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स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि में राष्ट्र की रीढ़..!

स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि में राष्ट्र की रीढ़..!

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~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलस्वामी विवेकानन्द ने भारत के उस मर्म को छुआ जो कालखण्ड के प्रहार से पथभ्रष्ट होकर एक असाध्य रोग का रुप ले चुका था। वह था— 'छुआछूत वाद',गरीबी, भुखमरी और निम्न से निम्नतर समझी जाने वाली श्रेणियों के प्रति घ्रणा,वैमनस्य और अत्याचार की अन्तहीन प्रताड़ना। उनका ह्रदय इस मानवीय पाशविकता से डोल गया। उनके अन्दर उसी समानुभूतिपूर्ण करुणा का ज्वार मथने लगा — जो उन असंख्य निर्दोष लोगों के जीवन को हीनतर बना रहा था।उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त इस व्याधि के उपचार के लिए केवल आह्वान ही नहीं किया,बल्कि उस कार्य में अपने जीवन के अन्तिम क्षणों! तक रत रहे आए। ऐसा नहीं था कि उस समय समाज सुधार नहीं चल रहे थे, किन्तु उन सामाजिक सुधारों में सिध्दान्त और व्यवहार में पूर्णतः अन्तर पाया जाता था। साथ ही तथाकथित समाज सुधारकगण — वे समाज की इस दुर्दशा का ठीकरा हिन्दू धर्म पर फोड़कर अपनी अ...
<strong>भारत में आयोजित जी-20 की दो बड़ी उपलब्धियां</strong>

भारत में आयोजित जी-20 की दो बड़ी उपलब्धियां

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आर.के. सिन्हा अब तक का सबसे भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जी- 20 शिखर सम्मेलन जो भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुआ, दो वजहों से याद रखा जायेगा। पहला, जी 20 घोषणा पत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बन गई। हालांकि, इस मसले पर चीन, कनाडा आदि देशों से विवाद होने की आशंका जताई जा रही थी। दूसरा, अफ्रीका यूनियन को भारत की पहल पर जी-20 में शामिल कर लिया गया जो “जी -20” में भारत की स्थिति को और मजबूत बनायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा "हमारी टीम की  कड़ी मेहनत से ही नई दिल्ली जी-20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बनी है।" अब पाठकों को यह भी जानना जरुरी है कि नई दिल्ली घोषणा पत्र में किन चीज़ों का ज़िक्र है I दरअसल इसमें संसार के मजबूत, दीर्घकालीक, संतुलित और समावेशी विकास पर जोर दिया गया है। ज...
चन्दामामा ने बुला ही लिया

चन्दामामा ने बुला ही लिया

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, साहित्य संवाद
चन्द्रमा के विभिन्न पर्याय समस्त विश्व में प्रसिद्ध रहे हैं। उनमें चन्द्रमा के सदृश सौन्दर्य की उपमा, भारत देश में सभी धर्मों के अनुयायिओं के लिए देवतुल्य एवं बच्चों को बहलानें लिए मामा का पर्याय आदि अधिक प्रसिद्ध हैं। मामा के घर भांजे का जाना सदैव ही आकर्षण का केन्द्र रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि भांजा सदैव से ही मामा का प्रिय रहा है, वे कभी भी अपने भांजो को खाली हाथ नहीं भेजते।चन्द्रयान -3 का चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सहजता से अवतरण को भी इसी दृष्टि से यदि देखा तो यह अवतरण सम्पूर्ण विश्व को अचम्भित करने वाला है। परन्तु विश्व इस तथ्य से अनभिज्ञ है कि चंद्रमा पर अन्य देशों के अनेको प्रयासों के पश्चात सफल होना और भारत के तीसरे प्रयास के सफल होने का एकमात्र कारण यही है कि चन्द्रमा, मामा तो केवल भारत के ही है और मामा अपने भांजे को प्रेम व वात्सल्य से अंगीकार करता है और इस ऐतिहासिक क्...
एक देश एक चुनाव की पहल को कैसे देखें

