देश को चाहिए राष्ट्रवादी मुसलमान
कभी-कभी मुझे इस बात की हैरानी होती है कि क्यों हमारे ही देश के मुसलमानों का एक बड़ा तबका नकारात्मक सोच का शिकार हो चुका है? इन्हें फ्रांस में गला काटने वाले के हक में तो बढ़-चढ़कर बोलना होता है, पर ये मोजम्बिक में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा दर्जनों मासूम लोगों का जब कत्लेआम होता है तब ये चुप रहते हैं। ये हर मसले पर केन्द्र की मोदी सरकार का आदतन भले ही रस्म अदायगी के लिये ही क्यों न हो विरोध तो जरूर ही करते हैं। इससे इन्हें क्या लाभ है, यह समझ से परे की बात है। इनका पूरी तरह से ब्रेन वाश कर दिया गया है स्वयंभू सेक्युलरवादियों और कठमुल्लों ने।
पाकिस्तान में जन्मे और अब कनाडा में निर्वासित जीवन बिता रहे प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार ठीक ही कहते हैं कि कठमुल्लों और जिहादी आतंकवादियों के निहित स्वार्थ के कारण “अल्ला का इस्लाम” अब तेजी से “मुल्ला का इस्लाम” बनता जा रहा है जिससे विश्व की अमन चैन ख...




