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Hanging sword of closure on 300 branches of Punjab National Bank

Hanging sword of closure on 300 branches of Punjab National Bank

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It refers to country’s second-largest public-sector bank Punjab National Bank considering closure of about 300 loss-making branches out of total about 7000 branches. It is noteworthy that Reserve Bank of India (RBI) gave liberty to banks for merger, shifting or closure of their branches in urban areas without seeking prior RBI permission. Step was needed long ago when branches of an individual public-sector bank became too close because of merger of small public-sector bank in the bigger one. It is time long-awaited merger-plan of public-sector banks into some bigger ones may be implemented soon to further bring down overheads in running surplus bank-branches. Reducing number of banks will largely reduce need of clearing-operations where funds could be transferred by bank-transfers...
how our country can be great?

how our country can be great?

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हमारा भारत महान....कैसे हो..? क्या भारत में भारत के ही मूल धर्म व संस्कृति को नष्ट करने वालों के विरुद्ध कोई राजनैतिक दल सक्रिय होगा या केवल उनकी धार्मिक भावनाओं का दोहन करके उनकी वोटों से सत्ता के सुख में मस्त होकर अपना दायित्व भूल जाएगा ? ध्यान करों 2011 का वह हिंदुओं को एकतरफा दोषी घोषित करने वाला "साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक विधेयक" जिसके होने वाले संभावित उत्पीडन के भय से हिंदुओं के देशव्यापी विरोध के कारण वह रोका गया और जबसे भाजपा 2014 में केंद्र व उसके बाद अनेक प्रदेशो में सरकार बनाने में सफल होती आ रही हैं। वैसे भी अब यह माना जाने लगा हैं कि राष्ट्रवादियों के लिए भाजपा के अतिरिक्त कोई और विकल्प भी नही है। इस पर भी हमारे धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्यों को नष्ट करने के लिए हो रहें आघातों पर पूर्ण विराम नही लगा हैं। विचार करना होगा कि क्या राष्ट्रवादियों की इच्छाओं का सम्मान हुआ ? क्...

MR. MODI NEEDS TO CONSOLIDATE THE GAINS IN 2018

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Mr. Modi was voted to power as India’s Prime Minister with overwhelming majority three years back, primarily due to the faith that he successfully created amongst large section of country men that he would ensure probity in public life, root out black money and corruption and focus on development and growth. After seeing the dismal performance of Manmohan Singh government and several corrupt dealings under his “watchful eye”, people thought that the country desperately needed better governance. Mr. Modi met the mood of the people and got the mandate to govern the country for five years. Now, with three years gone after becoming the Prime Minister, Mr. Modi seems to have not only many admirers but also many critics. While the admirers continue to favourably look at him , ...
SAVE Sanitation Workers

SAVE Sanitation Workers

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अब मरने से बचाओ सफाई योद्धाओं को आर.के.सिन्हा स्वच्छ भारत अभियान ज़ोरों पर है। होना भी चाहिए! देशभर में युद्धस्तर पर शौचालय बन रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है और वे गॉव- गॉंव घूम- घूमकर खुले में शौच करने वालों को खदेड़ते नज़र आ रहे हैं! और, दूसरी ओर देश के छोटे-बड़े शहरों में सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई करने वाले सफाई योद्धाओं की मौत के मामले बंद होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। असलियत तो यह है कि अब ये हादसे पहले से कहीं अधिक होने लगे हैं। हाल के दौर में इन अभागों के कुछ चित्र मीडिया में भी आने लगे हैं कि किन कठोर हालातों में सफाईकर्मी गंदे-कीचड़ से सने सीवर के भीतर से निकल रहे हैं या इनके शव निकाले जा रहे हैं। ये सारे नजारे भयावह लगते हैं। निराश कर जाते हैं और सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि हमारे इस महान देश में आज़ादी के 70 साल बाद भी हमारे देश का कोई इंसान अप...
Why friendship with Pakistan?

Why friendship with Pakistan?

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दुर्जन से कैसी सज्जनता ...⁉ क्या पाकिस्तान के अनेक अपमानजनक व अमर्यादित कटु व्यवहारों के बाद भी हम मौन रहें और उसे सहते रहें , पर कब तक और क्यों ? अधिक पीछे न जाते हुए अभी पिछले सप्ताह ऐसा ही एक प्रकरण हुआ जिसमें पाकिस्तान की एक जेल में बंद हमारे नागरिक कुलभूषण जाधव से मिलने गई उनकी माँ और पत्नी के साथ हुआ । उनके साथ किये गये दुर्व्यवहार ने हमारी धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचा कर पाकिस्तान ने अपनी वहीं धूर्त व घृणित इस्लामिक मानसिकता का ही परिचय दिया । ध्यान रहें जाधव की माँ और पत्नी को उनसे मिलवाने से पहले उन दोनों के मंगल सूत्र, बिंदी , चूड़ियां आदि हिन्दू सुहागिनों के प्रतीक चिन्हों को उतरवाया गया व उनके वस्त्र भी परिवर्तित करायें गयें । यहां तक की सुरक्षा के नाम पर कुलभूषण की पत्नी के जूते तक भी उतरवा कर रख लिये। परंतु नकारात्मक व संदेहास्पद सोच के कारण वापसी में उनको बदले हुए जूते/...
Hon’ble VP M Venkaih Naidu + Public Interest Foundation (PIF) STRATEGIC FORMAT for India’s Governance Turnaround

Hon’ble VP M Venkaih Naidu + Public Interest Foundation (PIF) STRATEGIC FORMAT for India’s Governance Turnaround

