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अवसादों भरा हफ़्ता

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अवसादों भरा हफ़्ता विनीत नारायण पिछला हफ़्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसादों से भरा रहा। जो घटनाएँ घटीं उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष असर भारत पर भी पड़ेगा। इस क्रम में सबसे ज़्यादा दुखद घटना जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे की नृशंस हत्या है। वे न केवल जापान के सशक्त और लोकप्रिय नेता थे बल्कि विश्व राजनीति में भी उनका सर्वमान्य प्रभावशाली व्यक्तित्व था। इस तरह की हिंसा जापान की संस्कृति में अनहोनी घटना है। कुछ लोगों को अंदेशा है कि इसके पीछे चीन का हाथ हो सकता है। जिसने हत्यारे को मनोवैज्ञानिक रूप से इस हाराकिरी के लिए उकसाया होगा। ऐसे षड्यंत्रों का प्रमाण आसानी से जग-ज़ाहिर नहीं होता, इसलिए दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। पर ऐसा अंदेशा लगाने वालों का तार्किक आधार यह है कि ‘साउथ एशिया सी’ में चीन की बढ़ती दादागिरी को रोकने की जो पहल शिंजो आबे ने की उससे चीन जाहिरन बहुत विचलित...
धार्मिक भावनाओं पर दोहरी राजनीति

धार्मिक भावनाओं पर दोहरी राजनीति

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धार्मिक भावनाओं पर दोहरी राजनीति  श्री शंकर शरण (लेखक: राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर एवं वरिष्ठ स्तंभकार हैं) काग्रेस नेता शशि थरूर का यह कथन चर्चा में है कि 'हमारा यह हाल हो गया है कि धर्म-मजहब के किसी पक्ष पर कुछ भी कहने पर कोई न कोई भावना आहत होने का दावा कर नाराज होने लगता है।' तृणमूल नेत्री महुआ मोइत्रा द्वारा देवी काली के बारे में दिए गए बयान के संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि 'ऐसी बातें सहजता से लेनी चाहिए, क्योंकि इसके पीछे किसी को चोट पहुंचाने का भाव नहीं रहता।' थरूर की बात सही है। समस्या यह है कि उन जैसे अधिकांश नेता और बौद्धिक तब चुप रह जाते हैं, जब मामला इस्लामी प्रसंगों का होता है। तब अभिव्यक्ति के सहज अधिकार पर दोहरापन झलकता है, जो सबसे बड़ा संकट है। लोग किसी चोट से अधिक उस पर शासन और बुद्धिजीवियों के दो तरह के रुख दिखाने से अधिक क्षुब्ध होते हैं। महुआ मोइत्रा के पक्ष मे...
क्या भारत का विपक्ष बुढ्ढा हो चुका है?*

क्या भारत का विपक्ष बुढ्ढा हो चुका है?*

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क्या भारत का विपक्ष बुढ्ढा हो चुका है?* भारत देश की स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ, जिसके अन्तर्गत कांग्रेस पार्टी के पंडित जवाहर लाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और कांग्रेस पार्टी लगभग 50 वर्षो तक सत्ता में रही। कांग्रेस के स्थायित्व का प्रमुख कारण प्रारम्भ में विपक्ष का कमजोर होना था। कांग्रेस के सत्ताकाल में ही भारत दो टुकड़ों में विभाजित हुआ, जिसके अन्तर्गत पाकिस्तान का जन्म हुआ। उस समय विपक्ष मजबूत होता तो शायद पाकिस्तान नहीं बनता। विपक्ष को स्वयं को सशक्त करने में 50 वर्ष व्यतीत हुए। इस अवधि में विपक्षी दलों में अनेकों बार बिखराव भी हुआ परन्तु उसने पुनः स्वयं को एकजुट किया। अथक प्रयासों के पश्चात भाजपा एक सुदृण विपक्ष के रूप में उभरी। पूर्व में भाजपा ने अपना अस्तित्व स्थापित करने हेतु अन्य दलों का सहयोग लिया, परन्तु वर्तमान समय में भाजपा स्व...

