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Author: Dialogue India

देश की पहली राजयोग थॉट लेबोरेट्री ने पूरे किये ३ वर्ष

देश की पहली राजयोग थॉट लेबोरेट्री ने पूरे किये ३ वर्ष

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जयपुर ऐतिहासिक इमारतों एवं किलों के कारण विश्व हेरिटेज में अपना एक विशेष स्थान रखता है। गत कुछ वर्षों से जयपुर शिक्षा के क्षेत्र में भी नए इनिशिएटिव ला रहा है, इन्ही में से एक है राजयोग थॉट लेबोरेट्री। यह ऐसी अनूठी प्रयोगशाला है जिसमें विद्यार्थी स्वयं पर एक्सपेरिमेंट्स करके अपने विचारों को दिशा दे सकता हैं। यह भारत की पहली ऐसी प्रयोगशाला है जो वैचारिक स्तर पर सशक्तिकरण का कार्य कर रही है।  जिस प्रकार स्टूडेंट फिजिक्स लैब, केमिस्ट्री लैब आदि लेब्स में कार्य करके अपनी टेक्निकल स्किल्स को इम्प्रूव करता है, ठीक उसी प्रकार इस थॉट लैब में स्टूडेंट अपने मन में चलने वाले थॉट पैटर्न पर वर्क करके मेंटल एंड इमोशनल लेवल पर एम्पावरमेंट कर सकते हैं। आज के इस आधुनिक युग में सोशल मीडिया और इन्टरनेट के अनियंत्रित उपयोग के कारण युवाओं में मानसिक परेशानियाँ जैसे की गुस्सा, बदले की भावना, तनाव, आत्म-ग्लान...
DoPT should revise fees for lectures with provision of GST added

DoPT should revise fees for lectures with provision of GST added

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Department of Personnel and Training DoPT fixed a fees of rupees 4000 for lectures in conducting workshops for government-staff on various aspects including on handling applications filed under Right-To-Information Act. Surprisingly there is no provision of adding Goods and service Tax GST which is presently 18-percent on this amount fixed long back thus practically further reducing the fees to just rupees 3390 for those coming under GST network. DoPT should not only upgrade the fees reasonably, but also direct all departments, ministries and others to compulsorily add GST to newly fixed amount for those coming under GST network. Many departments and ministries spend exorbitantly to hire taxis for pick-up and dropping the persons delivering lectures, where these taxis are paid for ru...
More required for transgenders even after passing The Transgender Persons (Protection of Rights) Bill, 2019

More required for transgenders even after passing The Transgender Persons (Protection of Rights) Bill, 2019

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It refers to Rajya Sabha on Constitution Day 26.11.2019 gifting transgenders by passing The Transgender Persons (Protection of Rights) Bill, 2019 which was earlier cleared by Lok Sabha on 05.08.2019. But more is required bring transgenders in main streamline and to ensure that transgenders may leave begging and singing-dancing as their profession for livelihood. An era should be there whereby transgenders may not separately in a society of their own, but may lead normal life in families of their birth. It is indeed an irony of the system that just 22 transgenders applied for under-graduate courses combinedly in thee universities in Delhi namely Delhi University, Jamia University and Ambedkar University. Union government should constitute National Transgender Commission. Unrestricted adm...
ईश आराधना में दीपक का स्थान

ईश आराधना में दीपक का स्थान

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ईश्वर की पूजन में सबसे अधिक महत्व दीपक प्रज्ज्वलित करने का होता है। दीपक के बिना किसी भी भगवान की पूजन करना अधूरा कार्य माना गया है। पूजन का दीपक सिर्फ अंधेरे को ही दूर नहीं करता है, वरन् हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। पूजन में शास्त्रोक्त विधि से दीपक लगाने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं तथा उनकी कृपा हम पर बरसना प्रारम्भ हो जाती है। हम प्रायः अपने घर के मंदिर में प्रतिदिन सुबह एवं शाम को भगवान के समीप दीपक प्रज्ज्वलित करते हैं। दीपक जलते ही अनेक प्रकार के वास्तुदोष नष्ट हो जाते हैं। दीपक के प्रज्ज्वलित होने के पश्चात् उसके प्रकाश एवं धुँए से वातावरण शुद्ध होने के साथ अनेक प्रकार के कीटाणुओं से घर मुक्त हो जाता है। विषैले कीटाणुं नष्ट हो जाते हैं। दीपक प्रज्जवलित करने के पूर्व दीपक को पूजन में कैसे रखा जाय इस हेतु विशेष परम्परा है। पूजा के समय दीपक जमीन पर न रखें बल्कि द...
जब हनुमान्जी रचित रामायण को महर्षि वाल्मीकिजी ने सागर में स्थापित करवाया

