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राहुल के सहारे चमकते नेता, पार्टी के लिए ख़तरनाक

राहुल के सहारे चमकते नेता, पार्टी के लिए ख़तरनाक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। अगर राहुल गांधी को अपने बचाव में ऊपरी अदालत में अपील करते हैं,तभी वह जेल जाने से बच सकेंगे एवं उसके बाद ही उनकी संसद की सदस्यता भी संभवतः बहाल हो पाएगी। अभी तो राहुल गांधी को अपने इर्द-गिर्द तैनात नेताओं में से उन लोगों को दूर कर देना चाहिए जो सिर्फ स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए राहुल गांधी का सहारा ले रहे हैं। बहुत से जनाधार विहीन नेता राहुल गांधी के सहारे बड़े-बड़े पदों पर बैठे हुये हैं। इस मामले के तथ्य से सब परिचित हैं,सूरत कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को सजा सुनाने के 26 घंटे बाद ही लोकसभा ने उन्हें सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया। यदि लोकसभा अध्यक्ष चाहते तो उन्हें ऊपरी अदालत के निर्णय होने तक संसद सदस्य रखा जा सकता था, शायद यहाँ राजनीति के दबाव में अति शीघ्रता में उनकी सदस्यता रद्द कर दी गयी। कोर्ट के निर्...
बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो

बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो और इससे पहले कि सामनेवाला सम्भले दूसरा हमला और लगातार पहल अपने हाथ में रखो।विरोधी दल जो स्वयं आकंठ भ्रष्टाचार की दल दल में डूबे हुऐ हैं, यही े्््करना चाह रहे हैं। अड़ानी के मामले में और तो कुछ मिला नहीं, बस शेयर मंदी होने पर चिल्लाहट मचाये हुऐ हैं और जो बेईमानियाँ खुद की हैं, इससे पहले कि आरोप इन पर आये, मोदीजी को आरोपित कर रहे हैं।भारत में १९४७ से २००७ तक के वर्षों में कुल बैंक क़र्ज़ा १६ बिलियन का था। जब सोनिया की सरपस्ती में मन मोहन सिंह की हुकूमत आयी तो २०१४ तक( मोदीजी के समय आने से पहले तक) केवल ७ वर्ष में बढ़ कर ५२ लाख करोड़ हो गया। ६० वर्ष में १८ लाख करोड़ और केवल ८ वर्ष में ३४ लाख करोड़ बढ़ गया। सोनिया का हुक्म होता था और चिदंबरम वित्त मंत्री जी का फ़ोन पर हुक्म जाता था और लोन बढ़ जाता था। मेहुल चौकसी, ललित मोदी और नी...
Lower Investment, Employment and Productivity? 

Lower Investment, Employment and Productivity? 

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
Siyavar Ramchandra Ki Jai. How India can reduce scratching impact from Lower Investment, Employment and Productivity?  The economic crisis has resulted in large scale job losses and a marked decline in the rate of new job creation in most parts of the India, giving rise to a substantial reduction in employment rates and a sharp increase in unemployment. It’s scary. The pandemic, coupled with trade disruptions and Russia’s war on Ukraine, and now the Bank Run caused lasting harm to Asia-Pacific economies, damaging growth, productivity, and investment. And, slowly and emotionally but realistically – it has already hit Indian Economy. Specifically, it will leave very deep and long-lasting scars which, without swift and bold policy action, could restrict Indian growth well into the...
नया सेंसर बताएगा कितने पके हैं फल

नया सेंसर बताएगा कितने पके हैं फल

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
फल-उत्पादकों के लिए पेड़ पर लगे फलों के पकने की अवस्था का समय पर आकलन महत्वपूर्ण होता है। फलों की छंटाई और उनके पकने का पता लगाने के लिए उपयोग होने वाले माइक्रोसेंसर रासायनिक विश्लेषण एवं इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसिंग पर आधारित हैं, जिनकी अपनी सीमाएं हैं। एक ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने फल कितने पके हैं यह पता लगाने के लिए एक नया सेंसर विकसित किया है, जो सस्ता होने के साथ-साथ अत्यधिक संवेदी और स्पर्शनीय दाब (Tactile pressure) जैसे गुणों से लैस है। लिथोग्राफी-मुक्त इस नये सेंसर में नैनो-नीडल संरचना युक्त पॉलीडिमिथाइलसिलोक्सेन (पीडीएमएस) परत का उपयोग किया गया है, जो इसे लचीला और बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाता है। शोधकर्ताओं ने इस कैपेसिटिव टैक्टाइल सेंसर के संवेदी स्तर और हिस्टीरिक्स प्रतिक्रिया की विशेषता बतायी है, और इसकी बदलती प्रतिक्रिया का परीक्षण किया है। उन्होंने लोचदार मा...
India Strikes Back

India Strikes Back

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, समाचार
Balbir Punj The massive crack down by Punjab Police since Saturday last (March 18, 2023) on Khalistan secessionist elements led by Amritpal Singh (30), chief of “Waris Punjab De”, in co-ordination with various central agencies and backing of Union Government, comes as a silver lining in an otherwise dark political horizon where narrow political considerations, coupled with intra party internecine political wars , usually overshadow all other concerns, including the ones with grave security implications for the country. However, in this case, India has hit back, as one man, on separatist forces which are seeking to push Punjab back to the dark days of 1980-90 - when terror ruled the state. During that difficult decade, all social, economic and political activities had come to an halt...
भारत के अंदर- बाहर सभी जगह राम का नाम