शिक्षा और चिकित्साः जबानी जमा-खर्च

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शिक्षा और चिकित्साः जबानी जमा-खर्च डॉ. वेदप्रताप वैदिक वाराणसी में अखिल भारतीय शिक्षा समागम में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों की औपनिवेशिक प्रणाली की दो-टूक आलोचना की और देश भर के शिक्षाशास्त्रियों से अनुरोध किया कि वे भारतीय शिक्षा प्रणाली को शोधमूलक बनाएं ताकि देश का आर्थिक और सामाजिक विकास तीव्र गति से हो सके। जहां तक कहने की बात है, प्रधानमंत्री ने ठीक ही बात कही है लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री और पिछले सभी प्रधानमंत्रियों से कोई पूछे कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कौनसे आवश्यक और क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं? पिछले 75 साल में भारत में शिक्षा का ढांचा वही है, जो लगभग 200 साल पहले अंग्रेजों ने भारत पर थोप दिया था। उनकी शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जी-हुजूर बाबुओं की जमात खड़ी करना था। आज भी वही हो रहा है। हमारे सुशिक्षित नेता लोग उसके साक्षात ज्वलंत प्रमाण हैं। देश ...
अस्पताल-जनित संक्रमण से बचाने के लिए नया सॉल्यूशन

अस्पताल-जनित संक्रमण से बचाने के लिए नया सॉल्यूशन

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अस्पताल-जनित संक्रमण से बचाने के लिए नया सॉल्यूशन नई दिल्ली, 08 जुलाई (इंडिया साइंस वायर): अस्पतालों में उपयोग होने वाले स्वास्थ्य देखभाल परिधान (स्क्रब, गाउन, डॉक्टर कोट, रोगी के वस्त्र आदि) में सूक्ष्म रोगजनक होते हैं, जो बीमारी का कारण बन सकते हैं। कपड़े की नरम और छिद्रयुक्त सतह हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, और कवक के पनपने एवं उनके प्रसार के लिए अनुकूल होती है। इन रोगजनकों को साफ करने या हटाने के बार-बार किये जाने वाले प्रयासों के बावजूद, वे समय के साथ कपड़ों से चिपके रहते हैं, और संक्रमण फैलाते रहते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली द्वारा इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप मेडिकफाइबर और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक प्रभावी सॉल्यूशन विकसित किया है, जिससे अस्पतालों में चिकित्सकों, कर्मचारियों, एवं मरीजों को रोगजनकों के संक्रमण से रहित ...
पुलिस की मजबूरी

पुलिस की मजबूरी

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पुलिस की मजबूरी *रजनीश कपूर हाल ही में हुई दो पत्रकारों की गिरफ़्तारी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। ताज़ा मामला एक राष्ट्रीय टीवी चैनल के एंकर की गिरफ़्तारी से सम्बंधित है। इस घटना में जिस तरह दो राज्यों की पुलिस इस एंकर की गिरफ़्तारी को लेकर आपस में भिड़ी है वो नई बात नहीं है। कुछ हफ़्तों पहले भी ऐसा कुछ हुआ था जब एक राजनैतिक पार्टी के प्रवक्ता की गिरफ़्तारी के समय पंजाब, दिल्ली और हरियाणा की पुलिस आपस में उलझ गयी थी। जब कभी ऐसी परिस्थिति पैदा होती है पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते आए हैं। न्यूज़ एंकर रोहित रंजन की गिरफ़्तारी के समय हुई घटना के तथ्यों को देखें। छत्तीसगढ़ पुलिस के पास उन्हें पूछताछ के लिए ले जाने वाला एक वारंट था। जिसका वो पालन कर रहे थे। छत्तीसगढ़ पुलिस का आरोप है कीं नॉएडा पुलिस ने उस वारंट को अनदेखा कर रोहित को अपनी...
उत्तर प्रदेश में क्यों हो रहा तगड़ा निवेश

उत्तर प्रदेश में क्यों हो रहा तगड़ा निवेश

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उत्तर प्रदेश में क्यों हो रहा तगड़ा निवेश अथवा उत्तर प्रदेश क्यों पसंद आ रहा निवेशकों को आर.के. सिन्हा कोरोना काल के बाद जब निवेशक समाज बहुत सोच-समझकर और फूंक-फूंककर निवेश कर रहा है, तब उत्तर प्रदेश में 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश का वादा हो चुका है। यह वादा किया है देश के प्रमुख उद्योग समूहों ने। इसके कई छुपे संदेश हैं। स्पष्ट है कि निवेशकों को आज के दिन उत्तर प्रदेश में निवेश करना लाभ का सौदा नजर आ रहा है। वर्ना कोई निवेशक घाटा खाने के लिए तो कभी भी निवेश करेगा नहीं। उन्हें लगता है कि उत्तर प्रदेश में निवेश करने से उन्हें बेहतर रिटर्न मिलेगा। पिछले कुछ हफ्ते पहले लखनऊ में हुए एक निवेशक सम्मेलन में हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाएं धरातल पर उतरीं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खुद उपस्थित होना ही अहम था। निवेशक सम्मेलन में देश के नामी उद्योगपति...
शिव सेना में उभरे ताज़ा नए सवाल

