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Author: dindiaadmin

CIC quizzes PMO and other Union Ministries on bringing BCCI under RTI Act and huge disparity in awards-money for cricket and other sports (See CIC-verdict and other attachments)

CIC quizzes PMO and other Union Ministries on bringing BCCI under RTI Act and huge disparity in awards-money for cricket and other sports (See CIC-verdict and other attachments)

BREAKING NEWS, घोटाला
Central Information Commission-CIC deserves all compliments for its recent order dated 16.06.2017 -copy attached- in case-number CIC-LS-C-2012-000565, wherein answer is sought on following points from Prime Minister Office-PMO, Union Ministry of Sports and Union Ministry of Law on important points relating to cricket and BCCI. 1. Why the Indian Cricket team even now carrying the logo of BCCI instead of sporting the Union of India symbol? Why the BCCI is still using the logo designed by British Raj in 1928 which resembles 90 per cent the symbol of star of India given by British Raj to his loyal princes? Why the Government of India does not change it to truly Indian Symbol with either tricolor or four lions or Ashoka’s Dharm Chakra or any other logo decided by the Government of In...
High Courts still named after old city-names?

High Courts still named after old city-names?

TOP STORIES
There was a move from Central government sometime in January 2015 for renaming Bombay High Court and Madras High Court after long years of renaming these cities as Mumbai and Chennai. But till now change is not affected. Even Calcutta High Court is to be renamed as Kolkatta High Court. It is significant that except for these three High Courts at Mumbai, Chennai and Kolkata respectively, all other High Courts are named after states of their jurisdiction. An RTI response had revealed that while all the High Courts constituted after independence were named after respective main states of jurisdiction, these three High Courts constituted by British regime in pre-independence era continue to be named as per British legacy on basis of cities of their existence even after 70 long years of ind...
Now domestic help at public-expense also for retired judges of Delhi High Court: Is pension and other post-retirement income not enough to hire domestic help?

Now domestic help at public-expense also for retired judges of Delhi High Court: Is pension and other post-retirement income not enough to hire domestic help?

BREAKING NEWS
It refers to shocking news-item that Delhi Government on 30.05.2017 through a notification approved one domestic help for all the retired judges of Delhi High Court and their spouses, subsequent to judges of Delhi High Court passing a resolution to this effect in April this year. Earlier Supreme Court judges also arranged similar facility for themselves in November 2016 subsequent to a resolution passed in the conference of Chief Justices held in New Delhi on 22-23 April 2016. It is doubted that other High Courts may soon follow the same in coming days. Disgusting logic behind the move is that it is pathetic to see retired judges standing in queues for payment of water or power bills, without citing even a single incident in present era of on-line payments. Is pension of retired judges...
ना फैलाएँ नफरत का वातावरण

ना फैलाएँ नफरत का वातावरण

Uncategorized
पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए रोकने केंद्र के नए कानून का विवेकहीन विरोध या फिर उसका समर्थन करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें 1 सम्पूर्ण विश्व में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए आन्दोलन चल रहे हैं। 2 कहा जा रहा है कि कृषि और पशुपालन राज्यों का विशिष्ट अधिकार है और इस आदेश से केंद्र उनके इस अधिकार का अतिक्रमण कर रही है। तो सबसे पहले तो राज्य सरकारें इस बात को समझ लें कि राज्य चलाने के लिए जो कानून और संविधान बनाया गया है वह उनका सुचारु रूप से पालन करना उनका "फर्ज़" है न कि "अधिकार" दूसरा, देश को सुचारु रूप से चलाने के लिए देश को केंद्र और राज्य दो भागों में बाँटा गया ताकि हर राज्य अपने देश काल वातावरण और रहन सहन के हिसाब से अपने नागरिकों जीव जंतुओं एवं पर्यावरण की रक्षा कर सके हर राज्य की अपनी नगर निगम व्यवस्था होती है कानून व्यवस्था होती है अपनी पुलिस फो...
भीड़तंत्र की हिंसा से जख्मी होता समाज