एक देश एक चुनाव की पहल को कैसे देखें

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, सामाजिक
अवधेश कुमार18 सितंबर से 22 सितंबर तक संसद सत्र बुलाने तथा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव पर सुझाव देने के लिए समिति गठन की घोषणा ने विमर्श को एकाएक बदल दिया है। इस समय विशेष संसद सत्र और एक साथ चुनाव स्वाभाविक ही सबसे बड़े बहस का मुद्दा है। मुंबई में आयोजित आईएनडीआईए की बैठक में भी यह मुद्दा उठा तथा वहां से आने वाली प्रतिक्रियाओं में यह शीर्ष पर था। कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक रणनीति ने ऐसी स्थिति पैदा की जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला राजग एजेंडा तय कर रहा है। संसद का विशेष सत्र बुलाने का अर्थ है कि सरकार कुछ विशेष चर्चा कराना चाहती है। राष्ट्रपति की अध्यक्षता में समिति का गठन और उसमें शामिल सदस्यों को देखें तो कहना पड़ेगा कि सरकार ने एक साथ चुनाव पर गंभीर है। पहले किसी मामले पर पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में समिति का गठन ...
<strong>शिक्षक दिवस- 5 सितम्बर 2023 पर विशेष</strong>

शिक्षक दिवस- 5 सितम्बर 2023 पर विशेष

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
नये शिक्षक से होगा नये भारत का निर्माण- ललित गर्ग-भारत के राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को 5 सितम्बर को पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित करने के बाद से देश में शिक्षा एवं शिक्षक पर व्यापक चर्चा आरंभ हो गई है। शिक्षकों को अधिक सशक्त, जिम्मेदार एवं राष्ट्र- व्यक्ति निर्माण में उनकी भूमिका पर विशेष बल दिया जाने लगा है। लार्ड मैकाले की शिक्षा में अब तक भारत में गुरु एवं शिक्षक श्रद्धा का पात्र न होकर वेतन-भोगी नौकर बन गया था, शिक्षक की भूमिका गौण हो गयी थी। ‘सा विद्या या विमुक्तये’, यह भारतीय शिक्षा जगत का प्रमुख सुभाषित है। इस सुभाषित के अनुसार सच्ची शिक्षा वह है जो विद्यार्थी को नकारात्मक भावों और प्रवृत्तियों के बंधनों से मुक्ति प्रदान करें। पर ंिचंता का विषय ...
कोटा पर कलंक लगाती आत्महत्या की घटनाएं

कोटा पर कलंक लगाती आत्महत्या की घटनाएं

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रमेश सर्राफ धमोरा राजस्थान का कोटा शहर देश में कोचिंग की सबसे बड़ी मंडी बन चुका है। यहां प्रतिवर्ष लाखों छात्र कोचिंग करने के लिए आते हैं। जिससे कोचिंग संचालकों को सालाना कई हजार करोड़ रुपए की आय होती है। हालांकि कोटा आने वाले सभी छात्र मेडिकल व इंजीनियरिंग परीक्षा में सफल नहीं होते हैं। मगर देश की शीर्षस्थ मेडिकल व इंजीनियरिंग संस्थानों में चयनित होने वाले छात्रों में कोटा में कोचिंग लेने वाले छात्रों की संख्या भी काफी होती है। इसी कारण अभिभावक अपने बच्चों को कोचिंग के लिए कोटा भेजते हैं। कोटा में कोचिंग लेने वाले छात्रों को प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। बहुत से छात्रों के अभिभावकों की स्थिति इतना खर्च वहन करने की नहीं होने के उपरांत भी वह अपने बच्चों को इस आशा से कोटा भेजते हैं कि यदि वह परीक्षा में सफल हो जाता है तो भविष्य में इंजीनियर या डॉक्टर बन जाएगा। इसके लिए लोग ला...
लोकतंत्र के चुनावों में हिंसा एवं बेईमानी

लोकतंत्र के चुनावों में हिंसा एवं बेईमानी

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, साहित्य संवाद
लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है जिसके अन्तर्गत लोक का अर्थ जनता और तंत्र का अर्थ है शासन। अब्राहम लिंकन के अनुसार लोकतंत्र की परिभाषा अत्यंत उपयुक्त ढंग से दी गई है जिसमें - ‘‘जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन‘‘ इसके विपरीत राजशाही तंत्र के अन्तर्गत एक ही व्यक्ति का शासन प्रमुख होता है। समाज के उत्थान के लिए ही लोकतंत्र का जन्म हुआ। इसका उद्देश्य है जनता का हित, जनता के द्वारा एवं जनता की आशाओं को पूर्णतया ईमानदारी एवं देशसेवा के भाव से क्रियान्वित किया जाए। उपरोक्त दोनों ही व्यवस्था अर्थात् लोकतंत्र एवं राजतंत्र के उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र में समायोजित नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान लोकतंत्र, राजतंत्र से भी निम्न स्तर पर पहुँच चुका है। इस सन्दर्भ में वर्तमान में, जनता का यह दृष्टिकोण हो गया है कि भारत लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करने में कदापि सफल नहीं हो सकता। इसके विपरीत...
भारत का गौरव एवं समृद्धि: यूरोप से तुलनात्मक कालक्रमानुसार विवरण

