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संतुलन बनाते-बनाते सच का मुंह तो नहीं नोचने लगे हैं हम?

संतुलन बनाते-बनाते सच का मुंह तो नहीं नोचने लगे हैं हम?

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कोरोना चीन से फैला, चीन ने फैलाया, लेकिन इसे चीनी वायरस कहने से यह रेसियल कमेंट हो जाता है। तबलीगी जमात में दुनिया भर के मजहबी धर्म प्रचारक कोरोना संक्रमण लेकर शामिल हुए और फिर सरकार व प्रशासन से छिपाते हुए घूम-घूम कर पूरे देश में इसे फैला दिया, लेकिन इसके लिए जमात की निंदा करने से यह कम्युनल कमेंट हो जाता है। कथित प्रोग्रेसिव व सेक्युलर लोग कोरोना की तुलना आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और अन्य बीमारियों से होने वाली मौतों से कर कर के थक गए, तो अब तबलीगी जमात की बैठक की तुलना तिरुपति बाला जी या वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की भीड़ से की जा रही है, बिना इस बात का जवाब दिये कि उन श्रद्धालुओं में कितने विदेशी थे, कितने कोरोना संक्रमित होने के कारण मर गए, लॉकडाउन के बाद कितनों ने मंदिर में पूजा करने की ज़िद की, कितने मंदिरों में छिपकर बैठे थे, कितनों ने संक्रमण की बात छिपाई और कितनों ...
तबलीगी जमात का निजामुद्दीन मुख्यालय कैसे बना मानव बम की फैक्ट्री

तबलीगी जमात का निजामुद्दीन मुख्यालय कैसे बना मानव बम की फैक्ट्री

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◆ दिल्ली के निजामुद्दीन वेस्ट के बंगलेवाली मरकज में 17 से 19 मार्च 2020 को हुए आलमी मसाबरात में विश्व भर के हजारों जमातियों ने भाग लिया था। ◆ निजामुद्दीन मरकज तबलीगी जमात का दिल्ली मुख्यालय है। ◆ इसमें से 24 जमाती आज दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने अभी तक  कोरोना पॉजिटिव कन्फर्म किये है, सैंकड़ों की जांच जारी है। ◆ इस मरकज में मलेशिया इंडोनेशिया चीन सहित दर्जनों देशों तथा भारत के 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया  था। ◆ इनमें से बहुत से जमाती साउथ ईस्ट एशिया की ग्लोबल मसाबरात 'इज्तिमा एशिया' से लौटे थे। ◆ ये इज्तिमा एशिया मलेशिया के सेलअंगोर नामक स्थान पर शेरीपेल्टिंग मस्जिद में हुआ था। ◆ 13 मार्च से दिल्ली में 50 से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ◆ जनता कर्फ्यू के बाद 23 मार्च को दिल्ली सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की। ◆ उसी दिन कानून तोड़ते हुए इ...
सउदी अरब की बहाबी विचारधारा पैसों के प्रभाव में कट्टरपंथी होते भारतीय मुसलमान

सउदी अरब की बहाबी विचारधारा पैसों के प्रभाव में कट्टरपंथी होते भारतीय मुसलमान

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  भारतीय इस्लाम पर खुद अरब के इस्लाम में आए बदलाव का असर देखा जा रहा है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सऊद परिवार ने अरब खाड़ी के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। यह परिवार इस्लाम की कट्टर विचारधारा – वहाबी का समर्थक है और इसकी वजह से सऊदी अरब में मुसलमान वहाबी धारा को सबसे ज्यादा मानते हैं। जैसे-जैसे पूरे विश्व में औद्योगीकरण बढ़ता गया, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ती गई वैसे-वैसे सऊदी अरब और समृद्ध होता गया। भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों का उच्च तबका इस समय इन अरबी शब्दों को अपनी सांस्कृतिक पहचान मानकर अपना रहा है। इसके जरिए वे आम मुसलमान नहीं बल्कि उस तरह के मुसलमान बन रहे हैं जो सऊदी अरब द्वारा प्रचारित हैं। भारत से लगभग 32 लाखमुस्लिम विदेश में प्रवास में रह रहे हैं। उनकी पहली पसंद अरब खाड़ी के देश होते हैं जहां वहाबी इस्लाम का ही बोलबाला है। ऐतिहासिक रूप से, इस्लाम को मानने वालों ने ...
तबलीग जमात और भारत सरकार से ज्वलंत प्रश्न – मौलिक भारत

