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बेरोजगारी है सबसे बड़ी चिन्ता 

बेरोजगारी है सबसे बड़ी चिन्ता 

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दुनिया भर के शासक एवं सत्ताएं अपनी उपलब्धियों का चाहे जितना बखान करें, सच यह है कि आम आदमी की मुसीबतें एवं तकलीफें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसके बजाय रोज नई-नई समस्याएं उसके सामने खड़ी होती जा रही हैं, जीवन एक जटिल पहेली बनता जा रहा है। विकसित एवं विकासशील देशों में महंगाई बढ़ती है, मुद्रास्फीति बढ़ती है, यह अर्थशास्त्रियों की मान्यता है। पर बेरोजगारी क्यों बढ़ती है? एक और प्रश्न आम आदमी के दिमाग को झकझोरता है कि तब फिर विकास से कौन-सी समस्या घटती है? बहुराष्ट्रीय मार्केट रिसर्च कंपनी इप्सॉस के द्वारा इसी माह कराया गया सर्वेक्षण 'वॉट वरीज दि वल्र्ड ग्लोबल सर्वे’ के निष्कर्ष विभिन्न देशों की जनता की अलग-अलग चिंताओं को उजागर करते हैं। जहां तक भारत का प्रश्न है तो यहां बीते मार्च में किए गए सर्वे में ज्यादातर लोगों ने यह तो माना कि सरकार की नीतियां सही दिशा में हैं, लेकिन आतंकवाद की...
‘Dialogue India’ Scripts History in India-UAE Educational Ties

‘Dialogue India’ Scripts History in India-UAE Educational Ties

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Dubai: Providing a solid platform to the Indian Higher Education Institutions, global investors and the foreign students aspiring for world-class education in India, the 5thDialogue India Academia Conclave 2019 concluded in the world’s glittering city Dubai on May 2, 2019. Over a hundred dignitaries from the United Arab Emirates (UAE) and India discussed in details how the Indian educational institutions can collectively act as a bridge between the needs of the industry globally and the skilled Indian workforce. Over a dozen investors from Dubai discussed the investment opportunities in India through the Indian institutions. In his keynote address, Shri Vipul, the Consulate General of India in UAE, discussed the focus of both India and UAE on innovations and how artificial intelligence ...
राष्ट्रवाद की आंधी से हिन्दुत्व के तूफान तक

राष्ट्रवाद की आंधी से हिन्दुत्व के तूफान तक

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अमित त्यागी 2019 का चुनाव और उसके परिणाम एक रोचक अंत का इशारा कर रहे हैं। एक ओर माया मुलायम ने एक साथ एक मंच पर आकर अपने अपने समर्थकों को एक साथ आने का संकेत दे दिया है तो दूसरी तरफ शिवपाल यादव और प्रवीण तोगडिय़ा के दल कुछ खास करते नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस महागठबंधन के साथ नहीं है फिर भी वह आंतरिक रूप से गठबंधन के साथ ही है। भाजपा को हराने के लिए सभी दल अंदर ही अंदर एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही यह चुनाव लगातार बड़बोले नेताओं के बयानों के आधार पर मीडिया की सुर्खियां बन रहा है। आज़म खान ने जयाप्रदा पर खाकी रंग का हमला किया तो उनके बेटे ने अनारकली कहकर खुद को बयान बहादुर साबित किया। इससे बौखलाए अमर सिंह ने आज़म खान पर ताबड़तोड़ जुबानी हमले किये। दोनों ही तरफ से गरिमा को तार तार किया गया। इसी क्रम में मायावती के द्वारा मुलायम सिंह के सामने गेस्ट हाउस कांड याद करके पहले उन...
राष्ट्रीय नेता के चयन करने के मानदंड

