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‘दवा’ के नाम पर कदाचार और भ्रष्टाचार

‘दवा’ के नाम पर कदाचार और भ्रष्टाचार

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‘दवा’ के नाम पर कदाचार और भ्रष्टाचार* विज्ञान अध्ययन पत्रिका ‘लांसेट’ द्वारा कराये गये पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी के संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि भारत में लोग डॉक्टर से परामर्श किये बिना एंटीबायोटिक्स दवाओं का बेतहाशा सेवन कर रहे हैं|ये दवाइयां स्वास्थ्य पर खराब असर कर सकती हैं तथा बीमारी को ठीक करने के बजाय बढ़ा सकती हैं| दूसरी ओर फार्मा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार किस तरह स्वास्थ्य के बेहतर नतीजों को खतरे में डाल रहा है। फार्मा कंपनी द्वारा अतार्किक रूप से डॉक्टरों को रिश्वत देकर अपनी दवाएं लिखवाने की बात हो या फिर हेल्थ केयर से जुड़े लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से अनुचित फायदा पहुंचाकर अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की, आखिरकार जोखिम में तो रोगी का स्वास्थ्य ही होता है| दुर्भाग्य से देश में ऐसे मामले दिन-ब-दिन सामने आ रहे हैं, और सरकार का रवै...
विरोध करना अधिकार है,सरकार की कृपा नहीं

विरोध करना अधिकार है,सरकार की कृपा नहीं

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*विरोध करना अधिकार है,सरकार की कृपा नहीं* विरोध करना और सरकार का विरोध करना भारत में आसान नहीं है | सदैव विरोध में रहे मेरे समाजवादी मित्र रघु ठाकुर ने यह बात बताते हुए सरकार के विरोध में किये जाने वाले धरना प्रदर्शन में होने वाली दुशवारियों का जिक्र किया था | यह दुश्वारी अब और गहरा गई है | कहने को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उदारतापूर्वक नागरिकों को "निर्दिष्ट क्षेत्र में" यानी सिर्फ तय जगहों पर ही विरोध करने का अधिकार दिया है। नायालय की टिप्पणी थी कि "असहमति और लोकतंत्र साथ-साथ चलते हैं, लेकिन विरोध निर्दिष्ट क्षेत्र में ही किया जाना चाहिए। विरोध के तौर पर जो धरना प्रदर्शन आदि शुरू हुआ, उससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कई प्रदर्शन ऐसे भी हुए जिनसे लोगों को असुविधा हुई और कई सिर्फ अनुमति के मकडजाल में फंस कर दम तोड़ गये | देश में बहुत से नागरिको को नहीं पता होगा कि निर्दिष्ट क्...
17 सितंबर को होगा 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन

17 सितंबर को होगा 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन

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आजादी के अमृत वर्ष के अवसर पर 05 जुलाई को शुरू हुए 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन 17 सितंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ के अवसर पर हो रहा है। महासागरों की स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करने और उसके बारे में जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू किये गए ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ नामक इस अभियान के समापन से जुड़े कार्यक्रम एक साथ देश के 75 समुद्र तटों पर आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह मुंबई में स्वयं समापन कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। देश की 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा से कचरा हटाने के लिए शुरू किए गए इस अभियान को विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों का समर्थन मिला है...
विश्व भाषा की ओर बढ़ती हिन्दी की भारत में उपेक्षा क्यों?

विश्व भाषा की ओर बढ़ती हिन्दी की भारत में उपेक्षा क्यों?

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हिंदी दिवस, 14 सितबंर, 2022 पर विशेषविश्व भाषा की ओर बढ़ती हिन्दी की भारत में उपेक्षा क्यों?  - ललित गर्ग-विश्व भाषा बनने की ओर हिन्दी के बढ़ते कदम भारत के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। हिन्दी  विश्व भाषा बनने की समस्त अर्हताएं एवं विशेषताएं स्वयं में समाये हुए है। हिन्दी स्वयं में अपने भीतर एक अन्तर्राष्ट्रीय जगत छिपाये हुए हैं। आर्य, द्रविड, आदिवासी, स्पेनी, पुर्तगाली, जर्मन, फ्रेंच, अंग्रेजी, अरबी, फारसी, चीनी, जापानी, सारे संसार की भाषाओं के शब्द इसकी विश्वमैत्री एवं वसुधैव कुटुम्बकम वाली प्रवृत्ति को उजागर करते हैं। विश्व में हिंदी भाषी करीब 70 करोड़ लोग हैं। यह तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इस समृद्ध एवं वैश्विक गरिमा वाली भाषा का हिन्दी दिवस  प्रत्येक 14 सितबंर को मनाया जाता है। देश की आजादी के पश्चात 14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी...
लिज ट्रस के मस्तिष्क पर कांटो का ताज*

