द केरल स्टोरी’ और ‘रैंट’ का राजरोग…
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कथित बुद्धिजीवियों, लिबिर-लिबिर गैंग और कौमियों का प्रिय शब्द है- 'रैंट'। इसका ढीला-ढाला अनुवाद तो बकवास या फिर प्रलाप होगा, लेकिन 'लेली' (लेफ्ट-लिबिर)गैंग के मुताबिक उनके अलावा दुनिया में जिस किसी ने दूसरे तरह की कोई भी बात कही तो वह रैंट है, उसे डिस्क्रेडिट करने का जरिया है। जैसे, अब्राहमिक मजहब बताते हैं कि उनके पैगंबर और उनकी किताबों में दुनिया का सारा सत्य समाहित है, उसके अलावा कुछ भी कहना 'कुफ्र' है, कहना क्या सोचना भी और दुनिया को एकरंगा कर देना उनकी पवित्र ड्यूटी है।--------------'द केरल स्टोरी' रैंट है, 'द कश्मीर फाइल्स' रैंट है, सीताराम गोयल के सवाल रैंट हैं, राम जन्मभूमि मामले में के के मोहम्मद की गवाही रैंट है, लेकिन डी एन झा की 'हिंदू भी गोमांस खाते थे' वाली बात आप्तवचन हैं, अल्लाह का हुक्म है और जीजस की मंशा है। यही बात रोमिला थापर के...









