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Author: Dialogue India

दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

सामाजिक
दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। दादा-दादी बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं, जिनके साथ वे अपने रहस्यों को खुलकर साझा कर सकते हैं। दादा-दादी भगवान का एक उपहार है जिसे हमें संजोना चाहिए। हम आज की दुनिया में अपने दादा-दादी के मूल्य को भूल गए हैं क्योंकि हम सभी को एकल परिवारों की जरूरत है। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि वे ईश्वर के अमूल्य उपहार हैं जो हमें दूसरों का सम्मान करना और भविष्य में एक सभ्य जीवन जीना सिखाते हैं। दादा-दादी जिम्मेदार व्यक्ति होते हैं जो हमें भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनना सिखाते हैं। हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति के बिना, जीवन उतना शांत नहीं होता।-डॉ सत्यवान सौरभ दादा-दादी अपने पोते-पोतियों के लिए वरदान हैं। वे अपने साथ वर्षों का अनुभव लेकर आते हैं जो उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में ...
देश में कई ट्रॉमा सेंटर होने चाहिए

देश में कई ट्रॉमा सेंटर होने चाहिए

EXCLUSIVE NEWS
देश में कई ट्रॉमा सेंटर होने चाहिए *विनीत नारायण टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की एक सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु से देश भर में सड़क सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। सड़क दुर्घटना में चोटिल व्यक्ति को यदि समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाए तो अधिकतर मामलों में घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। साइरस मिस्त्री की मृत्यु के बाद एक ओर जहां सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने एक आदेश जारी किया है जिसके तहत अब से कार में पीछे बैठने वाले अगर सीट बेल्ट नहीं लगाएँगे तो उनका भी चालान होगा। वहीं सड़क सुरक्षा को लेकर अन्य कई सवाल भी उठने लग गए हैं। इनमें से अहम है देश में ट्रॉमा सेंटर्स की भारी कमी का होना। ट्रॉमा सेंटर एक ऐसा अस्पताल होता है जो ऊँचाई से गिरने, सड़क दुर्घटना, हिंसा आदि जैसे हादसों में घायल रोगियों की प्राथमिक चिकित्सा व देखभाल के लिए विशेष स्टाफ़ से ...
अंधेरों में उजाले एवं सत्य की स्थापना के प्रेरक

अंधेरों में उजाले एवं सत्य की स्थापना के प्रेरक

संस्कृति और अध्यात्म
आचार्य विनोबा भावेअंधेरों में उजाले एवं सत्य की स्थापना के प्रेरक-ललित गर्ग-जब-जब मानवता विनाश की ओर बढ़ती चली जाती है, नैतिक मूल्य अपनी पहचान खोते जाते हैं, समाज में पारस्परिक संघर्ष की स्थितियां बनती हैं, समस्याओं से मानव मन कराह उठता है, तब-तब कोई न कोई महापुरुष अपने दिव्य कर्तव्य, मानवतावादी सोच, चिन्मयी पुरुषार्थ और तेजोमय शौर्य से मानव-मानव की चेतना को झंकृत कर जन-जागरण का कार्य करता है। समय-समय पर ऐसे अनेक महापुरुषों ने अपने क्रांत चिंतन के द्वारा समाज का समुचित पथदर्शन किया। महापुरुषों की इसी महिमामंडित शृंखला का एक गौरवपूर्ण नाम है आचार्य विनोबा भावे। वे हमारे लिये एक प्रकाश स्तंभ हैं, जिनकी जन्म जयन्ती 11 सितम्बर को मनाई जाती है। वे राष्ट्रीयता, नैतिकता एवं अहिंसक जीवन, पीड़ितों एवं अभावों में जी रहे लोगों के लिये आशा एवं उम्मीद की एक मीनार थे, रोशनी उनके साथ चलती थी। दिव्य कर्तव्य...
क्या गुजरात में केजरीवाल का जादू चलेगा?

क्या गुजरात में केजरीवाल का जादू चलेगा?

