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Author: Dialogue India

कितना उपयोगी है भारतीय पंचांग?

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लेखक:- इं. आलोक शर्मा (लेखक साफ्टवेयर इंजीनियर तथा ज्योतिष अलंकार हैं) आज कल पंचांग का प्रचलन बहुत ही कम है। जीवन की सभी घटनाओं का ब्यौरा हमारे पास सिर्फ ईसवी कैलेंडर के अनुसार ही है, कारण बहुत साफ़ है, घर में घडी भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार है, हाथ घडी भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार है यहाँ तक कि मोबाइल का प्रयोग समय देखने के लिए होने लगा है वह भी ग्रेगोरियन कैलेंडर अनुसार ही है। पंचांग के अनुसार किसी भी गणना का प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में नहीं करते हैं। ऑफिस, व्यापार सभी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ही चल रहे हैं तो फिर पंचांग के अनुसार समय का या किसी पर्व अथवा त्यौहार को मनाने का औचित्य क्या है? पंचांग अर्थात् पांच अंग – तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण। पुराण, उपनिषद् एवं अन्य ग्रंथों में घटनाओं का विवरण पंचांग के सन्दर्भ में ही दिया जाता है जिनमें से कई की पुरातनता 5000 वर्ष से...
ख़बरों के पीछे दौड़ती पत्रकारिता को थोड़ी रैड लाइट की जरूरत है।

ख़बरों के पीछे दौड़ती पत्रकारिता को थोड़ी रैड लाइट की जरूरत है।

BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, EXCLUSIVE NEWS, राज्य
( किसी भी मीडिया संस्थान की पहली खबर से अगर लोगों के चेहरे पर मुस्कान न आये तो वह कैसी पत्रकारिता ? आज देश भर के चैनलों और अख़बारों में खबर जहां जल्दी पहुंचाने पर जोर है, वहीं समाचार में वस्‍तुनिष्‍ठता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्क लोगों के लिए खबर का स्रोत बन गए हैं, लेकिन इनका कोई पत्रकारिता मानदंड नहीं है। ) आज  के दौर में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच मीडिया के लिए विश्वसनियता की अहमियत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। आज देश भर के चैनलों और अख़बारों में खबर जहां जल्दी पहुंचाने पर जोर है, वहीं समाचार में वस्‍तुनिष्‍ठता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। इंटरनेट और सूचना के आधिकार (आर.टी.आई.) ने आज की पत्रकारिता को बहुआयामी और अनंत बना दिया है। आज कोई भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध की और कराई जा सकती है। मी...
राजनीति में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी

राजनीति में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी

addtop, BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
( वर्तमान समय चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है जहाँ युवाओं का राजनीति में भाग गिरता जा रहा है | आज हमारी संसद में 35 वर्ष से कम उम्र के मात्र 20% नेता ही है और उनमे से 70 से 90 प्रतिशत केवल पारिवारिक संबंधों द्वारा ही राजनीति में आये हैं | हार्दिक पटेल और कन्हैया कुमार जैसे युवा सक्रिय राजनीति में बहुत कम हिस्सा लेते हैं | ) एक देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितना युवा है। 15-24 वर्ष के बीच के सभी  युवा, आमतौर पर कॉलेज जाने वाले छात्र होते हैं। उनके करियर विकल्प में इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, खेल, रक्षा और कुछ उद्यमी शामिल हैं। विशेष रूप से भारत के संदर्भ में, राजनीति को कैरियर विकल्प के रूप में बहुत कम लिया जाता हैं। इस प्रकार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को परिभाषित करने और नेतृत्व करने के लिए राजनीति में युवा प्रतिभाशाली दिमागों की भारी कमी है। यह स्थान उन लोगों द्वारा लिया...
जादुई सोच से नई दुनिया रचने वाला शख्स

जादुई सोच से नई दुनिया रचने वाला शख्स

संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
वास्तविक रचनाकार एवं सृजनकार अपने हूनर से ही नहीं, बल्कि अपनी सोच एवं मूल्यों से ख्याति पाते हैं और इतिहास बनाते हैं, ऐसे अनूठे एवं विलक्षण इंसान परंपरावादी दुनिया की सारी सीमाओं को तोड़कर जज्बातों के बवंडर से नई सूरत गढ़ते हैं। ऐसी शख्सियतें खुद अपनी सोच के जादू से नई दुनिया बनाते हैं। ऐसे ही थे मिर्जा असदुल्ला बेग खान अर्थात मिर्जा गालिब। वे भारत की एक ऐसे चर्चित, प्रतिशिष्ट एवं विशिष्ट शख्स थे, जिन्होंने प्रेम और दर्शन के, सोच एवं सीरत के नए पैमाने तय किए पर जिनकी जिंदगी खुद ही वक्त और किस्मत के थपेड़ों से लड़ती रही, जूझती रही, लेकिन थकी नहीं, हारी नहीं। उस उर्दू और फारसी भाषा के मशहूर शायर मिर्जा गालिब की आज 223वीं जयंती है। उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 को काला महल आगरा में हुआ था। भले ही गालिब को गुजरे करीब दो शताब्दियां बीत गयी है, लेकिन उनकी शायरी, गजलें और बेबाकी हिन्दुस्तानियों के दिलों म...

