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Author: Dialogue India

Boost in high-end car-sales even during corona-days proves rich and elite not affected

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It refers to six-fold rise in car-sales after lockdown was lifted in Delhi with data further revealing that most of the cars sold in this period was high-end cars afforded by rich and elite. This clearly establishes that it was middle-income group which was worst affected by corona-crisis and lockdown with all government-relief aimed at poorer section of society or grabbed by rich becoming even more richer as is clear from share-prices and big business-deals by richest person and corporate-group of India. It is for central and state governments to look into plight of middle-income people which mainly include traders giving big employment in private sector. If middle-income traders become prosperous, then automatically poorer section of people will get employment thus sharing burden of g...

अयोध्या : 6 दिसंबर की आँखों देखी

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रामजन्मभूमि आन्दोलन के हुतात्माओं के प्रति शब्दांजलि रुपी श्रद्धांजलि प्रभात झा (  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी, पूर्व सांसद  ) वे  लोग भाग्यशाली होते हैं जो किसी घट रहे इतिहास को अपनी आँखों से देखते हैं l  यह मेरा सौभाग्य था कि मैं पत्रकार के नाते 6 दिसंबर] 1992 को रामलला जन्मभूमि के उस परिसर में  खड़ा था, जहां हमारी आँखों के सामने भगवा पट्टी माथे पर बांधे सैकड़ों कार सेवक देखते-देखते गुम्बद पर चढ़ गए  बस घंटे-दो घंटे में विवादित ढाँचे को धूल-धुसरित कर दिया l मैं मध्यप्रदेश के स्वदेश समाचार-पत्र का विशेष संवाददाता था l सन 1986 से तत्कालीन बजरंग दल के नेता जयभान सिंह पवैया के साथ रामनवमी पर रिपोर्टिंग करने और रामलला के दर्शन करने लगभग प्रति वर्ष जाते थे l  हम मिथिलावासी हैं l हम मां मिथिलेश कुमारी (सीता जी ) के वंशज हैं l भगवान राम से हमारा नाता शास्त्रों के अनुसार, साले-बहनोई का...

राम,रामजन्मभूमि व राम का मुकदमा:एक आकलन

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*बाबा कबीर* कहते हैं कि- *सात समद की मसि  करौ, लेखनि सब  बनराइ* *धरती सब कागद करौ,हरि गुन लिखा न जाई* *अर्थात-* सात समुद्र के जल को स्याही बना दो,सभी जंगलों को लेखनी बना दो और पूरी धरती को कागज फिर भी ईश्वर के बारे में लिखने को ये अपर्याप्त हैं। मेरी कोशिश होगी भाषाई अभद्रता से बचते हुए सहज साहित्य में बात लिखना। चूंकि, *"साहित्य अलंकृत होता है,सौंदर्य से भरपूर लेकिन भाषा रूढ़ होती है,अक्खड़ और कभी कभी उजड्ड भी।" अगर लेख में भाषा कहीं साहित्य से विद्रोह कर दे या बागी हो जाये तो क्षमा कीजियेगा।* मान्यवर, मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ और मेरी औकात नहीं है कि मैं अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के विषय में कुछ लिख सकूँ। बस एक प्रयास भर है आप सब तक प्रभु श्रीराम व इस विवाद को सहज शब्दों में पहुंचाने का। मैंने उत्तर प्रदेश में उस त्रासदी को स्वयं झेला भी है और देखा भी है कि,कैसे मुल्ला मुलायम ने ...

अरे समीर जी, देखिए अब तो एक मन्त्री की भी मौत कोरोना से हो गई

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ऐसा वाक्य सुनने के बाद मन्त्री की मौत पर खेद व्यक्त करूँ या कहने वाले की बुद्धि पर तरस खाऊँ? बन्धु! कोरोना बस कोरोना है, उसे किसी मन्त्री या सन्तरी से दोस्ती या दुश्मनी नहीं निभानी है। मौत किसी की भी हो, दुःखदायी है, लेकिन जब कुछ लोग कोरोना को इसलिए महामारी बताने लगें कि एक मन्त्री की भी मौत हो गई...या अमिताभ बच्चन, अमित शाह और कई बड़े-बड़े वीआईपियों को कोरोना हो गया, तो ऐसे लोगों की बुद्धि की हालत भी दुःखदायी है। लोग मीडिया की बढ़ाई-चढ़ाई और हवाहवाई ख़बरों को आँख मूँदकर सच मानने लगते हैं तो इसका मतलब यही है कि हम पढ़े-लिखे होकर भी अनपढ़ों से बहुत आगे नहीं हैं। विज्ञान की तमाम किताबें पढ़ने के बाद भी अच्छे-अच्छों के विवेक पर लगा ताला खुलने का नाम नहीं ले रहा है, इसीलिए धर्म के नाम पर चलाए जा रहे अन्धविश्वास आज के दौर में अब विज्ञान का आधार लेकर नए रूपों में सामने आने लगे हैं। ये प्रगतिशील ...

