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Author: Dialogue India

आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव

आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण, सामाजिक
आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव नई दिल्ली, 25 अगस्त (इंडिया साइंस वायर): विज्ञान प्रसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा भारत के 12वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव-2022 का आयोजन भोपाल में किया जा रहा है। विज्ञान फिल्मों के इस मेले में देशभर से प्राप्त चुनिंदा 71 विज्ञान फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। विज्ञान संचार परिचर्चाएं, मास्टर क्लासेज, विज्ञान फिल्म निर्माण पर कार्यशाला, विज्ञान कवि सम्मेलन, और मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रमों को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। 22 अगस्त को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान भवन के प्रो. जगदीशचंद्र बसु सभागार में महान भारतीय वैज्ञानिक पी.सी.रे पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के साथ पाँच दिनों तक चलने वाले विज्ञान फिल्मोत्सव की शुरुआत ह...
आवारा मवेशी, घटिया दाम और कई मुद्दे

आवारा मवेशी, घटिया दाम और कई मुद्दे

राष्ट्रीय, सामाजिक
आवारा मवेशी, घटिया दाम और कई मुद्दे आवारा मवेशी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मानव निवासियों और पशु कल्याण के लिए कई खतरे पैदा करते हैं। आवारा मवेशी खड़ी फसलों को खाने और मनुष्यों पर हमला करने के लिए जाने जाते हैं। कृषि उद्योग में बढ़ते मशीनीकरण ने भी मवेशियों को काम करने वाले जानवरों के रूप में उपयोग से बाहर कर दिया है, और मवेशियों के परित्याग के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। गौरक्षकों द्वारा गिरफ्तारी, उत्पीड़न और लिंचिंग के डर ने भी मवेशियों के व्यापार को कम कर दिया है। एक बार जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तो गाय को खिलाना और उसका पालन-पोषण करना उस किसान पर आर्थिक बोझ बन जाता है जो उसका भरण-पोषण नहीं कर सकता। -प्रियंका 'सौरभ' मनुष्य, जब से इसकी रचना हुई है, पृथ्वी पर कभी भी अकेला नहीं रहा है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हम इस ग्रह को जीवों की विभिन्न प्रजा...
विज्ञान संचार पाठ्यक्रम को सशक्त बनाने की जरूरत

विज्ञान संचार पाठ्यक्रम को सशक्त बनाने की जरूरत

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“विज्ञान संचार पाठ्यक्रम को सशक्त बनाने की जरूरत” नई दिल्ली, 24 अगस्त (इंडिया साइंस वायर): भोपाल में चल रहे 12वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव (एनएसएफएफआई)-2022 में संचार विशेषज्ञों ने विज्ञान संचार पाठ्यक्रम को नये सिरे से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन 'साइंस कम्युनिकेशन इन मीडिया स्टडीज ऐंड मीडिया स्टडीज दैट कैन नॉट बी इग्नोर्ड' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में देश के चर्चित मीडिया एजुकेटर्स, साइंटिस्ट, विज्ञान संचारकों ने एक सुर में यह बात कही है। भोपाल के रवींद्र भवन में 22 अगस्त को शुरू हुआ यह पाँच दिवसीय महोत्सव 26 अगस्त चलेगा। पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं इग्नू के संचार विभाग के संस्थापक अध्यक्ष और इस विज्ञान फिल्म महोत्सव के नॉमिनेशन ज्यूरी सदस्य प्रोफेसर शंभूनाथ सिंह ने कहा कि कानून और पर्या...
A CSE assessment  Battered by heatwaves, high particulate pollution

A CSE assessment Battered by heatwaves, high particulate pollution

प्रेस विज्ञप्ति
PRESS BRIEF SUMMER OF 2022: A CSE assessment Battered by heatwaves, high particulate pollution CSE’s national assessment says north India has suffered the maximum pollution -- Delhi-NCR a hotspot. PM2.5 average of NCR almost three times the average of cities in southern India Daily peak pollution highest in east India -- cities in Bihar record the highest levels Overall average pollution this summer higher than last summer Mega cities are not the most polluted -- smaller cities become the pollution hotspots. Dominate the most polluted list for 2022 summer. Bhiwadi in Rajasthan tops the list. High summer pollution result of a combination of pollution from vehicles, industry, power plants, waste burning, and dust sources and wind-blown dust, aggravated by heat and arid c...
तकनीक से बढ़ती बेचैनी

