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Author: Dialogue India

G-20: Time for India to lead from the front

G-20: Time for India to lead from the front

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Challenges before India as head of G-20 Vivek Shukla India is taking over the reins of G-20 only on Ist December 2022, but fact of the matter is that the Indian Prime Minister  Narendra Modi is due to symbolically take over the G-20 presidency from current chair Indonesian President Joko Widodo in Bali on November 16, 2022. Indeed, it is a historic opportunity for the country. If everything goes according to the plan, U.S. President Joe Biden, Chinese President Xi Jinping, Russian President Vladimir Putin, British Prime Minister Rishi Sunak, Canadian Prime Minister Justin Trudeau, Japan’s Prime Minister Fumio Kishida, Australian Prime Minister Anthony Albanese, South  Korean President Yoon Suk—Yeol, German Chancellor Olaf Scholz, French President Emmanuel Macron,Tu...
पृथ्वी का संकट

पृथ्वी का संकट

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ह्रदय नारायण दीक्षित पृथ्वी का अस्तित्व संकट में है। पर्यावरण विश्व बेचैनी है। भारत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण चिंताजनक है। प्रातः टहलने वाले लोग प्रदूषित वायु में सांस लेने को बाध्य हैं। काफी लम्बे समय से अक्टूबर नवम्बर के महीनों में भारत के बड़े हिस्सों में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। पराली जलाने सहित इस प्रदूषण के अनेक कारण हैं। क्षिति, जल, पावक, गगन व समीर अव्यवस्थित हो रहे हंै। तुलसीदास ने रामचरितमानस में पृथ्वी संकट का उल्लेख किया है। लिखा है, ‘‘अतिशय देखि धरम कै हानी/परम सभीत धरा अकुलानी - धर्म की ग्लानि को बढ़ते देखकर पृथ्वी भयग्रस्त हुई। देवों के पास पहुंची। अपना दुःख सुनाया - निज संताप सुनाइस रोई। - पृथ्वी ने रोकर अपना कष्ट बताया। शंकर ने पार्वती को बताया कि वहां बहुत देवता थे। मैं भी उनमें एक था। तुलसी के अनुसार आकाशवाणी हुई, ‘‘हे धरती धैर्य रखो। मैं स्वयं ...
भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

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*भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष* आंकड़े गंभीर नहीं डरावने हैं,विश्व भर में लगभग १२ करोड़ लोग कोरोना दुष्काल भुखमरी की चपेट में आ चुके हैं | वैश्विक खाद्य संकट के कारण यह संख्या बढ़कर ८० करोड़ से भी अधिक हो गयी है। भारत में लगभग ८ करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं, प्रतिवर्ष १.७ करोड़ लोग हृदय रोग के कारण दम तोड़ देते है, ३३ लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे तथा हर पांच में से एक पुरुष एनीमिक है। यह सारा संकट अनाज के कारण है, कहीं अनाज उपलब्ध नहीं होता तो कहीं वो गुणकारी नहीं होता | सारा विश्व इस संकट से निबटने के उपाय खोज रहा है | पिछले दिनों उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुए एससीओ सम्मेलन में विश्व खाद्य संकट से निपटने के लिए सुपर फूड (मोटा अनाज) को हर थाली का हिस्सा बनाये जाने की अपील तक की गयी है । कोविड, जलवायु संकट, यूक्रेन युद्ध आदि कारणों से व...
आत्म निर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

आत्म निर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

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भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष2021-22 में वस्तुओं के आयात के मामले में एक बार पुनः भारत की निर्भरता चीन पर बढ़ीहै। हालांकि पिछले 3 साल के दौरान भारत के चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे परंतुवित्तीय वर्ष 2021-22 में चीन एवं भारत के बीच 11,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापारहुआ है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 8,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में कहीं अधिकहै। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े यह अच्छी बात हो सकती है परंतु चिंता का विषय यह हैकि चीन से भारत में आयात बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और भारत से चीन को निर्यात उसगति से नहीं बढ़ पा रहे है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत में चीन से आयात 9,400 करोड़अमेरिकी डॉलर का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6,530 करोड़ अमेरिकी डॉलर कारहा था। वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम दो माह में भी स्थिति संभलने के...
जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?

जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?

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जाँच एजेंसियाँ विवादों में क्यों?*विनीत नारायणपिछले कुछ समय से विवादों में घिरी सरकार की दो जाँच एजेंसियाँ, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई विपक्ष कानिशाना बनी हुई हैं। इस विवाद में ताज़ा मोड़ तब आया जब हाल ही में मुंबई की एक विशेष अदालत ने पात्रा चॉलपुनर्विकास से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा शिवसेना के सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ और ‘निशानाबनाने’ की कार्रवाई करार दिया। इसके साथ ही राउत की जमानत भी मंजूर कर ली गई। अदालत के इस आदेश ने विपक्षको और उत्तेजित कर दिया है। राज्यों में चुनावों के दौरान ऐसे फ़ैसले से विपक्ष को एक और हथियार मिल गया है। विपक्षअपनी चुनावी सभाओं में इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। सारा देश देख रहा है कि पिछले आठ साल मेंभाजपा के एक भी मंत्री, सांसद या विधायक पर सीबीआई या ईडी की निगाह टेढ़ी नहीं हुई। क्या कोई इस बात को मानेगाकि...
वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

