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Author: Dialogue India

स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?

स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?

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स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?*विनीत नारायण2014 में जब देश में मोदी जी ने सत्ता में आते ही स्वच्छता के प्रति ज़ोर-शोर से एक अभियान छेड़ा था तो सभीको लगा कि जल्द ही इसका असर ज़मीन पर भी दिखेगा। इस अभियान के विज्ञापन पर बहुत मोटी रक़म खर्च कीगयी। कुछ ही महीनों में मोदी सरकार की प्राथमिकताएं दिखनी भी शुरू हो गईं। जितनी तीव्रता से इस विचार कोसामने लाया गया उससे नई सरकार के योजनाकार भी भौचक्के रह गए। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने सफाई के कामको छोटा सा काम बताया था। पर अब तक का अनुभव बताता है की सफाई का काम उन बड़े-बड़े कामों से कमखर्चीला नहीं है जिनके लिए सरकारें हमेशा पैसा कि कमी का रोना रोते रहे हैं। आज आठ साल बाद भी देश कीराजधानी दिल्ली के ही पॉश इलाक़ों तक में पर्याप्त सफ़ाई नहीं दिखती। जगह जगह कूड़े के ढेर दिखाई दिखते हैं।प्रश्न है कि क्या इसके लिए केवल सरकार ज़िम्मेदार है? क्या स्वच्छता...
केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I

केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I

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केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसके बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक। आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था।यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी अनेक तत्कालीन विवरणों के आधार पर यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है। केदारनाथ की भूमि 21वीं सदी में भी बहुत प्रतिकूल है।एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है।इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदरी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं। यह क्षेत्र "मंदाकिनी नदी" का एकमात्र जलसंग्रहण क्षेत्र है। यह मंदिर एक कलाकृति है I कितना बड़ा असम्भव कार्य रहा होगा ऐसी जगह पर कलाकृति जैसा मन्दि...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छठवीं बार केदारनाथ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छठवीं बार केदारनाथ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छठवीं बार केदारनाथ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए। वह यहां ढाई घंटे रहे। इसके बाद वह बदरीनाथ धाम पहुंचे। प्रधानमंत्री के आगम की खबर से देश के अंतिम गांव माणा में खासतौर पर भारी उत्साह है। पीएम ने शुरू की मंदिर में पूजा अर्चनाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किए और फिर पूजा अर्चना शुरू की। यहां पूर्जा-अर्चना करने के बाद वह बदरीनाथ धाम से आस्था पथ के साकेत चौक पहुंचेंगे।माणा में होगी जनसभादेश के अंतिम गांव माणा के लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संवाद करेंगे। इसे लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है। गांव की महिलाओं ने प्रधानमंत्री से पूछने के लिए कुछ सवाल भी तैयार किए हैं। आत्मनिर्भर माणा गांव के लोग प्रधानमंत्री के स्वागत की खास तैयारियों में जुटे हैं। पीएम ने स्वीकारा लोगों का अभिवादनप्रधानमंत्री नरेंद्र की झलक पाने को यहां लोग बेताब हैं,...
Even Christian-Muslims too celebrate Diwali

Even Christian-Muslims too celebrate Diwali

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The Secular side of Diwali -Even Christian-Muslims too celebrate Diwali  Vivek Shukla As Diwali is here and now, one must acknowledge the fact that the festival of lights has become very secular in nature over the years. Even non-Hindus too celebrate it in their own way.  For instance, the members of the   Brotherhood of the Ascended Christ society, which is also known as Delhi Brotherhood Society (DBS) would also illuminate their Brothers House in national capital. It was started in 1877 based upon the vision of Bishop Westcott, initially under the title of the Cambridge Mission. Westcott's vision was for an Anglican community of celibate brothers from Cambridge University to set down roots  in India. The venerable St. Stephen's College th...
CSE unveils roadmap to bring down carbon

CSE unveils roadmap to bring down carbon

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CSE unveils roadmap to bring down carbon emissions from India’s iron and steel industry Decarbonizing India: Iron and Steel Sector, CSE’s new assessment report, shows how it is possible for this industry to grow and prosper –and emit less at the same time In a business-as-usual scenario, GHG emissions from the sector are estimated to grow 2.5 times (up to 659 million tonne or MT) by 2030 compared to 2020-21 (271 MT). CSE’s recommendations can reduce these emissions by 64 to 79 per cent (419 to 519 MT) by 2030, even after tripling the production Access the full CSE report here: https://www.cseindia.org/decarbonizing-india-s-iron-and-steel-sector-report-11434 New Delhi, October 20, 2022: “Our new analysis shows it is possible to bring down carbon dioxide (CO2...
फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की

फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की

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फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की -अनिल बेदाग- मुंबई : स्वदेशी लग्ज़री चॉकलेट ब्रांड फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स को बेमिसाल चॉकलेट अनुभव तैयार करने के लिए जाना जाता है। अब इस ब्रांड ने भारत में तैयार की गई विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट फबेल फिनेस लॉन्च की है। फबेल ने इस चॉकलेट को पेश करने के लिए प्रतिष्ठित ऑस्ट्रेलियाई पेस्ट्री शेफ एवं टीवी प्रेजेंटर शेफ एद्रियानो ज़ुम्बो से हाथ मिलाया है। यह चॉकलेट बेहद स्मूद है और मुंह में जाते ही तुरंत घुल जाने का खुशनुमा अनुभव प्रदान करती है।       एक चॉकलेट की स्मूदनेस ही उसके स्वाद से जुड़ी सबसे मूलभूत खूबी होती है, जो उपभोक्ता का अनुभव बेहतर बनाती है। आईटीसी  ने एक आधुनिक टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिसकी मदद से फबेल को सात माइक्रोन के बारीक कणों वाली चॉकलेट...
गुजरात के शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना गलत

गुजरात के शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना गलत

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-ललित गर्ग- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन पर आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एवं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की है वह हास्यास्पद होने के साथ अतिश्योक्तिपूर्ण है। मोदी छात्रों के बीच गए और उनके साथ एक स्मार्ट क्लास में बैठे। उन्होंने कुछ देर स्मार्ट क्लास का जायजा लिया और एक छात्र द्वारा बताई गई बातों को ध्यान से सुना। इन सब घटनाओं को केजरीवाल की नकल करार देना निश्चित ही विरोधाभासी है। भले ही आप पार्टी ने शिक्षा की दृष्टि से दिल्ली में उल्लेखनीय काम किया है, लेकिन गुजरात में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस एवं गुजरात में चल रहे शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना एक तरह से आम आदमी पार्टी द्वारा गुजरात में अपनी राजनीति चमकाने का घटिया एवं अलोकतांत्रिक तरीका है। यह मूल्यहीन राजनीति की पराका...
विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में

विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में

राष्ट्रीय
विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान मेंमहिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार औरसंघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्रालय, जर्मनी सरकार द्वारा भारत-जर्मन विज्ञान औरप्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) स्थापित किया गया है।आईजीएसटीसी के वीमेन इन्वोलवेमेंट इन साइंस ऐंड इंजीनियरिंग रिसर्च (WISER) कार्यक्रमके पहले 11 पुरस्कार विजेताओं को हाल में नई दिल्ली में सम्मानित किया गया है। इस अवसरपर भारत और भूटान में जर्मनी के राजदूत एच.ई. डॉ फिलिप एकरमैन एवं जवाहरलाल नेहरूविश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित उपस्थित थे।वाईजर कार्यक्रम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान साझेदारी के अंतर्गत पारस्परिकविशेषज्ञता का उपयोग करके भारत एवं जर्मनी में महिला शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक क्षमता केविकास और उनके शोध कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किय...
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

विश्लेषण, सामाजिक
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया   फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का फर्ज एक पुलिसकर्मी बेहतर ढंग से निभा सकता है। वो भी महिला पुलिसकर्मी। इसका काबिले गौर उदाहरण बनी है सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ आम जनता की सेवा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होकर अपना कर्तव्य निभा रही है सोनिया जोशी। महिला सिपाही वर्दी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने पुलिस में कठिन और प्रतिकूल स्थितियों में न  सिर्फ अपने जीवन को संभाला। बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का विषय बनी। आज वह समाज में अलग-अलग कार्य में सक्रिय हैं। बता दें कि इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते सोनिया ने मेहनत और काबिलियत के दम पर स...
रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये

रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये

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रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये-ललित गर्ग- दीपावली एक लौकिक पर्व है। फिर भी यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी बने। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूर्च्छा के अंधकार को दूर कर सकते हैं। दीपावली के मौके पर सभी आमतौर से अपने घरों की साफ-सफाई, साज-सज्जा और उसे संवारने-निखारने का प्रयास करते हैं। उसी प्रकार अगर भीतर चेतना के आँगन पर जमे कर्म के कचरे को बुहारकर साफ किया जाए, उसे संयम से सजाने-संवारने का प्रयास किया जाए और उसमें आत्मा रूपी दीपक की अखंड ज्योति को प्रज्वलित कर दिया जाए तो मनुष्य शाश्वत सुख, शांति एवं आनंद को प्राप्त हो सकता है।दीपों की कतारें दीपावली का शाब्दिक अर्थ ही नहीं, वास्तविक अर्थ है। कतारों के लिए निरंतरता जरूरी है। और निरंतरता के लिए नपा-तुला क्रम। दीप जब कतार में होते हैं, तो आनंद का सूचक बन जाते हैं। जैसे कोई मूक उ...