व नेता के रूप में उभर रही स्थितियों के कारण एक बड़ा अवसर देश को प्राप्त हो रहा है। जी-20  ऐसे देशों का समूह है जिनका आर्थिक सामर्थ्य विश्व की 75 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत अब इस जी-20 समूह का नेतृत्व करने जा रहा है, इसकी अध्यक्षता करने जा रहा है। निश्चित ही यह भारत के लिये एक नये सूरज के अभ्युदय का संकेत है। मोदी ने भारत की अध्यक्षता के शुभंकर और वेबसाइट का अनावरण करते हुए दुनिया को शांति के मार्ग पर अग्रसर करने के अपने संकल्प को दोहराया है। समूची दुनिया को सुखी होने ...
सेमीकंडक्टर चिप 

सेमीकंडक्टर चिप 

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सेमीकंडक्टर चिप  50 वर्ष पूर्व सेमीकंडक्टर चिप (कंप्यूटर, सेल फ़ोन, फ़्लैश ड्राइव इत्यादि में लगने वाली चिप) बनाने के लिए सिलिकॉन वेफर (पापड़ से कई गुना पतली प्लेट) पर कुछ विशेष रसायन की एक पतली फिल्म छिडकी जाती थी और फिर उस पर एक मास्क एवं लेंस के माध्यम से साधारण प्रकाश स्रोत डाला जाता था। वेफर के जिस भाग पर प्रकाश पुंज पड़ता था, वहां मास्क पर बना पैटर्न रसायन पर छप जाता था। ठीक वैसे ही जैसे एक समय नेगेटिव से फोटो डेवेलप की जाती थी। इस पैटर्न, जिस पर विद्युत् प्रवाह हो सकती थी, पर किसी आभूषण में जड़े हीरे के सामान ट्रांजिस्टर बैठा दिए जाते थे। इसे इंटीग्रेटेड सर्किट का नाम दिया गया जिसे चिप भी कहा जाता है। ट्रांजिस्टर की विशेषता यह है कि इन्हे विदूयत प्रवाह के द्वारा ऑन-ऑफ किया जा सकता है जो कंप्यूटर की भाषा भी है। अंक 1 - ऑन; अंक 0 - ऑफ। 1,0,1,0 … सभी सॉफ्टवेयर कोड इन्...
बलात्कारियों की रिहाईः कहाँ तक ठीक?

बलात्कारियों की रिहाईः कहाँ तक ठीक?

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* बलात्कार और हत्या के अपराधियों को जिस तरह हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने बरी कर दिया है, उनके इस फैसले ने हमारी न्याय-व्यवस्था, शासन-प्रशासन और देश की इज्जत को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। 2012 में दिल्ली के छावला क्षेत्र में एक 19 वर्षीय लड़की के साथ तीन लोगों ने मिलकर बलात्कार किया, पीट-पीटकर उसके अंग-भंग किए और उसकी लाश को ठिकाने लगा दिया। वे पकड़े गए। निचली अदालत और दिल्ली उच्च-न्यायालय ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। पिछले लगभग नौ साल से वे जेल काट रहे थे, क्योंकि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिका लगा रखी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें यह कहकर बरी कर दिया है कि उनके विरुद्ध न तो पुलिस ने पर्याप्त प्रमाण जुटाए हैं और न ही निचली अदालतों में गवाहों की परीक्षा ठीक से की गई है। निचली अदालतों के फैसलों को रद्द करने का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को जरुर है लेक...
क्या पराली का धुंआ ही प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार?

क्या पराली का धुंआ ही प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार?

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-बलबीर पुंज बढ़ते वायु-प्रदूषण के कारण उत्तर-भारत में फिर से सांस लेना दूभर हो गया है। स्थिति ऐसी बिगड़ी कि कुछ समय के लिए उत्तरप्रदेश सरकार को नोएडा क्षेत्र, तो दिल्ली सरकार को स्कूलों में 1-5 कक्षाओं को ऑफलाइन रूप से स्थगित करना पड़ा। इस दौरान राजनीति भी चरम पर रही। दिल्ली और पंजाब में सत्तारुढ़ दल आम आदमी पार्टी ('आप') अपने विरोधियों के निशाने पर है। इसका एक स्वाभाविक कारण भी है। वर्तमान समय में जिस प्रकार देश के इस भाग में वातावरण दूषित हुआ है, उसमें किसानों (अधिकांश पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश से) द्वारा विवशपूर्ण धान-पराली जलाने और उससे निकलने वाले संघनित धुंए की एक हिस्सेदारी— 35-38 प्रतिशत है। इसमें पंजाब स्थित किसानों की कई वीडियो वायरल भी है। यह ठीक है कि पंजाब में 'आप' की सरकार को मात्र छह माह हुए है। किंतु एक सच यह भी है कि उसके लिए पराली समस्या कोई नई नहीं है। जब वे पंजा...