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Author: Dialogue India

गायों की हो रही है दुर्दशा

गायों की हो रही है दुर्दशा

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
गायों की हो रही है दुर्दशा भारतीय संस्कृति में जिस गाय को 'मां' की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं। क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज तथाकथित गौभगत और गाय के नाम पर लूटकर खाने वाले चाहे वो कोई भी हो लगभग गायब है। (इक्का-दुक्का को छोड़कर) मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए। क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियां फ़ैल रही है। 'एक शाम, गायों के नाम' पर करोड़ों रुपए लेने वाले और गाय के ठेकेदार बागङबिल्ले सब कहाँ छुप गए? आखिर गायों की हो रही है दुर्दशा? गाय रो-रो कर पूछ रही है, कहां गए वह गौ सेवक? कहां गई वह राजनीतिक पार्टियां जो मेरे नाम पर सरक...
क्या खेल में जीतना ही सब कुछ है और सभी का अंत है?

क्या खेल में जीतना ही सब कुछ है और सभी का अंत है?

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS
क्या खेल में जीतना ही सब कुछ है और सभी का अंत है? खेलों में बढ़ते दुर्व्यवहार और असहिष्णुता के लिए एक ही कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, सामाजिक जागरूकता की कमी और खेल भावना की समझ में कमी, बढ़ती असहिष्णुता और नफरत इसके पीछे मुख्य कारण है। जब खेल को दो विरोधियों के बीच प्रतिद्वंद्विता के रूप में देखा जाता है, तो राष्ट्रवाद और धार्मिकता की मजबूत धारणा व्यक्तियों को धार्मिक दुर्व्यवहार के लिए प्रेरित कर सकती है। उदाहरण के लिए, भारत और पाकिस्तान क्रिकेट मैच का परिणाम अक्सर दोनों ओर से गाली-गलौज को आकर्षित करता है। पाकिस्तान का तो खास तौर पर हर विरोधी टीम के साथ व्यवहार निचले दर्जे से भी नीचे का है, हार को खेल के अंग के रूप में स्वीकार करने के लिए धैर्य और नैतिक शक्ति के गुणों का होना बहुत जरूरी है। हर संभव विकल्प का उपयोग करके जीतने के लिए तत्काल संतुष्टि और हताशा गलत परिणाम लाती...
आजादी की मज़ेदार नौटंकी

आजादी की मज़ेदार नौटंकी

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
*आजादी की मज़ेदार नौटंकी* *डॉ वेदप्रताप वैदिक* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेंट्रल विस्टा’ का उद्घाटन करते समय सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया कि वे देश की गुलाम मानसिकता को खत्म करने का काम कर रहे हैं। इसमें शक नहीं कि जॉर्ज पंचम की जगह सुभाष बाबू का शानदार पुतला खड़ा करना अत्यंत सराहनीय कदम है और पूरे ‘इंडिया गेट’ इलाके का नक्शा बदलना भी अपने आप में बड़ा काम है। इस क्षेत्र में बने नए भवनों से सरकारी दफ्तर बेहतर ढ़ग से चलेंगे और नई सड़कें भी लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक रहेंगी। इस सुधार के लिए नरेंद्र मोदी को आनेवाली कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। लेकिन राजपथ का नाम ‘कर्तव्यपथ’ कर देने को मानसिक गुलामी के विरुद्ध संग्राम कह देना कहां तक ठीक है? पहली बात तो यह कि राजपथ शब्द हिंदी का ही है। दूसरा, यह सरल भी है, कर्तव्य पथ के मुकाबले। यदि प्रधानमंत्री ने पहली बार शपथ लेते हुए खुद को देश का ‘प...
नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी

नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी

TOP STORIES, विश्लेषण
नाक से दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी नई दिल्ली, 09 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और इसके सार्वजनिक उपक्रम; जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के समर्थन से भारत बायोटेक द्वारा विकसित नाक से दिये जाने वाले (Intranasal ) कोविड-19 टीके के आपात उपयोग को नियामक मंजूरी मिल गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ताजा वक्तव्य में यह जानकारी दी गई है। बीबीवी154 इंट्रानैसल COVID-19 वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा मंजूरी दी गई है। बीबीवी154 नाक से दिया जाने वाला प्रतिकृति-अल्पता (इंट्रानैसल रेप्लिकेशन-डेफिसिएन्ट) वाले चिंपैंजी एडेनोवायरस सार्स-कोव-2 (SARS-COV-2) वेक्टरीकृत वैक्सीन है। इसमें स्थिर स्पाइक एसएआरएस–सीओवी-2 (वुहान वेरिएंट) को व्यक्त करने में सक्षम प्रतिकृ...
हिजाबः हिरन पर क्यों लादे घांस?

हिजाबः हिरन पर क्यों लादे घांस?

राज्य, विश्लेषण
*हिजाबः हिरन पर क्यों लादे घांस?* *डाॅ वेदप्रताप वैदिक* आजकल सर्वोच्च न्यायालय में बहस चल रही है कि कर्नाटक की मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनें या न पहनें? उच्च न्यायालय ने हिजाब पर पाबंदी को उचित ठहराया है। यहां बहस यह नहीं है कि हिजाब पहनना उचित है या नहीं? सिर्फ स्कूल की छात्राएं पहने या न पहनें, यह प्रश्न है। इस मुद्दे पर पहला सवाल तो यही उठना चाहिए कि हिजाब पहना ही क्यों जाए? क्या इसलिए पहना जाए कि डेढ़ हजार साल पहले अरब देशों की औरतें उसे पहनती थीं? उनकी नकल हिंदुस्तान की औरतें क्यों करें? क्या उन अरब औरतों की नकल हमारी लड़कियां करेंगी तो क्या वे बेहतर मुसलमान बन जाएंगी? हमारे भारतीय मुसलमान भी समझते हैं कि वे अरबों की तरह कपड़े पहनें, दाढ़ी रखें, टोपी पहनें तो वे बेहतर मुसलमान बन जाएंगे। मेरा निवेदन यह है कि बेहतर मुसलमान बनने के लिए अरबों की नकल करना जरुरी नहीं है। जरुरी है कुरान शरी...
कोर्ट परीक्षण में केजरी गिरोह की सारी हेकड़ी टूटेगी

