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Author: Dialogue India

*इस्लाम की लम्बी सोच*

*इस्लाम की लम्बी सोच*

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*इस्लाम की लम्बी सोच* *कोई भी विचार जो 1400 वर्ष पुराना है, उसे हमें लम्बी सभ्यतागत दृष्टी में ही समझना होगा। जिस प्रकार भारत एक सभ्यतागत राष्ट्र है, उसी प्रकार इस्लाम एक सभ्यतागत शक्ति है और इसे उसी प्रकार से समझा जाना चाहिए। मुसलमान यह कहते हैं कि ‘इस्लाम कभी नहीं हारा’। दुखद बात यह है कि एक देश को छोड़कर यह सच है। लेकिन इसका क्या अर्थ है? कि इस्लामी सेनाएँ कभी नहीं हारी? कि युद्ध के मैदान में शत्रु उनसे कभी नहीं जीते? कि उनके इतिहास में कभी बुरे साल या दशक नहीं आये? नहीं, ऐसा नहीं है।* *पैगंबर मोहम्मद की मृत्यु के पश्चात अरब से बाहर निकलते ही इस्लामी सेनाएं पूर्व में भारत के द्वार पर पहुंच गईं और पश्चिम में स्पेन में यूरोप के दरवाजे खटखटाने लगीं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस समय के दो महान साम्राज्यों ने लगभग तुरंत ही इस्लाम के सामने घुटने टेक दिए। उस समय के सबसे महान साम्राज्यों में ...
महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल

महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल

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महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल -प्रियंका 'सौरभ' उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरक खेतों की उर्वरता बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है। भारत में उर्वरकों की वर्तमान लागत एक खनिज संसाधन-गरीब देश के लिए वहन करने के लिए बहुत अधिक है। 2021-22 में, मूल्य के संदर्भ में, सभी उर्वरकों का आयात $ 12.77 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया। भारत द्वारा उर्वरक आयात का कुल मूल्य, घरेलू उत्पादन में उपयोग किए गए इनपुट सहित, 2021-22 में $ 24.3 बिलियन का विशाल मूल्य था। उर्वरकों की उच्च लागत के कारण देखे तो उर्वरकों का न केवल आयात किया जाता है, बल्कि भारतीय किसान भी आयातित आदानों का उपयोग करके आयात या निर्माण की लागत से कम का भुगतान करते हैं। अंतर का भुगतान सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में किया जाता है। महंगा कच्चा माल भी काफ...
सामाजिक समरसता व नारी सशक्तीकरण का अदभुत संदेश

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सामाजिक समरसता व नारी सशक्तीकरण का अदभुत संदेश भारत की भावी राष्ट्रपति आदिवासी महिला - द्रौपदी मुर्मू मृत्युंजय दीक्षित केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन की सरकार ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाकर सामाजिक समरसता व नारी सशक्तीकरण का अदभुत संदेश दिया है जिससे आदिवासी समाज व महिलाओं के बीच प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है। संसद व विधानसभाओं की अंकगणित के अनुसार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत महज औपचारिकता भर रह गयी है क्योंकि उन्हें ओड़िशा की बीजू जनता, आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस और बहन मायावती का समर्थन भी मिल चुका है। द्रौपदी मुर्मू छह साल तक झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं इसलिए झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित एनडीए में शामिल रहे सभी वर्तमान तथा पूर्व घटकों का सहयोग भी उन्हें मिलने जा रहा ह...
मस्तिष्क की कनेक्टिविटी बताने के लिए नया एल्गोरिदम

