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कृषि : भारत में गन्ने की फजीहत

कृषि : भारत में गन्ने की फजीहत

TOP STORIES, राष्ट्रीय
राकेश   दुबे देश में 23 प्रकार के अनाज, दलहन, तिलहन आदि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होते हैं  उसी तरह से भारत सरकार गन्ने के लिए एक गारंटीकृत मूल्य की घोषणा करती रही है जिसे 2008-09 तक वैधानिक न्यूनतम मूल्य कहा जाता था। वर्ष 2009-10 से, इसे रंगराजन समिति की सिफारिश के अनुसार उचित और लाभकारी मूल्य कहा जाता है, जिसमें गन्ने की उत्पादन लागत के साथ-साथ चीनी मिलों द्वारा वसूल की गई चीनी की कीमत को भी ध्यान में रखा गया है। इसकी सिफारिश के अनुसार, पिछले वर्ष की कीमत का 70 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जाना चाहिए और 30 प्रतिशत मिल मालिकों द्वारा रखा जाना है। इसके बावजूद, कुछ राज्य सरकारें गन्ने के लिए राज्य-अनुशंसित कीमतों की घोषणा करती हैं जो एफआरपी से अधिक होते हैं। ये चीनी मिलों पर बाध्यकारी हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2004 में पहली बार राज्यों की घोषणा शक्ति को मान्य किय...
संपादक नामक संस्था के मजबूत न होने का परिणाम

संपादक नामक संस्था के मजबूत न होने का परिणाम

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राकेश दुबे पत्र सूचना कार्यालय ने ६ यू टूयूब पर पाबंदी लगा दी | इन चैनलों के लाखों दर्शक हैं | पाबंदी का कारण कोई एक नहीं  है, अनेक हैं |अच्छी स्थिति होती यदि किसी संस्था या पेशे की विश्वसनीयता और मानवीय मूल्यों को लेकर प्रतिबद्धता की पहल भीतर उसके से ही हो, जिससे  बाहर से किसी को नसीहत देने का अवसर न मिल सके। लेकिन जब-जब हम मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघते हैं तो अपनी स्वायत्तता पर आंच आने देने के लिये स्वयं स्थितियां बनाते हैं। हाल ही में सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा सभी टीवी चैनलों को पुन: एक परामर्श जारी किया गया था । सरकार की दलील थी कि टीवी चैनल विचलित करने वाले वीडियो और तस्वीरों के प्रसारण से परहेज करें। सरकार का मानना है कि रक्तरंजित व्यक्ति, शवों व शारीरिक हमलों की तस्वीरों का दिखाया जाना कष्टप्रद है। कोशिश हो कि पीड़ित चेहरों की पहचान न होने पाये। सूचना प्रसारण मंत्रालय का...
मुसलमानों पर मोहन भागवत

मुसलमानों पर मोहन भागवत

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागव ने ‘पांचजन्य’ साप्ताहिक को दी गई एक भेंट वार्ता में ऐसी कई बातें कही हैं, जिन पर देश के लोगों और खास तौर से संघ के स्वयंसेवकों का विशेष ध्यान जाना चाहिए। उन्होंने पहली बात यह कही है कि भारत के मुसलमानों को किसी से डरने की जरुरत नहीं है। उन्हें वैसे ही निर्भय रहना चाहिए, जैसे अन्य भारतीय रहते हैं। आजकल देश और विदेशों के कई बुद्धिजीवी यह महसूस करते हैं कि जब से मोदी सरकार कायम हुई है, भारत के मुसलमान बहुत डर गए हैं। कुछ हद तक यह बात सही है लेकिन इसका मूल कारण यह सरकार उतना नहीं है, जितना कि कुछ सिरफिरे ‘हिंदुत्ववादी लोग’ हैं, जो कि नफरत फैलाते हैं और अपने व्यवहार से लोगों में डर पैदा करते हैं। भाजपा सरकार को इन उग्रवादी और तथाकथित ‘हिंदुत्ववादियों’ के खिलाफ सख्त कदम उठाने में कोताही क्यों करनी चाहिए? सच्चाई तो यह है कि...
धनखड़: संसद बड़ी या अदालत ?