तकनीक से बढ़ती बेचैनी

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
तकनीक से बढ़ती बेचैनी [आलेख: कमलेश कमल ] ********************* क्या आपको कभी लगा कि आज भले ही लोगों के पास साधन हैं, सूचना का बोझ है, पर उनके पास सच्चा संवाद नहीं है। साधन हैं, पर आत्मीय वार्तालाप करना उन्हें बोझिल लगता है, वे उड़े-उड़े, खोये-खोये से रहते हैं। यह भी हो सकता है कि कोई साथ के व्यक्ति से संवाद न करे पर सोशल मीडिया पर लगातार उत्तेजित अथवा नकरात्मक प्रतिक्रिया देने लगे। मानसिक भटकावों के अनेकानेक साधन उपलब्ध होने के इस युग में तकनीक भी बेचैनी का एक बड़ा कारण बन गई है। यह बस विकल्प देती है, विवेक नहीं देती। सस्ते डेटा के साथ फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब आदि में कोई तब भी लगा रह सकता है, जब इनकी कोई आवश्यकता ही नहीं या तब जब कुछ सकारात्मक, सर्जनात्मक करने का समय हो। आज लोगों के पास पढ़ने के लिए बहुत से अच्छे आलेख हैं, ठीक से एक भी पढ़ने का समय नहीं है। अनावश्यक चीज़ों को हटान...
बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो

बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो

BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, विश्लेषण
बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो  - ललित गर्ग - बिहार में फिर जंगलराज शुरु हो गया है। नई सरकार बनते ही पुलिस बर्बरता देखने को मिल रही है। लीडरशीप भ्रष्ट हो तो पुलिस-प्रशासन कैसे ईमानदार एवं अनुशासित होगा? कल ही छोटे परदे पर तब यह देख कर मन को गहरा असन्तोष हुआ जब एक एडीएम तिरंगा लिए गिरे पड़े एक बेरोजगार युवक को रोजगार की मांग करने पर बेरहमी से पीट रहे थे। देश की सेवक, जनता की रक्षक, अपराधियों को सजा दिलाने वाली, कानून व्यवस्था को बनाये रखने वाली पुलिस की इस तरह की बर्बर, क्रूर एवं खौफनाक छवि कोई नयी बात नहीं है। यह खाकी एवं खादी की मिलीभगत का परिणाम है, इसी खाकी के बल पर खादी वाले घौंसपट्टी जमाते हैं और इसी खादी के बल पर खाकी वाले आपराधिक कृत्यों, घालमेल, आर्थिक अनियमितताओं, कमजोरों पर अत्याचार, दमन, लाठीचार्ज और जमीन से लेकर हर तरह के सौदों में हेरफेर को अंजाम देते...
कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी

कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी

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कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी आर.के. सिन्हा          कांग्रेस से देश को यह उम्मीद थी कि यूपीए सरकार के सन 2014 में सत्ता से मुक्त होने के बाद वह अब एक सशक्त विपक्ष की भूमिका को सही तरह से निभायेगी । वह केन्द्र में एनडीए सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रखते हुए उसकी कमियों पर उसे घेरेगी भी और उपलब्धियों पर कभी-कभार उसकी पीठ भी थपथपा देगी। यही तो लोकतंत्र है। पर यह हो न सका। राहुल गांधी ने कांग्रेस को एक नकारा और थकी हुई पार्टी बनाकर रख दिया है। कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे पुराने नेता आलाकमान के फैसलों से निराश हैं।  गुलाम नबी आजाद और आनन्द शर्मा के चुनाव समितियों के अध्यक्ष पदों से दिए गए इस्तीफों ने यह दर्शा दिया है कि पार्टी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। दशकों से पार्टी की सेवा करने वाले आजाद और शर्मा जैसे नेताओं को भी अब कांग्रेस में घुटन ...
क्या भारत छोड़ रहा है गांधी परिवार ?

