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देश कब समझेगा रील और ऱीयल दुनिया के नायकों का अंतर

देश कब समझेगा रील और ऱीयल दुनिया के नायकों का अंतर

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  अभी हाल ही में देश के दो रीयल और रील लाइफ के नायकों के संसार से विदा होने पर जिस तरह की प्रतिक्रिया देश में देखने को मिलीं वह सबकों हैरान करने वाली थी। पहले सशक्त अभिनेता और पीकू, लंच बॉक्स, पान सिंह तोमर जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने यादगार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले इरफान खान और उसके बाद राज कपूर के छोटे बेटे ऋषि कपूर की मृत्यु पर देश में जिस तरह की शोक की लहर उमड़ी वह निश्चित रूप से अभूतपूर्व और अप्रत्याशित मानी जाएगी ऋषि कपूर ने अपने लगभग आधी सदी लंबे फिल्मी सफर में बॉबी, मुल्क,  लैला-मजनूं जैसी दर्जनों उम्दा फिल्मों में नायक का रोल निभाया । हालांकि वे बीच-बीच में अपने कुछ विवादास्पद बयानों के कारण खबरों में भी आ जाते थे। तो भी यह तो  मानना ही होगा कि वे एक लोकप्रिय सितारें थे। पर इन दोनों के दिवंगत होने के फौरन बाद कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए सेन...
महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

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  अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार कर ही लिया कि कोरोना महामारी नहीं वरन उनके देश पर चीन का आक्रमण है। उनके देश पर ही नहीं वरन पूरी दुनिया पर। बिना हथियार चलाए चीन ने एक वायरस के माध्यम से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और पूरी दुनिया मौत के साए में नपुंसक सी अपनी बर्बादी का यह ख़ौफ़नाक दृश्य 24 घंटे देख रही है। मजेदार बात यह कि जिस लेब में यह वायरस पैदा किया गया उसकी फंडिंग अमेरिका से हो रही थी। शांति पूर्ण ढंग से वायरोलॉजी के उपयोग के लिए संयुक्त प्रयासों से चल रही इस लेब का इतना खतरनाक उपयोग कोई शायद ही सोच पाया हो। क्या विडंबना है कि जिस विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया के बड़े देश चीन की कठपुतली मां चुके हैं उसी के निर्देशों पर ही दुनिया के देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। क्या इस संस्था के माध्यम से चीन दुनिया को अपने इशारों पर चला रहा है और बर्बा...
कोविड-19 से लड़ने के लिए सीएसआईआर लैब के शोधार्थियों ने बढ़ाया हाथ

कोविड-19 से लड़ने के लिए सीएसआईआर लैब के शोधार्थियों ने बढ़ाया हाथ

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वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की जोरहाट स्थित प्रयोगशाला उत्तर-पूर्व विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (एनईआईएसटी) के शोधार्थी छात्रों ने भी अब कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को मजबूती देने के लिए अपना हाथ बढ़ाया है। एनईआईएसटी के निदेशक डॉ जी. नरहरि शास्त्री के आह्वान पर संस्थान में अध्ययन कर रहे शोधार्थियों ने भी कोविड-19 के संकट में जरूरतमंदों की मदद के लिए पीएम-केयर फंड में आर्थिक सहयोग राशि जमा करायी है। इस पहल के अंतर्गत संस्थान के 58 शोधार्थियों ने 54,201 रुपये पीएम-केयर फंड में जमा कराए हैं। यह सहयोग राशि पीएम-केयर के कोविड-19 दान से संबंधित खाते में सीएसआईआर के सीनियर रिसर्च फेलो (एसआरएफ) प्रचुरज्य दत्ता के खाते से 15 अप्रैल को जमा करायी गई है। डॉ शास्त्री के नेतृत्व में सीएसआईआर-एनईआईएसटी कोविड-19 से निपटने के लिए हैंड-सैनिटाइजर, लिक्विड हैंडवॉश और संक्रमण दूर करने ...
CDRI’s efforts to combat novel coronaviru