भारत के अंदर- बाहर सभी जगह राम का नाम

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, सामाजिक
आर.के. सिन्हा भारत के कण-कण में राम बसे हैं। भारत की राम के बिना कल्पना करना ही असंभव है। सारा भारत राम को अपना आराध्य और पूजनीय मानता है। डॉ राम मनोहर लोहिया कहते थे कि भारत के तीन सबसे बड़े पौराणिक नाम – “राम, कृष्ण और शिव ही हैं।” उनके काम के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी प्राय: सभी को, कम से कम दो में एक भारतीय को तो होगी ही। उनके विचार व कर्म, या उन्होंने कौन-से शब्द कब कहे, उसे विस्तारपूर्वक दस में एक तो जानता होगा। कभी सोचिए कि एक दिन में भारत में कितनी बार यहां की जनता प्रभु राम का नाम लेती है।   पर भगवान राम को सिर्फ भारत तक सीमित करना उचित नहीं होगा। वैसे तो  थाईलैंड बौद्ध देश हैं, पर वहां भी राम आराध्य है। राजधानी बैंकॉक से सटा है अयोध्या शहर। वहां के लोगों की मान्यता है कि यहीं थी भगवान श्रीराम की राजधानी। थाईलैंड के बौद्ध मंदिरों में आपक...
राहुल गांधी को गुस्सा क्यों आता है?

राहुल गांधी को गुस्सा क्यों आता है?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
-बलबीर पुंज एक हालिया प्रेसवार्ता में पत्रकार के एक प्रश्न पर कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने अपना आपा खो दिया। आपराधिक मानहानि मामले में अदालत से दो वर्षीय सज़ा मिलते ही अपनी सांसदी निरस्त होने और इसपर जारी राजनीति को लेकर राहुल से, वर्षों से कांग्रेस कवर कर रहे टीवी-पत्रकार ने प्रश्न किया— "मोदी-उपनाम पर उनकी टिप्पणी को भाजपा 'ओबीसी का अपमान' बता रही है।" इसपर झुंझलाकर राहुल ने कह दिया, "...आप... बीजेपी का सिंबल सीने पर लगा लीजिए, तब मैं आपको उसी के अनुसार जवाब दूंगा। पत्रकार होने का ढोंग मत कीजिए।" इसके बाद थोड़ा ठहरकर राहुल ने कहा, "हवा निकल गई"। सार्वजनिक रूप से राहुल द्वारा इस प्रकार का अशोभनीय व्यवहार, कोई पहला मामला नहीं है। सुधी पाठकों को स्मरण होगा कि कैसे सितंबर 2013 में राहुल ने कांग्रेसी प्रेसवार्ता में अचानक पहुंचकर अपनी ही सरकार द्वारा पारित एक अध्यादेश को बतौर ...
INDIAN  DEMOCRACY  THRIVES

INDIAN  DEMOCRACY  THRIVES

TOP STORIES, समाचार
N.S.Venkataraman   It is more than seventy years now, since India attained independence   from British rule and   drafted a well balanced Constitution, which forms the basis for Indian democratic process. Several national and state elections have been conducted and the  victorious political  party has  taken over the governance in a smooth manner. Over the years, there have been  building up of great awareness amongst the people about their fundamental rights and freedom of speech.  While for an outsider, it may look like a noisy democracy in India, with protests, allegations and counter allegations and even corruption charges being raised and framed and complaints about dynastic political culture  being developed with number ...
जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
भारत के मीडिया में लगातार ‘आवारा कुत्तों का खतरा’ सुर्खियों में रहता है। पिछले पांच वर्षों से, 300 से अधिक लोग - ज्यादातर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे - कुत्तों द्वारा मारे गए हैं। 2017 के एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर कुत्ते भी वन्यजीवों के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। इसके बावजूद इन खबरों के प्रति समाज बेसुध बना रहता है। कभी-कभार यह जड़ता कुछ भयावह घटनाओं के साथ टूट जाती है। राज्यों, केंद्र, न्यायपालिका, नगर पालिका और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस संकट की स्वीकृति के बावजूद यह समस्या बढ़ती ही जा रही है। -प्रियंका सौरभ कुत्तों का मानव के विकास क्रम के साथ साहचर्य का एक अनूठा संबंध रहा है। यह उनके कल्याण के लिए जिम्मेदार होने की नैतिक दुविधा इंसान के सामने पैदा करता है, लेकिन इसके अपने खतरे भी हैं क्योंकि कुत्तों का विकास भेड़िये और उसकी प्रवृत्ति से जुड़ा ...
नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल

TOP STORIES, धर्म, संस्कृति और अध्यात्म
क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है। पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता है और उनका अपमान किया जाता है। आज भी भारत में बहूत सारे गांवों में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है। ऐसा क्यों? क्या आप ऐसा करके देवी मां के इन रूपों का अपमान नहीं कर रहे हैं। कन्याओं और महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। देवी तुल्य कन्याओं का सम्मान करें। इनका आदर करना ईश्वर की पूजा करने जितना पुण्य देता है। शास्त्रों में भी लिखा है कि जिस घर में औरत का सम्मान किया जाता है वहां भगवान खुद वास करते हैं। दुनिया में और यौन भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलनों के साथ देवी की अवधारणा में विविधता लाने का समय आ गया है। -प्रियंका सौरभ नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृ...