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कलात्मक मृत्यु का इतिहास रचने वाला साधक

कलात्मक मृत्यु का इतिहास रचने वाला साधक

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जैन धर्म के छोटे-से आम्नाय तेरापंथ धर्मसंघ के सुश्रावक श्री विष्णुभगवान जैन का इनदिनों अलखपुरा तहसील तोशाम जिला भिवानी (हरियाणा) में संथारा यानी समाधिमरण का आध्यात्मिक अनुष्ठान असंख्य लोगों के लिये कोतुहल का विषय बना हुआ है। दिनांक 9 नवम्बर, 2018 भैयादूज के प्रारंभ यह सर्वाधिक लम्बा संथारा आज 146 वें दिवस पर भी अनवरत जारी है। मृत्यु के इस महामहोत्सव के साक्षात्कार के लिये असंख्य श्रद्धालुजन देश के विभिन्न भागों से दर्शनार्थ पहुंच कर अमरत्व की इस अनूठी एवं विलक्षण यात्रा से लाभान्वित हो रहे हैं। यह संथारा इसलिये भी अनूठा एवं आश्चर्यकारी है क्योंकि एक कृषिजीवी जाट परिवार में जन्मे एवं सनातन धर्म के संस्कारों में पले एवं बाद में जैन बने श्री विष्णु भगवान आज के इस भौतिकवादी एवं सुविधावादी युग में सुख-सुविधा, मोहमाया के त्याग का इतिहास रच रहे हैं। जैसाकि सर्वविदित है कि जैन धर्म में अनगिनत सदि...
सांसद की भूमिका क्या होती है?

सांसद की भूमिका क्या होती है?

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इस देश की राजनीति की यह दुर्दशा हो गई है कि एक सांसद से ग्राम प्रधान की भूमिका की अपेक्षा की जाती है। आजकल चुनाव का माहौल है। हर प्रत्याशी गांव-गांव जाकर मतदाताओं को लुभाने में लगा है। उनकी हर मांग स्वीकार कर रहा है। चाहे उस पर वह अमल कर पाए या न कर पाए। 2014 के चुनाव में मथुरा में भाजपा उम्मीदवार हेमा मालिनी ने जब गांवों के दौरे किए, तो ग्रामवासियों ने उनसे मांग की कि वे हर गांव में आर.ओ. का प्लांट लगवा दें। चूंकि वे सिनेतारिका हैं और एक मशहूर आर.ओ. कंपनी के विज्ञापन में हर दिन टीवी पर दिखाई देती है। इसीलिए ग्रामीण जनता ने उनके सामने ये मांग रखी। इसका मूल कारण ये है कि मथुरा में 85 फीसदी भूजल खारा है और खारापन जल की ऊपरी सतह से ही प्रारंभ हो जाता है। ग्रामवासियों का कहना है कि हेमा जी ने ये आश्वासन उन्हें दिया था, जो आजतक पूरा नहीं हुआ। सही बात क्या है, ये तो हेमा जी ही जानती होंगी। यह...
उत्तराखंड की ठंडी और शांत वादियों में चुनावी शोर

उत्तराखंड की ठंडी और शांत वादियों में चुनावी शोर

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देश में लोकसभा चुनाव का शंख बजने के बाद उत्तराखंड की ठंडी और शांत वादियों में चुनावी शोर ने भले ही अभी गति न पकड़ी हो पर प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टी बीजेपी और कांग्रेस में अंतरकलह की गर्माहट ने राजनीतिक माहौल को खासा गरमा रखा है। प्रदेश के 76.28 लाख मतदाता 11 अप्रैल को अपना मतदान कर सूबे की 5 लोकसभा सीटों पर किस दल को काबिज करने जा रहे हैं यह तो अभी नहीं कहा जा सकता पर राजनीति के रणनीतिककारों का मानना है कि इस बार सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस दोनों की हालत चिकन सूप की तरह पतली बनी हुई है। एक ओर प्रदेश में कांग्रेस का अंतर्कलह का बीज फूट फूटकर आपसी कलह की नई पौध को जन्म देने पर तुला हुआ है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी के सिरमौर माने जाने वाले बड़े नेता वनवास की ओर रुख किये बैठे हैं जिसके चलते देश के इस सबसे बड़े उत्सव का रंग सूबे की जनता पर अभी तक नहीं चढ़ पाया है। उत्तराखंड की पांचों लोकसभ...
राजनीतिक दलदल में फंसी ममता के हाथ से फिसल रहा है बंगाल

