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Author: Dialogue India

राजनीतिक  असंवेदनशीलता का परिणाम है प्रदूषण

राजनीतिक  असंवेदनशीलता का परिणाम है प्रदूषण

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-ललित गर्ग- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पराली एवं वायु प्रदूषण से उत्पन्न दमघोटू माहौल का संकट जीवन का संकट बनता जा रहा हैं। संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घने कोहरे में डूबी हुई जानलेवा होती जा रही है। सब जानते हैं कि यह कोहरा नहीं, बल्कि प्रदूषण का ऐसा विकराल जाल है जिसमें मनुष्य सहित सारे जीव-जंतु फंसकर छटपटा रहे हैं, जीवन सांसों पर छाये संकट से जूझ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर लम्बी कतारें देखने को मिल रही है। खासकर दिल्ली में दिवाली के बाद यह समस्या साल-दर-साल गंभीर होती जा रही है। इससे पार पाने के लिए दिल्ली सरकार ने कई उपाय आजमाए, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये निर्देश जारी किये गये मगर वे कारगर साबित नहीं हो पा रहे। प्रदूषण जानलेवा स्तर तक खतरनाक हो गया है, जिसके चलते स्कूल बंद करने और दिल्ली सरकार के आधे कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। दिल्ली ...
गुरुनानक देव क्रांतद्रष्टा धर्मगुरु एवं ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि

गुरुनानक देव क्रांतद्रष्टा धर्मगुरु एवं ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि

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गुरुनानक देव जयन्ती- 8 नवम्बर 2022 के उपलक्ष्य मेंगुरुनानक देव क्रांतद्रष्टा धर्मगुरु एवं ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि-ललित गर्ग - विभिन्न धर्म-संप्रदायों की भारतभूमि ने मानव जीवन का जो अंतिम लक्ष्य स्वीकार किया है, वह है परम सत्ता या संपूर्ण चेतन सत्ता के साथ तादात्म्य स्थापित करना। यही वह सार्वभौम तत्व है, जो मानव समुदाय को ही नहीं, समस्त प्राणी जगत् को एकता के सूत्र में बांधे हुए हैं। इसी सूत्र को अपने अनुयायियों में प्रभावी ढंग से सम्प्रेषित करते हुए ‘सिख’ समुदाय के प्रथम धर्मगुरु नानक देव ने मानवता का पाठ पढ़ाया। गुरू नानक जी की जयंती या गुरुपूरब/गुरु पर्व सिख समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला सबसे सम्मानित दिन है। जिसका अर्थ है ‘गुरुओं का उत्सव’। गुरुनानक देव नैतिकता, पवित्रता, कड़ी मेहनत और सच्चाई का संदेश देते हैं। यह दिन महान आस्था और सामूहिक भावना और प्रयास के साथ, पूरे विश्व में उत्...
क्यों खास है कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट चर्च का करीब आना

क्यों खास है कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट चर्च का करीब आना

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आर.के. सिन्हा उत्तर भारत के ईसाई समाज के लिए पिछली 2 नवंबर की तारीख विशेष रही। उस दिन जब सारी दुनिया के ईसाई 'ऑल सोल्स डे' मना रहे थे, तब हरियाणा के शहर रोहतक में कैथोलिक और प्रोटेस्टेट पादरी समुदाय के लोग मिलजुलकर इस त्यौहार पर एक साथ बैठे। इन्होंने तय किया कि वे देश और अपने समाज के हित के लिये मिलकर प्रयास करते रहेंगे। ईसाई इस दिन कब्रिस्तानों में जाते हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 'ऑल सोल्स डे' हिन्दुओं के पितृ पक्ष के श्राद्ध से मिलता-जुलता है। दरअसल ईसाई धर्म के दो मुख्य संप्रदायों- कैथोलिक तथा प्रोटेस्टेंट में कुछ बिन्दुओं  पर मतभेद रहे हैं। कैथोलिक मदर मैरी की पूजा में भी विश्वास करते हैं। प्रोटेस्टेंट उन पर विश्वास नहीं करते हैं और उनके लिए मैरी केवल यीशु की भौतिक माँ है। हां, दोनों संप्रदायों के लि...
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार – 2021 प्रदान किए

