दिल है कि मानता नहीं
दिल है कि मानता नहीं
*रजनीश कपूर
जब भी कभी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो तो अक्सर यह देखा गया है कि दिल का पलड़ा दिमाग़ पर
भारी पड़ता है। ऐसा ज़्यादातर मोह माया के लोभ के कारण होता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि लोभ
में फंसकर व्यक्ति नीति के विरूद्ध कार्य करता है। परंतु जिस भी व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में जब लोभ
एक अहम स्थान ग्रहण कर लेता है तो वो हर तरह के प्रयास से अपने मोह से जुड़े लक्ष्यों की पूर्ति में जुट
जाता है।
प्रायः यह देखा गया है कि जब भी कभी किसी उच्च पद पर तैनात सरकारी अफ़सर, सासंद, विधायक आदि
की सेवा निवृत्ति का समय आता है तो सरकारी बंगले और अन्य सुविधाओं का मोह उन्हें घेर लेता है।
इसके विपरीत ऐसे भी व्यक्ति देखे गए हैं जो अतिसंवेदनशील पदों पर रहने के बावजूद, अपना सेवाकाल
पूरा होते ही सरकारी बंगला छोड़ देते हैं। ऐसे लोग आप उँगलियों पर गिन सकते हैं जो रिटायर हो...