जब हनुमान्जी रचित रामायण को महर्षि वाल्मीकिजी ने सागर में स्थापित करवाया

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श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग जब हनुमान्जी रचित रामायण को महर्षि वाल्मीकिजी ने सागर में स्थापित करवाया ''श्री हनुमन्नाटकÓÓ के रचना का काल निर्धारण का कोई निश्चित समय नहीं है किन्तु यह कालजयी रचना संस्कृत साहित्य का अनमोल रत्न है। इस ग्रंथ के अंतिम श्लोक में रचनाकार ने महर्षि वाल्मीकिजी की इसकी रचना की जानकारी दी है ऐसा वर्णित है यथा- रचितमनिलपुत्रेणाऽथ वाल्मीकिनाऽब्घौ निहितममृतबुद्धया प्राङ्महानाटकं यत्। सुमतिनृपतिभोजेनोद्धृतं तत्क्रमेण ग्रथितमवतु विश्वं मिश्रदामोदरेण।। हनुमन्नाटक अंक १४-९६ इस श्लोक के अनुसार इस ग्रंथ को पवनकुमार (श्री हनुमान्जी) ने शिलाओं पर अंकित किया था किन्तु जब महर्षि वाल्मीकिजी ने अपनी रामायण रची तब यह समझकर कि इस अमृत के समक्ष उनकी रामायण को कौन पढ़ेगा? महर्षि वाल्मीकिजी ने श्रीहनुमान्जी से प्रार्थना करके उनकी आज्ञा प्राप्त कर इस ''हनुमन्नाटकÓÓ को समु...
गांधी दृष्टि और पर्यावरण विमर्श

गांधी दृष्टि और पर्यावरण विमर्श

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गांधी जी ने अपनी जीवन यात्रा पहले पूरी की, 'पर्यावरण' शब्द बाद में अस्तित्व में आया; यही कोई 20वीं सदी के छठे दशक में। पर्यावरण चुनौतियों का उभार, उनकी चिंता, चिंताओं को सामने रखकर विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्देश, पर्यावरण संरक्षण के नाम पर संगठनों की स्थापना, आंदोलन, एक विज्ञान और तकनीकी विषय के रूप में पर्यावरण की पढ़ाई... ये सभी कुछ बहुत बाद में सामने आए। लिहाजा, गांधी साहित्य में ’वातावरण’ शब्द का उल्लेख तो है, किंतु ’पर्यावरण’ शब्द का नहीं। यह कहना उचित ही है; बावजूद इसके, गांधी जी की 105वीं जयंती के दिन साहित्य अकादमी ने पर्यावरण विमर्श को गांधी दृष्टि से देखने संबंधी आलेख पाठ करने और सुनने हेतु हमें आमंत्रित किया है। यह सुखद भी है और गांधी दृष्टि को गहराई से जानने की साहित्य अकादमी की उत्तम लालसा का परिचायक भी। इसके लिए अकादमी बधाई और आभार... दोनो की पात्र...
संयम व दृढ़ता की विजयगाथा

