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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हथियार, विरोधाभास और जोखिम में संसार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हथियार, विरोधाभास और जोखिम में संसार

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 इन हथियारों के प्रयोग में नैतिक विरोधाभास है, एआई हथियार प्रणालियों के नियंत्रण, सुरक्षा और जवाबदेही से समझौता करता है; यह नेटवर्क सिस्टम के बीच साझा दायित्व के जोखिम को भी बढ़ाता है, खासकर जब हथियार विदेशों से मंगाए जाते हैं। नीति निर्माण के लिए चुनौती है क्योंकि सैन्य सिद्धांत संघर्ष की पारंपरिक समझ पर आधारित है। उदा. यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि क्या मानव रहित समुद्री प्रणाली समुद्र के कानूनों के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तहत "जहाजों" की स्थिति का आनंद लेती है। -प्रियंका सौरभ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन कार्यों को पूरा करने वाली मशीनों की क्रिया का वर्णन करता है जिनके लिए ऐतिहासिक रूप से मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है। इसमें मशीन लर्निंग, पैटर्न रिकग्निशन, बिग डेटा, न्यूरल नेटवर्क, सेल्फ एल्गोरिदम आदि जैसी तकनीकें शामिल हैं। डीप लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग द्वार...
कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर

कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
 जोशीमठ की स्थिति यह एक बहुत ही गंभीर चेतावनी है कि लोग पर्यावरण के साथ इस हद तक खिलवाड़ कर रहे हैं कि पुरानी स्थिति को फिर से बहाल कर पाना मुश्किल होगा। जोशीमठ समस्या के दो पहलू हैं। पहला है बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास, जो हिमालय जैसे बहुत ही नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहा है और यह बिना किसी योजना प्रक्रिया के हो रहा है, जहां हम पर्यावरण की रक्षा करने में सक्षम हैं। दूसरा पहलू, जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारक है। भारत के कुछ पहाड़ी राज्यों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए, 2021 और 2022 उत्तराखंड के लिए आपदा के वर्ष रहे हैं।हमें पहले यह समझना होगा कि ये क्षेत्र बहुत नाजुक हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में छोटे परिवर्तन या गड़बड़ी से गंभीर आपदाएं आएंगी, जो हम जोशीमठ में देख रहे हैं। -डॉ सत्यवान सौरभ जोशीमठ में उभरता संकट विकासात्मक परियोजनाओं की योज...
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब चैनलों पर चलने वाली फर्जी खबरों के विरुद्ध कार्रवाई की

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब चैनलों पर चलने वाली फर्जी खबरों के विरुद्ध कार्रवाई की

TOP STORIES, घोटाला, सामाजिक
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) ने छह यूट्यूब चैनलों का भंडाफोड़ किया, जो भारत में समन्वित तरीके से काम कर रहे थे और गलत जानकारी फैला रहे थे। फैक्ट चेक यूनिट ने इन चैनलों द्वारा फैलाई जा रही फर्जी खबरों का मुकाबला करने के लिए 100 से ज्यादा फैक्ट चेक वाले छह अलग-अलग ट्विटर थ्रेड जारी किए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत यूनिट की ओर से यह दूसरी ऐसी कार्रवाई है जहां पूरे चैनलों का भंडाफो...
सीएमपीडीआईएल ने नई धूल नियंत्रण प्रौद्योगिकी का आविष्कार किया

सीएमपीडीआईएल ने नई धूल नियंत्रण प्रौद्योगिकी का आविष्कार किया

TOP STORIES, राष्ट्रीय
खनन क्षेत्रों में उड़ने वाली धूल को कम करने और उसे नियंत्रित करने के लिए सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल), रांची (कोल इंडिया लिमिटेड की एक सलाहकार सहायक कंपनी) ने उड़ने वाली धूल के उत्पादन और उसे नियंत्रित करने के लिए सिस्टम एवं मेथड का आविष्कार किया है और इसे दिसंबर, 2022 में पेटेंट मिला है (पेटेंट संख्या 416055)। इस प्रणाली का उपयोग खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग, बंदरगाहों, निर्माण स्थलों में इस्तेमाल किया जा सकता है जहां कोयला तथा अन्य खनिज तथा फ्यूजिटिव सामग्री खुले में संग्रहित रहती है। यह प्रणाली खुले स्रोतों से धूल उत्पादन को कम करने के अतिरिक्त शोर को कम करेगी। कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोयला/लिग्नाइट सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी तरीके से गुणवत्तापूर्ण उत्प...
स्वामी जी की पावन स्मृतियाँ और चंद सवाल

स्वामी जी की पावन स्मृतियाँ और चंद सवाल

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12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर....... यह कहना अनुचित नहीं होगा कि जहाँ आदि शंकराचार्य ने संपूर्ण भारतवर्ष को सांस्कृतिक एकता के मज़बूत सूत्र में पिरोया, वहीं स्वामी विवेकानंद ने आधुनिक भारत को उसके स्वत्व एवं गौरव का बोध कराया। बल्कि यह कहना चाहिए कि उन्होंने भारत का भारत से साक्षात्कार करा उसे आत्मविस्मृति के गर्त्त से बाहर निकाला। लंबी गुलामी से उपजी औपनिवेशिक मानसिकता एवं औद्योगिक क्रांति के बाद पश्चिम से आई भौतिकता की आँधी का व्यापक प्रभाव भारतीय जन-मन पर भी पड़ा। पराभव और परतंत्रता ने हममें हीनता-ग्रंथि विकसित कर दी। हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक चेतना मृतप्राय अवस्था को प्राप्त हो चुकी थी। नस्लभेदी मानसिकता के कारण पश्चिमी देशों ने न केवल हमारी घनघोर उपेक्षा की, अपितु हमारे संदर्भ में तर्कों-तथ्यों से परे नितांत अनैतिहासिक-पूर्वाग्रहग्रस्त-मनगढ़ंत स्थापनाएँ भी दीं।...
आज पाकिस्तान का पाकिस्तान से ही सामना