SHRI RAMJANMABHOOMI AND THE FUTURE OF BHARAT

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Lucknow. August 3, 2020. The central working president of Vishva Hindu Parishad(VHP) advocate shri Alok Kumar today said that the foundation stone for the construction of a grand Temple at the birth place of Bhagwan Shri Ram was laid in 1989. However, the construction of the Temple was embroiled in the hurdles created by various governments, the manipulations by political forces and the long delays in the Courts. It is after about 31 years that the construction of the Temple shall now begin in the presence of the Hon’ble Prime Minister on 05th of August 2020. We hope that in about three years, the devotees may be able to worship Shri Ramlala in the sanctum sanctorum of the grand Temple. The whole country would rejoice in the worship of the national heros.             We believe that this ...
शाहजहांपुर: मुमुक्षु आश्रम में तय की गई थी मंदिर निर्माण आंदोलन की रुप रेखा। डा. मदन मोहन जी व संघ प्रचारक दिनेश त्यागी जी बने थे सूत्रधार

शाहजहांपुर: मुमुक्षु आश्रम में तय की गई थी मंदिर निर्माण आंदोलन की रुप रेखा। डा. मदन मोहन जी व संघ प्रचारक दिनेश त्यागी जी बने थे सूत्रधार

राज्य, विश्लेषण
अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का शिलान्यास पांच अगस्त को होगा। यह शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि राम मंदिर निर्माण के आंदोलन की रुप रेखा शहर के मुमुक्षु आश्रम में तय की गई थी। जिसको मुजफ्फरनगर के हिन्दू सम्मेलन में धार दी गई। 1983 में जब उत्तर प्रदेश की कांग्रेस पार्टी की सरकार में मंत्री व काँठ से विधायक  रहे दाऊदयाल खन्ना जी ने काशीपुर की एक सभा में पहली बार अयोध्या में रामजन्मभूमि से टाला खुलवाने के मुद्दा उठाया था तब उससे पहले इस संबंध में विस्तृत चर्चा के लिए दाऊदयाल जी  के नेतृत्व में जो बैठक हुई थी वह काशीपुर से 11 किलोमीटर दूर ठाकुरद्वारा में वरिष्ठ संघ नेता डॉ मदन मोहन अग्रवाल के निवास पर आयोजित की गई थी। 1983 में जब उत्तर प्रदेश की कांग्रेस पार्टी की सरकार में मंत्री व काँठ से विधायक  रहे दाऊदयाल खन्ना जी ने काशीपुर की एक सभा में पहली बार अयोध्या में रामजन्मभूमि से टाला...
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आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की शत संवत्सरी पुण्यतिथि पर सर्वप्रथम लोकमान्य जी को वंदन करते हुए आप सभी से निवेदन करना चाहता हूं की मध्य प्रदेश के लोकप्रिय अखबारों और अन्य प्रिंट मीडिया  द्वारा इतनी बड़ी घटना का जिक्र न करना और अपने अखबार में लोकमान्य जी के प्रति श्रद्धांजलि भी अर्पित न करना, इसका समस्त मराठी भाषियों द्वारा विरोध व्यक्त किया जाता है। समस्त मराठी भाषियों से निवेदन है कि अपना आक्रोश व्यक्त कर समस्त प्रिंट मीडिया का विरोध करें। इस निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हुए म.प्र. सरकार से आग्रह है कि यह भूल नही राष्ट्रीय चरित्र को विलुप्त करने की साजिश है इस विषय में प्रिंट मीडिया पर योग्य कार्यवाही की जावे आश्चर्य कि लो.तिलक जी अग्रणी क्रांतिकारक तो थे ही वे अपने समय के जेष्ठ श्रेष्ठ पत्रकार भी थे उनकी अाग उगलती लेखनी राष्ट्र भक्तो मे जागृती के  स्वर फूंकती थी अंग्रेजी शासक उनकी ...
रोजगार के आंकड़ों में जादूगरी और स्थाई समाधान