संयम व दृढ़ता की विजयगाथा

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यह अपनी गलती सुधारने जैसा तो है ही, साथ ही अपनी जड़ों से जुडऩे की कोशिश भी है। राम जन्मभूमि के अस्तित्व को स्वीकार करने व उस पर भव्य राम मंदिर के निर्माण की स्वीकृति देने के उच्चतम न्यायालय के आदेश हम भारतीयों के लिए एक 'क्रांति’ के समान है। राम के अस्तित्व को स्वीकार करना यानि वैदिक सनातन संस्कृति के अस्तित्व को स्वीकार करना है। यह इंडिया पर भारत की जीत है। यह सैकड़ों सालों के उस संघर्ष की जीत है जो अरब देशों के विदेशी इस्लामी आक्रमणकारी लुटेरों के विरुद्ध भारत की जनता ने पिछले 500 से अधिक वर्षों से संयम व दृढ़ता से हज़ारों लोगों की जान गंवाकर भी की। ये हर भारतीय के रोम रोम में बसने वाले दुनिया में प्रथम आदर्श या संपूर्ण व्यक्तित्व एवं आदर्श राज्य की स्थापना करने वाले राजा रामचंद्र के प्रति संपूर्ण भारत का प्रायश्चित भी है और विश्व को यह संदेश भी कि कई सौ सालों की गुलामी से मुक्त हुई भारत...
क्या अब राजनीति की परिभाषा बदल गई ?

क्या अब राजनीति की परिभाषा बदल गई ?

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यह बात सही है कि राजनीति में अप्रत्याशित और असंभव कुछ नहीं होता, स्थाई दोस्ती या दुश्मनी जैसी कोई चीज़ नहीं होती हाँ लेकिन विचारधारा या फिर पार्टी लाइन जैसी कोई चीज़ जरूर हुआ करती थी।  कुछ समय पहले तक किसी दल या नेता की राजनैतिक धरोहर जनता की नज़र में उसकी वो छवि होती थी जो उस पार्टी की विचारधारा से बनती थी लेकिन आज की राजनीति में ऐसी बातों के लिए कोई स्थान नहीं है । आज राजनीति में स्वार्थ, सत्ता का मोह, पद का लालच, पुत्र मोह, मौका परस्ती जैसे गुणों के जरिए सत्ता प्राप्ति ही अंतिम मंज़िल बन गए हैं। शायद इसीलिए अपने लक्ष्य को हासिल करने की जल्दबाजी में ये राजनैतिक दल अपनी विचारधारा, छवि और नैतिकता तक से समझौता करने से नहीं हिचकिचाते। वैसे तो चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार महाराष्ट्र के घटनाक्रम केवल महाराष्ट्र की जनता ही नहीं पूरे देश के लोगों को निराश कर रहे थे। लेकिन जब 23 तारीख के अ...
‘राष्ट्र जानना चाहता है’ से लेकर ‘राष्ट्र प्रथम’ तक भारत का सुधार हुआ है : प्रधानमंत्री

‘राष्ट्र जानना चाहता है’ से लेकर ‘राष्ट्र प्रथम’ तक भारत का सुधार हुआ है : प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में रिपब्लिक समिट में मुख्य भाषण दिया। इस वर्ष का समिट ‘यह भारत का समय है और राष्ट्र सबसे पहले है’ विषय पर केन्द्रित है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र जानना चाहता है’ से लेकर ‘राष्ट्र प्रथम’ तक भारत का सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कई दशकों से जिन समस्याओं का निदान नहीं हुआ था, अब उनका समाधान संभव हुआ है। यह दो कारणों से संभव हुआ – पहला कारण यह है कि भारत के 130 करोड़ लोग सोचते हैं कि ‘यह भारत का समय है’ और दूसरा कारण ‘राष्ट्र सबसे पहले’ है। कश्मीर में अनुच्छेद-370 के हटाए जाने के बारे में, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के सबसे बड़े कारण को समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-370 के कारण जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था, जो संविधान में एक अस्थायी प्रावधान था, किन्तु ‘कुछ परिवारों’ के चलते इसे...
Mockery of Constitution continues on Constitution-Day in Maharashtra

Mockery of Constitution continues on Constitution-Day in Maharashtra

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While India is celebrating Constitution-Day on 26th November, politicians and constitutional authorities are continuing to make mockery of Constitution now in Maharashtra like has been done in so many states for last about half-a century from when alliance-politics started in 1967. UPA blaming role of Maharashtra governor, forgot role of governors like Romesh Bhandari in their regime. Bitter fact remains that Speakers and state-Governors usually dance to tunes of their political mentors to become a part of unholy politics involving heavy money-power. Only and best remedy is to eliminate altogether role of Speakers and Governors in making and breaking of governments. Chief Minister should be simultaneously elected with Speaker and Deputy Speaker by secret and compulsory vote through EVMs...