राजनीतिक दलदल में फंसी ममता के हाथ से फिसल रहा है बंगाल

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लोग अक्सर कहते हैं कि राजनीति में सबकुछ बदल जाने के लिए एक सप्ताह काफी है। लेकिन जिस तरह से बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा पिछले कुछ दिनों में बदली है वो हैरान करने वाला है। जो ममता बनर्जी एक महीने पहले देश की प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रही थी वो आज अपने ही घर में घिर गई है। बंगाल में बीजेपी के पक्ष में एक अंडरकरेंट चल रहा है। बीजेपी मजबूत होती जा रही है और ममता की पार्टी का ग्राफ धरातल की ओर जा रहा है। ये अंडरकरेंट कहां थमेगा और कब थमेगा ये कहना तो मुश्किल है लेकिन हकीकत ये है कि भारतीज जनता पार्टी की नजर अब बंगाल से 15-20 सीटें जीतने पर टिक गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह तृणमूल कांग्रेस के एक एमएलए अर्जुन सिंह हैं जिन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है। इससे बंगाल का पूरा परिदृश्य बदल गया है। ये बीजेपी का एक गेम-चेंजर दांव साबित होने वाला है क्योंकि ममता बनर्जी ने अपनी सेना का अर्जुन खो दिय...
सर्वे को  झुठलाने की जुगत में प्रदेश कांग्रेस

सर्वे को  झुठलाने की जुगत में प्रदेश कांग्रेस

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राजस्थान में विधान सभा की जीत के बाद कांग्रेस में इस बात का भी भारी उत्साह था कि अब तो लोकसभा चुनावों में जनता उन्हें बाग बाग कर देगी। जैसे प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन हुआ है वैसे ही लोक सभा चुनावों में 25 का मिशन पूरा होगा। इस मिशन को पूरा करने के लिये गहलोत ने सरकार बनने के बाद जनहित के कितने काम किये या जनहित में कितने निर्णय लिये, इसका तो कोई मालूम नहीं चला, लेकिन आईएएस से लेकर अन्तिम स्तर तक के लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों के तबादले कर दिये। बताया जा रहा है कि सरकार ने सुशासन के लिये पूरी मशीनरी को ही बदल दिया है। वह भी इस उम्मीद के साथ कि जनता में सकारात्मक संदेश जायेगा। लेकिन जिस प्रकार के सर्वे सामने आ रहे हैं उससे तो नहीं लगता कि कांग्रेस अपने मिशन को पूरा करने में सफल होगी। कांग्रेस ने भले ही लोकसभा चुनावों को लेकर मिशन 25 का टारगेट रखा हो, लेकिन आधा दर्जन से अधिक सीटों पर का...
लोकसभा चुनाव 2019 : जीत हार के अधर में अमेठी

लोकसभा चुनाव 2019 : जीत हार के अधर में अमेठी

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अमेठी संसदीय क्षेत्र की यूं तो देश ही नहीं विदेशों में भी अच्छी खासी धमक रही है। कारण कि गांधी परिवार के लिए हमेशा से महफूज रही अमेठी ने वक्त बेवक्त कांग्रेस को झटके भी देकर अपनी पृष्ठभूमि का अहसास कराया है। अमेठी संसदीय क्षेत्र में पांच विधान सभा क्षेत्र क्रमश: अमेठी, गौरीगंज, जगदीशपुर, तिलोई व सलोन शामिल हैं। भौगोलिक लिहाज से भी तीन जिलों के भूभाग मिलाकर बने इस संसदीय क्षेत्र के चुनाव में पूर्व की तरह इस बार भी काफी रोचक व दिलचस्प मुकाबले देखने को मिलेंगे। अमेठी लोकसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले लोकसभा चुनाव की भांति भाजपा यहां से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुकाबला करने के लिए केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सदस्य स्मृति ईरानी को एक बार फिर से उतारकर राहुल को उनकी ही कर्मभूमि पर कड़ी चुनौती देने के मूड में नजर आ रही है। ...
गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और न्याय

गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और न्याय

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कांग्रेस अध्यक्ष की बेसिक इनकम गारंटी प्रस्ताव के सम्बन्ध में। इसके बारे में तात्विक चर्चा का बहुत विस्तार है। संकेत भर के लिए कुछ तात्विक प्रश्न इस प्रकार हैं- गरीबी, भुखमरी, लाचारी, बेरोजगारी क्या ये समानार्थक हैं या इनमें कोई भेद है? इस दृष्टि से कोई विचार प्रकट नहीं किया गया। विगत वर्षों में बीपीएल की सीमा और बीपीएल की पहचान करके उनको कार्ड देना जमीनी स्तर पर बहुत विवाद का मुद्दा रहा है। इसकी ओर कोई संकेत नहीं। बीपीएल क्या एक व्यक्ति इकाई है या परिवार इकाई है या समाज इकाई है? ये मुद्दा विशेष उभर कर आया है बीपीएल की पहचान करने के नए एसेट्स बेस्ड मेथोडोलॉजी से। क्या टार्गेटेड सब्सिडी कार्यक्रम चलाना एक अच्छी नीति है? क्या इससे अपेक्षित परिणाम निकल पाते हैं? क्या इस प्रकार की बहुविध स्कीम्स का कोई निश्चित लाभ लाभार्थियों को पहुंचा है? क्या वे गरीबी रेखा से बाहर आ पाए हैं?...
घोषणापत्रों में कहीं फिर छूट ना जाये पर्यावरण के सवाल

