Shadow

TOP STORIES

Mobile-companies should auto-update tariff-plans in case of reduction in tariffs

Mobile-companies should auto-update tariff-plans in case of reduction in tariffs

addtop, TOP STORIES, आर्थिक
There is frequent downward revision in post-paid tariff-plans of mobile service-providers due to stiff competition by new-comer JIO. In recent past ever since JIO has entered as mobile service-provider, heavy reduction in post-paid tariff-plans by other mobile service-provider is quite common. But these mobile service-providers are looting unaware customers who by and large are unaware of such revised lower tariff-plans. Telecom Regulatory Authority of India TRAI should ensure that mobile service-providers may auto-revise post-paid tariff-plans in case of introduction of new reduced tariff-plans. Also it may be compulsory to inform post-paid customers by separate registered post about revised tariff-plans. Such communication must not be sent as enclosure to bills, because it is usual th...
Welcome Supreme Court order imposing fine on Tejaswy Yadav and ordering to vacate government-bungalow

Welcome Supreme Court order imposing fine on Tejaswy Yadav and ordering to vacate government-bungalow

addtop, TOP STORIES, समाचार
It refers to welcome order of Supreme Court on 08.02.2019 imposing symbolic fine of rupees 50000 for filing appeal at the Apex Court against justified order of Patna High Court directing former state Deputy Chief Minister Tejaswy Yadav to vacate government-bungalow meant for state Deputy Chief Minister. It is noteworthy that Tejaswy Yadav was rightfully offered another government-bungalow meant for persons of state of ministers in the state because he is presently Leader of the Opposition in state-assembly who is entitled for a government-bungalow meant for ministers in the State. Our political rulers should take lesson from British Prime Minister where family-members of outgoing British Prime Minister are seen pushing out their belongings to ensure that new British Prime Minister enter...
राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ?

राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ?

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
क्या राहुल रॉफेल डील से सचमुच असंतुष्ट हैं? अगर हाँ, तो जैसा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, उन्हें ठोस सबूत पेश करने चाहिए। अगर वो कहते हैं और मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए दिए हैं तो इसे सिद्ध करें, कहीं न कहीं किसी ना किसी खाते में पैसों का लेनदेन दिखाएं। काश कि वो और उनके सलाहकार यह समझ पाते कि इस प्रकार  आधी अधूरी जानकारियों के साथ आरोप लगाकर वे मोदी की छवि से ज्यादा नुकसान खुद अपनी और कांग्रेस की छवि को ही पहुँचा रहे हैं। क्योंकि देश देख रहा है कि जिस प्रकार की संवेदनशीलता से वे रॉफेल सौदे में कथित भ्रष्टाचार को लेकर मोदी के खिलाफ दिखा रहे हैं,वो ममता के प्रति शारदा घोटाले, या  अखिलेश के प्रति उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले अथवा मायावती के प्रति मूर्ति घोटाले या फिर लालू और तेजस्वी के प्रति चारा घोटाले या चिदंबरम के प्रति आई एन एक्स क...
फिऱ आया इंदिरा गांधी-राजीव गांधी की शहदात भुनाने का मौसम

फिऱ आया इंदिरा गांधी-राजीव गांधी की शहदात भुनाने का मौसम

addtop, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
ऱाफेल डील विवाद पर दो तरह की बातें साफ तौर पर देखने में आ रही है। पहली, कुछ नेता अपने विरोधियों पर खुलकर गटर छाप और असभ्य भाषा का इस्तेमाल करके निशाना साध रहे हैं। दूसरी, कांग्रेस के कुछ नेता फिर से चुनाव से ठीक पहले जनता की सहानुभूति बटोरने के लालच से इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की शहादत को भुनाने में लग गए हैं। ये ठीक है कि इन दोनों नेताओं की दुखद हत्याएं हुईं थीं। पर क्या श्रीमती इंदिरा गांधी की पंजाब नीति वाजिब थी? कौन नहीं जानता कि उन्होंने ही शुरूआती दौर में जरनैल सिंह भिंडरावाले को हर तरह से मदद करके खाद-पानी दिया था। भिंडरावाले का संबंध एक दौर में एक सिख डेरे से था। वह आगे चलकर सिख मिलिटेंसी के प्रतीक बन गया। पहले तो वह सिख धर्म का एक लोकप्रिय प्रचारक मात्र था। किसको नहीं पता कि पंजाब में कांग्रेस के राज में  खालिस्तानी ताकतें मजबूत  की गई और उनसे इंदिरा जी के बढ़ावा पर ही जमकर  खू...
शक्ति के उपासक बनें