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Public Interest Foundation – Recommendations On Systematic Reforms For Public Good In 2013 PIF published its report titled Systematic Reforms For Public Good. This report was compiled after painstaking effort by an eminent group headed by the late, Naresh Chandra JI who chaired the governing council of PIF. The PIF governing council also included former RBI governor Dr Bimal Jalan, famed journalist B G Verghese, former Chief Secretary of Delhi Mrs Shailaja Chandra, industrialists Harsh Vardan Neotia and Suresh Neotia as well CII mentor Mr Tarun Das.Senior IAS retiree and a former secretary Mr Anil Kumar was advisor and Mr Nipendra Misra presently with the PM, was director of PIF at the time. They were assisted by an excellent team of researchers and admin staff. PIF set ou...
खुद को हर कीमत  पर साबित करना

खुद को हर कीमत पर साबित करना

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एक बहुत ही पुरानी कहावत है वीर भोग्या वसुंधरा। हर सुबह ही अपने आप को वीर या श्रेष्ठ साबित करने की एक दौड़ शुरू हो जाती है, अपने आपको श्रेष्ठ साबित करने की एक दौड़ शुरू हो जाती है। बाघ हिरन के पीछे दौड़ता है जिससे वह उसे पकड़ सके। अब हिरन अपने आप तो बाघ के पास जाकर कहेगा नहीं कि मुझे खाओ, अपनी भूख मिटाओ। बाघ को हिरन को पकडऩे के लिए अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करना ही होता है। इसी प्रकार हिरन के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती होती है अपने आप को बचाना और दिन भर के लिए जिंदा रहना। तो हर रोज़ हिरन को भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है, न केवल हर दिन बल्कि हर घंटे, हर मिनट। क्योंकि उसे नहीं पता होता कि कब उस पर कोई बड़ा जंगली जानवर आक्रमण कर देगा और उसे अपना शिकार बना लेगा। आज हम जिस प्रतिस्पर्धी संसार में रहते हैं, वह किसी भी प्रकार से अलग नहीं है। एक सेल्समैन अपना दिन इसी उम्मीद के साथ शुरू...
कांग्रेस मुक्त संवैधानिक पद अब संघी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

कांग्रेस मुक्त संवैधानिक पद अब संघी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

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अमित त्यागी ति आधारित भारत की राजनैतिक व्यवस्था में एक समय यह बड़ा मुश्किल माना जाता था कि जाति-व्यवस्था टूट भी सकती है। मतदाता अपनी जाति से बाहर आकर राष्ट्रनिर्माण के लिये भी मत दे सकता है। जातियों में बंटा हिन्दू समाज कभी एकजुट भी हो सकता है। वोट बैंक माना जाने वाला मुस्लिम वर्ग तुष्टीकरण की राजनीति से बाहर भी आ सकता है। पर ऐसा संभव हुआ। पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ। इसके बाद कई अन्य प्रदेशों में होते हुये 2017 में उत्तर प्रदेश के चुनावों में संभव हुआ। जाति आधारित वोट बैंक टूट गया। जाति की राजनीति करने वाले नेताओं की मनमानी खत्म हुयी। लोगों ने प्रत्याशियों को नहीं, कमल और मोदी को वोट दिया। क्षेत्रीय दलों की निर्भरता सिमट कर रह गयी। केंद्र मजबूत होता चला गया। और यह तो गणित का नियम भी है कि अगर केंद्र बिन्दु मजबूत होता है तो वृत्त(विकास का पहिया) का निर्माण तेज़ होता है। वर्तम...
Consumer Affairs Department should make systematic changes in Consumer protection Act

Consumer Affairs Department should make systematic changes in Consumer protection Act

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Department of Consumers should take immediate steps to make appropriate changes in Packaged Commodities Act to make it compulsory to pack all packaged commodities only in packs of 1, 2, 5, 10, 20, 50, 100, 500 gms or kgs or millilitres or litres. Goods packed by numbers should likewise be only in packs of 1, 2, 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500, 1000 and similar multiples of 1000 abolishing packing by dozens etc. There is no sense in allow packing at gaps of just 5 gms like even in 95 gms. Systematic packing formula in metric units allows packing-units with next unit being almost double the previous unit with metric-system requiring units like 1, 2, 5, 10......and so on. Amul once reduced pouch-price of cow-milk to rupees twenty but at the same time also reducing contents to 400-mililit...
हिंदी वाले आईएएस बनने का सपना अब छोड़ ही दें!

हिंदी वाले आईएएस बनने का सपना अब छोड़ ही दें!

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सफलता के हज़ार साथी होते हैं, किन्तु असफलता एकान्त में विलाप करती है। यूँ तो सफलता या असफलता का कोई निश्चित गणितीय सूत्र नहीं होता, किन्तु जब पता चले कि आपकी असफलता कहीं न कहीं पूर्व नियोजित है, तो वह स्थिति निश्चित रूप से चिंताजनक है। देश की सबसे बड़ी मानी जाने वाली आईएएस की परीक्षा को आयोजित करने वाली संस्था 'संघ लोक सेवा आयोग' आज घोर अपारदर्शिता और विभेदपूर्ण व्यवहार में लिप्त है। हिंदी माध्यम के सिविल सेवा अभ्यर्थियों का विशेषतः 2011 के बाद से, गिरता हुआ चयन अनुपात सारी कहानी बयान करता है। सम्पूर्ण रिक्तियों का लगभग 3 या 4% ही केवल हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के हिस्से में आ पा रहा है। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के चयन की गिरती दर का कारण क्या उनकी अयोग्यता/अक्षमता को ठहराया जा सकता है? नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है, इसके पीछे कोई तार्किक आधार नहीं है। यह सर्वविदित है इस परीक्षा के ल...