घोषणापत्रों में कहीं फिर छूट ना जाये पर्यावरण के सवाल

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देश में लोकसभा चुनाव अगले माह ही शुरू होने जा रहे हैं। चुनाव का माहौल अब गरम होता ही जा रहा है। होली के बाद चुनावी रैलियों से लेकर नुक्कड़ सभाओं के दौर भी शुरू हो जाएंगे। इसी के साथ ही सभी दल अपने-अपने मेनिफेस्टो या संकल्प पत्रों को भी जारी करने लगेंगे। उनमें वर्णित तमाम बिन्दुओं पर चर्चा भी होगी, वादे और संकल्प भी दुहराये जाएंगे। लेकिन, अब पर्यावरण से जुड़े सवालों पर भी एक बार फिर से फोकस करने का समय आ गया है। सभी दलों को अपने-अपने घोषणापत्रों में देश को यह तो बताना ही होगा कि उनकी पर्यावरण से जुड़े सवालों पर किस तरह की सोच है। अभी भारत में यूरोपीय देशों की तर्ज पर ग्रीन पार्टी बनाने के संबंध में अब कौन सोचेगा? पर अगर कोई पार्टी सिर्फ पर्यावरण से जुड़े सवालों को लेकर चुनाव मैदान में भी उतरे तो भी उसका स्वागत ही होना चाहिए। यही तो भविष्य के लिए, आने वाली पीढिय़ों के हित में की जाने वाली सा...
बढ़ती नफरत का त्रासद दौर

बढ़ती नफरत का त्रासद दौर

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  न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुई त्रासद एवं अमानवीय हिंसक घटना आतंकवाद का एक नया संस्करण है। इस आतंकी वारदात ने यह बता दिया है कि जब तक नफरत, संकीर्णता और उन्माद इस दुनिया में सक्रिय है। कोई भी पूरी तरह से सुरक्षित एवं संरक्षित नहीं है। हालही में अल नूर मस्जिद और लिनवुड मस्जिद में नमाज पढऩे गए लोगों पर हथियारबंद हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 50 के आसपास लोग मारे गए और कई घायल हो गए। इस तरह की आतंकी वारदात सिर्फ हमारे भरोसे को ही नहीं हिलाती, बल्कि उन सारी सच्चाइयों को हमारे सामने ला खड़ी करती है, जिनसे चाहे-अनचाहे हम मुंह चुराते रहे हैं। इस प्रकार की यह आतंकी हिंसा एवं विस्फोटों की शृंखला, अमानवीय कृत्य अनेक सवाल पैदा कर रहे हैं। कुछ सवाल लाशों के साथ सो गये। कुछ घायलों के साथ घायल हुए पड़े हैं। कुछ समय को मालूम है, जो भविष्य में उद्घाटित होंगे। इसके पीछे जिस तरह की ...
मोदीराज में “डिफेंस डील : रक्षा सौदे”

मोदीराज में “डिफेंस डील : रक्षा सौदे”

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मोदी सरकार ने 2014 के बाद 4.26 लाख करोड़ से अधिक के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किया है. ● 36 :- राफेल मल्टीरोल फाइटर : 59,000 करोड़ ● 7 :- प्रोजेक्ट-17A क्लास युद्ध-पोत : 50,000 करोड़ ● 5 :- एयर डिफेंस SAM S-400 : 39,000 करोड़ ● 22 :- अपाचे AH-64 और 15 शिनूक : 3 अरब डॉलर ● पुर्जे और गोला बारूद : 3 अरब डॉलर ● 6 :- अरिहंत क्लास सबमरीन : 23,652 करोड़ ● 1 :- अकुला II क्लास न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी : 3.3 अरब डॉलर ● बराक-8 MRSAM एयर डिफेंस : 2 अरब डॉलर ● 73 :- ALH ध्रुव : 14,151 करोड़ ● 464 :- मेन बैटल टैंक T-90 MS : 13,448 करोड़ ● 7.47 लाख :- AK-203 असॉल्ट राइफल : 12,280 करोड़ ● LRSAM बराक-8 : 1.41 अरब डॉलर ● 2 :- 'आकाश - NG' SAM रेजिमेंट : 9,100 करोड़ ● 2 :- मल्टी यूटिलिटी वेसल 'HSL' : 9,000 करोड़ ● 4 :- P-8i 'Poseidon' : 1 अरब डॉलर ● 'NASAMS' SAM : 1 अरब डॉलर ● 2 :- प्रोजे...