तबलीग जमात और भारत सरकार से ज्वलंत प्रश्न – मौलिक भारत

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  १) क्यूँ इतने वर्षों से एक उदार इस्लाम विरोधी, जाहिल, गंवार, मूर्ख , अराजक, झूठी, लंपट, अवेज्ञानिक, कट्टरपंथी, आतंक समर्थक व देशद्रोही तबलीग जमात को देश में अपनी गतिविधियों को चलाने की अनुमति दो गयी ? २) ऐसे में जबकि इस जमात के अनेक आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आती रही हे , उसके बाद भी इससे संबंधित लोगों को निर्बाध देशभर में घूमने व प्रचार करने की अनुमति क्यों दी जाती रही ? ३) क्यों लगातार इस जमात के लोग पर्यटन वीज़ा पर कई वर्षों से देश में आकार आतंक व कट्टरपंथी इस्लाम का प्रचार करते रहे और ख़ुफ़िया एज़ेंसी सोयी रहीं? क्या जमात के लोग एक साज़िश के तहत भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण फ़ेलाने के लिए भेजे गए हे ? ४) जमात के विदेश से आने वाले लोगों के आपराधिक रिकार्ड व आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की जाँच की क्या व्यवस्था की जा...
अकेले चीन ही नहीं पश्चिमी देशों के कुकर्मों का परिणाम भी है कोरोना वायरस का संकट

अकेले चीन ही नहीं पश्चिमी देशों के कुकर्मों का परिणाम भी है कोरोना वायरस का संकट

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दुनिया को बाज़ार बना कर लूटने के पश्चिमी देशों के षड्यंत्रों का पिछले 500 बर्षो से दुनिया गवाह रही है। तीसरी दुनिया का हर नागरिक इस दर्द की पीड़ा की जानता है। आज कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया के 200 देशों तक फैल चुका है। दुनिया इसके लिए चीन को दोषी ठहरा रही है मगर उसके साथ पश्चिमी देश भी उतने ही दोषी है। इसके लिए पिछले कुछ दशकों के दुनिया के घटनाक्रमो को समझना होगा। 1) इसमें पहला चरण एशिया, अफ्रीका व लेटिन अमेरिकी देशों को गुलाम बनाकर लूटने का रहा जो इन देशो में पिछले 100 सालों में आयी जनजागृति के कारण आजादी के आंदोलनों में बदल गया और अंततः इन देशों को मुक्त करना पड़ा। मगर आजादी देने से पूर्व " ड्रेन ऑफ वेल्थ" की रणनीति पर अमल करते हुए 400 बर्षो तक इन देशों का यथासंभव शोषण व लूट के खेल चलते रहे। विकसित देशों की प्रचुर दौलत व शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के पीछे यही लूट का माल है। जितने भी पि...
Moderation and rationality is the cure for this epidemic

Moderation and rationality is the cure for this epidemic

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Today, all of you must have seen the photographs on television and in the dailies, in which passengers in Patna and Kolkata were eager to go to their villages by chilling in buses and even adjusting them on bus roofs, quite unconcerned about the fatality that could be caused due to their such attitude. Even as someone giving warning, one imprudent passenger lashes out shamelessly, saying, "kya karen, majboori ka naam mahatma gandhi hai." The fact, however, is that by describing his so called “majboori”, he is not only putting his entire village in danger, but also the entire population. It can only be said that if they are going to their villages with this deadly disease, then only God can save them. In this regard, Health Minister Dr. Harsh Vardhan has also admitted that till now there a...
मुख्यमंत्री बने, उपचुनाव और मुख्य सचिव के बयाने शुरू

मुख्यमंत्री बने, उपचुनाव और मुख्य सचिव के बयाने शुरू

TOP STORIES, राज्य
और मध्यप्रदेश में पन्द्रह महीने बाद फिर भाजपा सरकार बन गई | ३ मिनिट के समारोह में शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री की शपथ ली | यह एक रिकार्ड है | आज एक दूसरा भी रिकार्ड बना, नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने वाले इस विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव अपने इस्तीफे में चूक कर गये और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के स्थान पर प्रमुख सचिव विधानसभा को त्यागपत्र भेज दिया, वायरल हुआ यह त्यागपत्र प्रमुख सचिव विधानसभा को ही सम्बोधित है | भाजपा ने सरकार तो बना ली है, पर उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा| गत वर्ष महाराष्ट्र, २०१८ में कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट जैसी कवायद हुई थी, इसी तरह  मध्यप्रदेश में भाजपा को भी फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा|  इस समय भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे के दोष खोजने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है | कल गोपाल भार्गव के त्यागपत्र की तकनीकी त्रुटि बहस का विषय हो स...
जीवन-संकटों के बीच उजालों की खोज