भारत का गौरव एवं समृद्धि: यूरोप से तुलनात्मक कालक्रमानुसार विवरण

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकजभाग 1 महाभारत काल: योगेश्वर कृष्ण का काल(ईसा पूर्व ३१३८ अर्थात आज से लगभग 5200 वर्ष पहले)यूरोपीय क्षेत्र में इस सम्पूर्ण अवधि में हिमयुग है। पूरा क्षेत्र मोटी बर्फीली परतों से ढँका।भारतवर्ष का तत्कालीन विस्तार:भीष्म पर्व के अन्तर्गत जम्बू खण्ड विनिर्माण पर्व में नवम अध्याय में श्लोक 38 से 70 तक में लगभग 250 जनपदों के विवरण हैं।- इन राज्यांे के वैभव, भवन, प्रासाद, नगर, मार्ग, वीथी, सरोवर, शिल्प-वैभव, मन्दिर, चैत्य आदि का विशद वर्णन महाभारत में है।- आदि पर्व में प्रथम अध्याय में ही कुलपति, सत्रों आदि का वर्णन।- सूत कुल की गरिमा का आख्यान।- वाणी, व्याकरण, शास्त्रांे के ज्ञान की विपुलता।- प्राचीन काल से चले आ रहे इतिहास-वर्णन का प्रमाण (आदिपर्व, अध्याय 1, श्लोक 76)- काल सम्बन्धी विराट ज्ञान।- महान राजवंशों की विपुलता-कुरू, यदु, भरत, ययाति, इक्ष्वाकु आदि।- देशांे, तीर्...
छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति चिन्ताजनक

छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति चिन्ताजनक

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
- ललित गर्ग -नया भारत-सशक्त भारत बनाने की बात हो रही है, नई शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा, शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हुए उस पर सर्वाधिक ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन इन सब प्रयत्नों के बावजूद चिंता की बात यह है कि पूरे देश में खुदकुशी करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। साल 2020 में 12500 से अधिक, तो 2021 में 13,000 छात्रों ने आत्महत्या की। ये आंकड़े नैशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो के हैं। कोटा में इसी रविवार को दो और छात्रों ने खुदकुशी कर ली। इसके साथ इस साल कोटा में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या 23 हो गई है, जो बहुत ही गंभीर मसला है। राजस्थान की इस शिक्षा नगरी में दो महीनों में 9 छात्रों ने सुसाइड कर चुके हैं। यहां लगातार छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, इसके पीछे सरकार, प्रशासन या कोचिंग इंस्टिट्यूट की लापरवाही है या कुछ और? सुसाइड हब बन रहे कोट...
दो घटनाओं पर हमारा व्यवहार अलग-अलग

दो घटनाओं पर हमारा व्यवहार अलग-अलग

EXCLUSIVE NEWS, राज्य, सामाजिक
अवधेश कुमारहमारे सामने देश के दो अलग-अलग क्षेत्रों में दो विद्यालय छात्रों की पिटाई का मामला सुर्खियों में है। दोनों में पुलिस कार्रवाई जारी है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मंसूरपुर के नेहा पब्लिक स्कूल में 24 अगस्त की घटना पर पूरे देश में तूफान खड़ा हो गया। घटना केवल इतनी है कि शिक्षिका ने एक छात्र को गिनती नहीं सुनाने तथा होमवर्क नहीं करने पर दूसरे विद्यार्थियों से थप्पड़ लगवाए। इसे इस तरह बनाया गया मानो शिक्षिका ने जानबूझकर एक मुस्लिम बच्चों को हिंदू बच्चों से पिटवाया और इसके पीछे सांप्रदायिक भाव था। उस कक्षा में कुल 60 बच्चे हैं जिसमें 40 बच्चे मुस्लिम हैं। छात्र को थप्पड़ मारने वाले चार में से दो बच्चे एक छात्र और एक छात्रा मुस्लिम है। उस छात्र का चाचा वही था और उसने मोबाइल से वीडियो बना लिया । इसे यह कहते हुए प्रसारित किया गया कि हिंदू छात्रों से मुस्लिम छात्र को पिटवाया जा रहा ह...