CDRI’s efforts to combat novel coronaviru

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Working on three out of the five verticals formulated by the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), the Central Drug Research Institute (CDRI), has inked an MoU (memorandum of understanding) with King George’s Medical University (KGMU) to sequence the virus strains obtained from COVID-19 patients in Uttar Pradesh. Initially, the Lucknow-based lab will sequence the virus strains from the samples of a few patients. This activity will be taken up under the first vertical ‘digital and molecular surveillance’. As of now, eight different variants of the virus are known to be causing the COVID-19 infection. A team has been put into place for analyzing whether changes to the viral sequences, if any, will impact the proposed treatment strategies. Therapeutics or repurposing of drug...
कोरोनाः भारत की छवि ऊंची उठी

कोरोनाः भारत की छवि ऊंची उठी

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  कई लोगों ने मुझसे पूछा है कि कोरोना-संकट का भारत की विदेश नीति पर क्या असर पड़ा है, आप बताइए। असलियत तो यह है कि कोरोना का युद्ध इतना गंभीर है कि यह पूरा पिछला एक महिना हम सब लोग अंदरुनी सवालों से ही जूझते रहे। फिर भी यह तो मानना पड़ेगा कि इस कोरोना-संकट के दौरान भारत की विश्व-छवि बेहतर ही हुई है। *पहली* बात तो यह हुई कि इस संकट के दौरान सारा भारत एक होकर लड़ रहा है। भारत के पक्ष और विपक्ष का रवैया वैसा नहीं है, जैसा अमेरिका, ब्रिटेन, पाकिस्तान और ब्राजील जैसे देशों में देखने में आ रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सभी दलों के मुख्यमंत्री पूरी तरह साथ दे रहे हैं। *दूसरा*, भारत की जनता तालाबंदी का पालन जिस निष्ठा के साथ कर रही है, वह दूसरे देशों के लिए एक मिसाल बन गई है। विश्व स्वास्थ्य-संगठन ने स्पष्ट शब्दों में भारत की तारीफ की है। *तीसरा*, भारत ने कोरोना के जांच-यंत्...
मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

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  दिल्ली में तलबीगी मरकज में हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमितों के साथ छिपकर देश को कोरोना वायरस के जाल में फंसाने वाले ये तथाकथित खुदा के बंदे बाज नहीं आ रहे हैं। जब तबलीगियों पर थोड़ा सा शिकंजा कसने लगा तो उनके हमदर्द मुम्बई में लॉकडाउन तोड़ने लगे। बांद्रा और थाणे में हजारों की संख्या में बिला वजह इकट्ठे होकर पुलिस और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने लगे और मुरादाबाद से लेकर इंदौर तथा बिहार के मोतिहारी और औरंगाबाद में पुलिस और डाक्टरों की टीम पर पथराव करने लगे। जरा इनकी हिम्मत तो देखें। अब कोई यह तो न कहे कि सरकार इन्हें दोयम दर्जे का नागरिक-मानती समझती है। ये तो सरकार और बहुसंख्यकों के सिर पर चढ़कर खुलेआम पेशाब कर रहे हैं। डाक्टरों से मारपीट, महिला नर्सों से अश्लीलता और सफाई कर्मचारियों पर थूकना आम्बत है। इनकी महिलायें छतों से ईंटे बरसा कर पुलिस पर हमला कर रही हैं। उत्तर प्रदेश ...
अक्ल के पत्थर