मस्तिष्क की कनेक्टिविटी बताने के लिए नया एल्गोरिदम

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मस्तिष्क की कनेक्टिविटी बताने के लिए नया एल्गोरिदम भारतीय शोधकर्ताओं ने एक नया एल्गोरिदम विकसित किया है, जो मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर ढंग से समझने और पूर्वानुमान लगाने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है। ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू)- आधारित यह मशीन लर्निंग एल्गोरिदम बेंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है। रेगुलराइज्ड, एक्सेलेरेटेड, लीनियर फासिकल इवैल्यूएशन (ReAl-LiFE ) नामक यह एल्गोरिदम मानव मस्तिष्क के डिफ्यूजन मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (डीएमआरआई) स्कैन से भारी मात्रा में उत्पन्न डेटा का तेजी से विश्लेषण कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि रियल-लाइफ के उपयोग से मौजूदा अत्याधुनिक एल्गोरिदम की तुलना में 150 गुना तेजी से डीएमआरआई डेटा का मूल्यांकन किया जा सकता है। सेंटर फॉर न्यूरोसाइंस (सीएनएस), आईआ...
कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति

कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति

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 कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति आर.के. सिन्हा गौतम अडाणी ने सेहत, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 60 हजार करोड़ रुपए देने का संकल्प लिया है। जाहिर है कि यह कोई-छोटी मोटी राशि तो नहीं है न? देखिए , इससे सुखद कोई बात नहीं हो सकती कि देश में आप जो भी अपनी बुद्धि और मेहनत से दिन - रात एक करके पैसा कमाते हैं, उसे यदि वे उसी देश-समाज को वापस कर दें जिससे आपने कमाया है। बेशक, यह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े दानों  में से एक है। पर इतना कहना ही  होगा कि हमारे देश में अब भी गिनती के ही कारोबारी या पैसे वाले लोग हैं जो परोपकार के लिए अपना कमाया धन समाज के परोपकार में देते हैं। इस लिहाज से मोटा-मोटी अजीम प्रेमजी, शिव नाडार, मुकेश अंबानी, नंदन नीलकेणी, टाटा ग्रुप वगैरह का ही नाम मुख्य रूप से सबसे पहले जेहन में आता है। अजीम प्रेमजी के लिए कहा जाता है कि वे औसत रोज 22 करोड़ रुपए दान में...
 भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की जरूरत।

 भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की जरूरत।

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भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की जरूरत। (यद्यपि विभिन्न सामग्रियों जैसे खोई (गन्ने से रस निकालने के बाद अवशेष), मकई स्टार्च, और अनाज के आटे से बने खाद, बायोडिग्रेडेबल या यहां तक कि खाद्य प्लास्टिक को विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन वर्तमान में इनके पैमाने और लागत की सीमाएं हैं।)-प्रियंका 'सौरभ' सिंगल यूज प्लास्टिक से तात्पर्य उन प्लास्टिक वस्तुओं से है जो एक बार उपयोग की जाती हैं और त्याग दी जाती हैं। एकल-उपयोग प्लास्टिक में निर्मित और उपयोग किए गए प्लास्टिक के उच्चतम प्रयोग में वस्तुओं की पैकेजिंग से लेकर बोतलों, पॉलिथीन बैग, खाद्य पैकेजिंग आदि शामिल है। यह विश्व स्तर पर उत्पादित सभी प्लास्टिक का एक तिहाई हिस्सा है, जिसमें 98% जीवाश्म से निर्मित है। भारत कूड़े वाले सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कार्र...
तेलंगाना ने बनाया तिरुपति जैसा भव्य मंदिर

तेलंगाना ने बनाया तिरुपति जैसा भव्य मंदिर

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तेलंगाना ने बनाया तिरुपति जैसा भव्य मंदिर विनीत नारायण क्या आपको पता है कि हैदराबाद से 60 किलोमीटर दूर यदाद्रीगिरीगुट्टा क्षेत्र में भगवान लक्ष्मी-नृसिंह देव का एक अत्यंत भव्य मंदिर पिछले वर्षों में बना है। पिछले हफ़्ते जब मैं इसके दर्शन करने गया तो इसकी भव्यता और पवित्रता देख कर दंग रह गया। दरअसल 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद तेलंगाना में ये एक कमी थी। प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर आंध्र प्रदेश के हिस्से में चला गया था। तेलंगाना सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए पौराणिक महत्व के यदाद्री लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर का 1800 करोड़ रुपए की लागत से तिरुपति की तर्ज पर भव्य निर्माण करवाया है। आज यहाँ लाखों दर्शनार्थियों का मेला लगा रहता है। यदाद्री लक्ष्मी-नृसिंह गुफा का उल्लेख 18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में मिलता है। शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में महर्षि ऋष्यश्रृंग क...
नरेन्द्र मोदी के खिलाफ शरारतों का हश्र