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वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमकमृत्युंजय दीक्षितअंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है और विश्व के लगभग सभी देश प्रधानमंत्री व भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहे हैं। कोरोना महामारी की लड़ाई से थके हुए विश्व में अर्थ व्यवस्थाओं में मंदी और उसके करण उपजी नागरिक समस्याओं के साथ साथ रूस- यूक्रेन युद्ध सहित कई अन्य कारणों से तनाव व्याप्त है। किसी भी समय, किसी भी देश की एक गलती से धरती का बड़ा भाग परमाणु विध्वंस की चपेट में आ सकता है किन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की वर्तमान कूटनीति ने स्थितियों को बिगड़ने से बचा रखा है ।रूस -यूक्रेन युद्ध के सन्दर्भ में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा व उसके किसी भी मंच पर कभी रूस के विरुद्ध मतदान नहीं किया अपितु ऐसे हर प्रस्ताव के समय अनुपस्थित रहा किन्तु जब...
विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं।

विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं।

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अगर हमें कठिन परिस्थितियों से गुजरनी पड़ती है तो सबसे तो पहले हमें उस समय अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए और हमें किसी भी कार्य को हिम्मत से काम लेना चाहिए। अगर आप कोई भी कार्य को धैर्य के साथ करते हैं तो वह कार्य हमेशा सफल होता है चाहे वह कितनी भी कठिनाई क्यों ना हो धैर्य और हिम्मत से किसी भी कार्य को किया जा सकता है कठिन से भी कठिन परिस्थितियों को भी हराया जा सकता है इसीलिए अगर आप किसी भी समस्या परिस्थिति में जूझ रहे हो तो हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए हमें उन परिस्थितियों का मिलकर सामना करना चाहिए। लोगों के असली रंग-असली दोस्त की सतह को देखने में सक्षम है। यद्यपि प्रतिकूल परिस्थितियां दर्दनाक और कठिन हो सकती हैं, उन्हें भेष में आशीर्वाद के रूप में देखा और समझा जा सकता है, चाहे वह कितना भी स्वतंत्र क्यों न हो, आपको लोगों की आवश्यकता होगी और अक्सर सबसे प्रतिकूल समय में किसी के सच्चे दोस...
राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
-ललित गर्ग-संवैधानिक पद पर विराजित राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों के बीच द्वंद एवं टकराव की स्थितियां अनेक बार उभरती रही है। राजनीति के उलझे धागों के कारण ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण एवं विडम्बनापूर्ण स्थितियां देखने को मिलती है। गैर-भाजपा शासित राज्यों में सरकारों और राज्यपालों के बीच इस तरह का टकराव एक सामान्य बात हो गयी है, लेकिन यह टकराव न केवल लोकतंत्र के लिये बल्कि शासन-व्यवस्थाओं पर एक बदनुमा दाग की तरह है। बहुत समय से सरकारें राज्यपाल पर तो राज्यपाल सरकारों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे एक दूसरे के कामकाज में रोड़े अटका रहे हैं। इनदिनों तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ऐसी स्थितियां बढ़-चढ़कर देखने को मिली है। इन सभी राज्यों में गैर-भाजपा सरकार है और एक बात कॉमन है वो बात है राज्य सरकार का राज्यपाल के साथ विवाद। बीते कुछ समय से इन पांचों राज्यों में राज्यपाल बनाम राज्य सरक...
टेलीविजन और सिनेमा के साथ जुड़े राष्ट्रीय हित

टेलीविजन और सिनेमा के साथ जुड़े राष्ट्रीय हित

जीवन शैली / फिल्में / टीवी
टेलीविजन और सिनेमा के साथ जुड़े राष्ट्रीय हित टेलीविजन और सिनेमा में कुछ विषय या कहानियां लोगों को एक साथ ला सकती हैं और उन्हें धर्म, जाति और समाज को विभाजित करने वाली ऐसी अन्य गलत रेखाओं से ऊपर उठकर एकजुट कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, फिल्म चक दे ​​​​इंडिया बहुत बड़ी हिट थी और इसने सभी भारतीयों के मन में देशभक्ति की भावना जगाई। मेगा स्टार्स के सिनेमा से युवा आसानी से प्रभावित हो जाते हैं, जिनके पास बहुत बड़ा फैन बेस होता है। अगर ऐसे फिल्मी सितारों को देश पर बनी फिल्म में शामिल किया जाए तो इससे सामाजिक बदलाव आ सकता है। जैसे, शेरशाह, उरी आदि फिल्में। -डॉ सत्यवान सौरभ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'भारत में टेलीविजन चैनलों की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देश, 2022' को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित में सामग्री प्रसारित करना चैनलों के लिए अनिवार्य हो गया है।...
यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* विदेश मंत्री डाॅ. जयशंकर ने दिल्ली में एक संगोष्ठी में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच भारत की मध्यस्थता की बात बहुत अपरिपक्व है याने अभी कच्ची है। यह उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा है। यह सवाल किसी ने इसलिए उनसे पूछ लिया था कि वे 7-8 नवंबर को मास्को गए थे और उस वक्त यही प्रचारित किया जा रहा था कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को रूकवाने और दोनों राष्ट्रों के बीच मध्यस्थता करने के लिए जा रहे हैं। ऐसा लग भी रहा था कि भारत एकमात्र महत्वपूर्ण राष्ट्र है, जो दोनों की बीच मध्यस्थता कर सकता है और इस युद्ध को रूकवा सकता है। ऐसा लगने का एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत ने इस दौरान निष्पक्ष रहने की पूरी कोशिश की है। उसने संयुक्तराष्ट्र संघ के सभी मंचों पर यूक्रेन के बारे में यदि मतदान हुआ है तो किसी के भी पक्ष या विपक्ष में वोट नहीं दिया। वह तटस्थ रहा। उसने परिवर्जन किया। युद्ध के पिछल...