धनखड़: संसद बड़ी या अदालत ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय न्यायपालिका को दो-टूक शब्दों में चुनौती दे दी है। वे संसद और विधानसभाओं के अध्यक्षों के 83 वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वे स्वयं राज्यसभा के अध्यक्ष हैं। आजकल केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर लंबा विवाद चल रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का चयन-मंडल बार-बार अपने चुने हुए जजों की सूची सरकार के पास भेजता है लेकिन सरकार उस पर ‘हाँ’ या ‘ना’ कुछ भी नहीं कहती है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि सरकार का यह रवैया अनुचित है, क्योंकि 1993 में जो चयन-मंडल (कालेजियम पद्धति) तय हुई थी, उसके अनुसार यदि चयन-मंडल किसी नाम को दुबारा भेज दे तो सरकार के लिए उसे शपथ दिलाना अनिवार्य होता है। इस चयन-मंडल में पांचों चयनकर्त्ता सर्वोच्च न्यायालय के जज ही होते हैं। और कोई नहीं होता। इस पद्धति में कई कमियाँ देखी गईं। उसे बद...
पर्यावरण और विकास के बीच टकराव

पर्यावरण और विकास के बीच टकराव

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
विनीत नारायणउत्तराखंड में भगवान श्री बद्रीविशाल जी के शरद कालीन पूजा स्थल और आदि शंकराचार्य जी की तपस्थली ज्योतिर्मठ(जोशीमठ) नगर में विगत एक महीने से बड़ी लंबी-लंबी दरारें आ गई थीं, जो निरंतर दिन प्रतिदिन और गहरी व लंबी होतीजा रही हैं। वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और धार्मिक लोगों के अनुसार, बेतरतीब ढंग से हुए ‘विकास’ और हर वर्ष बढ़ते पर्यटकों केसैलाब को इसका कारण माना जा सकता है।जोशीमठ नगर बद्रीनाथ धाम से 45 किलोमीटर पहले ही अलकनंदा नदी के किनारे वाले, ऊंचे तेज ढलान वाले पहाड़ परस्थित है। यहां पर फौजी छावनी और नागरिक मिलाकर 50,000 के लगभग निवासी रहते हैं। साल के छ महीने की गर्मियोंके दौरान ये संख्या पर्यटकों के कारण दुगनी हो जाती है।बद्रीनाथ धाम में दर्शनार्थी तो आते ही हैं। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध औली जाने वाले पर्यटक भी यहीं आते हैं। जो किबद्रीनाथ से क़रीब 50 किलोमीटर दूर है। जोशीमठ से म...
नोएडा-दुबई जैसा बनेगा कानपुर तो नारायणमूर्ति भी करेंगे कानपुर में निवेश

नोएडा-दुबई जैसा बनेगा कानपुर तो नारायणमूर्ति भी करेंगे कानपुर में निवेश

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आर.के. सिन्हा गंगा किनारे बसे प्राचीन कानपुर शहर में आपको अब भी इस तरह के अनेक लोग मिल जाएंगे, जिन्हें अच्छी तरह से याद है जब उनके शहर की पहचान एशिया के मैनचेस्टर के रूप में हुआ करती थी। भारत में कपड़े का सबसे अधिक उत्पादन इसी कानपुर शहर में होता था। इसलिए ही इसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता था। जाहिर है, देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में कानपुर का बेहद महत्त्वपूर्ण योगदान हुआ करता था। कुछ दशक पहले तक कानपुर में सायरन, मशीनों की गड़गड़ाहट और अपनी-अपनी मिलों के लिए सड़क किनारे भागते श्रमिकों के साइकिल की घंटियों की आवाजें सुनाई दिया करती थीं। फिर महान स्वाधीता सेनानी और शहीद ए आजाम भगत सिंह के गुरु गणेश शंकर विद्यार्थी के शहर कानपुर का चेहरा-मोहरा धीरे-धीरे बदलने लगा। यहां से कपड़ा मिलें बंद होने लगीं। मजदूर बेरोजगार होते चले गए। कानपुर जैसा जीवंत शहर अपनी पहचान खोने लगा। ...
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना 18वां स्थापना दिवस मना रहा है

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना 18वां स्थापना दिवस मना रहा है

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना 18वां स्थापना दिवस मना रहा है राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना 18वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर को पूरी तरह बच्चों को समर्पित करने के लिए आयोग ने बाल अधिकारों के बारे में बच्चों में जागरूकता फैलाने और इस प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बाल अधिकार चैंपियन बनाने के लिए 12 जनवरी, 2023 को राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती) पर एक प्रश्नोत्तरी का शुभारंभ किया। स्कूली छात्रों, छात्रावासों में रहने वाले बच्चों, बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले बच्चों और बेघर बच्चों से ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड से इस प्रश्नोत्तरी में भाग लेने के लिए बच्चों की व्यापक भागीदारी को आमंत्रित किया गया है। यह बच्चों को उनके अधिकारों के लिए सशक्त बनाने का मंच है, जहां प्रश्नोत्तरी में उन सभी विषयों को शामिल किया गया है, जिन्हें जानना बच्चों के लिए बहुत ज...
बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को रोका जाये-ललित गर्ग

बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को रोका जाये-ललित गर्ग

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बच्चों के प्रति समाज को जितना संवेदनशील होना चाहिए, उतना नहीं हो पाया है। कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते फिर भी उनकी बाल-सुलभ संवेदनाओं को कुचला जाना लगातार जारी है। बच्चों के प्रति संवेदनहीनता को सिर्फ जघन्य अपराधों में ही नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि कई ऐसे मौके हैं, जब समाज के संवेदनहीन व्यवहार का हमें अहसास भी नहीं होता, वैसा व्यवहार लगातार बच्चों पर होता रहता है। सोशल मीडिया पर बच्चों के बारे में की गई टिप्पणियों के आईने में समाज को अपना चेहरा देखना चाहिए। क्यों हम नन्हें बच्चों को अपनी विकृत मानसिकता एवं वीभत्स सोच का शिकार बनाते हैं? ऐसी ही एक त्रासद एवं विडम्बना घटना ने एक बार फिर बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाया है। क्रिकेट जगत की दो हस्तियों महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली की बेटियों पर की गई अभद्र एवं अश्...
Fall & Fall of Pakistan 

Fall & Fall of Pakistan 

TOP STORIES, राष्ट्रीय
By Balbir Punj Pakistan is in deep trouble. It’s reaping what it had sown. For decades, it has exported terror to India, as a part of a doctrine propounded by General Zia to ‘bleed India through 1000 cuts.’ Now chickens are coming home to roost. Tehreek-e-Taliban-e-Pakistan (TTP), an Islamist group, created by Pakistan, is hissing at its creator. The beleaguered nation is also riven by intra-faith violence, fractured by regional pulls and suffering aftermath of devastating floods . Reeling under stagflation, the country is on the brink of bankruptcy. The Islamic nation is facing an existential crisis. For the first time in its chequered history , Pakistan Army, the only stable institution in the country, has become controversial. TTP with support from Afghanistan Taliban regi...
उपद्रवी हवाई यात्रियों पर लगे कड़ा अंकुश

उपद्रवी हवाई यात्रियों पर लगे कड़ा अंकुश

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*रजनीश कपूर2017 में देश के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हंगामा करने वाले हवाई यात्रियों को नियंत्रित करने की मंशा से ‘नोफ़्लाई लिस्ट’ की शुरुआत की थी। परंतु इस सबके बावजूद हंगामा करने वाले उपद्रवी यात्रियों के नये-नये किस्सेरोज़ देखे जाते हैं।एयर इंडिया की न्यू यॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट की बिज़नेस क्लास में एक वृद्ध महिला के साथ हुए शर्मनाकहादसे ने दुनिया भर में भारत को शर्मसार किया है। ऐसा नहीं है कि ऐसे क़िस्से केवल भारत में या भारतीयों द्वाराही किए जाते हैं। यदि आप गूगल पर खोजेंगे तो ऐसे मामलों की एक लंबी सूची आपको मिल जाएगी। परंतु ऐसेमानसिक रोगियों के साथ सरकारें और एयरलाइंस ऐसा क्या करें जिससे इन पर अंकुश लग सके?यदि ऐसे हादसे उड़ान भरने से पहले होते हैं तो एयरलाइन ऐसे उपद्रवी यात्री को विमान से उतार सकती है। इसकेसाथ ही उसे ‘नो फ़्लाई लिस्ट’ में भी डाल सकती है। परंतु यदि ऐसा बीच हवा म...