राष्ट्रीय नेता के चयन करने के मानदंड

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भारत में चुनावी बुखार अपने चरम पर है। 300 से अधिक लोकसभा सीटों के भाग्य को अंतिम रूप दे दिया गया है। 23 मई 2019 से देश का नेतृत्व कौन करेगा, इस बार यह बहुत बड़ा सवाल नहीं है। सभी जनमत सर्वेक्षण वर्तमान पीएम के पक्ष में एक स्पष्ट फैसला दिखा रहे हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों के दौरान एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली और उनके पास सुशासन, विकास और आतंकवाद की एक भी घटना नहीं (जम्मू-कश्मीर और नक्सल क्षेत्र को छोड़कर) होने के रिकॉर्ड हैं। एक भी विपक्षी नेता ऐसा नहीं है जो उन्हें चुनौती दे सके। हालांकि कई क्षेत्रीय नेता और सबसे पुरानी पार्टी के नेता त्रिशंकु संसद की उम्मीद कर रहे हैं और संख्या के कुछ अलग संयोजन से वे मोदी को बाहर करना चाहते हैं। वे पूरी तरह से अवसरवादी हैं और मीडिया की मदद से आम जनता को अकल्पनीय, अवास्तविक वादों और अस्थायी कहानियों के साथ बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए पह...
नरेंद्र मोदी का भला ही कर रहे हैं राहुल गांधी

नरेंद्र मोदी का भला ही कर रहे हैं राहुल गांधी

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देश में आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। सभी सियासी पार्टियां अपने-अपने हिसाब से चुनाव प्रचार में लगी हैं। लेकिन इस बार चुनाव प्रचार की धार पूरी तरह बदली-बदली नजऱ आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी नीत सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियां जहां पांच साल में किए गए विकास के नाम पर और अगले पांच साल के लिए तय किए गए लक्ष्यों के आधार पर जनता से वोट मांग रही हैं, वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां जाति और धर्म के नाम पर वोट की जुगाड़ में लगी हैं। चुनाव जीतने की होड़ में इस बार जो शब्द बाण चलाए जा रहे हैं, उनमें तर्क, तथ्यपरकता और मर्यादा तक का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने हालांकि कुछ सख्ती दिखाई है, लेकिन किसी को नीचा दिखाने के लिए व्यक्तिगत संयम का निर्माण आयोग किसी भी स्तर पर नहीं कर सकता। जिस तरह हांडी के चावल पक गए हैं या न...
राजनीति एक व्यवसाय

राजनीति एक व्यवसाय

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आज राजनीति सेवा का पर्याय नहीं, एक व्यवसाय बन गयी है। राजनीति ने पूरी तरह से व्यवसायीकरण का रूप ले लिया है। आज राजनीति जगत में अपराधी भ्रष्टाचारी शिरोमणि ही आसन जमाये दिखते हैं। कहीं कोई भुला भटका साफ सुथरी छवि का व्यक्ति नजर भी आता है तो गहराई में जाने पर हम पाते हैं कि वह भी इनकी गिरफ्त में है। लेकिन व्यक्ति सत्य के मार्ग से क्यों भटक जाता है, यदि हम इसके मूल को खोजने का प्रयास करें तो निष्कर्ष निकलेगा कि जीवन में सबसे घातक अहम को पालना और उसका पोषण करना है। उच्य से उच्य पदों पर आसीन व्यक्ति जब अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरी करना चाहता है तो अपने सिद्धांतों और आदर्शों को एक किनारे रख देता है। धर्म, राजनीति, साहित्य सभी क्षेत्रों के शिखर पुरुष यश की भूख की चपेट में है। आज के नेता हो या धर्मात्मा सबका हाल एक ही है। मौका मिले तो वे अपनी आगे आने वाली छह पीढिय़ों के लिए भी सम्पत्ति इक_ी कर ले। ...
प्रियंका के गुनहगारों को माफ कर कांग्रेस ने गुनाह किया