आज पाकिस्तान का पाकिस्तान से ही सामना

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बलबीर पुंज भारत को 1947 में विभाजित करके उभरा पाकिस्तान बदहाल क्यों है? वर्ष 1971 में पाकिस्तान जहां दो टुकड़ों में बंट गया, वही आज ब्लूचिस्तान, पख़्तूनिस्तान और सिंध में अलगाववाद के स्वर चरम पर है। आर्थिक रूप से यह इस्लामी राष्ट्र न केवल खोखला हो चुका है, अपितु अपनी देनदारी चुकाने या आतंरिक समस्याओं से निपटने हेतु दयनीय भिखारी के रूप में विश्वभर में इधर-उधर याचना कर रहा है। अमेरिका आदि देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय समुदायों ने लगभग 10 अरब डॉलर के रूप में बाढ़ से बेहाल पाकिस्तान की झोली भरने का वादा किया है। स्थिति ऐसी है कि पाकिस्तानी नागरिक या तो बिजली से लेकर चायपत्ती, आटा, सब्जियों और अन्य खाद्य-पदार्थों के लिए जूझ रहे है या फिर अनियंत्रित महंगाई और कालाबाजारी के शिकार है। बिजली बचाने के लिए शरीफ सरकार ने संध्या 8:30 बजे बाजारों, तो रात 10 बजे तक विवाहस्थलों को बंद करने का आदेश दिया ...
उत्तर प्रदेश में धार्मिक केंद्रों के विकास पर बल और तीर्थ यात्राओं को बढ़ावा 

उत्तर प्रदेश में धार्मिक केंद्रों के विकास पर बल और तीर्थ यात्राओं को बढ़ावा 

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मृत्युंजय दीक्षित  अयोध्या और काशी के बाद अब प्रदेश सरकार मथुरा, वृंदावन में भी भव्य कॉरिडोर बनाने की ओर अग्रसर है इसके साथ ही प्रदेश में तीर्थयात्राओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी छोटे व स्थानीय महत्व के धार्मिक स्थलों का विकास भी किया जा रहा है, जिससे तीर्थ यात्राओं को बढ़ावा तो मिलेगा ही रोजागर के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। प्रदेश सरकार निवेश लाने के लिए जो अभियान चला रही है उसके केंद्र बिंदु में तीर्थ पर्यटन एक महत्वपूर्ण बिंदु रखा गया है जिसके कारण निवेशक बड़ी संख्या में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। यह प्रदेश सरकार की मेहनत का ही परिणाम है कि इस बार आंग्ल नववर्ष पर प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों व धार्मिक केंद्रो पर भारी भीड़ उमड़ी।प्रदेश के प्रमुख आस्था केन्द्रों अयोध्या, मथुरा, काशी सहित तमाम छोटे बड़े आस्था केंद्रों पर भक्तों का अभूतपूर्व आगमन देखा गय...
विज्ञान-प्रौद्योगिकी में करियर और उद्यमिता संबंधी सलाह-परामर्श

विज्ञान-प्रौद्योगिकी में करियर और उद्यमिता संबंधी सलाह-परामर्श

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भारत युवाओं का देश है। आगामी 25 वर्षों के 'अमृतकाल' में विशेषकर विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं और नव-उद्यमियों की सक्रिय और उत्साही प्रतिभागिता द्वारा हम आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तत्परता से बढ़ सकते हैं। भारत सरकार और विभिन्न संस्थानों द्वारा इस दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। 21 से 24 जनवरी 2023 के दौरान भोपाल में आयोजित होने वाले “इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ)” में युवाओं और उद्यमियों को विज्ञान-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अपार संभावनाओं से परिचित कराने और मार्गदर्शन के लिए आयोजित किया जा रहा “सलाह और परामर्श (वैज्ञानिक चर्चा)” कार्यक्रम इन प्रयासों का हिस्सा है। केंद्रीय राज्य मंत्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि ...
Science through games and toys

Science through games and toys

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Science through games and toysNew Delhi, Jan 11 (India Science Wire): A child enjoys playing with toys, as theyengage child’s senses, and spark their imagination. Most of us remember thescience behind many of those childhood games. Only during the secondary levelof the school, we realized that toy cars function based on potential and kineticenergy. And while at the Higher Secondary level, we understood the nitty grittythat by changing the shape of the material, energy is stored and then released asmotion.The event “Science with Games and Toys” synchronizes well with the 8th editionof the India International Science Festival (IISF) 2022 on the theme 'Marchingtowards Amrit Kaal with Science, Technology and Innovation'. The event will beorgnaised at Maulana Azad National Institute of Te...
स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग

स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग

TOP STORIES, धर्म
मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान जैकालियट ने अपनी पुस्तक ‘बाइबिल इन इंडिया’ में भारतीय ज्ञान विज्ञान की खुलकर प्रशंसा की है। पंडित और पुजारी तो ब्राह्मण ही बनेगा, लेकिन उसका जन्मगत ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है। यहां ब्राह्मण से मतलब श्रेष्ठ व्यक्ति से न कि जातिगत। आज भी सेना में धर्मगुरु पद के लिए जातिगत रूप से ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है बल्कि योग्य होना आवश्यक है। ऋषि दयानंद की संस्था आर्यसमाज में हजारों विद्वान हैं जो जन्म से ब्राह्मण नहीं हैं। इनमें सैकड़ों पूरोहित जन्म से दलित वर्ग से आते हैं। -प्रियंका सौरभ वर्तमान समय...