भीड़तंत्र की हिंसा से जख्मी होता समाज

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-ललित गर्ग- उत्तर प्रदेश के आगरा में भाजपा नेता की हत्या के बाद भीड़ ने ही दो हमलावरों में से एक को पीट-पीटकर मार डाला। दिल्ली में खुलेआम दो लड़कों को पेशाब करने से रोकने पर गतदिनों एक ई-रिक्शा चालक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। कुछ दिनों पहले आनंद विहार इलाके में कवि देवीप्रसाद मिश्र को सड़क पर खुलेआम पेशाब कर रहे डीटीसी बस के चालक और परिचालक ने टोकने पर बुरी तरह मारा-पीटा था। इधर किसान आन्दोलन हो या गौरक्षा का मसला-हिंसा एवं अशांति की ऐसी घटनाएं देशभर में लगातार हो रही हैं। महावीर, बुद्ध, गांधी के अहिंसक देश में हिंसा का बढ़ना न केवल चिन्ता का विषय है बल्कि गंभीर सोचनीय स्थिति को दर्शाता है। सभ्य समाज में किसी की भी हत्या किया जाना असहनीय है लेकिन जिस तरह से भीड़तंत्र के द्वारा कानून को हाथ में लेकर किसी को भी पीट-पीटकर मार डालना अमानवीयता एवं क्रूरता की चरम पराकाष्ठा है। दिल्ली के जीटीब...
शिक्षा से जुड़े सवालों का अनुत्तरित होना

शिक्षा से जुड़े सवालों का अनुत्तरित होना

सामाजिक
ललित गर्ग- दुनिया के परिदृश्य में भारत में जिस रफ्तार से प्रगति हो रही है, चाहे वह आर्थिक हो, सांस्कृतिक हो, वैज्ञानिक हो, कृषि की हो, तकनीक की हो, उस अनुपात में देश में शिक्षा की अपेक्षित प्रगति आजादी के 70 वर्ष बाद भी हासिल न होना शोचनीय है। नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तब से एक नये युग के आरंभ की बात कही जा रही है। न जाने कितनी आशाएं, उम्मीदें और विकास की कल्पनाएं संजोयी गयी हंै और उन पर न केवल देशवासियों की बल्कि समूचे विश्व की निगाहें टिकी हुई है। लेकिन शिक्षा की धीमी गति एवं शिक्षा के प्रति सरकार की ढुलमुल नीति विडम्बनापूर्ण स्थिति को दर्शाती है। शिक्षा की उपेक्षा करके कहीं हम विकास का सही अर्थ ही न खो दे। ऐसा न हो जाये कि बस्तियां बसती रहे और आदमी उजड़ता चला जाये। इनदिनों बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम चर्चा में हैं। सीबीएसई के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट, दोनों के परिणाम आ गए ह...
बाहुबली का ‘दक्षिण दोष’

बाहुबली का ‘दक्षिण दोष’

संस्कृति और अध्यात्म, साहित्य संवाद
जावेद अनीस बाहुबली भारतीय सिने इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है. यह देसी फैंटेसी से भरपूर एक भव्य फिल्म है जो अपने प्रस्तुतिकरण,बेहतरीन टेक्नोलॉजी, विजुअल इफेक्ट्स और सिनेमाई कल्पनाशीलता से दर्शकों को विस्मित करती है। एस.एस. राजामौली के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म बन चुकी है। बाहुबली के दूसरे हिस्से के कमाई का आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चूका है। बाहुबली एक ऐसी अखिल भारतीय फिल्म बन गयी है जिसको लेकर पूरे भारत में एकसमान दीवानगी देखी गयी लेकिन इसी के साथ ही बाहुबली को हिंदुत्व को पर्दे पर जिंदा करने करने वाली एक ऐसी फिल्म के तौर पर भी पेश किया जा रहा है जिसने प्राचीन भारत के गौरव को दुनिया के सामने रखा है। एक ऐसे समय में जब भारत में दक्षिणपंथी विचारधारा का वर्चस्व अपने उरूज पर है, बाहुबली को इस खास समय का बाइप्रोडक्ट बताया जा रहा है। ...
एक साथ चुनाव से लोकतंत्र मजबूत होगा

