खुशियाँ बाँटिए, ख़ुशियाँ मिलेगी
खुशियाँ बाँटिए, ख़ुशियाँ मिलेगी।
■ राजकुमार जैन राजन
आज मनुष्य की कीमत भी दिनों दिन रुपये के अवमूल्यन की तरह घटती जा रही है। उसके मानसिक प्रदूषण में निरन्तर बढ़ोतरी हो रही है। क्या हमने कभी बैठकर विचार किया है कि ऐसा क्यों है ? अगर नहीं है, तो देर मत कीजिये सुबह का भुला शाम को घर आ जाये तो भुला नहीं कहलाता। हम अपना आत्म विश्लेषण करें और देखें कि क्या कारण है ? जीवन संघर्ष का नाम हैं। जहाँ जीवन है वहीं समस्या है। समस्याओं का चक्र अनवरत गति से चलता रहता है। कभी खुशी कभी गम, कभी सुख कभी दुःख, पर इसे दिल और दिमाग पर हावी न होने दें। खुश रहने के लिए परिस्थितियों के कारण मन को भारी न बनाएं। खुश रहना और अपने आसपास को भी खुशियों से सराबोर रखना एक कला है। यह सबमें नहीं होती, लेकिन जिसमें होती है वह सबका मन जीत लेता है। जो लोग खुश रहना और हंसना -हंसाना जानते हैं, वे अक्सर सकारात्मक रहते हुए ख़ुशियाँ...









