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Author: Dialogue India

For national pride give prominence to Bhaaratiya Bhasha

For national pride give prominence to Bhaaratiya Bhasha

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Are we free? We can consider ourselves free only when we break the shackles placed on our culture, language, mind and economy by colonialism, Marxism, religious fundamentalism and pseudo secularism. Only when we contribute to a greater Bhaarat and a better humanity, can we claim to be free. None are more hopelessly enslaved than those who falsely believe they are free. ~ Johann Wolfgang von Goethe Centuries of slavery gave us so much INFERIORITY COMPLEX that adoring, trusting, serving the FOREIGNERS has become the "way of life" of Hinduus who take pride in being "nishkam sewaks" of their colonial masters. This has ruined the gene quality of the Hinduu nation in Bhaarat to an immeasurable extent. Bhaaratiya people like the imposition of a foreign language English but oppose spreading of...
CSE releases its new report on use of solar-powered water pumps in agriculture

CSE releases its new report on use of solar-powered water pumps in agriculture

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 Central and state governments are promoting solar power to meet India’s irrigation requirements. The recently approved KUSUM scheme alone targets to install 17.5 lakh off-grid and 10 lakh on-grid solar pumps and 10 GW of solar power plants capacity in rural areas by 2022. The objective is to meet multiple ambitious goals ­– provide access to assured irrigation, increase farmer income through sale of surplus power, reduce electricity subsidy burden (~Rs 50,000 crores) and expand the distributed renewable energy capacity. But will the multitude of objectives be met? Unlikely, asserts Centre for Science and Environment (CSE) in its latest report titled Silver Bullet: Are Solar pumps a panacea for irrigation, farmer distress and discom losses? The report is supported by CSE’s surveys of fa...
बढ़ते अंधेपन का प्रमुख कारण है-विटामिन ए की कमी

बढ़ते अंधेपन का प्रमुख कारण है-विटामिन ए की कमी

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  हाल ही में एक पैडेट्रीशियन ने मुझे एक बच्चे को देखने के लिए बुलाया था। वह बच्चा कुछ दिन पहले उस पैडेट्रीशियन के पास डायरिया के इलाज के लिए आया था। उसका पिछला रिकार्ड देखते ही मैं समझ गया था कि बच्चा  अवश्य ही विटामिन ए और अपर्याप्त पोषण से जूझ रहा है। बच्चे को देख कर मैं खुद को बेबस महसूस करने लगा क्यों कि विटामिन ए की कमी के कारण उसे केराटोमेलेशिया (कोर्निया का पिघलना) नामक बीमारी हो गई थी और वह सदा के लिए अपनी आखों की दृष्टि खो चुका था। आज के समय में विटामिन ए की कमी बच्चों में बढ़ते अंधेपन का एक बहुत बड़ा कारण है। साथ ही इससे कई अन्य बीमारियां जैसे डायरिया और मीसल्स आदि होने की भी अधिक संभावना रहती है, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में विटामिन ए की पर्याप्त मात्रा नार्मल दृष्टि, हड्डियों का विकास, हैल्थी स्किन, पाचन के म्यूकस मेम्ब्रेन की सुरक्षा, श्वास प्रणाली और यूरेनरी टै्...
देश प्रेम का विस्तार विश्व प्रेम के रूप में होना ही मानवता है!

देश प्रेम का विस्तार विश्व प्रेम के रूप में होना ही मानवता है!

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रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता (पहले कलकत्ता) के एक प्रतिष्ठित और कला प्रिय परिवार में हुआ। रवीन्द्रनाथ टैगोर यूं तो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, पर बंगाली साहित्य में उनका अप्रतिम योगदान रहा। उन्होंने महाकाव्य को छोड़कर तकरीबन सभी विधाओं में साहित्य रचना की। रवीन्द्रनाथ ने करीब ढाई हजार गीत लिखे और संगीतबद्ध किए। जीवन के अंतिम वर्षों में उनका झुकाव पेंटिंग की ओर हुआ और उन्होंने करीब 3 हजार पेंटिंग्स बनाई। उनके बड़े भाई श्री सत्येन्द्रनाथ आईसीएस परीक्षा पास करने वाले प्रथम भारतीय थे। टैगोर का विवाह 9 दिसंबर 1893 को मृणालिनी देवी के साथ हुआ था। रवीन्द्रनाथ जी की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल में हुई थी। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1878 में लंदन के यूनिवर्सिटी कालेज में बेरिस्टरी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया लेकिन बिना डिग्री की पढ़ाई पूरी किए ही वे भारत लौट आए। हालांकि...
A Kashmir Policy, At Last!

A Kashmir Policy, At Last!