अक्ल के पत्थर

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दुखद, त्रासद समाचार है कि इंदौर में कोरोना वायरस की जांच करने जा रही मेडिकल टीम पर पत्थऱ फेंके गये। पत्थरबाजी का जहालत भरा यह  बरताव एकदम पागल कुत्ते के बरताव जैसा है। कुत्ता पागल हो जाये, उसकी मदद करने कोई  जाये, तो वह काट खाता है। कुत्ता कुत्ता होता है, पर इंदौर की मेडिकल टीम को चोट पहुंचा रहे पत्थरबाज तो इंसान थे। इंसान में कब पागल कुत्ता घुस जाये,कहा ना सकता। पागल कुत्ते को मारा जा सकता है। पर पागल कुत्ता टाइप इंसान तो दांव लगने पर मंत्री विधायक बन सकता है। पागल कुत्तों का वोटबैंक नहीं होता। पर पागल कुत्ते की तरह बरताव कर रहे इंसान का अगर वोट बैंक है, तो वह मंत्री विधायक बनकर और बड़े स्तर का कटखना हो सकता है। कुत्तों में अगर वोट बैंक होते, और पागल कुत्तों की आक्रामकता देखकर अगर उनकी विशेष लोकप्रियता होती, तो पागल कुत्ता होना बहुत ही फायदे का सौदा होता। पागल कुत्ता बनने की होड़...
तब्लीगी मरकज” को सील किया जाए 

तब्लीगी मरकज” को सील किया जाए 

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हज़ारों-लाखों लोगों के जीवन पर जीवाणुओं का जान लेवा आक्रमण होने की बढ़ती सम्भावना के उत्तरदायी तब्लीगी मरकज को सील न किया जाना क्या विश्व की कोई न्यायायिक व्यवस्था उचित ठहराएगी? इसके आयोजकों और इसमें सम्मलित होने वाले कट्टरपंथियों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही भारतीय न्यायायिक प्रणाली के अनुसार अवश्यम्भावी होनी चाहिये।तब्लीगी मरकज, निज़ामुद्दीन, दिल्ली में पिछले माह मॉर्च में आये हज़ारों जमातियों ने कोरोना वायरस की आपदा में अपने तुच्छ जिहादी सोच के कारण देश के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। शासन व प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के उपरांत भी हज़ारों की संख्या में एक ही भवन में एकत्रित होकर कानूनों का खुला उल्लंघन करने वालों ने इसप्रकार अपनी जिंदगी के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी को भी संकट में डाल दिया है।आज सम्पूर्ण समाज व राष्ट्र इन पापियों के कर्मों को भुगतने के खौफ से आक्रोशित...
सब याद रखा जाएगा…

सब याद रखा जाएगा…

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अलकायदा ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला कर जब तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों को मारा तो उसकी विचारधारा से हमदर्दी रखने वालों ने पूरी दुनिया मे इसका जश्न मनाया था। उन्हें लगा कि पहली बार किसी ने अमेरिका को मज़ा चखाया है। उसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से लेकर इराक में जो तबाही मचाई वो सबके सामने है। उसने पूरी दुनिया में ढूंढ-ढूंढकर जिस तरह अलकायदा के आतंकियों का सफाया किया वो सबने देखा। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की घटना ने अमेरिका ज़ुल्म करने का लाइसेंस दे दिया। उसने रासायनिक हथियारों की झूठी बात बोलकर इराक पर भी हमला कर दिया। जो लोग ट्रेड सेंटर की घटना पर जश्न मना रहे थे वही बाद में अमेरिका की इन ज़्यादतियों पर छाती कूटने लगे। गुजरात में फरवरी 2002 के आखिर में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने 50 से अधिक कारसेवकों को ज़िंदा जला दिया। एक तरीके से उनका जो मिशन था उसमें वो कामयाब हुए। उसके बाद अगले कुछ दिनों...
Weaponization of Corona Virus?

Weaponization of Corona Virus?

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1. Weaponization of  germs causing infectious disease has a long history. Mongols used the plague-infested cadavers as a weapon against European armies in the year 1346, during the Siege of Caffa, Crimea.  For Europeans, germs conferred them the conquest of the Americas as local inhabitants did not have immunity against the new disease . 2. Let us focus on the post-Second World War  Era of Pax-Americana, that too after the discovery of the DNA as the life-molecular cluster  by Watson and Crick(1953) . 3. The US built largest laboratory of biological weapons at Fort Detrick, Maryland, 50 miles Northwest of Washington D.C. The Convention on the Prohibition of the Development, Production and Stockpiling of Bacteriological and Toxin Weapons and on their Destruction was the first multil...