लिज ट्रस के मस्तिष्क पर कांटो का ताज*

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लिज ट्रस के मस्तिष्क पर कांटो का ताज* ब्रिटेन, विश्व के सर्वाधिक खुशहाल देशों में से एक है। अतीत में एक छोटे से देश ब्रिटेन का झण्डा संसार के सभी स्थानों पर फहराया जाता था और सम्पूर्ण विश्व उसके आगे नतमस्तक था। ब्रिटिश शासक, अपने अधीन देशों से उनकी बहुमूल्य सम्पदा को लूटकर ब्रिटिश राजकोष में भरते थे। ब्रिटेन देश, जहाँ पर सम्पूर्ण विश्व से लूटे हुए धन का अर्जन किया जा रहा हो, उसका खुशहाल होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। परन्तु लूट के धन से प्राप्त की गई खुशहाली सदैव ही अस्थायी होती है एवं परिश्रम के फलस्वरूप प्राप्त की गई खुशहाली स्थायी होती है। ब्रिटिश राज्य आज इसी समस्या का सामना कर रहा है। कंजर्वेटिव पार्टी के प्रधानमंत्री बोरिस जान्सन की त्रुटिपूर्ण नीतियों के कारण जनता का विरोध असहनीय हो गया था। अतः राष्ट्र को सुचारू रूप से चलाने हेतु पार्टी के लिए ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री चुनना...
राहुल गांधी के खिलौने में हिंदू विरोध और मुस्लिम /ईसाई समर्थक चाभी कौन भरता है

राहुल गांधी के खिलौने में हिंदू विरोध और मुस्लिम /ईसाई समर्थक चाभी कौन भरता है

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*राहुल गांधी के खिलौने में हिंदू विरोध और मुस्लिम /ईसाई समर्थक चाभी कौन भरता है ? *भारत माता को गालियां बकने वाले, हिंसक ईसाई पादरी जार्ज पौन्नेया को राहुल गांधी अपनी* *भारत जोड़ो यात्रा का आईकॉन क्यों बनाया ?* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* =================== राहुल गांधी का हिन्दू विरोधियों से प्रेम कब समाप्त होगा? हिन्दू विरोधी और ईसाई-मुस्लिम समर्थक सलाहकार कब तक राहुल गांधी की हंसी उड़वाते रहेंगे, आत्मघाती कदम पर चलाते रहेंगे ? राहुल गांधी के खिलौने में जार्ज पौन्नया जैसी हिंसक मानसिकताओं की चाभी कौन लोग भरते हैं? हिन्दू विरोधियों के बल पर भाजपा और मोदी के हराने का सपना राहुल गांधी कब तक देखेंगे? अपने को ब्राम्हण कहने वाले राहुल गांधी हिन्दू विरोधियों से हिन्दुओं के खिलाफ राजनीतिक आवाज को कब तक समर्थन करते रहेंगे? यह जानते हुए भी कि हिन्दू विरोधी ही उनकी पार्टी की केन्द्रीय सत्ता से...
भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां।

भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां।

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भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां। 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य सूची में होने के कारण, अपराध की जांच करने और आवश्यक साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का प्राथमिक दायित्व राज्यों का है। हालांकि भारत सरकार ने सभी प्रकार के साइबर अपराध से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना सहित कई कदम उठाए हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। चूंकि पारंपरिक अपराध के साक्ष्य की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रकृति में पूरी तरह से भिन्न होते हैं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से निपटने के लिए मानक और समान प्रक्रियाएं निर्धारित करना आवश्यक है। प्रत्येक जिले या रेंज में एक अलग साइबर-पुलिस स्टेशन स्थापित करना, या प्रत्येक पुलिस स्टेशन में तकनीकी रूप से योग्य कर्मचारी, आवेदन, उपकरण और बुनियादी ढांचे के परीक्षण ...
नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी

नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी

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नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी नई दिल्ली, 09 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और इसके सार्वजनिक उपक्रम; जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के समर्थन से भारत बायोटेक द्वारा विकसित नाक से दिये जाने वाले (Intranasal ) कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी मिल गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ताजा वक्तव्य में यह जानकारी दी गई है। बीबीवी154 इंट्रानैसल COVID-19 वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा मंजूरी दी गई है। बीबीवी154 नाक से दिया जाने वाला प्रतिकृति-अल्पता (इंट्रानैसल रेप्लिकेशन-डेफिसिएन्ट) वाले चिंपैंजी एडेनोवायरस सार्स-कोव-2 (SARS-COV-2) वेक्टरीकृत वैक्सीन है। इसमें स्थिर स्पाइक एसएआरएस–सीओवी-2 (वुहान वेरिएंट) को व्यक्त करने में सक्षम प्रतिकृ...
कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

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नई दिल्ली में कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ आज के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम पर पूरे देश की दृष्टि है, सभी देशवासी इस समय इस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। मैं इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन रहे सभी देशवासियों का हृदय से स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं। इस ऐतिहासिक क्षण में मेरे साथ मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री हरदीप पुरी जी, श्री जी किशन रेड्डी जी, श्री अर्जुनराम मेघवाल जी, श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी, श्री कौशल किशोर जी, आज मेरे साथ मंच पर भी उपस्थित हैं। देश के अनेक गणमान्य अतिथि गण, वह भी आज यहां उपस्थित हैं। साथियों, आजादी के अमृत महोत्सव में, देश को आज एक नई प्रेरणा मिली है, नई ऊर्जा मिली है। आज हम गुजरे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है। गुलामी का प्रतीक...
आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस- 10 सितंबर, 2022आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग  ललित गर्ग बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं एक ऐसा बदनुमा दाग है जो हमारे तमाम विकास एवं शिक्षित होने के दावों को खोखला करता है। आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है, उनके प्रियजन, रिश्तेदार एवं मित्र तो दुःखी होते ही हैं, सम्पूर्ण मानवता भी आहत एवं शर्मसार होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भारत में 1.39 लाख लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 45 फीसदी लोग तनाव, अवसाद, बायपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आत्महत्या के प्रमुख कारणों में तनाव, हिंसा, अवसाद, निराशा, नकारात्मकता सहित अन्य मानसिक समस्याएं, गंभीर रोगों के च...