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Kashmir has been a part of me since 1972 but it’s only over the last quarter century that I have tried to delve deeper to study it, particularly to find out about our Kashmir policy. In 2001 when I opted to go back to Kashmir valley as corps commander, I had the opportunity to interact with the political hierarchy in J&K which came as part of my duties. Before broaching the subject with Mufti Mohammad Sayeed sahab, who was then the chief minister, I thought it prudent to check within the Army’s senior leadership. Unfortunately, I got no clear answer on the government’s policy either on that for achieving short term goals or for bringing about a desired end state in Kashmir. Later when Shri LK Advani visited Nadimarg village in South Kashmir valley, where terrorists had carried out a ...
कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है।

कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है।

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कश्मीर में "कुछ बड़ा होने वाला है" के सस्पेंस से आखिर पर्दा उठ ही गया। राष्ट्रपति के एक हस्ताक्षर ने उस ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया जिसके बहाने पाक सालों से वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में सफल होता रहा  लेकिन यह समझ से परे है कि कश्मीर के राजनैतिक दलों के महबूबा मुफ्ती फ़ारूख़ अब्दुल्ला सरीखे नेता और कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष जो कल तक यह कहता था कि कश्मीर समस्या का हल सैन्य कार्यवाही नहीं है बल्कि राजनैतिक है, वो मोदी सरकार के इस राजनीतक हल को क्यों पचा पा रहे हैं। शायद इसलिए कि मोदी सरकार के इस कदम से कश्मीर में अब इनकी राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है। लेकिन क्या यह सब इतना आसान था ? घरेलू मोर्चे पर भले ही मोदी सरकार ने इसके संवैधानिक कानूनी राजनैतिक आंतरिक सुरक्षा और विपक्ष समेत लागभग हर पक्ष को साधकर अपनी कूटनीतिक सफलता का परिचय दिया है लेकिन अभी इम्तिहान आगे और भी है। क्य...
एजेंडा 2030: सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता

एजेंडा 2030: सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता

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  यदि सरकारें विकास को पूर्ण कार्यसाधकता के साथ न करें तो अक्सर परिणाम अपेक्षा से विपरीत रहते हैं। “कार्यसाधकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि पूर्व में विकास कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा से नहीं हुए हैं” कहना है जस्टिन किलकुल्लेन का जो सीपीडीई (सीएसओ पार्टनरशिप फ़ॉर डिवेलप्मेंट इफ़ेक्टिवनेस) के सह-अध्यक्ष हैं। जस्टिन कहते हैं कि 1960-1990 के दौरान जो अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान के ज़रिए विकास काम हुआ वह काफ़ी बेअसर रहा। कार्यसाधकता की कमी के कारण ही 'मिलेनीयम डिवेलप्मेंट गोल (एम.डी.जी.)' के लक्ष्य सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित किए जिससे कि 2015 तक विकास कार्य निश्चित दिशा में प्रभावकारी रहे, एवं मूल्याँकन का ढाँचा भी उपयोग में रहे। परंतु 2005 तक अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान के प्राप्तकर्ता देश यह समस्या साझा कर रहे थे कि विभिन्न विकास संस्थाओं के इतने अधिक दौरे हो रह...
Revocation of Article 370: Doom for Separatists

Revocation of Article 370: Doom for Separatists

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Future generation of India will remember August 5, 2019 as a milestone in Indian history. Article 370 of the Indian Constitution giving special status to the state of Jammu & Kashmir has been revoked. It spells dooms day for the separatists in the Kashmir valley. The state has been bifurcated into two Union Territories- Jammu & Kashmir with a legislature and Ladakh without a legislature.  Contrary to the general opinion that the step taken by Prime Minister Narendra Modi and Home Minister Amit Shah to end the special status of the state was done in hurry, the government decision was well planned and executed after five years of the Centre’s study of the situation in the state. I am not privy to any information in this regard but as a political commentator I have my own views on ho...
श्री आरके सिंह ने नाइजर, टोगो और टोंगा के ऊर्जा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं; ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर की चर्चा

श्री आरके सिंह ने नाइजर, टोगो और टोंगा के ऊर्जा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं; ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर की चर्चा

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केंद्रीय बिजली और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार) और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री आरके सिंह ने आज नाइजर की ऊर्जा मंत्री मैडम अमीना मौमौनी, टोगो के ऊर्जा और खान मंत्री श्री मार्क डेडेरीवे एबली- बिदामोन और टोंगा के ऊर्जा मंत्री श्री पोआसी माटाले ती के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) स्थायी समिति की बैठक के इतर इन द्विपक्षीय बैठकों का आयोजन नई दिल्ली में किया। बैठकों के दौरान मंत्री ने आईएसए और भारत तथा इन देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। नाइजर की ऊर्जा मंत्री मैडम अमीना मौमौनी का स्वागत करते हुए श्री आरके सिंह     टोगो के ऊर्जा और खान मंत्री श्री मार्क डेडेरीवे एबली- बिदामोन का स्वागत करते हुए श्री आरके सिंह     टोंगा के ऊर्जा मंत्री ...
वेतन विधेयक, 2019 लोकसभा में पारित

वेतन विधेयक, 2019 लोकसभा में पारित

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लोकसभा में आज वेतन विधेयक, 2019 पारित हो गया। विधेयक पर विचार करने और पारित करने के लिए चर्चा की शुरुआत करते हुए केन्‍द्रीय श्रम और रोजगार राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक विधेयक है, जिसका उद्देश्य पुराने और अप्रचलित श्रम कानूनों को विश्वसनीय और भरोसेमंद कानूनों में तब्दील करना है, जो वक्त की जरूरत है। इस समय 17 मौजूदा श्रम कानून 50 से ज्यादा वर्ष पुराने हैं और इनमें से कुछ तो स्वतंत्रता से पहले के दौर के हैं। वेतन विधेयक में शामिल किए गए चार अधिनियमों में से वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 तो स्वतंत्रता से पहले का है और न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 भी 71 साल पुराना है। इसके अलावा बोनस भुगतान विधेयक, 2965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 भी इसमें शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ट्रेड यूनियनों, नियोक्ताओं और राज्य सरकारों के...