शक्ति के उपासक बनें

addtop, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
भारत भूमि के महान सपूत महर्षि अरविन्द ने वर्षों पूर्व जब हम अंग्रेजों के अधीन थे, अपनी एक छोटी रचना 'भवानी मंदिर' की भूमिका में लिखा था कि "हमने शक्ति को छोड़ दिया है , इसलिए शक्ति ने भी हमें छोड़ दिया"। अतः पराधीनता में रहना हमारी दुर्बलता का ही परिणाम था। अनेक मनीषियों ने लिखा व कहा भी था कि सदियों की पराधीनता से हमारी शक्तियाँ दुर्बल हुई हैं , अतः इससे मुक्त होना सर्वाधिक आवश्यक है।स्वामी विवेकानंद ने भी हिन्दुओं को निर्भीक व बलवान बनने के लिए प्रेरित किया था । हिन्दू समाज की दुर्बलता, कायरता व भीरुता को गोरखनाथ पीठ के  ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ व महंत अवैद्यनाथ जी भी समझते थे और इस आत्मघाती अवगुण से समाज को बाहर लाने का निरंतर प्रयास करते रहे । उसी  धरोहर और परंपराओं को अनेक अवरोधों के उपरान्त भी निभाने वाला एक संत आज अपने समाज का अग्रणी सारथी बन गया है। अपने अथक परिश्रम...
अपने-अपने ब्रह्मास्त्र

अपने-अपने ब्रह्मास्त्र

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
जब जब विरोधियों को लगता है कि मोदी का ग्राफ गिर रहा है और वह कमजोर हो रहे हैं तभी अचानक मोदी खेमा ऐसे वापसी करता है कि विपक्षी खेमा चारों खाने चित्त हो जाता है। चूंकि राजनीति में विमर्श का बड़ा महत्व होता है। जनता के बीच चलने वाला विमर्श ही राजनीतिक दलों का वोट बैंक निर्धारित करता है। इसलिए तीन प्रमुख राज्यों में हार के बाद राष्ट्रीय विमर्श कांग्रेस की सत्ता में वापसी एवं मोदी का गिरता ग्राफ बन गया था। मोदी विरोध एवं मोदी समर्थन वाले मीडिया समूह अपनी अपनी ढपली पर अपने अपने राग अलाप रहे थे। राम मंदिर चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा था। संतों के द्वारा एक समानान्तर आंदोलन चलाया जा रहा था। सवर्णों को आधार बनाकर 2019 के लोकसभा चुनावों हेतु समीकरण दिये जा रहे थे। इसी बीच मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का संवैधानिक संशोधन करके एक बड़ा दांव चल दिया। देश में विमर्श की दिशा ही बदल गयी। मोदी से नारा...
आस्था ही नहीं, हिंदू जागरण का पर्व भी है कुंभ

आस्था ही नहीं, हिंदू जागरण का पर्व भी है कुंभ

addtop, TOP STORIES, सामाजिक
  अमृत प्राप्ति की इच्छा मनुष्य के मन में आदि काल से रही है। मनुष्य ही क्यों, देवता और राक्षस भी अजर-अमर होने की कामना रखते थे। जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ तो चौदह रत्न निकले, लेकिन सबसे ज्यादा छीना-झपटी मची अमृतकलश को लेकर क्योंकि जो अमृतपान करेगा वही स्वर्ग पर राज करेगा, जो अमृतपान करेगा वही देवत्व को प्राप्त करेगा। लेकिन वो अमृतपान करने वाली हंै कौन - सतोगुणी शक्तियां या तमोगुणी शक्तियां? यदि सतोगुणी शक्तियां अमृतपान करती हैं तो सृष्टि का कल्याण होगा। यदि तमोगुणी शक्तियां अमृतपान करती हैं तो मानवताविरोधी, विनाशकारी और विध्वंसकारी शक्तियां अमरत्व का दुरूपयोग कर तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मचा देंगी। अमृतकलश को किसी तरह तमोगुणी शक्तियों से बचाना था तो देवताओं ने स्वर्ग के राजा इंद्र के पुत्र जयंत को कलश थमा कर चुपचाप वहां से भगा दिया। राक्षसों को जैसे ही भनक लग...
राजनीतिक सोच में बौना पड़ता जनहित