कोर्ट परीक्षण में केजरी गिरोह की सारी हेकड़ी टूटेगी

राष्ट्रीय
राष्ट्र-चिंतन* *उपराज्यपाल की कानूनी नोटिस को संजय सिंह द्वारा फाड़ने की करतूत* *कोर्ट परीक्षण में केजरी गिरोह की सारी हेकड़ी टूटेगी* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* ==================== अरविंद केजरीवाल गिरोह उसी तरह से उछल-कूद कर रहा है जिस तरह से उछल-कूद कभी संजय राउत करते थे, कभी नवाब मलिक करते थे। संजय राउत बात-बात पर केन्द्रीय सरकार को धमकी देते थे और ललकारते थे कि ईडी, सीबीआई और अन्य केन्द्रीय एजेंसियों की शक्ति है तो मुझे हाथ लगा कर देख ले, गिरफ्तार कर देख लें, महाराष्ट में आग लग जायेगी, केन्द्रीय सरकार की चूलें हिल जायेगी, जनता बगावत पर उतर आयेगी। कहावत है कि जिसके घर शीशे के होते हैं वह दूसरे के घरों में पत्थर नहीं फेकते हैं। जिनके हाथ पूरे तरह से भ्रष्टचार में रंगे हुए हैं, जिनके खिलाफ गबन के प्रमाणिक आरोप है, जिनके खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत जुटा चुकी हैं अगर वैसे व्यक्ति न केव...
क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी?

क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी?

राष्ट्रीय
क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी? ------------------------------------------------ 1950 ई. में बने भारतीय संविधान की “प्रस्तावना” ने भारत को ‘लोकतांत्रिक गणराज्य’ कहा था। उस में छब्बीस वर्ष बाद दो भारी राजनीतिक शब्द जोड़ दिये गये – ‘सेक्यूलर’ और ‘सोशलिस्ट’ । तब से भारत को ‘लोकतांत्रिक समाजवादी सेक्यूलर गणराज्य’ कर डाला गया। अब सुप्रीम कोर्ट डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने वाली है, कि इसे पूर्ववत् किया जाए क्योंकि इस ने पूरे संविधान को ही बिगाड़ा है। स्मरणीय है कि यह परिवर्तन 1975-76 ई. की कुख्यात ‘इमरजेंसी’ के दौरान किया गया था, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय केंद्रीय मंत्रियों को भी रेडियो से मालूम होते थे! जब विपक्ष जेल-बंद था, और प्रेस पर सेंसरशिप थी। अर्थात वह संशोधन बिना विचार-विमर्श, जबरन हुआ था। वह संविधान की आमूल विकृति थी। यहाँ चार तथ्यों पर विचा...
कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, Today News, TOP STORIES, राष्ट्रीय
नई दिल्ली में कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ आज के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम पर पूरे देश की दृष्टि है, सभी देशवासी इस समय इस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। मैं इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन रहे सभी देशवासियों का हृदय से स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं। इस ऐतिहासिक क्षण में मेरे साथ मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री हरदीप पुरी जी, श्री जी किशन रेड्डी जी, श्री अर्जुनराम मेघवाल जी, श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी, श्री कौशल किशोर जी, आज मेरे साथ मंच पर भी उपस्थित हैं। देश के अनेक गणमान्य अतिथि गण, वह भी आज यहां उपस्थित हैं। साथियों, आजादी के अमृत महोत्सव में, देश को आज एक नई प्रेरणा मिली है, नई ऊर्जा मिली है। आज हम गुजरे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है। गुलामी का प्रतीक...
आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस- 10 सितंबर, 2022आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग  ललित गर्ग बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं एक ऐसा बदनुमा दाग है जो हमारे तमाम विकास एवं शिक्षित होने के दावों को खोखला करता है। आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है, उनके प्रियजन, रिश्तेदार एवं मित्र तो दुःखी होते ही हैं, सम्पूर्ण मानवता भी आहत एवं शर्मसार होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भारत में 1.39 लाख लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 45 फीसदी लोग तनाव, अवसाद, बायपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आत्महत्या के प्रमुख कारणों में तनाव, हिंसा, अवसाद, निराशा, नकारात्मकता सहित अन्य मानसिक समस्याएं, गंभीर रोगों के च...
CSE slams new notification which gives coal-based power plants a license to continue to pollute

CSE slams new notification which gives coal-based power plants a license to continue to pollute

प्रेस विज्ञप्ति
PRESS RELEASE CSE criticises environment ministry’s new notification on emission norms for coal-based power plants                  The September 5 amendment has -- once again – given power plants a license to pollute: by offering them another two years’ extension for meeting the norms for sulphur dioxide Ironically, the new amendment and notification comes just before the International Day of Clean Air for Blue Skies (today). It exposes the ministry’s casual attitude towards tackling pollution  New Delhi, September 7, 2022: Centre for Science and Environment (CSE) has strongly criticised the environment ministry’s latest amendment to the 2015 notification on emission norms for coal-based thermal power plants. The amendment was notified on September 5. The amendme...