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Author: Dialogue India

Payushan, the festival of illuminating the soul

Payushan, the festival of illuminating the soul

संस्कृति और अध्यात्म
आत्मा को ज्योतिर्मय करने का पर्व पयुर्षण  - ललित गर्ग - पयुर्षण पर्व जैन समाज का आठ दिनों का एक ऐसा महापर्व है जिसे खुली आंखों से देखते ही नहीं, जागते मन से जीते हैं। यह ऐसा मौसम है जो माहौल ही नहीं, मन को पवित्रता में भी बदल देता है। आधि, व्याधि, उपाधि की चिकित्सा कर समाधि तक पहुंचा देता है, जो प्रतिवर्ष सारी दुनिया में मनाया जाता है। जैनधर्म की त्याग प्रधान संस्कृति में इस पर्व का अपना अपूर्व महत्व है। इसको पर्व ही नहीं, महापर्व माना जाता है। क्योंकि यह पर्व आध्यात्मिक पर्व है, और एकमात्र आत्मशुद्धि का प्रेरक पर्व है। इसीलिए यह पर्व ही नहीं, महापर्व है। जैन लोगों का सर्वमान्य विशिष्टतम पर्व है। चारों ओर से इन्द्रिय विषयों एवं कषाय से सिमटकर, स्वभाव में, आत्मा में निवास करना, ठहरना, रहना ही पर्युषण का वास्तविक अर्थ और उद्देश्य है। जिसका भावार्थ एवं फलितार्थ होता है-कषायादि का उपशमन, इन्...
आपदा प्रबंधन के लिए कुछ नया करना होगा

आपदा प्रबंधन के लिए कुछ नया करना होगा

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आपदा प्रबंधन के लिए कुछ नया करना होगा *रजनीश कपूर किसी भी तरह की आपातस्थिति में आम नागरिक सीधे 100 नम्बर मिलाने की सोचता है। परंतु क्या हमारे देश का आपदा प्रबंधन इस कदर व्यवस्थित है कि किसी भी आपातस्थिति से कुशलतापूर्वक निपट सके? इसका जवाब आपको आसानी से नहीं मिल पाएगा। आपातस्थिति में तंत्र की अव्यवस्था के चलते नागरिकों को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है उनसे शायद हम सबको भविष्य के लिए सबक सीखने की आवश्यकता है। मिसाल के तौर पर दिल्ली जैसे शहर में रहने वालों को शायद यह नहीं पता कि दिल्ली में कितने दमकल केंद्र हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार दिल्ली में 64 दमकल केंद्र हैं। प्रत्येक दमकल केंद्र का एक तय कार्यक्षेत्र और सीमा होती है। आग लगने के स्थिति में उसी सीमा के भीतर ही दमकल की गाड़ियाँ घटनास्थल पर जाती हैं। दिल्ली वालों को शायद यह भी नहीं पता कि सितम्बर 2019 से समस्त भारत...
सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

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सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है? (अब्राहम लिंकन, जॉन एफ कैनेडी, इंदिरा गांधी और बेनजीर भुट्टो की जीवन ज्योति उनके राजनीतिक जीवन के चरम पर बुझा दी गई। आजादी के बाद से राजनीतिक हत्याओं का दौर भारत के राजनीतिक जीवन को भी लहूलुहान करता आया है। भारत को आजादी मिले छह महीने भी नहीं हुए थे कि महात्मा गांधी की हत्या ने दुनिया को हिला दिया। वर्ष 1953 में कश्मीर की शेष भारत के साथ एकता का आंदोलन करने वाले डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की श्रीनगर की जेल में रहस्यमय मृत्यु हो गई थी। वंशवादिता में राजनीति का कमान मिलना वंशपरंपरा के अधीन रहता है तो दूसरी ओर संपर्कवादिता के जरिए किसी बडे राजनेता के संपर्क में आने से राजनीतिक कमान प्राप्त करने की अभिलाषा पूर्ण हो जाती है। कहावत है कि "राजनीति एक गंदा खेल है"। )   - सत्यवान 'सौरभ' हरियाणा की बीजेपी न...
शोधकर्ताओं ने विकसित की हाइड्रोजन और हवा से चलने वाली स्वदेशी बस