शिव सेना में उभरे ताज़ा नए सवाल

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शिव सेना में उभरे ताज़ा नए सवाल वैसे तो यह सवाल महाराष्ट्र का है, पर उसके असर देश की राजनीति पर होगा यह बात कही जा सकती है। सवाल यह है कि क्या शिव सेना पर उद्धव ठाकरे का नियंत्रण समाप्त हो चुका है या हो जायेगा? राजनीतिक पंडितों ने अभी इस पर अपनी राय ज़ाहिर नहीं की है।वैसे भी इस संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना अभी तो जल्दबाजी ही होगी। महाराष्ट्र विधानसभा में शिंदे के खेमे में पार्टी के अधिकतर विधायक हैं। जहां तक किसी एक विधायक या विधायक समूह की सदस्यता का मामला है, तो उसका अंतिम निर्णय तो अदालत में होगा, पर अभी यह स्थिति है कि पार्टी में औपचारिक टूट नहीं हुई है। विधानसभा से बाहर शिव सेना का संगठन किसके पक्ष में जायेगा, यह जानने के लिए इंतजार करना होगा।महाराष्ट्र में कई लोग इस बात से चिंतित है कि खुद बालासाहेब ठाकरे की सरपरस्ती में पले-बढ़े शिंदे सेना की कीमत पर भाजपा को मजबूत बना रहे ह...
कमाई की होड़ में शिक्षण संस्थान, शिक्षा का बाजार या बाजार की शिक्षा।

कमाई की होड़ में शिक्षण संस्थान, शिक्षा का बाजार या बाजार की शिक्षा।

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कमाई की होड़ में शिक्षण संस्थान, शिक्षा का बाजार या बाजार की शिक्षा। शिक्षा के व्यावसायीकरण के कारण शिक्षण एक जुनून के बजाय एक शुद्ध पेशा बन गया है और शिक्षण संस्थानों ने मूल्यों को विकसित करना बंद कर दिया है।  स्कूल चार दीवारों वाली एक इमारत है जिसके अंदर एक उज्जवल कल है। यदि विद्यालय मूल्यों को विकसित करने में विफल रहते हैं तो आने वाली पीढ़ी सामाजिक बुराइयों से प्रभावित हो सकती है। असहिष्णुता, कट्टरता, लैंगिक भेदभाव और अपराध में वृद्धि देखी जा सकती है। -प्रियंका 'सौरभ' "शिक्षा का उद्देश्य तथ्य नहीं बल्कि मूल्यों का ज्ञान है।"  युवा मन में इन मूल्यों को विकसित करने में स्कूल और कॉलेज एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अनुशासन, जवाबदेही, अखंडता, टीम वर्क, करुणा, विश्वास और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण मूल्य हैं जो स्कूलों में पेश किए जाते हैं। शिक्षक को छात्रों में उपरोक्त मूल्यों को विकसित कर...
उच्चतम न्यायालय की गरिमा हनन का दोषी कौन?: आम जनता या स्वयं माननीय

उच्चतम न्यायालय की गरिमा हनन का दोषी कौन?: आम जनता या स्वयं माननीय

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*उच्चतम न्यायालय की गरिमा हनन का दोषी कौन?: आम जनता या स्वयं माननीय* ************************************** दिनांक: ०१/०७/२०२२ स्थान: उच्चतम न्यायालय *जज साहेब* :हाँ जी बताएं! *अधिवक्ता महोदय* : मीलॉर्ड! मेरी मुवक्किला *नूपुर शर्मा* के खिलाफ विभिन्न  राज्यों के थानों में मुकदमे दर्ज हैं। मैं मीलॉर्ड से निवेदन करता हूँ कि मेरी मुवक्किला को बलात्कार,जान से मारने की धमकी मिल रही है और उन्हें खुद को *जान से मार दिए की गम्भीर आशंका है,अतः सभी मुकदमों को किसी एक जगह स्थानांतरित कर दिया जाय।* *जज साहेब* : अधिवक्ता महोदय! *आपकी मुवक्किला को मैजिस्ट्रेट कोर्ट में जाना चाहिए? क्या वो निचली अदालतों को तुच्छ समझती हैं? आप सुप्रीम कोर्ट में सीधे क्यों चले आये?* *अधिवक्ता महोदय* : मीलॉर्ड! मेरी मुवक्किला एक महिला हैं और बहुत ही भयभीत हैं क्योंकि *उदयपुर में सिर्फ उनको समर्थन करने वाले ए...