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार – 2021 प्रदान किए

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (7 नवंबर, 2022) राष्ट्रपति भवन में नर्सिंग पेशेवरों को वर्ष 2021 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समाज में नर्सों और नर्सिंग पेशेवरों द्वारा प्रदान की गई सराहनीय सेवाओं को मान्यता देने के रूप में की गई थी। पुरस्कार विजेताओं की सूची देखने के लिए यहां क्लिक करें। Click here to see the List of awardees . ...
मैं हिंदुस्तान की ‘ तूती ‘ हूँ।

मैं हिंदुस्तान की ‘ तूती ‘ हूँ।

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इसके संवर्धन में अमूल्य योगदान दिया है । हिंदी के विषय मे अमीर खुसरो जो ' *तूतिये हिन्द* के नाम से भी विख्यात है , कहते हैं *चूं मत तती हिदं अर रास्त पुरसी, जे मन हिन्दवी पुरस ता नग्ज गोयम। अर्थात मैं हिंदुस्तान की ' तूती ' हूँ।**अगर मुझसे सच पूछते हो तो हिंदी में पूछो जिससे मैं कहीं* *अच्छी बातें बता सकूं* वास्तविकता भी यही है अपनी मूल भाषा में ही बेहतर वैचारिक सम्प्रेषण सम्भव है ।  हिंदी भाषा पढ़ने, लिखने व बोलने में सहज व सरल है तथा कविता , कहानी, नाटक, उपन्यास आदि सभी विधाओं में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है । यह उदार भाषा है जिसने अन्य भाषाओं के अरबी, फारसी, अंग्रेजी भाषा के शब्दों को उनके मूल रूप में ही आत्मसात कर लिया । देश में 65 प्रतिशत हिंदी भाषी जनसंख्या है , लगभग हर प्रान्त के लोग हिंदी जानते व समझते हैं । अन्य भाषाओं के समान हिंदी का भी विज्ञान है।किंतु आज अपने ही द...
Study unveils protein synthesis in red blood cells

Study unveils protein synthesis in red blood cells

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New Delhi, Nov. 7 th (India Science Wire): The process by which the mRNA codes for a particularprotein is known as translation. It is the final step in which an mRNA carrying information fromDNA synthesises proteins. It is a necessary process performed by almost all living cells, leavingerythrocytes (Reb Blood Cells or RBCs), which are believed to be the only exception. A researchteam led by Sandeep M Eswarappa, Associate Professor, Department of Biochemistry, IndianInstitute of Science, Bengaluru, has identified that mature human RBCs can also make theirproteins.Unlike other cells of the human body, RBCs do not have a nucleus. They have a long lifespan ofnearly 115-120 days. Though initially thought to be mere bags of proteins, these cells are nowmetabolically active and have a comprehen...
प्रकृति और वायु प्रदूषण

प्रकृति और वायु प्रदूषण

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प्रकृति और वायु प्रदूषण वायु की गुणवत्ता एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है क्योंकि प्रदूषक फेफड़ों के अंदर गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं और फेफड़ों की रक्त शुद्ध करने की क्षमता कम हो जाती है जो व्यक्ति की वृद्धि, मानसिक क्षमता और विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए काम करने की क्षमता को प्रभावित करती है। गरीब लोग वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे ही सड़कों पर अधिक समय व्यतीत करते हैं। अधिकांश वनस्पतियों को नष्ट कर दिया गया है, वनों की कटाई हो रही है और मिट्टी का कटाव पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण का एक स्रोत है। खराब वायु गुणवत्ता आपको बताती है कि प्रशासन सही नहीं है। यह एक बहुत बड़ी समस्या है और हर साल भौगोलिक रूप से बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा संकलित वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित...