शोधकर्ताओं ने विकसित की हाइड्रोजन और हवा से चलने वाली स्वदेशी बस

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शोधकर्ताओं ने विकसित की हाइड्रोजन और हवा से चलने वाली स्वदेशी बस नई दिल्ली, 22 अगस्त (इंडिया साइंस वायर): भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात की दृष्टि से वैश्विक हब बनाने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन’ शुरू किया गया है। हाइड्रोजन चालित वाहनों का निर्माण भी इस पहल का हिस्सा है। इस दिशा में कार्य करते हुए भारतीय शोधकर्ताओं को स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल बस विकसित करने में सफलता मिली है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने पुणे में रविवार को इस हाइड्रोजन ईंधन सेल बस का अनावरण किया है। विद्युत उत्पन्न करने के लिए ईंधन सेल हाइड्रोजन और हवा का उपयोग करता है। इससे केवल पा...
Life is enriched with ‘Thank you’ and ‘Gratitude’

Life is enriched with ‘Thank you’ and ‘Gratitude’

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‘शुक्रिया’ एवं ‘कृतज्ञता’ से संवरती है जिन्दगी - ललित गर्ग -इंसानी जीवन का एक सत्य है कि आदमी दुख भोगना नहीं चाहता, किन्तु काम ऐसे करता है, जिससे दुख पैदा हो जाता है। यह आश्चर्य की ही बात है कि आदमी चाहता है सुख और इस प्रयत्न में निकाल लेता है दुख। यह बहुत विरोधाभासी बात है। लेकिन यह समझ की भूल भी है। आदमी की अज्ञानता भी है। उसके पुरुषार्थ में कहीं कोई कमी है, खोट है। जीवन को जीने और उसके लिये अपनायी जाने वाली सोच गलत है। सही विधि उसे मालूम नहीं है तभी उसके कार्य का उचित परिणाम नहीं मिल पाता। चालाकी छोड़कर एवं लोभ-स्वार्थ की मानसिकता को दरकिनार करने से ही वास्तविक सुख को प्राप्त किया जा सकता है और इसके लिये आदमी को कृतज्ञता का भाव अपनाना जरूरी है। वास्तविकता यह है कि सुख प्राप्ति के लिए आदमी दुख के उत्पादन का कारखाना चला रहा है। अपने मिथ्या दृष्टिकोण के कारण वह दुख को जेनरेट कर रहा है। सु...
आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं?

आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं?

सामाजिक
आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं? बॉबी रमाकांत – सीएनएस एक महीने से अधिक हो गया है और एचआईवी के साथ जीवित लोग, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यालय के बाहर अनिश्चितक़ालीन धरने पर हैं। 21 जुलाई 2022 से यह लोग दिन-रात यहाँ निरंतर शांतिपूर्वक ढंग से बैठे हुए हैं। इनकी माँग स्पष्ट है कि एचआईवी दवाओं की कमी दूर हो, और नियमित एक-महीने की खुराक हर एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति को मिले जब वह अस्पताल दवा लेने जाए। भारत सरकार की 2018 मार्गनिर्देशिका भी यही कहती है कि जो लोग एचआईवी दवाओं का स्थायी रूप से सेवन कर रहे हैं उनको 3 महीने की खुराक दे दी जाए। पर अनेक प्रदेशों में सिर्फ़ 7-10 दिनों तक की खुराक मिल रही है। कहीं-कहीं तो वयस्क को बच्चे की और बच्चों को वयस्क की दवा देनी पड़ रही है क्योंकि दवाओं की कमी है। भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन क...
गोवा जैसे क्यों नहीं बनते सभी पर्यटन स्थल

गोवा जैसे क्यों नहीं बनते सभी पर्यटन स्थल

राज्य, समाचार
गोवा जैसे क्यों नहीं बनते सभी पर्यटन स्थल अथवा गोवा जैसा ही बनें सब पर्यटन स्थल आर.के. सिन्हा बीती 15 अगस्त को जब देश के अधिकतर राज्यों के स्कूल बंद थे, उस दिन गोवा की सड़कों पर स्कूली बच्चे सुबह 11 बजे के बाद अपने स्कूल में आयोजित हुये स्वाधीनता दिवस समारोह में भाग लेकर निकल रहे थे। उनके हाथों में तिरंगे और मिठाई के पैकेट थे। यह देखकर बहुत सुखद लग रहा था। बहुत से राज्यों के स्कूलों में 14 अगस्त को ही देश का स्वाधीनता दिवस समारोह मना लिया जाता है। यह सही नहीं है। कायदे से सारे देश के स्कूलों को 15 अगस्त को खुलना चाहिये। उस दिन वहां स्वाधीनता दिवस समारोह आयोजित किये जाने चाहिये। गोवा क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा राज्य होने पर भी कई मामलों में बड़े-बड़े राज्यों से बहुत आगे है। गोवा क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चौथा सबसे छोटा राज्य है। गोवा का क्षेत्रफल ...
कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ?

कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ?

विश्लेषण, सामाजिक
कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ? आपने पहले भी स्त्रियों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न तथा अन्य ज्यादतियों के मामले में उल्टे उसी को कुलटा या चरित्रहीन बता देने का प्रसंग तो सुना ही होगा, किन्तु आज के  दौर में  मूल्यों की जमीन कितनी कमजोर है इसका अंदाजा इस वाकिये से सहज ही लगा सकते हैं कि अदालत में जज की कुर्सी पर बैठा हुआ शख़्स पुरुष वर्चस्ववादी मानसिकता पर मुहर लगा रहा है। हम ये मान भी लें कि पहली बार कोर्ट ने सच बोलने का साहस किया है, लेकिन छोटी बच्चियों के साथ जब कोई ग़लत करता है तब कौन से कपड़ों को जिम्मेदार ठहराया जायेगा? अदालत के फैसले कुछ हद तक ठीक है मगर ऐसे फैसले यौन शोषण को बढ़ावा देते है।  उत्पीड़न सरासर ग़लत है यह अधिकार किसी भी पुरुष को नहीं, पर एक प्रश्न है, क्या आजकल लड़कियां जो कपड़े पहन रही है वो सही है? लड़कियों की ऐसे नंगे कपड़े पर पाबंदी लगनी चाहिए।...
भ्रष्टाचार इसलिए होता है क्योंकि हम स्वयं बेईमान है।

भ्रष्टाचार इसलिए होता है क्योंकि हम स्वयं बेईमान है।

घोटाला, जीवन शैली / फिल्में / टीवी
भ्रष्टाचार इसलिए होता है क्योंकि हम स्वयं बेईमान है। हम बेवकूफ इसलिए बनाए जा रहे है, क्योंकि हम बेवकूफ है। हमारे हक इसलिए छीने जाते है ,क्योंकि हम दूसरो को छीनने की कोशिश करते है। हमारे साथ भ्रष्टाचार इसलिए होता है क्योंकि हम स्वयं बेईमान है। हमे अपने अंदर सुधार की जरूरत है, लोग खुद सुधर जाएंगे। महात्मा गांधी ने कहा था- "खुद में वो बदलाव लाइए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” -सत्यवान 'सौरभ' देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9वीं बार तिरंगा फहराया। इस मौके पर पीएम मोदी ने देशवासियों के सामने उम्मीदों और संकल्पों के साथ-साथ अपनी चिंताओं को भी साझा किया।  पीएम ने अपने भाषण में देश में फैले भ्रष्टाचार के बारे जिक्र किया। पीएम ने करप्शन को देश के लिए खतरनाक बताते हुए इसे खत्म करने के लिए युवा पीढ़ी से आगे आने की अपील ...
राष्ट्र को दागी नेताओं से मुक्ति कब मिलेगी?

राष्ट्र को दागी नेताओं से मुक्ति कब मिलेगी?

Current Affaires, राष्ट्रीय, समाचार
राष्ट्र को दागी नेताओं से मुक्ति कब मिलेगी? -ललित गर्ग-भारतीय राजनीति में आपराधिक छवि वाले या किसी अपराध के आरोपों का सामना कर रहे लोगों को जनप्रतिनिधि बनाए जाने एवं महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी देने के नाम पर गहरा सन्नाटा पसरा है, जो लोकतंत्र की एक बड़ी विडम्बना बनती जा रही है। कैसा विरोधाभास एवं विसंगति है कि एक अपराध छवि वाला नेता कानून मंत्री बन जाता है, एक अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे प्रतिनिधि को शिक्षा मंत्री बना दिया जाता है। ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय के साथ होता है। यह कैसी विवशता है राजनीतिक दलों की? अक्सर राजनीति को अपराध मुक्त करने के दावे की हकीकत तब सामने आ जाती है जब किसी राज्य या केंद्र में गठबंधन सरकार के गठन का मौका आता है। बिहार में नई सरकार में कानून मंत्री बने राष्ट्रीय जनता दल के विधायक कार्तिकेय सिंह हैं। जिन्हें मंगलवार को पटना के दानापुर में अदालत के सामने समर्पण...