प्रियंका के गुनहगारों को माफ कर कांग्रेस ने गुनाह किया

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श्रीमती प्रियंका चतुर्वेदी अब कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नहीं रहेंगी।  अब वे शिवसेना का वह चेहरा हैं, जो अब तक टीवी चैनलों की डिबेट में कांग्रेस पर लगने वाले आरोपों से अपनी पार्टी का बचाव करती रही हैं। उन्होंने कांग्रेस से अपनी उपेक्षा और बदतमीजी करने वालों को माफ़ करने के लिए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। पार्टी के नेताओं की सही-गलत हर तरह की बयानबाजी पर कांग्रेस का बचाव करने वाली प्रियंका चतुर्वेदी इस समय खुद कांग्रेस में अकेली पड़ गई थी। नेताओं द्वारा दूसरी पार्टियों की महिलाओं पर तो लांछन लगाने की घटनाएं चुनावी माहौल में आप खूब देख रहे होंगे, लेकिन प्रियंका चतुर्वेदी से तो कांग्रेस के ही नेताओं ने बदतमीजी की और उन्हें माफी भी मिल गई। हैरानी तो इस बात की है कि माफी देने वाला शख्स कोई और है। नाम है ज्योतिरादित्य सिंधिया। जैसा नाम, वैसा काम। भले ही अब देश में लोकतंत्र हो, पर ज...
सवालों से जूझता सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश पर लगे आरोप

सवालों से जूझता सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश पर लगे आरोप

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न्यायाधीशों को इसलिए पंच परमेश्वर कहा जाता है, क्योंकि वे न्याय केवल करते ही नहीं, बल्कि करते हुए दिखते भी हैं। न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद कहा था कि मृत्युदंड जैसे जरूरी मामलों पर ही त्वरित सुनवाई होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने अपने मामले में, जिसमें एक महिला ने उन पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया है, छुट्टी के दिन शनिवार को विशेष न्यायिक सुनवाई का फैसला किया। इसके चलते यह सवाल उठा कि उन्होंने महासचिव से स्पष्टीकरण दिलाने के बजाय उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की बैठक क्यों नहीं बुलाई? सच तो यह है कि ऐसे एक नहीं अनेक सवाल तभी से उठ रहे हैं जबसे मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीडऩ के आरोपों का सनसनीखेज मामला सामने आया। सबसे प्रमुख सवाल यही है कि जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर व्यक्तिगत सफाई देने के बजाय खुद ही सुनवाई करने का फैसला क्यों...
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की क्या कोई सीमा भी है या नहीं?

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की क्या कोई सीमा भी है या नहीं?

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उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर जिस प्रकार से अमर्यादित आचरण का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया गया है वह निंदनीय ही नहीं चिंताजनक भी है। सर्वाधिक चिंता की बात यह है कि चार न्यूज पोर्टलों- स्क्रोल, द लीफलैट, कारवां और द वायर ने एक साथ व एक ही भाषा में इस संबंध में, आनन-फानन में जिस प्रकार समाचार चलाया वह किसी गहरे षड्यंत्र की ओर इशारा करता है और यह सब किया गया  'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की आड़ में। जैसा कि स्वाभाविक था कि इस गम्भीर मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई। इसकी जांच भी होगी। यह षड्यंत्र किसने रचा और किसके इशारों पर रचा गया इसका पता करना कोई बहुत कठिन काम नहीं होना चाहिए। क्योंकि जिस महिला के 'शपथ पत्र’ को आधार बनाया गया है वह अनजान नहीं है। इसी प्रकार वे चारों न्यूज पोर्टल भी अनजाने नहीं हैं। मीडिया में वे काफी चर्चित नाम हैं और इस प्रकार के सनसनीखेज आरोप लग...
Probe those getting agriculture-loans in multi-croes at subsidized interest-rate of four-percent per annum

Probe those getting agriculture-loans in multi-croes at subsidized interest-rate of four-percent per annum

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Former Central Information Commissioner Shailesh Gandhi in his facebook-post has made shocking revelation said to have been obtained under RTI Act and published in a social media that every year from 2010 to 2016 about 700 people were given total agricultural-loans of about 60000 crores every year with an average of about rupees 90 crores per individual every year on a highly subsidised nominal rate of just four-percent per annum. This is just a mockery of economy where ultra-rich are getting tax-exemptions in name income from agriculture, and such heavy loans at highly subsidised rate of just four-percent per annum. It may not be surprising if some of these might have availed loan-waivers granted in name of agricultural loans. There must be a limit of loans sanctioned by banks in name ...