भारत और वैदिक गणित

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ह्रदय नारायण दीक्षित  भारत में गणित का विकास वैदिककाल में ही हो रहा था। ऋग्वेद में इसके साक्ष्य हैं। लेकिन अंग्रेजी सत्ता के प्रभाव व अन्य कारणों से कुछ विद्वानों का मत भिन्न है कि प्राचीनकाल में भारतवासियों को शून्य की जानकारी नहीं थी। शून्य गणित का मुख्य अंक है। ‘एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका‘ में कहा गया था कि शून्य के अंक का अविष्कार संभवतः हिन्दुओं ने किया था। शून्य और शून्य के स्थानगत मूल्य की जानकारी भी वैदिककाल में थी। 1 से 10 अंकों के प्रतीक ‘‘अधिकतर भारत में उत्पन्न हुए। अरबों ने उनका व्यापक प्रयोग किया। उन्हें हिन्दू अरेबिक अंक कहा जाता है।‘‘ (वही) दशमलव पद्धति दुनिया के लिए भारत का उपहार है। डा० रामविलास शर्मा ने ‘भारतीय नवजागरण और यूरोप‘ (पृष्ठ 333) में लिखा है, ‘‘शून्य का अविष्कार, स्थान के अनुसार शून्य के प्रयोग द्वारा अंक की मूल्य वृद्धि भारतीय प्रतिभा का चमत्कार है।‘...
सरकार ! क्या यही ज्ञान की सदी है ?

सरकार ! क्या यही ज्ञान की सदी है ?

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सरकार ! क्या यही ज्ञान की सदी है ?* भारत के भविष्य की स्याह तस्वीर देखकर क्षुब्ध हूँ | देश में मन्दिर- मस्जिद का जोड़ घटाव चल रहा है और स्कूल बंद हो रहे हैं | इण्डिया समृद्ध हो रहा है और भारत को पीछे धकेला जा रहा है | देश में एक साल के भीतर कोई २०००० सरकारी बंद कर दिए गये हैं | ये वे ही स्कूल हैं, जिनमें ज्यादातर निम्न आय वर्ग व वंचित समाज के बच्चे उम्मीदों से पहुंचते हैं। इशारा साफ है कि देश का शैक्षिक ढांचा लगातार इंडिया और भारत में विभाजित होता जाता रहा है। एक तरफ संपन्न तबके, पूंजीपतियों, नेताओं व नौकरशाहों के बच्चे महंगे स्कूलों में शिक्षित व प्रशिक्षित हो रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों की बदहाली का विस्तार जारी है। राजनीतिक भ्रष्टाचार की तपिश भी शिक्षा की कोंपलें जला रही है | शिक्षा मंत्रालय की स्कूल शिक्षा पर ताज़ा रिपोर्ट तो कम से कम यही बताती है। पिछले दिनों शिक्षा मंत्रालय क...
हर साल जहरीली धुंध से क्यों घिर जाता है एनसीआर?

हर साल जहरीली धुंध से क्यों घिर जाता है एनसीआर?

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हर साल जहरीली धुंध से क्यों घिर जाता है एनसीआर?*विनीत नारायणहर साल दिवाली के आसपास पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा पराली जलाने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रजहरीली धुंध से घिर जाता है। हमेशा की तरह इस साल भी इस धुंध ने यहाँ के रहने वालों के होश उड़ा दिए हैं। दिल्ली औरउसके नजदीकी दूसरे शहरों में हाहाकार मचा हुआ है। आंखों को उंगली से रगड़ते और खांसते लोगों की तदाद बढ़ती जा रहीहै। सबसे ज़्यादा ख़तरा तों छोटे बच्चों के लिये हो गया है। केंद्र और दिल्ली सरकार किमकर्तव्य विमूढ़ हो गई है। वैसे यह कोईपहली बार नहीं है। कई साल पहले 1999 में ऐसी ही हालत दिखी थी। तब क्या सोचा गया था और अब क्या सोचनाचाहिए? इसकी जरूरत एक बार फिर से आन पड़ी है।पर्यावरण विशेषज्ञ, नेता और संबंधित सरकारी विभागों के अफसर हर साल की तरह इस साल भी इस समस्या को लेकरसिर खपा रहे हैं।उन्होंने अब तक के अपने सोच विचार ...