Bal Diwas (Children Day) should be on 26th December rather than on 14th November

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Prime Minister Narender Modi on 27.12.2020 in his last Man-ki-Baat of the year 2020 remembered brave sons of Guru Govind Singh ji namely Zoravar Singh and Fateh Singh who preferred being martyred on 26.12.1704 within the wall built for the purpose rather than adopting Islam at orders of cruel Mughal Emperor Aurangzeb. Nehru-Gandhi Congress in its long regime after independence made all efforts to wash out memories of such unforgettable ones by glorifying members of Nehru-Gandhi family only. Present BJP government should act boldly to re-write school text-books and history-books to make new generation aware about such brave children and other martyrs like Bhagatsingh, Rajguru, Sukhdev and others who were deliberately ignored by Congress dynastically ruled by Nehru-Gandhi family. Insti...

Complicating GST rules further to avoid false Input Tax Credit

CURRENT ISSUE
Central Board of Indirect Taxes and Customs has further complicated system of Goods and Service Tax (GST) to check cases of false Input Tax Credits (ITC) with businessmen with monthly turnover of rupees 50 lakhs and above mandatorily required to pay at least one-percent GST liability in cash. Numerous amendments in GST structure in its short regime of introduction in India has proved that GST structure as a whole requires complete overhaul to make it simple-most in a manner than all those registered under GST may voluntarily and honestly comply with the system. Honest compliance of GST will result in reduction of Income Tax evasion also. Input Tax Credit (ITC) is main source of corrupt practices under GST system. Best is to abolish 18-percent GST slab, and to retain ITC only on tradable...

Suggestions for Union Budget 2021-22 – Postal tariffs need total overhaul

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Postal-tariffs have not been revised for last so many years resulting in undesired loss to public-exchequer due to negligible tariff like of 25 or 50 paise still prevailing even though coins in denominations less than rupee one are no more in circulation. Minimum postal-tariff for registered newspapers and ordinary post-cards should be rupee one with these post-cards fetching additional revenue through advertisements printed on postcards. Outdated Inland Letter Cards having lost utility should be discontinued. Thereafter all postal-tariffs (inland and international) should be in multiples of rupees ten. Printed or rubber-stamped post-cards and ordinary mail should have tariff of rupees ten with weight-slabs for mail-articles fixed in multiples of 50 gms rather than of 20 gms at present....
(Budget suggestions) Introduce new simplified Income Tax Act to replace six-decades old outdated Income Tax Act 1961 with simplified tax-regime

(Budget suggestions) Introduce new simplified Income Tax Act to replace six-decades old outdated Income Tax Act 1961 with simplified tax-regime

SPECIAL ISSUE, Today News
Our six-decades old outdated Income Tax Act 1961 which is full of amendments, needs to be replaced by an altogether new Income Tax Act which may be simple-most abolishing additives and deductive like cess, surcharge and exemptions with tax-rates incorporated in new Income Tax Act according to recommendations of Raja Chelliah Committee. Maximum tax-rate at one time used to be effectively as high as 98-percent causing hihgh level of tax-evasion with people paying upto even 52-percent to whiten black money. However good sense prevailed and maximum tax-rate was slashed down to just 30-percent in tune with most other countries of the world in accordance with recommendations of Raja Chelliah Committee. But gradually surcharges, cess etc have again raised effective tax-rate to now about 50-per...
केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करना बिल्कुल भी बुद्धिमानी नहीं है।

केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करना बिल्कुल भी बुद्धिमानी नहीं है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने लव जिहाद ’को रोकने के लिए एक अध्यादेश से  गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण’ के लिए कानून बनाने का प्रस्ताव दिया है। सदियों से भारत में जातिवाद और धर्मवाद का प्रचलन रहा है। कई कानूनों के बावजूद, अंतरजातीय विवाह के लिए सामाजिक कलंक अभी भी भारतीय समाज में मौजूद है। हालाँकि, अंतरजातीय विवाह पर कानूनों का विचार सीधे तौर पर  लोगों के स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार जैसे कई अधिकारों का उल्लंघन करता है। उत्तर प्रदेश सरकार का  प्रस्ताव पितृसत्ता और सांप्रदायिकता का एक शातिर मिश्रण है। यह एक ऐसे शब्द को वैधता प्रदान करता है जो अंतर-जातीय विवाह और उन रिश्तों के खिलाफ अपमान का कारण बनता है जिसमें पार्टियों में से एक मुस्लिम व्यक्ति है। इस तरह के कानून को लाने का कारण यह है कि हिंदू महिलाएं मुस्लिम युवकों से शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन के लिए  कोशिश कर रही हैं। यह...

आधुनिक भारत की राजनीति के ‘चाणक्य’ थे राजाजी

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चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, यह नाम भारतीय इतिहास का एक ऐसा स्वर्णिम पृष्ठ है, जिससे एक सशक्त जननायक, स्वप्नदर्शी राजनायक, आदर्श चिन्तक, दार्शनिक के साथ-साथ युग को एक खास रंग देने की महक उठती है। उनके व्यक्तित्व के इतने रूप हैं, इतने आयाम हैं, इतने रंग है, इतने दृष्टिकोण हैं, जिनमें वे व्यक्ति और नायक हैं, दार्शनिक और चिंतक हैं, प्रबुद्ध और प्रधान है, वक्ता और नेता हैं। उनकी उपलब्धियों के वैराट्य को देखते हुए उनको दी गयी ‘राजाजी’ की उपाधि उचित है। उन्हें भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष कहा जाता है। प्रसिद्ध वकील, लेखक और दार्शनिक थे। वे पहले भारतीय गर्वनर जनरल थे। महान् स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, गांधीवादी राजनीतिज्ञ चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को आधुनिक भारत के इतिहास का ‘चाणक्य’ माना जाता है। बीसवीं शताब्दी के भारत के महान् सपूतों की सूची में कुछ नाम हैं जो अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं, उनमे...