राज्य
क्या गुजरात में केजरीवाल का जादू चलेगा?-ललित गर्ग-गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के दिसंबर में होने हैं, इस बार का चुनाव हंगामेदार होगा, ऐतिहासिक होगा एवं नये परिदृश्यों को निर्मित करने वाला होगा। इसके लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल पिछले कई माह से सक्रिय हैं, भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी भी पूरी तरीके से सक्रिय हो चुकी है, गुजरात में भाजपा जहां पिछले 27 सालों से सत्ता में है तो वहीं कांग्रेस पार्टी सत्ता पाने के लिए बेचैन है। पहली बार में ही आम आदमी पार्टी तो गुजरात में सरकार बनाने का दावा कर रही है। भाजपा की चुनावी तैयारियां जहां पिछले 1 साल से चल रही हैं तो वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपनी अलग रणनीति के हिसाब से काम कर रही है, आप के चलते कांग्रेस को अपने वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका भी है। कुछ भी हो इस बार का चुनाव नरेन्द्र मोदी की प्रतिष्ठा का प्रश्न बनता जा रहा है।...
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विशेष

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विशेष

विश्लेषण
 विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विशेष आत्महत्या मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण क्यों है ?अब समय आ गया है कि हम अपने शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को नए अर्थों, जीवन जीने के नए विचारों और नई संभावनाओं को संजोने के तरीकों से नए सिरे से तलाशने की कोशिश करें जो अनिश्चितता के जीवन को जीने लायक जीवन में बदल सकें। आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या के बारे में सोचने वाले युवा अक्सर अपने संकट की चेतावनी के संकेत देते हैं। माता-पिता, शिक्षक और मित्र इन संकेतों को समझने और सहायता प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थिति में हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इन चेतावनी के संकेतों को कभी भी हल्के में न लें या इन्हें गुप्त रखने का वादा न करें। माता-पिता आत्महत्या जोखिम मूल्यांकन के महत्वपूर्ण सदस्य होते हैं क्योंकि उनके पास अक्सर मानसिक स्वास्थ्य इतिहास, पारिवारिक गतिशीलता, हाल की दर्दन...
याकूब मेमन- हत्यारे को हीरो बनाने वाले कौन?

याकूब मेमन- हत्यारे को हीरो बनाने वाले कौन?

विश्लेषण
याकूब मेमन- हत्यारे को हीरो बनाने वाले कौन? आर.के. सिन्हा यह सिर्फ अपने भारत में ही संभव है कि मुंबई बम धमाकों के साजिशकर्ता याकूब मेमन को नायक बनाने की चेष्टा की जाती है। उसे सुप्रीम कोर्ट से मौत की सजा होती है, तो उसे बचाने के लिए देश के बहुत सारे स्वयंभू उदारवादी-सेक्युलरवादी रातों रात सामने आ जाते हैं। उसकी शव यात्रा में हजारों लोग शामिल भी होते हैं। फिर उसे फांसी हो जाती है। तब उसकी कब्र को सजाया जाता है। उसका इस तरह से रखरखाव होता है कि मानो वह कोई महापुरुष हो। मुंबई में याकूब मेमन की कब्र के ‘‘सौंदर्यीकरण’’ करने के ठोस सुबूत मिल रहे हैं और उसे एक इबादत गाह में बदलने की कोशिश की जा रही थी। जब इस तरह के आरोपों की सच्चाई सामने आई तो मुंबई पुलिस ने आतंकवादी की कब्र के चारों ओर लगाई गई ‘एलईडी लाइट’ को हटाया। याकूब मेमन को 2015 में नागपुर जेल में फांसी दी गई थी। उसे दक्षिण मुंबई के बड़...
सामाजिक समन्वय की संवाहक है हिंदी