क्या भारत छोड़ रहा है गांधी परिवार ?

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क्या भारत छोड़ रहा है गांधी परिवार ? नेशनल हेराल्ड घोटाले में गिरफ़्तारी की आशंका के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चिकित्सा जांच के लिए विदेश जाएंगी और उनके साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जाएंगे। हालांकि पार्टी ने इस बात का खुलासा नहीं किया है वे सभी किस तारीख और किस जगह जाएंगे। राजनीतिक हल्क़ों में चर्चा है कि बीमारी की जाँच के बहाने गांधी परिवार देश छोड़ने की फ़िराक़ में है। इस पूरे खेल में भाजपा व कांग्रेस में कोई गुप्त समझौता होना भी बताया जा रहा है। इसीलिए गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाने की बात राहुल गांधी ने छेड़ी है और अशोक गहलोत को कांग्रेस की कमान मिलनी तय मानी जा रही है। ग्रूप - 23 के नेताओ द्वारा कश्मीर व हिमाचल में  पद ठुकराने का निर्णय भी इसीलिए किया गया बताया जा रहा है क्योंकि इस ग्रूप के नेता अब बड़ी भूमिका की अपेक्षा कर...
एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के

एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के

BREAKING NEWS, TOP STORIES, घोटाला, सामाजिक
एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के यह दुःखद है कि देश के अनेक प्रतिष्ठित प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज व यूनिवर्सिटी स्नातक कोर्सेज़ में प्रवेश के नाम पर मोटी केपिटेशन फ़ीस ले रहीं हैं। डायलॉग इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार आइ पी यूनिवर्सिटी से जुड़े अनेक संस्थान दस लाख से लेकर पच्चीस लाख रुपए तक माँग रहे हैं तो एकेटीयू से जुड़े कुछ कोलेज दो से दस लाख रुपए तक माँग रहे हैं। पूरे देश में अनेक निजी यूनिवर्सिटी व कालेजों के भी यही हाल हैं। अनेक जगह मेरिट व मानक़ो को ताक पर रखकर केपिटेशन फ़ीस देने वालों को प्रवेश दे रहे है और प्रतिभाशाली मध्यम व गरीब वर्ग के विद्यार्थी प्रवेश के लिए टक्कर मार रहे हैं। सम्बंधित राज्य सरकारों, एआईसीटीई व शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को इस लूट की व्यापक जाँचकर दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। ...
कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें

कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें - ललित गर्ग -कुछ ऐसे व्यक्ति सभी जगह होते हैं जिनसे हम असहमत हो सकते हैं, पर जिन्हें नजरअन्दाज करना मुश्किल होता है। ऐसे ही सिद्धान्त एवं मूल्यहीन व्यक्तियों की विडम्बनाओं से समाज एवं राष्ट्र परेशान है, लेकिन विडम्बना इससे बड़ी यह है कि हम ऐसे व्यक्तियों की गलतियों पर उनका बहिष्कार करने की बजाय उन्हें महानायक बनाने की कुचेष्ठा करते हैं। उनके समर्थन में उतरते हैं, उन्हें सम्मानित किया जाता है। ऐसा ही श्रीकांत त्यागी नामक एक कथित राजनीतिक कार्यकर्त्ता के साथ त्यागी समाज ने किया, उनकी गलती पर, एक महिला के साथ बदसलूकी पर उनको चेताने, उनका सामाजिक बहिष्कार करने की बजाय उनको हीरो बनाकर प्रस्तुत किया गया है। यह एक सभ्य, संस्कारी एवं आदर्श समाज की संरचना की एक विसंगति के रूप में सामने आया है। श्रीकांत त्यागी का मामला राजनीतिक संरक्षण में पनप रहे दादा एवं ...