नरेन्द्र मोदी के खिलाफ शरारतों का हश्र

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नरेन्द्र मोदी के खिलाफ शरारतों का हश्र -ः ललित गर्गः- कांग्रेसियों, वामपंथियों और कट्टरवादियों की ओर से नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लगातार किये जा रहे उद्देश्यहीन, उच्छृंखल, विध्वंसात्मक विरोध एवं नीति ने एक बार फिर घुटने टेके हैं, एक बार फिर परास्त हुई है। 2002 के गुजरात दंगों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष जांच दल की ओर से मिली क्लीनचिट को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणियां की, वे मोदी के खिलाफ सक्रिय शरारती तत्वों को एक करारा तमाचा है। यह सर्वविदित है कि पिछले दो दशकों से किस तरह मोदी को आरोपित एवं लांछित करने का एक शरारत भरा कुत्सित एवं विडम्बनापूर्ण अभियान छेड़ा गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर इस शरारती अभियान को रेखांकित किया कि ऐसा लगता है कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी किसी और के इशारे पर काम कर रही थी। यह एक यथार्थ भी ...
जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।”

जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।”

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जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।” -सत्यवान 'सौरभ' जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें क्योंकि एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे और महसूस करेंगे कि वे बड़ी चीजें थीं। छोटी चीजें जरूरी हैं क्योंकि वे हमारे जीवन के विशाल बहुमत को शामिल करती हैं। महत्वपूर्ण घटनाएं छिटपुट रूप से घटित होती हैं। छोटे-छोटे पल-पल होते रहते हैं। जब आप छोटी-छोटी चीजों की उपेक्षा करते हैं, तो आप अपने जीवन का काफी आनंद लेने से चूक जाते हैं। बचपन मे कहानी सुनी थी -एक मुर्गी रोज एक सोने का अन्डा देती थी पर उसके मालिक ने बडी खुशी के लिऐ उस मुर्गी को मारकर सब अन्डे साथ मे निकालने की सोची; न अन्डा मिला न मुर्गी बची तो तात्पर्य ये है की एक बडी खुशी से जीवन मे छोटी-छोटी खुशियां ज्यादा मायने रखती है। छोटी-छोटी बातों की सराहना किए बिना केवल बड़ी चीजों के...
क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ?

क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ?

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क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ? (प्रदर्शनकारी पूछ रहे हैं कि वे चार साल बाद क्या करेंगे? उन उम्मीदवारों का क्या होगा जिन्होंने दो साल से शारीरिक और चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण की और लिखित परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे थे।  यही 4 साल होते हैं जब बच्चे आगे पढ़कर करियर बनाते हैं, 4 साल बाद क्या करेंगे? सिक्योरिटी गार्ड, ग्रुप डी ? क्यूंकि पढ़ाई तो छोड़ चुके होंगे, वापिस आकर कितने पढ़ेंगे? ) -प्रियंका 'सौरभ' भले ही अग्निपथ योजना को बेरोजगारी कम करने वाली योजना बताया जा रहा हो पर योजना पर गौर करने पर पता चलता है कि यह योजना वेतन और पेंशन के बोझ को कम करने के लिए लाई गई है। सेना में अहम् पदों पर रहने वाले कुछ पूर्व सैनिकों ने इस योजना पर चिंता भी जताई है। कई सैनिकों ने विभिन्न अख़बारों में लिखे लेख में इस योजना इंडियन  आर्मी रिक्रूटमेंट 2022 से समाज के सैन्यीकरण को घातक बताय...