सामाजिक समन्वय की संवाहक है हिंदी

साहित्य संवाद
सामाजिक समन्वय की संवाहक है हिंदी या राष्ट्रीय एकता का बोध दिलाती है हिंदी डॉ. शंकर सुवन सिंह एक से अधिक लोगों के समुदायों से मिलकर बने एक वृहद समूह को समाज कहते हैं, जिसमें सभी व्यक्ति मानवीय क्रिया-कलाप करते हैं। मानवीय क्रिया-कलाप में आचरण, सामाजिक सुरक्षा और निर्वाह आदि की क्रियाएं सम्मिलित होती हैं। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। मनुष्य सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है। अन्य प्राणियों की मानसिक शक्ति की अपेक्षा मनुष्य की मानसिक शक्ति अत्यधिक विकसित है। समाज रूपी मकान जब भाषा रूपी स्तम्भ पर खड़ा होता है तो ऐसा समाज सौम्यता, समानता और शांति का प्रतीक होता है। भाषाई आधार पर समाज जुड़ते हैं। भिन्न भिन्न वर्गों के लोग एक भाषा के आधार पर समन्वय स्थापित करते है। यही भाषा हिंदी कहलाती है। हिंदी भाषा किसी भी समाज में अभिव्यक्ति का आधार है। हिंदी किसी भी समाज के लिए एक वरदान है। मनुष...
भारत-चीनः शुरुआत अच्छी

भारत-चीनः शुरुआत अच्छी

राष्ट्रीय
*भारत-चीनः शुरुआत अच्छी* *डॉ वेदप्रताप वैदिक* पिछले ढाई-तीन साल से भारत और चीन के संबंधों में जो तनाव पैदा हो गया था, वह अब कुछ घटता नजर आ रहा है। पूर्वी लद्दाख के गोगरा हॉट स्प्रिंग क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने लगी हैं। दोनों देशों के फौजियों के बीच दर्जनों बार घंटों चली बातचीत का यह असर तो है ही लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमारे विदेश मंत्री जयशंकर की रही है। जयशंकर चीनी विदेश मंत्री से कई बार बात कर चुके हैं। वे चीन में हमारे राजदूत रह चुके हैं। इसके अलावा अब अगले सप्ताह समरकंद में होनेवाली शांघाई सहयोग संगठन की बैठक में हमारे प्रधानमंत्री और चीनी नेता शी चिन फिंग भी शीघ्र ही भाग लेनेवाले हैं। हो सकता है कि वहां दोनों की आपसी मुलाकात और बातचीत हो। वहां कोई अप्रियता पैदा नहीं हो, इस दृष्टि से भी दोनों फौजों की यह वापसी प्रासंगिक है। मोदी और शी के...
भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां।

भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां।

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
भारत में बढ़ते साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे में कमियां। 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य सूची में होने के कारण, अपराध की जांच करने और आवश्यक साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का प्राथमिक दायित्व राज्यों का है। हालांकि भारत सरकार ने सभी प्रकार के साइबर अपराध से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना सहित कई कदम उठाए हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। चूंकि पारंपरिक अपराध के साक्ष्य की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रकृति में पूरी तरह से भिन्न होते हैं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से निपटने के लिए मानक और समान प्रक्रियाएं निर्धारित करना आवश्यक है। प्रत्येक जिले या रेंज में एक अलग साइबर-पुलिस स्टेशन स्थापित करना, या प्रत्येक पुलिस स्टेशन में तकनीकी रूप से योग्य कर्मचारी, आवेदन, उपकरण और बुनियादी ढांचे के परीक्षण ...
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस विशेष

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस विशेष

विश्लेषण
(अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस विशेष) स्कूल न जाने वाले बच्चों में लड़कियों का आज भी बड़ा हिस्सा। हाई स्कूल के बाद 50 प्रतिशत लड़कियों की शादी हो जाती है और बाकी 12वीं में आ जाती हैं। इसके बाद इनमें से लगभग 25 प्रतिशत लड़कियाँ कॉलेज में दाखिला लेती हैं। यदि लड़कियों को 12वीं के बाद किन्हीं तरह की नौकरियाँ मिल जाती हैं तो वे भी पढ़ाई छोड़ देती हैं। माता-पिता अपनी लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिन्तित रहते हैं। उन्हें इस बात का भी डर रहता है कि ज़्यादा शिक्षित होने पर लड़कियाँ कहीं भाग न जाएँ। अपने सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार कम उम्र में विवाह, लड़कियों को घर और गाँव से बाहर जाने की अनुमति नहीं है क्योंकि यह एक सामाजिक वर्जना है, माता-पिता अपने कार्यस्थलों पर जाते हैं और घरेलू गतिविधियाँ छोटी बच्चियों द्वारा की जाती हैं, छोटे बच्चों की देखभाल की जाती है। -डॉ सत्यवान सौरभ पिछले दशकों में ...