जो आदमी दूसरी कौम से जितनी नफरत करता है, समझ लीजिये कि वह खुदा से उतनी ही दूर है! – प्रेमचंद
8 अक्टूबर - कथा-सम्राट प्रेमचंद की पुण्य तिथि पर शत शत नमन!
महान लोग वाकई महान होते है हिन्दी जगत के महान लोकप्रिय लेखक मंुशी प्रेमचंद की मानव जाति सदैव ऋणी रहेगी। उन्हें परवाह थी तो बस अपनी कलम की धार की, न फटे जूतों की न ही गरीबी से तंग हाल की। वह साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारने वाले तथा आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह और उपन्यास सम्राट थे। इस साहित्य जगत के महान सम्राट के जीवन की शुरूआत गरीबी से नंगे पाँव हुई थी।
प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी केनिकट लमही गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम श्रीमती आनन्दी देवी व पिता का नाम मुंशी अजायबराय था। उनके पिता लमही में डाकमुंशी थे। प्रेमचंद 7 साल के थे तभी उन्होंने लालपुर के मदरसा में शिक्षा प्राप्त करना शुरू किया। मदरसा में प्रेमचंद ने मौलवी से उर्दू और फारसी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया। अंग्रेजी, दर्शन, फारसी और ...