जीवन-संकटों के बीच उजालों की खोज

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बड़ा सत्य है कि जीवन कहीं ठहरता नहीं है और सब कुछ कभी खत्म नहीं होता। जबकि कोरोना वायरस जैसे संकटों से जीवन में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं, जब लगता है मानो सब खत्म हो रहा है। डाॅ. फ्रैंकल यह गहराई से जान सके कि जीवन कितना भी निरर्थक क्यांे न लगे, उसमें अंतर्निहित अर्थ को खोज कर मनुष्य सारे कष्टों को सहन कर बाहर निकल सकता है। विपरीत परिस्थितियों में यह जानना महत्वपूर्ण नहीं है कि हमें जीवन से क्या अपेक्षा है, बल्कि यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस समय जीवन को हमसे क्या अपेक्षा है। जो समस्या हमें दी गई है, उसका सही जवाब पाने की जिम्मेदारी हमारी ही है। मानवता ने बड़े-बड़े जीवन अस्तित्व के संकटों के बीच उजालों को खोजा है, यही मानव इतिहास की विलक्षणता भी है। जब संकट बड़ा हो तो संघर्ष भी बड़ा अपेक्षित होता है। इस संघर्ष में जन-जन की मुट्ठियां तन जाने का अर्थ है कि आपके अंदर किसी लक्ष्य को हासिल करने का पू...
येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

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बैंकिग व्यवस्था किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का दर्पण होती है। बैंकिग प्रणाली में जनता के विश्वास का होना, इस बात का प्रमाण है कि उक्त देश की अर्थव्यवस्था बहुत सुदृढ़ है इसके विपरीत यदि जनता का विश्वास बैंकिंग व्यवस्था से भंग होता है तो सत्ता के प्रति भी उनका विश्वास भंग होना स्वाभाविक है। देश में अभी कुछ समय के अंतराल में न केवल येस बैंक अपितु 50 से अधिक अन्य छोटे-बड़े बैंक भी बंद हो चुके हैं। इस परिस्थिति के परिणामस्वरूप 25-30 हजार से लेकर कई लाख खाताधारकों का पैसा डूबा है, जिसके कारण आज सम्पूर्ण देश में साधारण जनता का विश्वास बैंकिग व्यवस्था से उठता जा रहा है।  आज बैंको के डूबने के कारणों का गहनता से अध्ययन करने की आवश्यकता है। जब भी कोई बैंक डूबता है, सरकार तथा रिजर्व बैंक द्वारा साधारण जनता को यही समझाया जाता है कि उक्त बैंको के उच्च पदो पर आसीन प्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों ने अप...
आप आज समूचे समाज पर उपकार करें !

आप आज समूचे समाज पर उपकार करें !

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वैसे तो हम भारतीयों की यह आदत रही है कि संकट के समय एकजुट हो जाते हैं ।सचमुच यह  समय एकजुटता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को स्वीकारने और उसके पीछे चलने का है | समूचे राष्ट्र को यह  संकल्प करना होगा कि हम वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए दिशा-निदेशों का पालन करेंगे । ‘इस बार समाज रक्षा का तरीका पृथक है, समाज की रक्षा के लिए खुद को फौरी तौर पर समाज से अलग  लेने का है।  वैज्ञानिकों के बाद प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि घर से बाहर तभी निकलें, जब बहुत जरूरी हो। आज २२ मार्च ‘जनता कर्फ़्यू’ का दिन है, इसकी उद्देश्य पूर्ति में सरकार के कठोर कदम से ज्यादा हमारी जागरूकता जरूरी है। आने वाले तीन हफ्ते घर से बाहर निकलने से पहले सोचें कि क्या घर से निकलना बेहद जरूरी है? घर में रहने के नाम पर  अक्सर घबराहट फैलती है और लोग जमाखोरी करने में जुट जाते हैं। अमेरिका जैसे विकसित देश में यह देखा गया है कि वहां भी स्टोर के ...