एक साथ चुनाव से लोकतंत्र मजबूत होगा

विश्लेषण
नीति आयोग ने चुनाव आयोग को वर्ष 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का सुझाव देकर एक सार्थक बहस का अवसर प्रदत्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों चुनावों को एक साथ कराने का सुझाव दिया था। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस सुझाव को राष्ट्रहित में मानते हुए चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाने के लिए पहल करने को कहा था। चुनाव एक साथ कराने का विचार बहुत नया हो, ऐसा भी नहीं है। पिछली सरकारों में भी समय-समय पर इस पर चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर अनेक संवैधानिक समस्याएं भी और कुछ बुनियादी सवाल भी है। इन सबका समाधान करते हुए यदि हम यह व्यवस्था लागू कर सके तो यह सोने में सुहागा होगा। जनता की गाढी कमाई की बर्बादी को रोकने, बार-बार चुनाव प्रक्रिया के होने जनता को होने वाली परेशानी और प्रशासनिक कार्य में हो...
प्रदेश कांग्रेस में बदलाव नेताओं व  मतदाताओं को जीत तक एक रख पायेगा?

प्रदेश कांग्रेस में बदलाव नेताओं व मतदाताओं को जीत तक एक रख पायेगा?

राज्य
रामस्वरूप रावतसरे जस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए पार्टी आलाकमान प्रदेष में संगठन स्तर पर बड़ा आमूलचूल परिवर्तन करने जा रही है जिससे प्रदेश के नेताओं में आपसी समन्वय हो। प्रदेश में डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव हैं और उसके छह महीने बाद लोकसभा चुनाव होंगे। प्रदेश के बड़े नेताओं की आपसी कलह और गुटबाजी के चलते पार्टी आलाकमान को अंदेशा है कि पार्टी कहीं इन चुनावों में शिकस्त ना खा जाए। इसके लिए वह पूरी तैयारियां और सभी नेताओं को साथ लेकर कदम उठा रही है। पूर्व प्रभारी गुरुदास कामत के इस्तीफे के बाद अब उस टीम को राजस्थान के प्रभार की जिम्मेदारी दी गई है, जिसने 2008 के चुनाव से पहले भी राजस्थान का मोर्चा संभाला था और पार्टी को विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। कांग्रेस आलाकमान ने पूर्व सांसद अविनाश पांडे को राजस्थान प्रभारी बनाया है, साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेत...
अब ग्रामोद्योग के जरिए  पांच करोड़  रोजगार की बात

अब ग्रामोद्योग के जरिए पांच करोड़ रोजगार की बात

सामाजिक
बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी समस्या है। करोड़ों नौजवान रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। हर सरकार इसका हल ढूंढने के दावा करती आई है पर कर नहीं पाई। कारण स्पष्ट है जिस तरह सबका जोर भारी उद्योगों पर रहा है और जिस तरह लगातार छोटे व्यापारियों और कारखानेदारों की उपेक्षा होती आई है उससे बेरोजगारी बढी है।आज तक सब जमीनी सोच रखने वाले और अब बाबा रामदेव भी ये सही कहते हैं कि अगर रोजमर्रा के उपभोग के वस्तुओं को केवल कुटीर उद्योंगों के लिए ही सीमित कर दिया जाय तो बेरीजगारी तेजी से हल हो सकती है। पर उस मॉडल से नहीं जिस पर आगे बढकर चीन भी पछता रहा है। अंधाधुंध शहरीकरण ने पर्यावरण का नाश कर दिया। जल संकट बढ़ गया और आर्थिक प्रगति ठहर गई। इसलिए शायद अब खादी उद्योग में पांच साल में पांच करोड़ लोगों को रोजगार दिलाने की योजना बनी है। इस सूचना की विश्वसनीयता पर सोचने की ज्यादा जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि यह ...