रोजगार के आंकड़ों में जादूगरी और स्थाई समाधान

आर्थिक, विश्लेषण
देश बेरोजगारी के बड़े संकट से गुजर रहा है | आज सरकार या अन्य कोई बेरोजगारी कम होने का दावा करें तो बेमानी है | खरीफ की फसल के दौरान मिला रोजगार या मनारेगा से मिला रोजगार स्थाई प्रकृति का नहीं है | इसके आधार पर जीवनयापन होना मुश्किल है |रोज बढती जनसंख्या और वर्तमान माहौल के मद्देनजर कुछ नये उपाय फौरन सोचना होंगे |गैर-सरकारी संगठन सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनामी [सीएमआईई ]  के इस दावे से अनेक अर्थशास्त्री असहमत है कि भारत में बेरोजगारी की दर गिर रही है और वो महामारी से पहले के स्तर पर आ चुकी है|थोड़ी देर के लिए यह मान भी लें, कि यह रिपोर्ट सही है तो इसका मतलब है तालाबंदी में ढील दिए जाने के बाद जो आर्थिक गतिविधि फिर से शुरू हुई है और उससे रोजगार का सृजन हुआ है| लेकिन, क्या वाकई ऐसा हुआ है? सीएमआईई ने पिछले कुछ महीनों में कहा था कि जो बेरोजगारी दर मार्च में८ .७५ प्रतिशत थी, वह अप्रैल में ...
समय आ गया है आर्थिक चिन्तन का

समय आ गया है आर्थिक चिन्तन का

Uncategorized, आर्थिक
अब वो समय आ गया है, जब दिल्ली को वैश्विक अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक रुझानों के बारे में भी चिंतन करना चाहिए, खासतौर से अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी को देखकर| इससे जुड़े कई सवाल हैं। जैसे, अमेरिका और चीन किस हद तक आपसी तनाव बढ़ाएंगे? क्या हमें भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा  के इस युग में किसी एक तरफ झुक जाना चाहिए? क्या भारत के लिए यह एक मौका है कि वह बाजार में विविधता की इच्छा रखने वालों और वैश्विक उत्पादन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दे? यदि इसे आधार मानकर हम आगे बढ़ते हैं कि भारत को उच्च प्रौद्योगिकी वाले औद्योगिकीकरण, अधिक गुणवत्ता वाले विनिर्माण-कार्य, उत्पादों की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में अधिकाधिक रोजगार, और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी की दरकार है, तो वैश्वीकरण में खलल डालने वाले इन रुझ...

*राममंदिर से रामराज्य की ओर बढ़ने के कुछ पहलू।

संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक, साहित्य संवाद
भारत वर्ष सभ्यतामूलक दृष्टि से दुनिया का नेतृत्व करता रहा है। कालांतर में वैभव, प्रमाद, आलस्य, आत्मविस्मृति और सदगुण विकृति से प्रभावित हुआ। फलतः पिछले 5-7 सौ वर्षों में निरंतर संघर्षरत रहा। *पिछले 200 वर्ष तो चिंताजनक रहे। पर भारतीय चेतना फिर से आग्रही चैतन्यवान स्वरुप की ओर 1800 से बढ़ी।* *दुनिया की हलचलों को समझकर भारतीय समाज ने अब मानव केन्द्रिक विकास की जगह प्रकृति केन्द्रिक विकास की ओर कदम बढाये हैं। देसी, स्वदेशी और विकेन्द्रीकरण की आग्रही राजनैतिक, आर्थिक सुव्यवस्था की मांग अब बढ़ रही है।* समाज, सरकार दोनों को समझ मे आ रहा है कि रामराज्य हमारा आदर्श है। वह *रामराज्य ही राम के भारत को स्वीकार्य है।* उसके अनुकूल है प्रकृति का संपोषण करने वाली प्रकृति केन्द्रिक विकास की संकल्पना। उससे ही मेल खाती है महात्मा गांधीजी के हिन्द स्वराज की सभ्यता मूलक दृष्टि और रा. स्व. संघ के परम वैभव का ...