राजनीतिक सोच में बौना पड़ता जनहित

addtop, TOP STORIES, राज्य
  राजस्थान में विधान सभा चुनावों के बाद लगता है जैसे सब कुछ ठहर सा गया है। प्रदेश में शिक्षा, चिकित्सा, पानी, सड़कें, बेरोजगारी, रोजगार, सरकारी कर्मियों की मांगें मुहं बाये खड़ी थी। क्या सरकार के बदलते ही सारी समस्याओं  का स्वत: ही समाधान हो गया है? या यों कहें कि मतदाताओं ने वह सब प्राप्त कर लिया है जिसकी वे विधान सभा चुनावों से पहले मांग कर रहे थे। पिछली सरकार में शुरू किये गये जनहित के काम किसी ना किसी बहाने बन्द पड़े हैं। लगता है अब उन कामों की जरूरत नहीं है। जानकारी के अनुसार 135 विधायक जो कि राजस्थान की पौने तीन करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इन्होंने सदन में पहुंचने के बाद जनसमस्याओं से स बन्धित एक भी प्रश्न ना ही पूछा और ना ही सदन में रखा ऐसा बताया जा रहा है। नई सरकार में चुन कर आए विधायकों की सक्रियता और जनता के प्रति अपनी कितनी जवाबदेही समझते हैं, इससे स्पष्ट हो ...
नहीं बन पाया पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड

नहीं बन पाया पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड

addtop, TOP STORIES, राज्य
उत्तराखंड बने अठारह साल हो गये। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ये प्रदेश आज भी एक पर्यटन राज्य की पहचान नहीं बना पाया है, बद्रीनाथ केदारनाथ यमनोत्री गंगोत्री जैसे विश्व वि यात चार धाम जिस प्रदेश में हो वहां आज एक भी ढंग का पांच सितारा होटल नहीं है। सरकार की पर्यटन नीति में खामियां ही खामियां हैं, जिसकी वजह से न तो यहां तीर्थाटन पनपा न ही पर्यटन। उत्तराखंड वो प्रदेश है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा टाइगर यानि बाघ रहते है, जिसकी जानकारी दुनियां के हर किसी वन्यजीव प्रेमी को है। नेपाल से लेकर भूटान तक बना हुआ एशियन एलिफेंट कैरिडोर उत्तराखंड से गुजरता है जहां सबसे ज्यादा हाथी पाए जाते हैं, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से जुड़ा पर्यटन यहां है, परन्तु तो भी पर्यटक क्यों अफ्रीका की तरफ जंगल सफारी के लिए जाते है? सीधा सा जवाब है कि यहां सोच का अभाव है, उत्तराखंड के आईएफएस अफसर ज्यादातर दूसरे प्रदेशों के मूल निव...
A new paradigm for Human Rights & Women’s Rights

A new paradigm for Human Rights & Women’s Rights

addtop, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
The Challenge: Current Human Rights discourse is divisive & aimed at breaking up India: India is perhaps the only country in the world where leading groups claiming to be defenders of human rights are openly aligned with organizations wedded to the cult of violence whose stated agenda is to subvert the nation and tear asunder Indian society.  This is because human rights work in India today is almost all funded by Western donor agencies through NGOs that are willing to view Indian reality through western paradigms and push the agendas of donor agencies promoted by western governments & evangelical groups. In recent years, select human rights groups have also tied up with Islamist organizations & agencies in Arab countries that are using Indian NGOs as front organizations for Je...